📚 Art & Culture — कला एवं संस्कृति
01. प्राचीन भारतीय विज्ञान
परीक्षा उपयोगी One-Liner तथ्य एवं महत्वपूर्ण सारणियाँ
वैदिक कालीन विज्ञान, वेदांग ज्योतिष एवं काल-गणना
वैदिक काल में खगोलीय गणनाओं का प्राथमिक उद्देश्य
यज्ञों का सटीक समय निर्धारण
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ऋग्वेद में सूर्य के रथ में वर्णित सात घोड़ों का वैज्ञानिक प्रतीक
सूर्य की सात किरणें
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वैदिक साहित्य में ब्रह्मांडीय व नैतिक व्यवस्था हेतु प्रयुक्त मूल शब्द
ऋत
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ऋग्वेद में वर्णित चंद्र-आधारित वर्ष के दिनों की मूल संख्या
360 दिन
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चंद्र और सौर वर्ष के सामंजस्य हेतु प्रयुक्त अतिरिक्त माह
मलमास (अधिमास)
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वेदांग ज्योतिष के रचयिता माने जाने वाले प्राचीन आचार्य
लगध मुनि
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वेदांग ज्योतिष में एक वर्ष को विभाजित किए जाने वाले अयनों की संख्या
दो अयन
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सूर्य के उत्तर दिशा की ओर संचलन की कालावधि
उत्तरायण
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सूर्य के दक्षिण दिशा की ओर संचलन की कालावधि
दक्षिणायन
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वेदांग ज्योतिष के अनुसार एक युग चक्र में सौर वर्षों की संख्या
पाँच वर्ष
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वैदिक काल में समय मापन की अत्यंत सूक्ष्म इकाई
निमेष
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वैदिक काल में दो घटी अथवा 48 मिनट की समयावधि
एक मुहूर्त
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वैदिक संहिताओं में उल्लिखित कुल पारंपरिक नक्षत्र
27 या 28
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चंद्रमा के परिभ्रमण पथ पर स्थित तारामंडल समूह
नक्षत्र
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ऋग्वेद में सूर्य ग्रहण का सर्वप्रथम उल्लेख करने वाले ऋषि
अत्रि ऋषि
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वेदांग ज्योतिष ग्रंथ की दो प्रमुख शाखाएँ
आर्च व याजुष ज्योतिष
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शतपथ ब्राह्मण में वर्णित खगोलीय ज्ञान का प्रमुख आधार
अग्निचयन वेदी निर्माण
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वैदिक काल में दिशा निर्धारण हेतु प्रमुख खगोलीय संदर्भ
ध्रुव तारा
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वैदिक काल में वर्ष को विभाजित की जाने वाली ऋतुओं की संख्या
छह ऋतुएँ
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वैदिक काल में समय मापन हेतु प्रयुक्त छिद्रयुक्त जल-पात्र
घटी यंत्र (जल घड़ी)
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वैदिक परंपरा
प्रमुख वैज्ञानिक परंपराएँ एवं उनके प्राचीन स्रोत
वैदिक एवं उत्तर-वैदिक वैज्ञानिक स्रोतों का वर्गीकरण
| स्रोत/ग्रंथ | विषय | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|
वेदांग ज्योतिष | उत्तर देखें खगोल एवं काल-गणना | उत्तर देखें पाँच वर्षीय युग चक्र व नक्षत्र गणना |
बौधायन शुल्बसूत्र | उत्तर देखें यज्ञीय ज्यामिति | उत्तर देखें पाइथागोरस प्रमेय का आरंभिक निरूपण |
आपस्तंब शुल्बसूत्र | उत्तर देखें क्षेत्रमिति एवं रेखागणित | उत्तर देखें वर्ग, वृत्त व करणी मानों की गणना |
कात्यायन शुल्बसूत्र | उत्तर देखें ज्यामितीय रूपांतरण | उत्तर देखें समतुल्य क्षेत्रफल की वेदी रचना |
शतपथ ब्राह्मण | उत्तर देखें अनुष्ठानिक खगोलिकी | उत्तर देखें वेदी निर्माण व आकाशीय पिंडों का समन्वय |
शुल्बसूत्र, यज्ञीय ज्यामिति, शून्य एवं दशमलव परंपरा
शुल्बसूत्र किस वेदांग साहित्य का अभिन्न अंग हैं
कल्पसूत्र (श्रौतसूत्र)
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संस्कृत में 'शुल्ब' शब्द का मूल शाब्दिक अर्थ
