Special Provisions - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़
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Special Provisions - Articles 370-371J, special status for states, temporary provisions, and 50 MCQs with detailed explanations for UPSC, SSC, State PCS and other competitive exams
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💡 व्याख्या
विशेष प्रावधान (Special Provisions) - संपूर्ण अध्ययन गाइड
भारतीय संविधान के भाग XXI का शीर्षक "Temporary, Transitional and Special Provisions" है। इसमें अनुच्छेद 369 से 392 तक के प्रावधान शामिल हैं। राज्यों से संबंधित विशेष प्रावधान मुख्यतः अनुच्छेद 371 से 371J में दिए गए हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विशिष्टताओं को ध्यान में रखते हुए संवैधानिक व्यवस्था में विशेष प्रबंध करना है। इन्हें भारतीय संघवाद में असममित (asymmetric) व्यवस्थाओं के उदाहरण के रूप में समझा जा सकता है।
विशेष प्रावधानों को केवल "सामान्य प्रावधानों पर हमेशा सर्वोच्च" नियम के रूप में नहीं समझना चाहिए। प्रत्येक अनुच्छेद का प्रभाव उसके अपने संवैधानिक पाठ और लागू संशोधनों के अनुसार निर्धारित होता है। कुछ प्रावधान संसद के कानून के application पर विशेष शर्तें लगाते हैं, जबकि कुछ राज्यपाल की विशेष जिम्मेदारियों, क्षेत्रीय विकास बोर्डों, स्थानीय अवसरों या विशेष प्रतिनिधित्व से संबंधित हैं।
अनुच्छेद 371 से 371J के अंतर्गत महाराष्ट्र और गुजरात, नागालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा और कर्नाटक के लिए अलग-अलग विशेष प्रावधान हैं। अनुच्छेद 370 का ऐतिहासिक संदर्भ जम्मू-कश्मीर से संबंधित था; 2019 में संवैधानिक और वैधानिक कदमों के बाद उसकी पूर्व विशेष संवैधानिक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुआ और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बने।
राज्यवार प्रमुख विशेष प्रावधान
| अनुच्छेद | राज्य/क्षेत्र | संवैधानिक विशेषता |
|---|---|---|
| 371 | महाराष्ट्र और गुजरात | क्षेत्रीय विकास बोर्ड, विकास निधि का equitable allocation तथा technical education, vocational training और राज्य सेवाओं में अवसरों से संबंधित राज्यपाल की विशेष जिम्मेदारी। |
| 371A | नागालैंड | Naga religious/social practices, customary law and procedure, customary-law आधारित civil/criminal justice तथा land and its resources से संबंधित विशेष संरक्षण। |
| 371B | असम | Assam Legislative Assembly में tribal areas से चुने गए सदस्यों की committee की व्यवस्था। |
| 371C | मणिपुर | Hill Areas Committee तथा राज्यपाल की संबंधित विशेष जिम्मेदारियां। |
| 371D | आंध्र प्रदेश और तेलंगाना | public employment और education में equitable opportunities तथा local cadres/areas से संबंधित विशेष व्यवस्था। |
| 371E | आंध्र प्रदेश | Parliament द्वारा Central University स्थापित करने का प्रावधान। |
| 371F | सिक्किम | सिक्किम के भारत में पूर्ण राज्य के रूप में प्रवेश के बाद विशेष संवैधानिक व्यवस्थाएं, जिसमें विधानसभा और विभिन्न समुदायों के हितों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। |
| 371G | मिजोरम | Mizo religious/social practices, customary law and procedure तथा land ownership and transfer से संबंधित विशेष संरक्षण। |
| 371H | अरुणाचल प्रदेश | राज्यपाल को law and order के संबंध में विशेष जिम्मेदारी। |
| 371I | गोवा | गोवा की विधान सभा में कम से कम 30 सदस्य होने का संवैधानिक प्रावधान। |
| 371J | कर्नाटक | राज्य के specified region के लिए विकास बोर्ड तथा education और public employment में equitable opportunities से संबंधित विशेष प्रावधान। |
अनुच्छेद 371 - महाराष्ट्र और गुजरात
अनुच्छेद 371(2) राष्ट्रपति को महाराष्ट्र या गुजरात के संबंध में राज्यपाल की विशेष जिम्मेदारी निर्धारित करने की अनुमति देता है। इसमें Vidarbha, Marathwada और महाराष्ट्र के शेष भाग तथा Saurashtra, Kutch और गुजरात के शेष भाग के लिए separate development boards, developmental expenditure का equitable allocation तथा technical education, vocational training और state services में पर्याप्त अवसरों से संबंधित व्यवस्थाएं शामिल हैं। विकास बोर्डों की working report प्रत्येक वर्ष राज्य विधानमंडल के समक्ष रखी जाती है।
