लैंगिक जनन - पुष्प परागण से भ्रूण निर्माण तक - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

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लैंगिक जनन - पुष्प परागण से भ्रूण निर्माण तक - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

क्या आपने कभी सोचा है कि फूल क्यों खिलते हैं? या बच्चा माता-पिता दोनों जैसा क्यों दिखता है? इन सबका उत्तर लैंगिक जनन में छिपा है।

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💡 व्याख्या

क्या आपने कभी सोचा है कि फूल क्यों खिलते हैं? या बच्चा माता-पिता दोनों जैसा क्यों दिखता है? इन सबका उत्तर लैंगिक जनन में छिपा है। लैंगिक जनन में दो जनक भाग लेते हैं - नर और मादा युग्मक मिलकर युग्मनज बनाते हैं। इससे आनुवंशिक विविधता आती है जो विकास का आधार है। पौधों में पुष्प जनन का अंग है और मानव में शुक्राणु-अंडाणु का निषेचन होता है। इस लेख में हम लैंगिक जनन, पुष्प संरचना, परागण, निषेचन और भ्रूण विकास को विस्तार से समझेंगे।

1. लैंगिक जनन

लैंगिक जनन में दो जनक भाग लेते हैं।

नर युग्मक और मादा युग्मक मिलकर निषेचन करते हैं।

निषेचित अंडा युग्मनज बनता है जिससे भ्रूण विकसित होता है।

लैंगिक जनन से आनुवंशिक विविधता आती है - यही विकास का आधार है।

2. पुष्प संरचना

पुष्प लैंगिक जनन का अंग है।

चार चक्र: बाह्यदल, दल, पुंकेसर (नर), स्त्रीकेसर (मादा)।

पुंकेसर में परागकण बनते हैं - नर युग्मक।

स्त्रीकेसर में अंडाणु बनते हैं - मादा युग्मक।

3. परागण

परागण परागकणों का पुंकेसर से स्त्रीकेसर तक पहुंचना है।

स्व परागण: उसी फूल के स्त्रीकेसर पर। पर परागण: दूसरे फूल पर।

माध्यम: वायु, कीट, पक्षी, जल।

परागण निषेचन से पहले आवश्यक प्रक्रिया है।

4. निषेचन युग्मनज

निषेचन परागकण और अंडाणु का मिलना है।

पराग नलिका बनकर अंडाणु तक पहुंचती है।

द्वि निषेचन: एक नर युग्मक अंडाणु से और दूसरा केंद्रक से।

युग्मनज द्विगुणित (2n) होता है और भ्रूणपोष त्रिगुणित (3n)।

5. मानव युग्मक

मानव में दो प्रकार के युग्मक होते हैं:

शुक्राणु: छोटा, चलने योग्य, 23 गुणसूत्र।

अंडाणु: बड़ा, स्थिर, 23 गुणसूत्र।

निषेचन के बाद युग्मनज में 46 गुणसूत्र होते हैं।

6. निषेचन से भ्रूण

निषेचन परागकण और अंडाणु का मिलना है।

पराग नलिका बनकर अंडाणु तक पहुंचती है।

द्वि निषेचन: एक नर युग्मक अंडाणु से और दूसरा केंद्रक से।

युग्मनज द्विगुणित (2n) होता है और भ्रूणपोष त्रिगुणित (3n)।

7. महत्व और तुलना

लैंगिक जनन का महत्व:

(1) आनुवंशिक विविधता - हर संतति अलग।

(2) प्राकृतिक चयन - बेहतर गुणों का चयन।

(3) रोग प्रतिरोधक क्षमता - विविधता से अधिक प्रतिरोध।

गुण अलैंगिक लैंगिक
जनक एक दो
विविधता नहीं हाँ
गति तेज धीमी

🔑 मुख्य तथ्य (Key Facts)

  • ●लैंगिक दो जनक युग्मक युग्मनज भ्रूण विविधता।
  • ●पुष्प 4 चक्र पुंकेसर नर स्त्रीकेसर मादा।
  • ●परागण स्व और पर वायु कीट।
  • ●निषेचन द्वि निषेचन युग्मनज भ्रूणपोष।
  • ●शुक्राणु छोटा 23 अंडाणु बड़ा 23 अर्धसूत्री।
  • ●निषेचन आंतरिक युग्मनज 46 भ्रूण अपरा।
  • ●महत्व विविधता चयन प्रतिरोध।
  • ●लैंगिक जनन से आनुवंशिक विविधता आती है - यही प्राकृतिक चयन और विकास का आधार है।
  • ●पुष्प के चार चक्र होते हैं - बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर।
  • ●द्वि निषेचन केवल आवृतबीजी पौधों में होता है - एक युग्मक अंडाणु से और दूसरा केंद्रक से मिलता है।
  • ●मानव में निषेचन आंतरिक होता है और युग्मनज में 46 गुणसूत्र होते हैं - 23 माता से और 23 पिता से।
  • ●लैंगिक जनन में युग्मकों का निर्माण अर्धसूत्री विभाजन से होता है - इससे गुणसूत्र संख्या आधी रहती है।
  • ●निषेचन से युग्मनज बनता है जो द्विगुणित होता है - इसमें 46 गुणसूत्र होते हैं।

📝 परीक्षा बिंदु (Exam Points)

  • ✓लैंगिक परिभाषा युग्मनज।
  • ✓पुष्प संरचना चक्र।
  • ✓परागण प्रकार कारक।
  • ✓निषेचन द्वि भ्रूणपोष।
  • ✓युग्मक संरचना अर्धसूत्री।
  • ✓निषेचन से भ्रूण अपरा।
  • ✓महत्व तुलना तालिका।

⚡ त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)

  • ➤लैंगिक दो युग्मक निषेचन।
  • ➤पुष्प पुंकेसर स्त्रीकेसर।
  • ➤परागण स्व पर।
  • ➤द्वि निषेचन युग्मनज।
  • ➤शुक्राणु 23 अंडाणु 23।
  • ➤युग्मनज 46 भ्रूण।
  • ➤विविधता चयन।