Public Services - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

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Public Services - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

Public Services in India - Articles 308-314, All India Services, Central Services, State Services, and 50 MCQs with detailed explanations for UPSC, SSC, State PCS and other competitive exams

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लोक सेवाएं (Public Services) - संपूर्ण अध्ययन गाइड

भारतीय संविधान के भाग XIV में संघ और राज्यों के अधीन सेवाओं से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 308 से 323 तक दिए गए हैं। इन प्रावधानों में भर्ती और सेवा-शर्तें, पद पर बने रहने का सिद्धांत, बर्खास्तगी/पद से हटाने और पदावनति से सुरक्षा तथा लोक सेवा आयोगों से संबंधित व्यवस्थाएं शामिल हैं। अनुच्छेद 315 से 323 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) की संवैधानिक व्यवस्था से संबंधित हैं। लोक सेवाओं के संदर्भ में 'स्थायी कार्यपालिका' और 'स्टील फ्रेम' जैसे शब्द सामान्यतः प्रशासनिक सेवा की भूमिका के वर्णन में प्रयुक्त होते हैं, लेकिन इन्हें संविधान में प्रयुक्त आधिकारिक पदनाम न समझें।

लोक सेवाओं से संबंधित प्रमुख संवैधानिक प्रावधानों में अनुच्छेद 309, 310, 311 और 312 विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। अनुच्छेद 309 भर्ती और सेवा-शर्तों के विनियमन से संबंधित है। अनुच्छेद 310 संघ या राज्य की सेवा में पद धारण करने के संबंध में pleasure doctrine का प्रावधान करता है, जबकि अनुच्छेद 311 कुछ सिविल सेवकों को बर्खास्तगी, पद से हटाने या पदावनति के संबंध में प्रक्रियात्मक सुरक्षा देता है। अनुच्छेद 312 अखिल भारतीय सेवाओं के गठन का संवैधानिक आधार प्रदान करता है।

लोक सेवाओं का संवैधानिक ढांचा

अनुच्छेद 308 से 313

अनुच्छेद 308 इस भाग के लिए आवश्यक व्याख्या से संबंधित है। अनुच्छेद 309 के अनुसार संसद या राज्य विधानमंडल संबंधित सेवाओं और पदों पर नियुक्ति तथा सेवा-शर्तों को कानून द्वारा विनियमित कर सकते हैं। जब तक संबंधित विधानमंडल कानून नहीं बनाता, तब तक राष्ट्रपति या राज्यपाल, जैसा मामला हो, नियम बना सकते हैं।

अनुच्छेद 310 के अंतर्गत संघ की रक्षा सेवा या संघ की सिविल सेवा अथवा अखिल भारतीय सेवा के सदस्य तथा राज्य की सिविल सेवा या राज्य के अधीन सिविल पद धारण करने वाला व्यक्ति राष्ट्रपति या राज्यपाल के pleasure के अधीन पद धारण करता है, जैसा संवैधानिक प्रावधान लागू हो। यह सिद्धांत अनुच्छेद 311 में दी गई प्रक्रियात्मक सुरक्षा के अधीन समझा जाना चाहिए।

अनुच्छेद 311 के अनुसार संघ या राज्य की सिविल सेवा अथवा संघ या राज्य के अधीन सिविल पद पर नियुक्त व्यक्ति को उसके नियुक्ति प्राधिकारी से अधीनस्थ किसी प्राधिकारी द्वारा बर्खास्त या पद से हटाया नहीं जा सकता। सामान्यतः बर्खास्तगी, पद से हटाने या पदावनति से पहले आरोपों की सूचना और सुनवाई का अवसर देने की संवैधानिक प्रक्रिया लागू होती है। संविधान में कुछ अपवाद भी दिए गए हैं, जैसे आपराधिक दोषसिद्धि की स्थिति, जहां जांच के बाद सामान्य प्रक्रिया आवश्यक नहीं होती, तथा ऐसी स्थिति जहां जांच कराना व्यवहारतः संभव न हो या राज्य की सुरक्षा के हित में जांच करना उचित न हो, जैसा अनुच्छेद 311 में निर्धारित है।

