Pressure Groups - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़
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Pressure Groups in Indian Politics - 50 MCQs with detailed explanations for UPSC, SSC, State PCS and other competitive exams
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💡 व्याख्या
दबाव समूह (Pressure Groups) - संपूर्ण अध्ययन गाइड
दबाव समूह ऐसे संगठन होते हैं जो अपने विशेष हितों की रक्षा के लिए सरकार पर दबाव डालते हैं। ये सामान्यतः स्वयं चुनाव लड़कर सत्ता प्राप्त करने के बजाय नीति निर्माण और सरकारी निर्णयों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। प्रमुख उदाहरण फिक्की व्यापारिक एटक श्रमिक भारतीय किसान यूनियन कृषक और एबीवीपी छात्र। ये लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं और जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाते हैं। मूल उद्देश्य विशेष हितों की रक्षा सरकार की नीतियों को प्रभावित करना। स्वयं चुनाव लड़कर सत्ता प्राप्त करना सामान्यतः राजनीतिक दलों की विशेषता है, जबकि दबाव समूह मुख्यतः नीतियों को प्रभावित करते हैं। दल सत्ता प्राप्त करते हैं दबाव समूह केवल प्रभावित करते हैं। दबाव समूह संगठित हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह होते हैं जो सरकार की नीतियों और निर्णयों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। राजनीति विज्ञान के वर्गीकरण में नौकरशाही और सेना जैसे औपचारिक संस्थागत निकायों को संस्थागत समूहों के उदाहरण के रूप में लिया जाता है।
दबाव समूहों के प्रकार - व्यावसायिक फिक्की सीआईआई एसोचैम, श्रमिक AITUC, INTUC, CITU और BMS, कृषक भारतीय किसान यूनियन किसान सभा, छात्र एबीवीपी एनएसयूआई एसएफआई, महिला एआईडब्ल्यूसी एनएफआईडब्ल्यू। गैब्रियल अल्मंड और बिंघम पॉवेल का वर्गीकरण - संघात्मक Associational जैसे फिक्की, गैर संघात्मक Non-associational जैसे जाति भाषा धर्म आधारित, संस्थागत Institutional जैसे नौकरशाही, अनियमित Anomic जैसे दंगा प्रदर्शन भीड़। संस्थागत समूहों के उदाहरणों में नौकरशाही और सेना जैसे औपचारिक संस्थागत निकाय शामिल किए जाते हैं। असंघटनात्मक उदाहरण जाति आधारित समूह धर्म भाषा क्षेत्रीय। क्षेत्रीय भाषाई उदाहरण असम आंदोलन द्रविड़ आंदोलन। छात्र संगठन ABVP और NSUI अलग-अलग राजनीतिक-वैचारिक संबद्धताओं वाले छात्र संगठन हैं। RSS एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है; इसे दबाव समूह के रूप में वर्गीकृत करना संदर्भ और परिभाषा पर निर्भर करता है। शिक्षक संघ व्यावसायिक हित समूह। पर्यावरण, मानवाधिकार और उपभोक्ता मुद्दों से जुड़े संगठन या अभियान व्यापक सार्वजनिक मुद्दों पर काम कर सकते हैं; उदाहरण के रूप में चिपको, नर्मदा बचाओ और Greenpeace जैसे अभियानों का उल्लेख किया जाता है। हित समूह Interest विशेष हितों से जुड़े होते हैं, जबकि promotional groups व्यापक सार्वजनिक मुद्दों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं।
दबाव समूहों के साधन और भूमिका
