मानव उत्सर्जन तंत्र - वृक्क, नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़
⌄मानव उत्सर्जन तंत्र - वृक्क, नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़
शरीर में उपापचय के बाद हानिकारक अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं। इन अपशिष्ट को बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।
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💡 व्याख्या
शरीर में उपापचय के बाद हानिकारक अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं। इन अपशिष्ट को बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। मानव में मुख्य उत्सर्जी अंग वृक्क है। वृक्क रक्त को छानकर मूत्र बनाता है और मूत्रवाहिनी, मूत्राशय, मूत्रमार्ग से मूत्र बाहर निकलता है। वृक्क की मूल इकाई नेफ्रॉन है।
1. उत्सर्जन - परिभाषा और आवश्यकता
उत्सर्जन वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर में उपापचय के बाद बने नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। मुख्य अपशिष्ट हैं - अमोनिया NH3, यूरिया, यूरिक अम्ल, अतिरिक्त जल H2O और लवण NaCl।
उपापचय में प्रोटीन के टूटने से अमोनिया बनता है जो बहुत विषैला है। यकृत अमोनिया को यूरिया में बदल देता है जो कम विषैला है। यदि अपशिष्ट शरीर में जमा हो जाए तो कोशिका की मृत्यु हो सकती है।
उत्सर्जन से शरीर में जल और आयन संतुलन बना रहता है। रक्त का pH 7.4 बनाए रखने में वृक्क मदद करता है। मानव मुख्य रूप से यूरिया उत्सर्जी है।
2. मानव उत्सर्जन तंत्र के अंग
मानव उत्सर्जन तंत्र में चार मुख्य अंग होते हैं - 1. दो वृक्क - मुख्य अंग जो मूत्र बनाते हैं। 2. दो मूत्रवाहिनी - वृक्क से मूत्र को मूत्राशय तक ले जाती हैं। 3. एक मूत्राशय - मूत्र को संचित करता है। 4. एक मूत्रमार्ग - मूत्र को बाहर निकालता है।
इसके अलावा फेफड़े CO2 और जल वाष्प, त्वचा पसीने में NaCl और यूरिया, यकृत पित्त वर्णक उत्सर्जित करते हैं। पर मुख्य तंत्र वृक्क तंत्र है।
दोनों वृक्क उदर गुहा में रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित हैं। बायां वृक्क दायें से थोड़ा ऊपर होता है। प्रत्येक वृक्क से एक मूत्रवाहिनी निकलती है।
3. वृक्क - संरचना और कार्य
वृक्क सेम के बीज के आकार का गहरे भूरे रंग का अंग है। लंबाई लगभग 10 cm से 12 cm, चौड़ाई 5 cm से 7 cm, मोटाई 3 cm और भार लगभग 150 g होता है।
वृक्क की संरचना में दो भाग - बाहरी वल्कुट और भीतरी मज्जा। मज्जा में 8 से 12 पिरामिड होते हैं। वृक्क धमनी रक्त लाती है और वृक्क शिरा ले जाती है। भीतर वृक्क श्रोणि कीप जैसी गुहा होती है।