नापने की रस्सी (डोरी)
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सबसे प्राचीन उपलब्ध शुल्बसूत्र के रचयिता
बौधायन
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बौधायन शुल्बसूत्र की रचना का मुख्य व्यावहारिक उद्देश्य
यज्ञ वेदियों का सटीक निर्माण
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समकोण त्रिभुज के विकर्ण पर बने वर्ग का नियम देने वाला प्राचीनतम भारतीय ग्रंथ
बौधायन शुल्बसूत्र
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'पाइथागोरस प्रमेय' का प्राचीन भारतीय ज्यामितीय प्रतिरूप
बौधायन प्रमेय
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दो के वर्गमूल (√2) का अत्यंत सन्निकट मान प्रतिपादित करने वाला सूत्र ग्रंथ
शुल्बसूत्र
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शुल्बसूत्रों में वृत्त के समतुल्य क्षेत्रफल का वर्ग बनाने की ज्यामितीय विधि
मंडलीकरण
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उड़ते हुए बाज पक्षी के आकार में निर्मित यज्ञ वेदी
श्येनचिति वेदी
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वैदिक कर्मकांड में गार्हपत्य वेदी का निर्धारित ज्यामितीय आकार
वृत्ताकार
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वैदिक अनुष्ठान में आहवनीय वेदी का निर्धारित ज्यामितीय आकार
वर्गाकार
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वैदिक काल में दक्षिणाग्नि वेदी का पारंपरिक ज्यामितीय स्वरूप
अर्धवृत्ताकार
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शुल्बसूत्रों में वेदी निर्माण की पकी ईंटों हेतु प्रयुक्त पारिभाषिक शब्द
इष्टका
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शुल्ब परंपरा के चार प्रमुख प्राचीन सूत्रकार
बौधायन, मानव, आपस्तंब, कात्यायन
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प्राचीन भारतीय गणित में शून्य की दार्शनिक संकल्पना
रिक्तता एवं पूर्णता
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छंदशास्त्र में द्वि-आधारी (बाइनरी) एवं शून्य संकेत के प्रारंभिक प्रयोक्ता
आचार्य पिंगल
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पिंगल कृत छंदशास्त्र में अक्षरों के भार मापन हेतु प्रयुक्त दो भेद
लघु एवं गुरु
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संपूर्ण विश्व को भारत की सबसे युगांतरकारी गणितीय देन
दशमलव स्थान-मान पद्धति
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दशमलव प्रणाली में किसी अंक का मान किस पर निर्भर करता है
स्थान (स्थानीय मान)
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प्राचीन भारतीय अंकों को अरब विद्वानों द्वारा दिया गया नाम
हिंदसा
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भारतीय संख्या प्रणाली को यूरोप तक पहुँचाने वाले प्रमुख गणितज्ञ
अल-ख्वारिज्मी एवं फिबोनाची
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प्राचीन बख्शाली पांडुलिपि किस प्राचीन भारतीय लिपि में लिखी गई है
शारदा लिपि
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बख्शाली पांडुलिपि में शून्य को निरूपित करने हेतु प्रयुक्त दृश्य चिह्न
ठोस बिंदु (डॉट)
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बख्शाली पांडुलिपि की खोज किस वर्ष हुई थी
1881 ईस्वी में
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बख्शाली पांडुलिपि का मुख्य अध्ययन विषय
व्यावहारिक अंकगणित एवं बीजगणित
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प्राचीन भारतीय गणित में ऋणात्मक संख्याओं की व्यावहारिक समझ
ऋण (कर्ज) रूप में
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दशमलव गुणोत्तर शृंखला (एकम, दसम, शतम, सहस्रम) का सर्वप्रथम उल्लेख
यजुर्वेद संहिता
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शून्य को एक स्वतंत्र संख्यात्मक मान के रूप में स्थापित करने वाले आचार्य
ब्रह्मगुप्त
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शून्य से किसी संख्या को भाग देने पर परिणाम अनंत (खहर) बताने वाले गणितज्ञ