अनुच्छेद 312 के अनुसार यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित करे कि राष्ट्रीय हित में एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन आवश्यक या हितकारी है, तो संसद कानून द्वारा ऐसी सेवा या सेवाओं का सृजन कर सकती है। वर्तमान में तीन अखिल भारतीय सेवाएं हैं—भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFoS)। इन सेवाओं के अधिकारी संघ तथा राज्यों, दोनों के मामलों से संबंधित सेवा-व्यवस्था में कार्य कर सकते हैं। अखिल भारतीय सेवाओं की सेवा-शर्तों के लिए All India Services Act, 1951 और उसके अधीन बनाए गए नियम महत्वपूर्ण हैं।

IAS, IPS और IFoS के संवर्ग प्रबंधन में क्रमशः DoPT, गृह मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं। अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी राज्य संवर्ग में कार्य करने के साथ नियमों के अनुसार केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर भी जा सकते हैं।

लोक सेवा आयोग और भर्ती

अनुच्छेद 315 संघ के लिए Union Public Service Commission और प्रत्येक राज्य के लिए State Public Service Commission की संवैधानिक व्यवस्था करता है। दो या अधिक राज्य, संबंधित राज्यों के अनुरोध और संसद के कानून के अनुसार Joint State Public Service Commission की व्यवस्था भी कर सकते हैं। UPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति तथा State Public Service Commission के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।

अनुच्छेद 316 के अनुसार लोक सेवा आयोग के सदस्य छह वर्ष की अवधि या निर्धारित आयु-सीमा तक, जो पहले हो, पद पर रहते हैं। UPSC के लिए आयु सीमा 65 वर्ष तथा State Public Service Commission और Joint Commission के लिए 62 वर्ष है। सदस्य अपने पद की अवधि समाप्त होने के बाद उसी पद पर पुनर्नियुक्त नहीं हो सकता।

अनुच्छेद 317 लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को हटाने और निलंबित करने से संबंधित है। कदाचार के आधार पर हटाने के लिए राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को reference किए जाने और सर्वोच्च न्यायालय की निर्धारित जांच के बाद रिपोर्ट की संवैधानिक प्रक्रिया लागू होती है। संविधान में कुछ अन्य आधार भी निर्धारित हैं, जिन पर राष्ट्रपति द्वारा हटाने की व्यवस्था है।

अनुच्छेद 318 राष्ट्रपति या राज्यपाल को, जैसा मामला हो, आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की संख्या तथा उनकी सेवा-शर्तों के संबंध में विनियम बनाने की शक्ति देता है। नियुक्ति के बाद सदस्य की सेवा-शर्तों को उसके प्रतिकूल नहीं बदला जा सकता।

लोक सेवा आयोग के सदस्यों के पदोत्तर रोजगार पर प्रतिबंध

अनुच्छेद 319 आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के पद छोड़ने के बाद सरकारी रोजगार पर प्रतिबंध लगाता है। UPSC के अध्यक्ष को भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन आगे रोजगार के लिए अयोग्य बनाया गया है। अन्य अध्यक्षों और सदस्यों के लिए संविधान में विशिष्ट पदोत्तर नियुक्ति की सीमाएं निर्धारित हैं। इसलिए Article 319 को केवल सामान्य 'reappointment restriction' के रूप में नहीं, बल्कि पद छोड़ने के बाद सरकारी रोजगार की संवैधानिक सीमाओं के रूप में समझना अधिक सटीक है।

UPSC के कार्य, परामर्श और रिपोर्ट

अनुच्छेद 320 के अनुसार UPSC और State Public Service Commission अपने-अपने क्षेत्र में नियुक्तियों के लिए परीक्षाएं आयोजित करते हैं। UPSC को, अन्य निर्धारित कार्यों के अलावा, भर्ती की पद्धतियों, नियुक्ति और पदोन्नति के सिद्धांतों तथा अनुशासनात्मक मामलों जैसे विषयों पर सरकार से परामर्श किया जाता है। अनुच्छेद 320(3) में परामर्श के विषयों का संवैधानिक ढांचा दिया गया है।

अनुच्छेद 320(4) के अनुसार लोक सेवा आयोग से परामर्श की आवश्यकता उस तरीके के संबंध में नहीं है जिससे अनुच्छेद 16(4) के तहत आरक्षण संबंधी प्रावधान किए जाते हैं या अनुच्छेद 335 के प्रावधानों को प्रभावी किया जाता है। इसलिए इसे 'SC, ST और OBC मामलों पर आयोग को कोई भूमिका नहीं' जैसी व्यापक भाषा में नहीं समझना चाहिए।