साधन - लॉबिंग विधायकों अधिकारियों से मिलना, प्रदर्शन प्रत्यक्ष कार्रवाई हड़ताल घेराव धरना बंद, प्रचार जनमत निर्माण मीडिया याचिका। अनुचित या अवैध साधनों में रिश्वत जैसे कृत्य शामिल हो सकते हैं। अमेरिका में Lobbying Disclosure Act के तहत लॉबिंग के लिए पंजीकरण और प्रकटीकरण की व्यवस्था है; भारत में अमेरिका जैसा व्यापक वैधानिक लॉबिंग-पंजीकरण ढांचा नहीं है। संसदीय और राष्ट्रपति प्रणालियों में दबाव समूह विभिन्न संस्थाओं और नीति-निर्माण प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं; किसी एक संस्था पर प्रभाव को सार्वभौमिक नियम नहीं माना जाना चाहिए। किसान समूहों का प्रभाव उनकी सदस्य संख्या, संगठन और राजनीतिक भागीदारी जैसे कारकों पर निर्भर करता है। व्यावसायिक दबाव समूह आर्थिक और नियामक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर सरकार के समक्ष अपने हित रखते हैं। बहुलतावादी दृष्टिकोण में विभिन्न समूहों के बीच हितों और राजनीतिक प्रभाव की प्रतिस्पर्धा को लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा माना जाता है; रॉबर्ट डाहल का बहुलवाद संबंधी कार्य इस दृष्टिकोण से जुड़ा है। अभिजात वर्गीय दृष्टिकोण राजनीतिक प्रभाव और संसाधनों के असमान वितरण पर जोर देता है। AITUC की स्थापना 1920 में हुई थी और लाला लाजपत राय इसके प्रथम अध्यक्ष थे; INTUC का कांग्रेस से, CITU का CPI(M) से और BMS का RSS से ऐतिहासिक/वैचारिक संबंध रहा है। भारतीय राजनीति में दबाव समूहों का प्रभाव उनके संगठन, संसाधनों, सदस्यता और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। रिश्वत जैसे अवैध साधन दबाव-प्रक्रिया के वैध माध्यम नहीं हैं। राजनीतिक या वैचारिक संबद्धता के उदाहरणों में INTUC का कांग्रेस से ऐतिहासिक संबंध, ABVP का RSS से संबद्ध होना और NSUI का कांग्रेस से संबद्ध छात्र संगठन होना शामिल है। राजनीतिक दलों और दबाव समूहों के बीच कई बार परस्पर संपर्क और संबंध देखने को मिलते हैं।
संवैधानिक आधार और भारतीय संदर्भ
संवैधानिक आधार अनुच्छेद 19(1)(c) में संघ या संगठन बनाने की स्वतंत्रता है; इस अधिकार पर अनुच्छेद 19(4) के तहत संप्रभुता और अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था तथा नैतिकता के हित में युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा संघ बनाने अधिकार पर प्रतिबंध हो सकता है पर अधिकार निरपेक्ष नहीं। अनुच्छेद 39 और 46 जैसे नीति-निर्देशक सिद्धांत सामाजिक-आर्थिक हितों से जुड़े नीति-संदर्भ प्रदान करते हैं। भारतीय राजनीति में दबाव समूह प्रकृति भारतीय संदर्भ में दबाव समूहों की प्रकृति और प्रभाव को उनके संगठन तथा राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में समझा जाता है। क्षेत्रीय आंदोलनों और दबाव समूहों के बीच कई संदर्भों में संबंध देखा जा सकता है। नकारात्मक प्रभाव संकीर्ण हित बढ़ावा नीति विकृति भ्रष्टाचार। सकारात्मक भूमिका लोकतंत्र मजबूत जनता आवाज बहुमत द्वारा अल्पसंख्यक उपेक्षा रोकना जानकारी सरकार तक, संसदीय नियंत्रण जवाबदेही बढ़ाना, प्रदर्शन याचिका हड़ताल जनमत माध्यम, दबाव समूहों की प्रमुख ताकत संगठित हितों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करना है; संभावित कमजोरी संकीर्ण हितों का अत्यधिक प्रभाव हो सकता है, विभिन्न दबाव समूह अपने संगठन के प्रकार के अनुसार लागू कानूनों के अधीन होते हैं। दबाव समूहों की प्रभावशीलता राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। अमेरिका में लॉबिंग के लिए वैधानिक पंजीकरण और प्रकटीकरण व्यवस्था है, जबकि भारत में अमेरिका जैसा व्यापक वैधानिक लॉबिंग-पंजीकरण ढांचा नहीं है।
महत्वपूर्ण तथ्य और परीक्षा बिंदु
