Governor - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

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Governor of Indian State - 50 MCQs with detailed explanations for UPSC, SSC, State PCS and other competitive exams

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💡 व्याख्या

राज्यपाल (Governor) - संपूर्ण अध्ययन गाइड

राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। इसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 153 से 162 में है। अनुच्छेद 153 कहता है प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल होगा, 7वां संशोधन 1956 से एक व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल हो सकता है। अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है। राज्यपाल केंद्र का प्रतिनिधि होता है और राज्य में राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 लागू करने की सिफारिश कर सकता है। कार्यकाल 5 वर्ष होता है लेकिन राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत रहता है अर्थात निश्चित नहीं। मुख्यमंत्री की नियुक्ति, विधानसभा सत्र बुलाना, विधेयकों पर सहमति और क्षमादान शक्ति राज्यपाल के मुख्य कार्य हैं। योग्यता भारतीय नागरिक, 35 वर्ष आयु, लाभ का पद नहीं, संसद या विधानमंडल सदस्य नहीं।

राज्यपाल की मूल जानकारी - नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 155, कार्यकाल 5 वर्ष प्रसादपर्यंत अनुच्छेद 156, त्यागपत्र राष्ट्रपति को, शपथ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है राज्य में वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा, वेतन 3.5 लाख रुपये माह राज्य की संचित निधि से लेकिन सेवा शर्तें संसद तय करती है, दो राज्यों का राज्यपाल होने पर वेतन दोनों राज्यों में निर्धारित अनुपात में। अनुच्छेद 158 शर्तें लाभ का पद धारण नहीं करेगा। अनुच्छेद 159 शपथ। कानूनी उन्मुक्ति अनुच्छेद 361 में कार्यकाल के दौरान दायित्व से उन्मुक्ति, सिविल कार्यवाही 2 माह नोटिस के बाद ही। राज्य का प्रथम नागरिक राज्यपाल होता है। पद सम्मानजनक संवैधानिक प्रमुख। संसद सदस्य नहीं हो सकता। सैन्य कमांडर नहीं होता राष्ट्रपति होता है।

राज्यपाल की प्रमुख शक्तियां

कार्यकारी शक्तियां - मुख्यमंत्री की नियुक्ति बहुमत दल नेता की अनुच्छेद 164, मंत्रिपरिषद गठन मुख्यमंत्री सलाह से, राज्य सरकार के कार्य राज्यपाल नाम से अनुच्छेद 166, महाधिवक्ता नियुक्ति अनुच्छेद 165, राज्य लोक सेवा आयोग अध्यक्ष सदस्य नियुक्ति अनुच्छेद 316 लेकिन हटाना राष्ट्रपति, राज्य में संवैधानिक तंत्र विफलता रिपोर्ट राष्ट्रपति को अनुच्छेद 356, कुलाधिपति राज्य विश्वविद्यालयों का। विधायी शक्तियां - विधानसभा सत्र बुलाना सत्रावसान करना अनुच्छेद 174, विधानसभा भंग करना मुख्यमंत्री सलाह पर या विवेक से त्रिशंकु में, विधानसभा में अभिभाषण, विधेयकों पर सहमति अनुच्छेद 200, धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकता, लेकिन संविधान के अनुसार विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने की शक्ति रखता है यदि संविधान विरोधी या केंद्र कानून विरोधी हो तो अनुच्छेद 200, विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाना एक बार, विधान परिषद में 1/6 सदस्य साहित्य कला विज्ञान समाज सेवा से मनोनयन अनुच्छेद 171(3)(e), विधानसभा में एंग्लो इंडियन मनोनयन पहले था अब 104वां संशोधन 2019 से समाप्त। अध्यादेश शक्ति अनुच्छेद 213 के तहत है और विधानसभा या दोनों सदनों वाले राज्य में दोनों सदनों के सत्र में न होने पर प्रयोग की जाती है; विधानमंडल के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद यह समाप्त हो जाता है, जब तक पहले निरस्त न हो जाए।