अनुच्छेद 320 के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति या राज्यपाल कुछ मामलों में आयोग से परामर्श की आवश्यकता को विनियमों द्वारा बाहर कर सकते हैं। ऐसे विनियम संसद या संबंधित राज्य विधानमंडल के समक्ष रखे जाते हैं। अनुच्छेद 321 के तहत संसद या राज्य विधानमंडल कानून द्वारा लोक सेवा आयोग के कार्यों का विस्तार कर सकता है।

लोक सेवा आयोग की सलाह सामान्यतः सरकार पर न्यायिक आदेश की तरह बाध्यकारी नहीं होती। हालांकि आयोग की वार्षिक रिपोर्ट में उन मामलों का उल्लेख किया जाता है जहां आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई। यह व्यवस्था अनुच्छेद 323 के तहत रिपोर्ट प्रस्तुत करने और उस पर कार्रवाई की संवैधानिक जवाबदेही से संबंधित है।

वार्षिक रिपोर्ट और वित्तीय स्वतंत्रता

अनुच्छेद 322 के अनुसार लोक सेवा आयोग के खर्च, जिसमें आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन से संबंधित खर्च शामिल हैं, संबंधित Consolidated Fund पर charged होते हैं। UPSC के खर्च भारत की Consolidated Fund पर और State Public Service Commission के खर्च संबंधित राज्य की Consolidated Fund पर charged होते हैं।

अनुच्छेद 323 के अनुसार UPSC राष्ट्रपति को वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। राष्ट्रपति उस रिपोर्ट को, उन मामलों पर स्पष्टीकरण ज्ञापन सहित जहां आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई, संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाता है। State Public Service Commission राज्यपाल को रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और राज्यपाल उसे संबंधित राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाता है।

लोक सेवा आयोग का ऐतिहासिक विकास

भारत में Public Service Commission की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि Government of India Act, 1919 से जुड़ी है। Lee Commission ने 1924 में Public Service Commission की स्थापना की सिफारिश की। इसके बाद 1 अक्टूबर 1926 को भारत में पहली Central Public Service Commission स्थापित हुई और Sir Ross Barker इसके पहले Chairman थे। बाद में संवैधानिक विकास के साथ इसका स्वरूप Federal Public Service Commission और स्वतंत्र भारत में Union Public Service Commission के रूप में विकसित हुआ। इसलिए Sir Ross Barker को 'UPSC के पहले Chairman' कहने के बजाय '1926 में स्थापित पहली Central Public Service Commission के पहले Chairman' कहना अधिक ऐतिहासिक रूप से सटीक है।

अखिल भारतीय सेवाएं और केंद्रीय सेवाएं

अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं में मुख्य अंतर उनके संवर्ग और सेवा-क्षेत्र से संबंधित है। अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी संघ और राज्य दोनों स्तरों पर सेवा कर सकते हैं, जबकि केंद्रीय सेवाएं केंद्र सरकार के अधीन सेवाएं हैं। हालांकि किसी केंद्रीय सेवा की भर्ती किस संस्था द्वारा होगी, यह संबंधित सेवा और भर्ती नियमों पर निर्भर करता है; इसलिए सभी केंद्रीय सेवाओं की भर्ती को केवल UPSC से जोड़ना सही नहीं है। उदाहरण के लिए रेलवे की बड़ी संख्या में भर्ती Railway Recruitment Boards जैसी अलग भर्ती संस्थाओं के माध्यम से होती है।

अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की सेवा-शर्तें संबंधित अखिल भारतीय सेवा नियमों द्वारा विनियमित होती हैं। All India Services के लिए Conduct Rules, Discipline and Appeal Rules तथा Cadre Rules अलग-अलग बनाए गए हैं। Central Civil Services के लिए अलग नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए 'Civil Services Conduct Rules, 1964' को सभी लोक सेवाओं पर लागू एकमात्र आचरण नियम के रूप में नहीं लिखना चाहिए।

प्रशासनिक अधिकरण और सेवा विवाद

संविधान के भाग XIV-A में अनुच्छेद 323A और 323B अधिकरणों से संबंधित प्रावधान हैं। अनुच्छेद 323A प्रशासनिक अधिकरणों से संबंधित है और संसद को सेवा तथा संबंधित विषयों से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है। Administrative Tribunals Act, 1985 के आधार पर Central Administrative Tribunal (CAT) की स्थापना हुई।