दबाव समूह सामान्यतः चुनाव के माध्यम से सत्ता प्राप्त करने के बजाय नीतियों और सरकारी निर्णयों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं; यही राजनीतिक दलों से उनका प्रमुख अंतर है, फिक्की व्यापारियों संगठन 1927, एटक मजदूर संगठन 1920, लोकतंत्र मजबूत करते, विभिन्न संगठन अपने प्रकार के अनुसार लागू कानूनों और नियमों के अधीन होते हैं, दबाव समूहों की प्रभावशीलता राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। प्रकार व्यवसायिक फिक्की सीआईआई एसोचैम, श्रमिक AITUC, INTUC, CITU और BMS, कृषक BKU किसान सभा, छात्र ABVP NSUI SFI, महिला AIWC NFIW, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Greenpeace जैसे संगठन पर्यावरण और सार्वजनिक हित के मुद्दों पर अभियान चलाते हैं। मुख्य कार्य नीतियों को प्रभावित करना, माध्यम लॉबिंग प्रदर्शन याचिका हड़ताल जनमत, ताकत संगठित शक्ति, कमजोरी संकीर्ण हित। अनुच्छेद 19(1)(c) संघ बनाने स्वतंत्रता। गैब्रियल अल्मंड और बिंघम पॉवेल का वर्गीकरण 4 प्रकार संघात्मक गैर संघात्मक संस्थागत अनियमित। गैब्रियल अल्मंड और बिंघम पॉवेल के वर्गीकरण के चार प्रकार परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। संस्थागत में नौकरशाही। असंघटनात्मक जाति। क्षेत्रीय भाषाई आंदोलन। पर्यावरण और मानवाधिकार से जुड़े सार्वजनिक हित अभियान बहुलतावादी डाहल। अभिजात वर्गीय।
- अवधारणा - मूल उद्देश्य विशेष हित रक्षा नीति प्रभावित, दल चुनाव के माध्यम से सत्ता प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, जबकि दबाव समूह सामान्यतः नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं, दबाव समूह संगठित हितों को व्यक्त और प्रभावित करने का माध्यम, भारतीय संदर्भ में दबाव समूहों की प्रकृति संगठन और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, डाहल बहुलतावादी शक्ति बिखरी दबाव समूह महत्वपूर्ण, अभिजात वर्गीय अभिजात नियंत्रित, क्षेत्रीय आंदोलनों और दबाव समूहों के बीच संबंध कई संदर्भों में देखा जा सकता है
- प्रकार - व्यावसायिक FICCI CII ASSOCHAM व्यापार उद्योग, श्रमिक AITUC, INTUC, CITU और BMS जैसे श्रमिक संगठन, कृषक BKU किसान सभा मुख्य कार्यशैली आंदोलन रैली, छात्र ABVP, NSUI और SFI जैसे संगठन, महिला AIWC NFIW, जाति आधारित जाति समूह, धार्मिक-सांस्कृतिक संगठन जैसे RSS, शिक्षक व्यावसायिक, पर्यावरण संबंधी उदाहरणों में चिपको और नर्मदा बचाओ जैसे आंदोलनों का उल्लेख किया जाता है, हित समूह विशेष हित, प्रचारक समूह व्यापक सार्वजनिक हित, संस्थागत नौकरशाही और सेना जैसे औपचारिक निकाय, असंघटनात्मक जाति भाषा धर्म, क्षेत्रीय भाषाई असम द्रविड़, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Greenpeace जैसे संगठन सार्वजनिक हित के मुद्दों पर अभियान चलाते हैं
- साधन भूमिका - साधन लॉबिंग विधायक मिलना प्रचार जनमत याचिका प्रदर्शन प्रत्यक्ष हड़ताल घेराव धरना, नहीं शामिल चुनाव लड़ना सत्ता प्राप्त, अलोकतांत्रिक या अवैध साधनों में रिश्वत जैसे कृत्य शामिल हो सकते हैं, नकारात्मक संकीर्ण हित नीति विकृति, सकारात्मक लोकतंत्र मजबूत जनता आवाज अल्पसंख्यक उपेक्षा रोकना जानकारी संसदीय नियंत्रण जवाबदेही, ताकत संगठित शक्ति कमजोरी संकीर्ण हित, माध्यम लॉबिंग प्रदर्शन याचिका हड़ताल जनमत, उद्देश्य प्रचार जनमत सरकार प्रभावित