भास्कराचार्य द्वितीय
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प्राचीन भारतीय गणित में भिन्न (Fractions) के निरूपण की विधि
अंश ऊपर, हर नीचे
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आर्यभट एवं शास्त्रीय भारतीय खगोलशास्त्र
महान खगोलविद् एवं गणितज्ञ आर्यभट प्रथम का जन्म वर्ष
476 ईस्वी
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आर्यभट प्रथम का प्रमुख कार्यक्षेत्र एवं वेधशाला स्थल
कुसुमपुर (पाटलिपुत्र)
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23 वर्ष की आयु में आर्यभट द्वारा विरचित युगांतकारी ग्रंथ
आर्यभटीय
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आर्यभटीय ग्रंथ कितने प्रमुख खंडों (पादों) में विभक्त है
चार खंड
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आर्यभटीय के चार प्रमुख खंडों के नाम
गीतिका, गणित, कालक्रिया, गोल
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पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, यह सर्वप्रथम सिद्ध करने वाले भारतीय वैज्ञानिक
आर्यभट प्रथम
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आर्यभट के अनुसार पृथ्वी की दैनिक गति का स्वरूप
पश्चिम से पूर्व घूर्णन
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आर्यभट के अनुसार चंद्र ग्रहण का वास्तविक वैज्ञानिक कारण
पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ना
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आर्यभट के अनुसार सूर्य ग्रहण की खगोलीय स्थिति
चंद्रमा का सूर्य व पृथ्वी मध्य आना
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आर्यभट द्वारा पाई (π) का प्रतिपादित अत्यंत सन्निकट मान
3.1416
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त्रिकोणमिति में अर्ध-ज्या (Sine) की संकल्पना के प्रवर्तक
आर्यभट प्रथम
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आर्यभटीय में वृत्त की परिधि और व्यास के संबंध को क्या कहा गया
आसन्न (सन्निकट) मान
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बड़ी संख्याओं को संस्कृत वर्णमाला के अक्षरों में संहिताबद्ध करने की पद्धति
वर्णाक्षर संख्या प्रणाली
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आर्यभट द्वारा आकलित एक वर्ष की सटीक कालावधि
365.258 दिन
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आर्यभट की अन्य महत्वपूर्ण खगोलीय रचना
आर्यभट सिद्धांत
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राहु और केतु द्वारा सूर्य-चंद्र को ग्रसने की पौराणिक धारणा का खंडन किसने किया
आर्यभट ने
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आर्यभट द्वारा खगोलीय प्रेक्षण व छाया मापन हेतु प्रयुक्त प्रमुख यंत्र
शंकु यंत्र
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भारत द्वारा 1975 में अंतरिक्ष में प्रक्षेपित प्रथम कृत्रिम उपग्रह का नाम
आर्यभट
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आर्यभट के सिद्धांतों की व्याख्या हेतु 'महाभास्करीय' लिखने वाले विद्वान
भास्कर प्रथम
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भास्कर प्रथम द्वारा रचित संक्षिप्त खगोलीय टीका ग्रंथ
लघुभास्करीय
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भास्कर प्रथम द्वारा आर्यभटीय पर लिखी गई प्रथम प्रामाणिक संस्कृत टीका
आर्यभटीयभाष्य
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त्रिकोणमितीय ज्या (Sine) के सन्निकटन का बीजगणितीय सूत्र देने वाले गणितज्ञ
भास्कर प्रथम
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आर्यभट के अनुसार तारों की पूर्व से पश्चिम गति का मूल कारण
पृथ्वी का अक्षीय घूर्णन
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चलती नाव से किनारे के स्थिर वृक्षों के पीछे भागते दिखने का दृष्टांत किसने दिया
आर्यभट ने
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आर्यभटीय के 'गणितपाद' में कुल कितने श्लोक हैं
33 श्लोक