L. Chandra Kumar v. Union of India के 1997 के निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अधिकरणों के निर्णयों पर उच्च न्यायालयों की Article 226 और 227 के तहत judicial review की संवैधानिक शक्ति समाप्त नहीं होती। अधिकरण उच्च न्यायालयों का पूर्ण विकल्प नहीं हैं। न्यायिक समीक्षा संविधान की मूल संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Quick Revision - महत्वपूर्ण बिंदु

  • भाग XIV - संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं, मुख्यतः अनुच्छेद 308-323
  • अनुच्छेद 309 - भर्ती और सेवा-शर्तों का विनियमन
  • अनुच्छेद 310 - pleasure doctrine
  • अनुच्छेद 311 - बर्खास्तगी, पद से हटाने और पदावनति के संबंध में संवैधानिक सुरक्षा
  • अनुच्छेद 312 - अखिल भारतीय सेवाओं का गठन; राज्यसभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई बहुमत वाला संकल्प और उसके बाद संसद का कानून
  • वर्तमान अखिल भारतीय सेवाएं - IAS, IPS और IFoS
  • अनुच्छेद 315 - UPSC, SPSC और Joint State Public Service Commission की व्यवस्था
  • अनुच्छेद 316 - नियुक्ति और कार्यकाल; UPSC के लिए 6 वर्ष/65 वर्ष तथा State/Joint Commission के लिए 6 वर्ष/62 वर्ष, जो पहले हो
  • अनुच्छेद 317 - लोक सेवा आयोग के सदस्यों का हटाना और निलंबन
  • अनुच्छेद 318 - सदस्यों और कर्मचारियों की संख्या तथा सेवा-शर्तों संबंधी विनियम
  • अनुच्छेद 319 - पद छोड़ने के बाद सरकारी रोजगार पर संवैधानिक प्रतिबंध
  • अनुच्छेद 320 - लोक सेवा आयोग के कार्य और परामर्श
  • अनुच्छेद 321 - आयोग के कार्यों का विस्तार
  • अनुच्छेद 322 - आयोग के खर्च संबंधित Consolidated Fund पर charged
  • अनुच्छेद 323 - वार्षिक रिपोर्ट
  • 1924 - Lee Commission की Public Service Commission संबंधी सिफारिश
  • 1 अक्टूबर 1926 - पहली Central Public Service Commission की स्थापना; Sir Ross Barker पहले Chairman
  • Administrative Tribunals - अनुच्छेद 323A; CAT के लिए Administrative Tribunals Act, 1985
  • L. Chandra Kumar (1997) - अधिकरणों के निर्णयों पर High Courts की Article 226/227 judicial review शक्ति बनी रहती है
अनुच्छेद / विषयसही प्रावधान
308-313सेवाओं से संबंधित सामान्य प्रावधान; 309 भर्ती/सेवा-शर्तें, 310 tenure, 311 सुरक्षा, 312 अखिल भारतीय सेवाएं, 313 transitional provisions
315संघ और राज्यों के लिए Public Service Commissions; दो या अधिक राज्यों के लिए Joint Commission की संवैधानिक व्यवस्था
316UPSC सदस्य राष्ट्रपति द्वारा, SPSC सदस्य राज्यपाल द्वारा; कार्यकाल 6 वर्ष या निर्धारित आयु सीमा, जो पहले हो
317लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष/सदस्यों को हटाने और निलंबन की प्रक्रिया
318आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की संख्या तथा सेवा-शर्तों संबंधी विनियम
319पद छोड़ने के बाद सरकारी रोजगार पर संवैधानिक सीमाएं
320परीक्षाएं और आयोग के संवैधानिक परामर्श संबंधी कार्य
321संसद/राज्य विधानमंडल द्वारा आयोग के कार्यों का विस्तार
322आयोग के खर्च संबंधित Consolidated Fund पर charged
323UPSC की रिपोर्ट राष्ट्रपति को और SPSC की रिपोर्ट राज्यपाल को
312अखिल भारतीय सेवाओं का गठन; राज्यसभा का कम से कम दो-तिहाई उपस्थित और मतदान बहुमत वाला संकल्प और उसके बाद संसद का कानून
323AAdministrative Tribunals; CAT का आधार Administrative Tribunals Act, 1985

लोक सेवाओं के अध्ययन में अनुच्छेद 309 से 323, अखिल भारतीय सेवाओं का संवैधानिक आधार, UPSC/SPSC की नियुक्ति और कार्यकाल, आयोग के कार्य एवं रिपोर्ट तथा प्रशासनिक अधिकरणों से संबंधित प्रावधान विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।