अनुच्छेद 371A - नागालैंड
अनुच्छेद 371A के तहत Parliament का कोई Act निम्न विषयों पर नागालैंड में स्वतः लागू नहीं होता, जब तक Nagaland Legislative Assembly resolution द्वारा ऐसा तय न करे: Nagas की religious or social practices, Naga customary law and procedure, customary law के अनुसार civil और criminal justice से जुड़े निर्णय तथा ownership and transfer of land and its resources। यह व्यवस्था 13वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1962 से जोड़ी गई थी और 1 दिसंबर 1963 से प्रभावी हुई।
अनुच्छेद 371A में Tuensang क्षेत्र के प्रशासन के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी हैं। Governor को Tuensang से संबंधित कुछ विशेष जिम्मेदारियां दी गई थीं और Regional Council की संवैधानिक व्यवस्था की गई थी। इन प्रावधानों को केवल "35 सदस्यीय परिषद और दस वर्ष" जैसे संक्षिप्त दावे तक सीमित करके नहीं पढ़ना चाहिए; मूल संवैधानिक व्यवस्था में समय-सीमा से संबंधित विशेष प्रावधान भी थे।
अनुच्छेद 371B - असम
अनुच्छेद 371B असम की Legislative Assembly में tribal areas से निर्वाचित सदस्यों की एक committee की व्यवस्था करता है। राष्ट्रपति order द्वारा इस committee के constitution और functions के लिए व्यवस्था कर सकते हैं। यह प्रावधान संविधान (22वाँ संशोधन) अधिनियम, 1969 से संबंधित है।
अनुच्छेद 371C - मणिपुर
अनुच्छेद 371C मणिपुर के Hill Areas के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्था देता है। Legislative Assembly में Hill Areas से निर्वाचित सदस्यों की Hill Areas Committee की व्यवस्था की गई है। Governor को Hill Areas के administration के संबंध में President को report देने तथा Union द्वारा दिए गए directions के अनुसार कार्य करने से संबंधित विशेष भूमिका दी गई है। यह प्रावधान संविधान (27वाँ संशोधन) अधिनियम, 1971 से जोड़ा गया।
अनुच्छेद 371D और 371E - आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
अनुच्छेद 371D आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में public employment और education के संबंध में equitable opportunities और facilities उपलब्ध कराने के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्था करता है। राष्ट्रपति order के माध्यम से अलग-अलग local areas और local cadres से संबंधित व्यवस्थाएं कर सकते हैं तथा educational institutions और public employment में local opportunities से जुड़े प्रावधान निर्धारित किए जा सकते हैं।
अनुच्छेद 371D में Administrative Tribunal से संबंधित संवैधानिक व्यवस्था भी शामिल थी। वर्तमान स्थिति बताते समय इसे एक सक्रिय सार्वभौमिक tribunal के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए; परीक्षा में Article 371D के मूल constitutional provision और बाद के statutory/administrative developments को अलग रखना उचित है। यह व्यवस्था संविधान (32वाँ संशोधन) अधिनियम, 1973 से जोड़ी गई थी।
अनुच्छेद 371E संसद को Andhra Pradesh में Central University स्थापित करने के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है। यह भी 32वें संविधान संशोधन के साथ Part XXI की विशेष व्यवस्था का हिस्सा बना।
अनुच्छेद 371F - सिक्किम
सिक्किम को 1975 में भारत का पूर्ण राज्य बनाया गया और संविधान (36वाँ संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा अनुच्छेद 371F जोड़ा गया। इससे सिक्किम की विशिष्ट ऐतिहासिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप अनेक विशेष संवैधानिक व्यवस्थाएं की गईं।
अनुच्छेद 371F में Legislative Assembly के लिए कम से कम 30 members की संवैधानिक व्यवस्था है। इसमें विभिन्न sections of the population के हितों और representation से संबंधित विशेष प्रावधान भी हैं। सिक्किम के existing laws के continuance तथा कुछ property और rights से संबंधित विशेष constitutional arrangements भी इसी अनुच्छेद में हैं। इसलिए सिक्किम के वर्तमान विधानसभा सदस्यों की संख्या को अनुच्छेद 371F की "minimum 30" शर्त के बराबर नहीं मानना चाहिए।