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वर्गमूल और घनमूल निकालने की अंकगणितीय विधियाँ आर्यभटीय के किस पाद में हैं
गणितपाद
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काल-विभाजन, ग्रह गति व अधिमास गणना आर्यभटीय के किस खंड में है
कालक्रियापाद
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गोलीय त्रिकोणमिति व आकाशीय गोले का अध्ययन आर्यभटीय के किस खंड में है
गोलपाद
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आर्यभट के अनुसार एक महायुग में कुल सौर वर्षों की संख्या
43,20,000 वर्ष
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आर्यभट ने एक महायुग को कितने समान चरणों (चार युगों) में विभक्त माना
चार समान चरण
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विद्वत परंपरा
प्रमुख प्राचीन वैज्ञानिक/गणितज्ञ एवं उनका योगदान
प्राचीन भारतीय मनीषियों के प्रमुख अनुसंधान व योगदान
| व्यक्तित्व/परंपरा | क्षेत्र | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|
आर्यभट प्रथम | उत्तर देखें खगोल एवं गणित | उत्तर देखें पृथ्वी घूर्णन, पाई का मान, ग्रहण सिद्धांत व ज्या |
वराहमिहिर | उत्तर देखें खगोल, ज्योतिष व भौतिकी | उत्तर देखें पंचसिद्धांतिका, वृहत्संहिता व जल-भूगर्भ विज्ञान |
ब्रह्मगुप्त | उत्तर देखें बीजगणित व खगोल | उत्तर देखें शून्य संक्रिया नियम, चक्रीय चतुर्भुज व गुरुत्वाकर्षण संकेत |
भास्कराचार्य द्वितीय | उत्तर देखें गणित एवं खगोल | उत्तर देखें सिद्धांतशिरोमणि, लीलावती, चक्रवाल व कलन आधार |
महर्षि कणाद | उत्तर देखें परमाणु भौतिकी व दर्शन | उत्तर देखें परमाणु सिद्धांत एवं वैशेषिक दर्शन का प्रतिपादन |
नागार्जुन | उत्तर देखें रसायन एवं धातुकर्म | उत्तर देखें पारद शोधन, धातु भस्म निर्माण व रसशास्त्र |
वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त एवं मध्यकालीन खगोल-गणित
वराहमिहिर किस ऐतिहासिक शासक की राजसभा के नवरत्नों में शामिल थे
सम्राट विक्रमादित्य
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वराहमिहिर की जन्मस्थली एवं प्रमुख अनुसंधान केंद्र
कपित्थक (उज्जैन के निकट)
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पाँच प्राचीन खगोलीय पद्धतियों का तुलनात्मक संकलन करने वाला ग्रंथ
पंचसिद्धांतिका
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पंचसिद्धांतिका में परीक्षित पाँच प्रमुख सिद्धांत
पोलिश, रोमक, वासिष्ठ, सौर, पैतामह
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पंचसिद्धांतिका में वराहमिहिर ने किस सिद्धांत को सर्वाधिक शुद्ध माना
सूर्य सिद्धांत
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वराहमिहिर द्वारा विरचित वृहत् ज्ञानकोश सदृश विश्वकोशीय ग्रंथ
बृहत्संहिता
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बृहत्संहिता में भूमिगत जल स्रोतों के अन्वेषण से संबंधित अध्याय
दकार्गल अध्याय
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दीमक की बांबी व वनस्पतियों के लक्षणों से भूजल खोजने का वैज्ञानिक विवरण
बृहत्संहिता में
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बृहत्संहिता में भवन निर्माण कला, रत्न परीक्षा एवं मौसम का वर्णन करने वाले विद्वान
वराहमिहिर
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वराहमिहिर द्वारा फलित ज्योतिष पर रचित प्रामाणिक ग्रंथ
बृहज्जातक
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बादलों के लक्षण एवं वर्षा मापन की विधियों का प्राचीन उल्लेख किस ग्रंथ में है
बृहत्संहिता
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इत्र एवं सुगंधित द्रव्य निर्माण की 'गंधयुक्ति' कला का विस्तृत विवरण किसने दिया
वराहमिहिर ने
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7वीं शताब्दी के महान गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त का जन्म स्थान
भीनमाल (राजस्थान)
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ब्रह्मगुप्त द्वारा 628 ईस्वी में रचित सर्वप्रमुख गणितीय-खगोलीय ग्रंथ