- भारत अमेरिका - अमेरिका में लॉबिंग के लिए वैधानिक पंजीकरण और प्रकटीकरण व्यवस्था है; भारत में अमेरिका जैसा व्यापक वैधानिक लॉबिंग-पंजीकरण ढांचा नहीं है, संसदीय और राष्ट्रपति प्रणालियों में दबाव समूह विभिन्न संस्थाओं और नीति-निर्माण प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं, प्रभाव संगठन, संसाधन, सदस्यता और राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर, किसान समूहों का प्रभाव उनकी सदस्य संख्या, संगठन और राजनीतिक भागीदारी जैसे कारकों पर निर्भर करता है, व्यावसायिक समूह आर्थिक और नियामक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर अपने हित रखते हैं, छात्र संगठनों की भूमिका छात्र हितों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक भागीदारी से जुड़ी हो सकती है, दल और दबाव समूहों के बीच परस्पर संपर्क के उदाहरणों में INTUC का कांग्रेस से ऐतिहासिक संबंध शामिल है, अनुच्छेद 19(1)(c) संघ बनाने की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(4) के तहत संप्रभुता और अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था तथा नैतिकता के हित में युक्तियुक्त प्रतिबंध, SC निरपेक्ष नहीं युक्तियुक्त प्रतिबंध, अनुच्छेद 39 और 46 जैसे नीति-निर्देशक सिद्धांत सामाजिक-आर्थिक हितों से जुड़े नीति-संदर्भ प्रदान करते हैं, विभिन्न दबाव समूह अपने संगठन के प्रकार के अनुसार लागू कानूनों के अधीन होते हैं, AITUC का ऐतिहासिक रूप से वामपंथी ट्रेड यूनियन आंदोलन से संबंध रहा है
| विषय | विवरण |
|---|---|
| परिभाषा अंतर | दबाव समूह सामान्यतः विशेष हितों और नीतियों को प्रभावित करने पर केंद्रित होते हैं, जबकि राजनीतिक दल चुनाव के माध्यम से सत्ता प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, दल चुनाव सत्ता, दबाव समूह संगठित हितों को व्यक्त और प्रभावित करने का माध्यम, मूल उद्देश्य हित रक्षा |
| प्रकार | व्यावसायिक FICCI CII ASSOCHAM, श्रमिक AITUC, INTUC, CITU और BMS, कृषक BKU, छात्र ABVP, NSUI और SFI जैसे संगठन, महिला AIWC, जाति धर्म भाषा क्षेत्रीय असंघटनात्मक, संस्थागत नौकरशाही और सेना जैसे औपचारिक निकाय, पर्यावरण संबंधी अभियान ग्रीनपीस चिपको |
| गैब्रियल अल्मंड और बिंघम पॉवेल का वर्गीकरण | संघात्मक Associational, गैर संघात्मक Non-associational, संस्थागत Institutional, अनियमित Anomic |
| साधन | लॉबिंग प्रदर्शन प्रत्यक्ष हड़ताल घेराव धरना याचिका प्रचार जनमत, अवैध साधनों में रिश्वत जैसे कृत्य; सामान्यतः चुनाव के माध्यम से सत्ता प्राप्त करना दबाव समूह का मुख्य उद्देश्य नहीं |
| भूमिका | सकारात्मक लोकतंत्र मजबूत जनता आवाज अल्पसंख्यक सुरक्षा जानकारी जवाबदेही, नकारात्मक संकीर्ण हित नीति विकृति भ्रष्टाचार, ताकत संगठित शक्ति कमजोरी संकीर्ण |
| भारत अमेरिका | अमेरिका में लॉबिंग के लिए वैधानिक पंजीकरण और प्रकटीकरण व्यवस्था है; भारत में अमेरिका जैसा व्यापक वैधानिक लॉबिंग-पंजीकरण ढांचा नहीं है; दबाव समूहों का प्रभाव विभिन्न संस्थाओं और नीति-निर्माण प्रक्रियाओं पर हो सकता है |
| संवैधानिक | 19(1)(c) संघ बनाने स्वतंत्रता प्रतिबंध सार्वजनिक व्यवस्था नैतिकता संप्रभुता अखंडता, SC निरपेक्ष नहीं, अनुच्छेद 39 और 46 सामाजिक-आर्थिक हितों से जुड़े नीति-संदर्भ |
| उदाहरण | FICCI की स्थापना 1927 में हुई थी और यह व्यापार एवं उद्योग जगत का प्रमुख संगठन है, AITUC की स्थापना 1920 में हुई थी और लाला लाजपत राय इसके प्रथम अध्यक्ष थे; इसका ऐतिहासिक रूप से वामपंथी ट्रेड यूनियन आंदोलन से संबंध रहा है, INTUC का कांग्रेस से, CITU का CPI(M) से और BMS का RSS से ऐतिहासिक/वैचारिक संबंध रहा है; ABVP RSS से संबद्ध छात्र संगठन है और NSUI कांग्रेस से संबद्ध छात्र संगठन है, RSS सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन, CSE पर्यावरण संबंधी संगठन |
दबाव समूह से संबंधित प्रकार, साधन, संवैधानिक आधार और भारत अमेरिका अंतर परीक्षा में पूछे जाते हैं।