न्यायिक वित्तीय आपात शक्तियां और विवेकाधिकार

न्यायिक शक्तियां अनुच्छेद 161 क्षमादान, लघुकरण, विराम, परिहार, मृत्युदंड के मामले में राज्यपाल अनुच्छेद 161 के तहत दंड को निलंबित, परिहार या लघुकरण कर सकता है, लेकिन क्षमा करने की शक्ति राष्ट्रपति के पास अनुच्छेद 72 के तहत है, यह राज्य कानून के विरुद्ध अपराध पर ही, केंद्र कानून पर राष्ट्रपति अनुच्छेद 72। वित्तीय शक्तियां - राज्य बजट वार्षिक वित्तीय विवरण राज्यपाल की सिफारिश से ही विधानसभा में पेश अनुच्छेद 202, धन विधेयक सिफारिश, अनुदान मांग सिफारिश। आपात शक्तियां - अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति शासन सिफारिश, अनुच्छेद 365 केंद्र निर्देश पालन न करने पर रिपोर्ट। विवेकाधिकार - अनुच्छेद 163 में मंत्रिपरिषद सलाह पर कार्य करता है सिवाय विवेक मामलों के, महत्वपूर्ण विवेक त्रिशंकु विधानसभा में मुख्यमंत्री चयन, बहुमत संदेह में विधानसभा भंग, विधेयक राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना, मुख्यमंत्री से जानकारी मांगना अनुच्छेद 167, मुख्यमंत्री को बहुमत सिद्ध करने कहना। मुख्यमंत्री नियुक्ति बहुमत आधार पर करता है। हटाने की प्रक्रिया महाभियोग नहीं, राष्ट्रपति प्रसादपर्यंत हटा सकता है, कोई निश्चित प्रक्रिया नहीं पर सुप्रीम कोर्ट बी पी सिंघल बनाम भारत संघ 2010 में कहा मनमाने ढंग से नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य और परीक्षा बिंदु

अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य राज्यपाल, 154 कार्यकारी शक्ति राज्यपाल में, 155 नियुक्ति राष्ट्रपति, 156 कार्यकाल 5 वर्ष प्रसादपर्यंत, 157-158 योग्यता शर्तें 35 वर्ष भारतीय नागरिक लाभ पद नहीं, 159 शपथ उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश, 160 आकस्मिक निर्वहन राष्ट्रपति व्यवस्था, 161 क्षमादान, 162 कार्यपालिका विस्तार, 163 मंत्रिपरिषद सलाह विवेक, 164 मुख्यमंत्री नियुक्ति, 174 सत्र बुलाना, 200 विधेयक सहमति आरक्षित, 213 अध्यादेश, 356 राष्ट्रपति शासन। वेतन संचित निधि से 3.5 लाख। कानूनी उन्मुक्ति अनुच्छेद 361। राज्य लोक सेवा आयोग रिपोर्ट राज्यपाल को राज्यपाल विधानमंडल में रखवाता है राष्ट्रपति को नहीं भेजता। मुख्य कार्य संवैधानिक प्रमुख के रूप में राज्य प्रशासन सुचारू रखना केंद्र राज्य कड़ी। तुलना राष्ट्रपति से - राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल राज्य का, दोनों की क्षमादान शक्ति लेकिन राष्ट्रपति मृत्युदंड क्षमा कर सकता है राज्यपाल नहीं। निर्णय न्यायालय में चुनौती योग्य है यदि दुर्भावना से हो। कार्यभार ग्रहण तिथि से कार्यकाल शुरू। मनोनयन विधान परिषद में 1/6। अध्यादेश 6 सप्ताह प्रभावी। धन विधेयक को राष्ट्रपति के पास नहीं भेज सकता यह महत्वपूर्ण।