ब्रह्मस्फुटसिद्धांत
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शून्य के साथ जोड़, घटाव व गुणा के गणितीय नियम सर्वप्रथम किसने दिए
ब्रह्मगुप्त ने
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शून्य में से शून्य घटाने पर परिणाम शून्य होने का नियम देने वाले आचार्य
ब्रह्मगुप्त
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चक्रीय चतुर्भुज के क्षेत्रफल का सटीक सूत्र सर्वप्रथम किसने प्रतिपादित किया
ब्रह्मगुप्त ने
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चक्रीय चतुर्भुज के विकर्णों की लंबाई ज्ञात करने का सूत्र क्या कहलाता है
ब्रह्मगुप्त प्रमेय
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अनिर्धार्य द्विघात समीकरणों को हल करने हेतु 'कुट्टक' विधि का परिष्कार किसने किया
ब्रह्मगुप्त ने
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'पृथ्वी वस्तुओं को अपने स्वभाव से आकर्षित करती है' यह संकेत देने वाले खगोलशास्त्री
ब्रह्मगुप्त
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न्यूटन से सदियों पूर्व गुरुत्वाकर्षण के मूल स्वभाव को रेखांकित करने वाले भारतीय मनीषी
ब्रह्मगुप्त
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ब्रह्मगुप्त द्वारा विरचित खगोलीय गणनाओं का प्रायोगिक ग्रंथ
खंडखाद्यक
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ब्रह्मस्फुटसिद्धांत का अरबी भाषा में अनूदित नाम
सिंधिंद
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खंडखाद्यक का अरबी भाषा में अनूदित नाम
अल-अरकंद
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भारतीय खगोल व गणित ग्रंथों का बगदाद में अनुवाद कराने वाले अब्बासी खलीफा
खलीफा अल-मंसूर
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भारतीय गणित ज्ञान को इस्लामी जगत तक संप्रेषित करने का मुख्य आधार
ब्रह्मगुप्त के ग्रंथ
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9वीं सदी के जैन गणितज्ञ जिन्होंने 'गणितसारसंग्रह' की रचना की
महावीराचार्य
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महावीराचार्य किस प्रसिद्ध राष्ट्रकूट शासक के समकालीन थे
अमोघवर्ष प्रथम
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गणितसारसंग्रह में मुख्य रूप से किन गणितीय विषयों का विस्तृत विवेचन है
भिन्न एवं क्रमचय-संचय
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दीर्घवृत्त (Ellipse) के क्षेत्रफल व परिधि का व्यावहारिक सूत्र देने वाले गणितज्ञ
महावीराचार्य
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श्रीधराचार्य द्वारा रचित प्रमुख पाटीगणित ग्रंथ
त्रिशतिका (पाटीगणितसार)
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द्विघात समीकरण को हल करने का व्यापक नियम देने वाले प्राचीन आचार्य
श्रीधराचार्य
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12वीं शताब्दी के भारत के महानतम गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री
भास्कराचार्य द्वितीय
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भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा 1150 ईस्वी में विरचित प्रसिद्ध ग्रंथ
सिद्धांतशिरोमणि
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सिद्धांतशिरोमणि ग्रंथ के चार प्रमुख अंग
लीलावती, बीजगणित, गणिताध्याय, गोलाध्याय
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भास्कराचार्य, केरल गणित परंपरा, भौतिकी एवं परमाणुवाद
भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा अपनी पुत्री के नाम पर रचित अंकगणितीय ग्रंथ
लीलावती
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लीलावती ग्रंथ का मुख्य प्रतिपाद्य विषय
अंकगणित एवं व्यावहारिक रेखागणित
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सिद्धांतशिरोमणि का 'बीजगणित' भाग किस गणितीय शाखा से संबंधित है
उच्च बीजगणित
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अनिर्धार्य समीकरणों को हल करने हेतु भास्कराचार्य द्वारा विकसित चक्रीय विधि