वृक्क का कार्य - रक्त को छानना और मूत्र बनाना, जल और आयन संतुलन, रक्त दाब नियंत्रण, एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन बनाना। प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख नेफ्रॉन होते हैं।
4. नेफ्रॉन - वृक्क की संरचनात्मक इकाई
नेफ्रॉन वृक्क की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है। प्रत्येक वृक्क में 10 लाख नेफ्रॉन होते हैं। नेफ्रॉन की लंबाई 3 cm से 5 cm होती है। नेफ्रॉन दो भागों में बंटा है - वृक्काणु और नलिका।
वृक्काणु में केशिकागुच्छ और बोमेन संपुट होते हैं। बोमेन संपुट प्याले जैसी संरचना है। नलिका में समीपस्थ कुंडलित नलिका, हेनले लूप और दूरस्थ कुंडलित नलिका होती है।
नेफ्रॉन का कार्य रक्त को छानना, उपयोगी पदार्थों को वापस रक्त में भेजना और अपशिष्ट से मूत्र बनाना है। हेनले लूप जल अवशोषण में मुख्य भूमिका निभाता है।
5. वृक्काणु और बोमेन संपुट - छानने की प्रक्रिया
वृक्काणु नेफ्रॉन का पहला भाग है। केशिकागुच्छ में रक्त दाब अधिक होता है। बोमेन संपुट दोहरी दीवार वाला प्याला है जिसमें पोडोसाइट कोशिका होती हैं।
रक्त से जल H2O, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, सोडियम आयन, पोटैशियम आयन, यूरिया और कैल्शियम आयन छनकर बोमेन संपुट में आ जाते हैं। इसे गुच्छीय निस्यंद कहते हैं।
एक दिन में दोनों वृक्क लगभग 180 L गुच्छीय निस्यंद बनाते हैं। प्रोटीन और रक्त कोशिका बड़ी होने से नहीं छनते।
6. मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
मूत्र निर्माण तीन चरणों में होता है - 1. गुच्छीय निस्यंदन, 2. नलिकीय पुनरावशोषण, 3. नलिकीय स्रवण।
गुच्छीय निस्यंदन वृक्काणु में होता है जहाँ 180 L निस्यंद बनता है। पुनरावशोषण में लगभग 99% जल, पूरा ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, 80% सोडियम और पोटैशियम वापस रक्त में जाते हैं।
स्रवण में दूरस्थ नलिका में पोटैशियम, हाइड्रोजन आयन, अमोनिया स्रावित होते हैं। ADH हार्मोन जल अवशोषण नियंत्रित करता है। अंत में केवल 1.5 L से 2 L मूत्र बनता है। मूत्र में 95% जल, 2.5% यूरिया, 1% लवण होता है।
7. मूत्रवाहिनी, मूत्राशय, मूत्रमार्ग और अपोहन
मूत्रवाहिनी 25 cm से 30 cm लंबी नली है जो क्रमाकुंचन गति से मूत्र को मूत्राशय की ओर धकेलती है।
मूत्राशय त्रिकोणीय थैली है जो मूत्र को संचित करता है। क्षमता 300 mL से 500 mL होती है। भरने पर तंत्रिका आवेग मस्तिष्क को जाता है और मूत्र त्याग की इच्छा होती है।
मूत्रमार्ग 3 cm से 5 cm लंबी नली है जो मूत्र को बाहर निकालती है। अपोहन या डायलिसिस कृत्रिम वृक्क है। सप्ताह में 2 से 3 बार 4 घंटे अपोहन करना पड़ता है।
| वृक्क का भाग | संरचना | कार्य |
|---|---|---|
| वल्कुट | बाहरी भाग, नेफ्रॉन का वृक्काणु | गुच्छीय निस्यंदन |
| मज्जा | भीतरी पिरामिड 8-12 | हेनले लूप, जल अवशोषण |