  • मूल जानकारी - अनुच्छेद 153-162, नियुक्ति राष्ट्रपति अनुच्छेद 155, कार्यकाल 5 वर्ष प्रसादपर्यंत अनुच्छेद 156 निश्चित नहीं, योग्यता भारतीय नागरिक 35 वर्ष लाभ पद नहीं संसद सदस्य नहीं, शपथ उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश अनुच्छेद 159, त्यागपत्र राष्ट्रपति को, वेतन 3.5 लाख राज्य संचित निधि, प्रथम नागरिक, कुलाधिपति विश्वविद्यालय, केंद्र प्रतिनिधि, एक व्यक्ति दो राज्य 7वां संशोधन 1956
  • कार्यकारी विधायी - मुख्यमंत्री नियुक्ति बहुमत अनुच्छेद 164, मंत्रिपरिषद गठन, सरकार कार्य राज्यपाल नाम से 166, महाधिवक्ता 165, SPSC नियुक्ति 316, विधानसभा सत्र बुलाना सत्रावसान भंग 174 मुख्यमंत्री सलाह या विवेक त्रिशंकु, अभिभाषण, विधेयक सहमति 200 पुनर्विचार एक बार आरक्षित राष्ट्रपति को धन विधेयक नहीं, विधान परिषद 1/6 मनोनयन 171, अध्यादेश 213 सत्र न होने पर 6 सप्ताह तक 6 माह पुनः नहीं
  • न्यायिक वित्तीय आपात - क्षमादान 161 लघुकरण विराम परिहार मृत्युदंड क्षमा नहीं केवल निलंबन, राज्य कानून अपराध पर, वित्तीय बजट सिफारिश 202 धन विधेयक अनुदान, SPSC रिपोर्ट विधानमंडल में, आपात 356 सिफारिश 365 रिपोर्ट, कानूनी उन्मुक्ति 361 सिविल 2 माह नोटिस
  • विवेकाधिकार - 163 सलाह सिवाय विवेक, महत्वपूर्ण त्रिशंकु में मुख्यमंत्री चयन बहुमत संदेह भंग, विधेयक आरक्षित, जानकारी मांगना 167, बहुमत सिद्ध कहना, हटाना कोई प्रक्रिया नहीं राष्ट्रपति प्रसादपर्यंत बी पी सिंघल 2010 मनमाना नहीं, निर्णय दुर्भावना पर चुनौती योग्य, कार्यभार तिथि से शुरू, सम्मानजनक संवैधानिक प्रमुख, मुख्यमंत्री वास्तविक प्रमुख, तुलना राष्ट्रपति से क्षमादान में अंतर
विषयप्रावधान
अनुच्छेद153 प्रत्येक राज्य राज्यपाल, 154 कार्यकारी शक्ति, 155 नियुक्ति राष्ट्रपति, 156 कार्यकाल 5 वर्ष प्रसादपर्यंत त्यागपत्र राष्ट्रपति, 157-158 योग्यता 35 वर्ष नागरिक, 159 शपथ HC CJ, 161 क्षमादान, 163 सलाह विवेक, 164 CM नियुक्ति, 174 सत्र, 200 विधेयक सहमति, 213 अध्यादेश, 356 रिपोर्ट
नियुक्ति योग्यताराष्ट्रपति द्वारा, भारतीय नागरिक 35 वर्ष, लाभ पद नहीं, संसद सदस्य नहीं, एक व्यक्ति दो राज्य 7वां 1956
कार्यकारीCM नियुक्ति बहुमत, मंत्रिपरिषद, कार्य राज्यपाल नाम से 166, महाधिवक्ता 165, SPSC 316 नियुक्ति, विश्वविद्यालय कुलाधिपति, 356 सिफारिश, प्रथम नागरिक
विधायीसत्र बुलाना सत्रावसान भंग 174, अभिभाषण, विधेयक सहमति पुनर्विचार आरक्षित धन विधेयक आरक्षित नहीं 200, विधान परिषद 1/6 मनोनयन 171, अध्यादेश 213 6 सप्ताह
न्यायिक वित्तीयक्षमादान 161 मृत्युदंड क्षमा नहीं लघुकरण निलंबन, बजट सिफारिश 202, उन्मुक्ति 361
विवेकत्रिशंकु में CM चयन, बहुमत संदेह भंग, विधेयक आरक्षित, जानकारी मांगना 167, बहुमत सिद्ध कहना
वेतन शपथ3.5 लाख राज्य संचित निधि, शपथ HC मुख्य न्यायाधीश, कार्यभार से शुरू, त्यागपत्र राष्ट्रपति
तुलनाराष्ट्रपति देश का राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख, राष्ट्रपति मृत्युदंड क्षमा कर सकता है राज्यपाल नहीं, दोनों क्षमादान शक्ति, निर्णय दुर्भावना पर चुनौती योग्य

राज्यपाल से संबंधित अनुच्छेद 153 से 161, नियुक्ति, कार्यकाल, क्षमादान और विधायी शक्तियां परीक्षा में बार बार पूछी जाती हैं।