चक्रवाल पद्धति
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चक्रवाल पद्धति की प्रशंसा करने वाले प्रसिद्ध पश्चिमी गणित इतिहासकार
हरमन हैंकेल
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भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा रचित व्यावहारिक पंचांग ग्रंथ
करणकुतूहल
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आधुनिक कलन (Calculus) के अवकलज व तात्कालिक गति की प्रारंभिक समझ किसने दी
भास्कराचार्य द्वितीय ने
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त्रिकोणमिति में Sine (a+b) और Sine (a-b) के समतुल्य सूत्र देने वाले आचार्य
भास्कराचार्य द्वितीय
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पृथ्वी के आकर्षण बल के संदर्भ में 'आकृष्टिशक्तिश्च मही...' का प्रतिपादन किसने किया
भास्कराचार्य द्वितीय ने
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मुगल सम्राट अकबर के आदेश पर लीलावती का फारसी अनुवाद किसने किया
फैजी ने
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शाहजहां के शासनकाल में भास्कराचार्य के बीजगणित का फारसी अनुवादक
अताउल्लाह रशीदी
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14वीं से 16वीं सदी में विकसित दक्षिण भारत का विशिष्ट गणितीय संप्रदाय
केरल गणित संप्रदाय
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केरल गणित संप्रदाय के संस्थापक एवं प्रवर्तक गणितज्ञ
संगमग्राम के माधव
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त्रिकोणमितीय फलनों (Sine, Cosine) की अनंत श्रेणी (Infinite Series) के प्रथम खोजकर्ता
संगमग्राम के माधव
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पश्चिम में 'ग्रेगरी-लाइबनिज श्रेणी' कहलाने वाली शृंखला के मूल भारतीय अन्वेषक
माधव
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पाई (π) के यथार्थ मान हेतु अनंत श्रेणी का प्रतिपादन करने वाले विद्वान
माधव
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नीलकंठ सोमयाजी द्वारा रचित प्रसिद्ध खगोलीय ग्रंथ
तंत्रसंग्रह
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तंत्रसंग्रह में ग्रहों की गति का प्रतिपादित संशोधित मॉडल
अर्ध-सूर्यकेंद्रीय मॉडल
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ज्येष्ठदेव द्वारा 1530 ईस्वी में मलयालम भाषा में रचित विश्व का प्रथम कैलकुलस ग्रंथ
युक्तिभाषा
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प्राचीन भारत में परमाणु सिद्धांत (Atomism) के मूल जनक महर्षि
महर्षि कणाद
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महर्षि कणाद द्वारा प्रवर्तित भारतीय दर्शन
वैशेषिक दर्शन
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कणाद के अनुसार भौतिक जगत का सूक्ष्मतम अविभाज्य नित्य घटक
परमाणु
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दो परमाणुओं के परस्पर संयोग से निर्मित प्रारंभिक यौगिक कण
द्व्यणुक
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तीन द्व्यणुकों के मिलने से निर्मित दृश्यमान कण
त्र्यणुक (त्रसरेणु)
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वैशेषिक दर्शन के अनुसार भौतिक जगत का निर्माण करने वाले मूल तत्व
पंचमहाभूत
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प्रकाश और ऊष्मा को एक ही तत्व (तेजस) के दो भिन्न रूप मानने वाला दर्शन
वैशेषिक दर्शन
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जैन दर्शन में भौतिक पुद्गल की सबसे सूक्ष्म अविभाज्य इकाई
परमाणु
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ध्वनि संचरण को तरंग रूप (वीचि-तरंग न्याय) में समझाने वाला प्राचीन विचार
मीमांसा एवं वैशेषिक दर्शन
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प्राचीन भारत में चुंबक और लोहे के आकर्षण का दार्शनिक उल्लेख करने वाले ग्रंथ
सुश्रुत संहिता एवं प्रशस्तपाद भाष्य
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प्रशस्तपाद द्वारा वैशेषिक सूत्रों पर रचित प्रसिद्ध भाष्य