अनुच्छेद 371G - मिजोरम
अनुच्छेद 371G मिजोरम की विशिष्ट सामाजिक और customary व्यवस्था की रक्षा करता है। Parliament का कोई Act Mizo religious or social practices, Mizo customary law and procedure तथा ownership and transfer of land से संबंधित विषयों पर स्वतः लागू नहीं होता, जब तक Mizoram Legislative Assembly resolution द्वारा ऐसा तय न करे। यह व्यवस्था संविधान (53वाँ संशोधन) अधिनियम, 1986 से जोड़ी गई।
371G को "हर केंद्रीय कानून मिजोरम में लागू नहीं होता" जैसी व्यापक भाषा में नहीं समझना चाहिए। विशेष protection केवल संविधान में निर्दिष्ट विषयों तक सीमित है।
अनुच्छेद 371H - अरुणाचल प्रदेश
अनुच्छेद 371H अरुणाचल प्रदेश में Governor को law and order के संबंध में special responsibility देता है। Governor इस जिम्मेदारी का निर्वहन अपने individual judgment में कर सकते हैं, और संविधान इस संबंध में Governor के निर्णय तथा President द्वारा दिए गए directions की विशेष व्यवस्था करता है। यह प्रावधान संविधान (55वाँ संशोधन) अधिनियम, 1986 से जोड़ा गया।
अनुच्छेद 371I - गोवा
अनुच्छेद 371I गोवा की Legislative Assembly के लिए कम से कम 30 members की व्यवस्था करता है। यह प्रावधान संविधान (56वाँ संशोधन) अधिनियम, 1987 से जुड़ा है। इसे गोवा के लिए 371 श्रृंखला का विशेष संवैधानिक प्रावधान माना जाता है; इससे कोई व्यापक भूमि या customary-law protection स्वतः नहीं बनता।
अनुच्छेद 371J - कर्नाटक
अनुच्छेद 371J संविधान (98वाँ संशोधन) अधिनियम, 2012 द्वारा जोड़ा गया। यह कर्नाटक के specified region के लिए special provisions देता है, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से Hyderabad-Karnataka region कहा जाता था और जिसे बाद में Kalyana Karnataka नाम दिया गया। इसमें development board की स्थापना, developmental expenditure का equitable allocation तथा education और public employment में specified region के लोगों के लिए equitable opportunities और facilities से संबंधित व्यवस्था शामिल है।
371J के संदर्भ में वर्तमान district-count को स्थायी constitutional fact की तरह नहीं लिखना चाहिए, क्योंकि administrative boundaries समय के साथ बदल सकती हैं। मुख्य परीक्षा तथ्य Article 371J, 98वाँ संशोधन, development board और education/public employment में equitable opportunities हैं।
अनुच्छेद 370 - ऐतिहासिक संदर्भ और 2019 के परिवर्तन
अनुच्छेद 370 मूल संविधान में जम्मू-कश्मीर के लिए एक विशेष संवैधानिक व्यवस्था के रूप में शामिल था और Part XXI में था। यह 17 अक्टूबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाए गए संवैधानिक प्रबंधों का हिस्सा था। इसका मूल उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की उस समय की विशिष्ट संवैधानिक परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत के साथ संवैधानिक संबंधों को व्यवस्थित करना था।
5 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति ने Constitution (Application to Jammu and Kashmir) Order, 2019 जारी किया। इसके बाद 6 अगस्त 2019 को Article 370 के clauses को cease to operate करने की घोषणा की गई। इन संवैधानिक कदमों के साथ Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 लागू हुआ। 31 अक्टूबर 2019 से पूर्व राज्य को दो Union Territories—Union Territory of Jammu and Kashmir और Union Territory of Ladakh—में reorganise किया गया। Jammu and Kashmir एक UT with Legislature है, जबकि Ladakh एक UT without Legislature है।
इसलिए वर्तमान परीक्षा संदर्भ में Article 370 को केवल "5 अगस्त 2019 को समाप्त" कहकर छोड़ने के बजाय 2019 के constitutional orders, Presidential declaration और Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 के क्रम को समझना अधिक सटीक है।
सिक्किम का भारत में एकीकरण
सिक्किम से संबंधित संवैधानिक परिवर्तन दो चरणों में समझे जा सकते हैं। संविधान (35वाँ संशोधन) अधिनियम, 1974 ने सिक्किम के लिए Associate State की व्यवस्था की थी। इसके बाद संविधान (36वाँ संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा सिक्किम भारत का पूर्ण राज्य बना और अनुच्छेद 371F जोड़ा गया। इसलिए 35वाँ और 36वाँ संशोधन सिक्किम के संवैधानिक इतिहास में महत्वपूर्ण हैं।