| वृक्काणु | केशिकागुच्छ + बोमेन संपुट | 180 L निस्यंद प्रतिदिन |
| मूत्रवाहिनी | 25-30 cm नली | मूत्र मूत्राशय तक |
| मूत्राशय | 300-500 mL थैली | मूत्र संचय |
| मूत्रमार्ग | 3-5 cm नली | मूत्र बाहर |
🔑 मुख्य तथ्य (Key Facts)
- ●उत्सर्जन - उपापचय अपशिष्ट अमोनिया NH3, यूरिया को बाहर निकालना, यकृत अमोनिया को यूरिया में बदलता है, आवश्यकता - विष से बचाव, जल आयन संतुलन, रक्त pH 7.4।
- ●वृक्क सेम आकार 10-12 cm, 150 g, 10 लाख नेफ्रॉन, वल्कुट बाहरी मज्जा भीतरी 8-12 पिरामिड, वृक्क श्रोणि कीप।
- ●नेफ्रॉन इकाई 3-5 cm, वृक्काणु केशिकागुच्छ+बोमेन संपुट, नलिका समीपस्थ हेनले लूप दूरस्थ, 180 L निस्यंद प्रतिदिन।
- ●मूत्र निर्माण - निस्यंदन 180 L, पुनरावशोषण 99% जल पूरा ग्लूकोज 80% सोडियम, स्रवण पोटैशियम हाइड्रोजन, ADH जल नियंत्रित, 1.5-2 L मूत्र 95% जल 2.5% यूरिया।
- ●मूत्रवाहिनी 25-30 cm क्रमाकुंचन, मूत्राशय 300-500 mL संचय, मूत्रमार्ग 3-5 cm, अपोहन कृत्रिम वृक्क 2-3 बार सप्ताह 4 घंटे।
📝 परीक्षा बिंदु (Exam Points)
- ✓उत्सर्जन परिभाषा - अपशिष्ट बाहर निकालना, अमोनिया विषैला यकृत में यूरिया बनता है, मानव यूरिया उत्सर्जी, आवश्यकता विष से बचाव जल आयन संतुलन pH नियंत्रण।
- ✓अंग - 2 वृक्क 150 g, 2 मूत्रवाहिनी 25-30 cm, मूत्राशय 300-500 mL, मूत्रमार्ग 3-5 cm, फेफड़ा CO2, त्वचा NaCl यूरिया, यकृत पित्त।
- ✓वृक्क - सेम आकार 10-12 cm, वल्कुट मज्जा पिरामिड 8-12, वृक्क श्रोणि, 10 लाख नेफ्रॉन, कार्य रक्त छानना जल आयन संतुलन रक्त दाब एरिथ्रोपोइटिन।
- ✓नेफ्रॉन - इकाई 3-5 cm, वृक्काणु केशिकागुच्छ+बोमेन संपुट पोडोसाइट, नलिका समीपस्थ हेनले U दूरस्थ संग्रह, कार्य छानना पुनरावशोषण स्रवण।
- ✓वृक्काणु - केशिकागुच्छ रक्त दाब अधिक छानना, बोमेन संपुट 180 L निस्यंद, जल ग्लूकोज सोडियम पोटैशियम यूरिया छनते, प्रोटीन कोशिका नहीं।
- ✓मूत्र निर्माण - निस्यंदन 180 L, पुनरावशोषण 99% जल पूरा ग्लूकोज 80% सोडियम, स्रवण पोटैशियम हाइड्रोजन अमोनिया, ADH, 1.5-2 L मूत्र 95% जल 2.5% यूरिया 1% लवण हल्का अम्लीय।
- ✓वाहिकाएं - मूत्रवाहिनी क्रमाकुंचन, मूत्राशय संचय तंत्रिका इच्छा, मूत्रमार्ग अवरोधक पेशी, अपोहन कृत्रिम वृक्क 2-3 बार 4 घंटे, प्रत्यारोपण स्थायी।
⚡ त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
- ➤उत्सर्जन - NH3 यूरिया बाहर, यकृत अमोनिया को यूरिया, आवश्यकता विष जल आयन pH 7.4।
- ➤अंग - 2 वृक्क 150 g 10 लाख नेफ्रॉन, 2 मूत्रवाहिनी 25-30 cm, मूत्राशय 300-500 mL, मूत्रमार्ग 3-5 cm।
- ➤नेफ्रॉन - केशिकागुच्छ+बोमेन संपुट 180 L निस्यंद, समीपस्थ हेनले दूरस्थ, 99% जल वापस।
- ➤मूत्र - 1.5-2 L, 95% जल 2.5% यूरिया, ADH जल नियंत्रित, अपोहन 2-3 बार 4 घंटे।