पदार्थधर्मसंग्रह
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ज्ञान शाखाएँ
प्राचीन वैज्ञानिक शाखाएँ एवं संबंधित प्रमाण ग्रंथ
विभिन्न वैज्ञानिक विद्याओं और उनके प्रमुख ग्रंथों का तुलनात्मक सार
| शाखा/विषय | प्रमुख ग्रंथ | मुख्य प्रतिपादक/विशेषता |
|---|---|---|
यज्ञीय ज्यामिति | उत्तर देखें शुल्बसूत्र (बौधायन/आपस्तंब) | उत्तर देखें वेदी निर्माण, बौधायन प्रमेय व करणी मान |
खगोल एवं काल-गणना | उत्तर देखें आर्यभटीय एवं सूर्य सिद्धांत | उत्तर देखें पृथ्वी घूर्णन, ग्रहण विज्ञान व त्रिकोणमिति |
उच्च बीजगणित | उत्तर देखें ब्रह्मस्फुटसिद्धांत व सिद्धांतशिरोमणि | उत्तर देखें शून्य संक्रिया, कुट्टक व चक्रवाल विधि |
कायचिकित्सा (मेडिसिन) | उत्तर देखें चरक संहिता | उत्तर देखें त्रिदोष सिद्धांत, निदान एवं समग्र स्वास्थ्य |
शल्यचिकित्सा (सर्जरी) | उत्तर देखें सुश्रुत संहिता | उत्तर देखें 121+ शल्य उपकरण, राइनोप्लास्टी व संधान |
रसायन एवं रसशास्त्र | उत्तर देखें रसरत्नसमुच्चय व रसार्णव | उत्तर देखें पारद शोधन, धातु भस्म, मूस व भट्ठी तकनीक |
वृक्ष एवं कृषि विज्ञान | उत्तर देखें वृक्षायुर्वेद (सुरपाल कृत) | उत्तर देखें पादप पोषण, वृक्षारोपण व रोगोपचार |
वास्तु एवं निर्माण कला | उत्तर देखें समरांगण सूत्रधार (राजा भोज) | उत्तर देखें नगर नियोजन, दुर्ग, मंदिर स्थापत्य व यंत्र |
आयुर्वेद, चरक-सुश्रुत परंपरा, धातुकर्म एवं स्थापत्य तकनीक
आयुर्वेद को किस मुख्य वेद का उपवेद माना जाता है
अथर्ववेद
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आयुर्वेद के अनुसार मानव देह के संतुलन का आधारभूत त्रिदोष सिद्धांत
वात, पित्त, कफ
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पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के आठ प्रमुख अंग क्या कहलाते हैं
अष्टांग आयुर्वेद
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प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा के तीन महान आधार स्तंभ ग्रंथ
वृहत्त्रयी
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वृहत्त्रयी में शामिल तीन प्रमुख ग्रंथ
चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय
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आयुर्वेद के 'लघुत्रयी' में सम्मिलित तीन ग्रंथ
माधव निदान, शार्ङ्गधर संहिता, भावप्रकाश
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कायचिकित्सा (Internal Medicine) का सर्वप्रमुख प्रामाणिक ग्रंथ
चरक संहिता
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चरक संहिता के मूल आद्य रचयिता कौन थे
अग्निवेश (अग्निवेश तंत्र)
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अग्निवेश तंत्र का प्रतिसंस्कार कर चरक संहिता का रूप देने वाले महर्षि
महर्षि चरक
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महर्षि चरक किस कुषाण सम्राट के समकालीन राजवैद्य माने जाते हैं
सम्राट कनिष्क
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चरक संहिता में कुल कितने स्थान (खंड) और अध्याय हैं
8 स्थान एवं 120 अध्याय
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चरक संहिता के अनुसार पूर्ण स्वास्थ्य की मूल परिभाषा
शरीर, इंद्रिय, मन व आत्मा की प्रसन्नता
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शल्य चिकित्सा (सर्जरी) का विश्वविख्यात प्राचीनतम भारतीय ग्रंथ
सुश्रुत संहिता
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'शल्य चिकित्सा के जनक' (Father of Surgery) माने जाने वाले महर्षि
महर्षि सुश्रुत
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सुश्रुत संहिता में वर्णित कुल शल्य उपकरणों (यंत्र एवं शस्त्र) की संख्या
121 उपकरण
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प्लास्टिक सर्जरी (विशेषकर नासा संधान - Rhinoplasty) के प्राचीनतम प्रवर्तक
महर्षि सुश्रुत
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मोतियाबिंद का शल्य ऑपरेशन (Couching विधि) करने वाले विश्व के प्रथम चिकित्सक