विशेष प्रावधानों का उद्देश्य
- सांस्कृतिक संरक्षण: कुछ राज्यों की धार्मिक, सामाजिक और customary practices को संवैधानिक संरक्षण देना।
- क्षेत्रीय विकास: अपेक्षाकृत पिछड़े या विशेष क्षेत्रों में development boards और equitable allocation की व्यवस्था करना।
- स्थानीय अवसर: कुछ राज्यों में education और public employment में equitable opportunities तथा local-area आधारित व्यवस्थाएं करना।
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व: कुछ विशिष्ट समुदायों या क्षेत्रों की प्रतिनिधित्व संबंधी संवैधानिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखना।
- संघवाद: राज्यों की ऐतिहासिक और सामाजिक विविधताओं के अनुरूप अलग-अलग संवैधानिक व्यवस्थाओं की अनुमति देना।
महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य
- भाग XXI - Temporary, Transitional and Special Provisions; अनुच्छेद 369 से 392।
- अनुच्छेद 371 - महाराष्ट्र और गुजरात।
- अनुच्छेद 371A - नागालैंड।
- अनुच्छेद 371B - असम।
- अनुच्छेद 371C - मणिपुर।
- अनुच्छेद 371D और 371E - आंध्र प्रदेश तथा 371D की व्यवस्था तेलंगाना पर भी लागू।
- अनुच्छेद 371F - सिक्किम।
- अनुच्छेद 371G - मिजोरम।
- अनुच्छेद 371H - अरुणाचल प्रदेश।
- अनुच्छेद 371I - गोवा।
- अनुच्छेद 371J - कर्नाटक।
- 13वाँ संशोधन - नागालैंड से संबंधित Article 371A।
- 22वाँ संशोधन - असम से संबंधित Article 371B।
- 27वाँ संशोधन - मणिपुर से संबंधित Article 371C।
- 32वाँ संशोधन - Article 371D और 371E।
- 36वाँ संशोधन - सिक्किम और Article 371F।
- 53वाँ संशोधन - मिजोरम और Article 371G।
- 55वाँ संशोधन - अरुणाचल प्रदेश और Article 371H।
- 56वाँ संशोधन - गोवा और Article 371I।
- 98वाँ संशोधन - कर्नाटक और Article 371J।
- Article 370 - जम्मू-कश्मीर की मूल विशेष संवैधानिक व्यवस्था; 2019 में इसके operation में व्यापक संवैधानिक परिवर्तन।
- 31 अक्टूबर 2019 - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो नए Union Territories के रूप में अस्तित्व में आए।
- Article 244, Fifth/Sixth Schedule और Part XXI के special provisions को अलग-अलग संवैधानिक व्यवस्थाओं के रूप में समझना चाहिए।
| अनुच्छेद | राज्य | मुख्य विषय |
|---|---|---|
| 371 | महाराष्ट्र और गुजरात | Regional development boards, equitable development expenditure और education/employment opportunities। |
| 371A | नागालैंड | Naga religious/social practices, customary law, customary-law based justice तथा land and resources। |
| 371B | असम | Tribal areas से निर्वाचित सदस्यों की Legislative Assembly committee। |
| 371C | मणिपुर | Hill Areas Committee और Governor की विशेष भूमिका। |
| 371D | आंध्र प्रदेश और तेलंगाना | Public employment, education और local-area आधारित equitable opportunities। |
| 371E | आंध्र प्रदेश | Central University की स्थापना के लिए Parliament की शक्ति। |
| 371F | सिक्किम | पूर्ण राज्य बनने के बाद विशेष constitutional arrangements और representation/protection provisions। |
| 371G | मिजोरम | Mizo religious/social practices, customary law और land ownership/transfer। |
| 371H | अरुणाचल प्रदेश | Law and order के संबंध में Governor की special responsibility। |
| 371I | गोवा | Legislative Assembly में कम से कम 30 members। |
| 371J | कर्नाटक | Specified region के लिए development board और education/public employment में equitable opportunities। |
विशेष प्रावधानों के अध्ययन में केवल article-number याद करना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक अनुच्छेद का संबंधित राज्य, constitutional amendment और वास्तविक special provision साथ में याद करना चाहिए। विशेष रूप से 371A, 371G और 371H में राज्य की विशिष्ट संवैधानिक सुरक्षा/जिम्मेदारी, 371D में local opportunities, 371F में सिक्किम की व्यवस्था तथा 371J में क्षेत्रीय विकास को अलग-अलग समझना परीक्षा के लिए उपयोगी है।