सुश्रुत
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सुश्रुत द्वारा शल्य क्रिया के व्यावहारिक अभ्यास हेतु प्रयुक्त वस्तुएँ
ककड़ी, तरबूज व मृत देह
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शल्य क्रिया से पूर्व रोगी को चेतना शून्य करने हेतु प्रयुक्त प्राचीन द्रव्य
मद्य (सुरा) एवं सम्मोहिनी औषधियाँ
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गुप्त काल में 'अष्टांग संग्रह' और 'अष्टांग हृदय' की रचना करने वाले आचार्य
वाग्भट
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रोगों के वर्गीकरण एवं सटीक नैदानिक परीक्षण हेतु 7वीं सदी का ग्रंथ
माधव निदान
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प्राचीन भारत में रसशास्त्र (रसायन विज्ञान) के प्रवर्तक बौद्ध विद्वान
नागार्जुन
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नागार्जुन द्वारा रचित प्रसिद्ध रसायन एवं धातुकर्म ग्रंथ
रसरत्नाकर
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रसरत्नाकर में किस धातु के शोधन एवं पारद योग का गहन वर्णन है
पारा (पारद)
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पारे को औषधीय रूप में प्रयुक्त करने हेतु विकसित प्रक्रिया
पारद संस्कार व भस्म निर्माण
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13वीं शताब्दी में वाग्भट द्वितीय द्वारा संकलित प्रसिद्ध रसग्रंथ
रसरत्नसमुच्चय
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दिल्ली के महरौली स्थित गुप्तकालीन लौह स्तंभ की प्रमुख तकनीकी विशेषता
जंग-रोधी उच्च शुद्धता का लोहा
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महरौली लौह स्तंभ का निर्माण किस गुप्त सम्राट की स्मृति से संबद्ध है
चंद्रगुप्त द्वितीय 'विक्रमादित्य'
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महरौली लौह स्तंभ में 1600 वर्षों से जंग न लगने का वैज्ञानिक कारण
उच्च फास्फोरस व सुरक्षात्मक मिसवाइट परत
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प्राचीन दक्षिण भारत में निर्मित विश्व विख्यात उच्च कार्बन इस्पात
वूट्ज़ स्टील (Wootz Steel)
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वूट्ज़ स्टील का प्रयोग कर मध्यकाल में निर्मित विश्वप्रसिद्ध हथियार
दमिश्क तलवारें (Damascus blades)
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सुल्तानगंज से प्राप्त गुप्तकालीन बुद्ध की विशाल ताम्र प्रतिमा की ढलाई तकनीक
मधुच्छिष्ट विधान (Lost-wax process)
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तांबे और टिन के सम्मिश्रण से कांस्य निर्माण की उन्नत तकनीक की शुरुआत
हड़प्पा सभ्यता
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राजस्थान के जावर में 12वीं सदी में किस धातु का औद्योगिक आसवन किया गया
जस्ता (जिंक)
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जावर में जस्ता निष्कर्षण हेतु विकसित प्राचीन भट्ठी तकनीक
तिरछी नली आसवन विधि
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हड़प्पा कालीन धोलावीरा नगर की सबसे अनूठी वैज्ञानिक विशेषता
परिष्कृत शैलकृत जल संचयन प्रणाली
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चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में सौराष्ट्र (गुजरात) में निर्मित ऐतिहासिक बांध
सुदर्शन झील
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सुदर्शन झील का निर्माण कराने वाले चंद्रगुप्त मौर्य के प्रांतीय राज्यपाल
पुष्यगुप्त वैश्य
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सम्राट अशोक के समय सुदर्शन झील से सिंचाई नहरें निकालने वाले यवन शासक
तुषास्फ
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सुदर्शन झील के जीर्णोद्धार का विवरण देने वाले दो प्रमुख अभिलेख
रुद्रदामन का जूनागढ़ व स्कंदगुप्त अभिलेख
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शुंग काल में निर्मित भारत का प्राचीनतम हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग जल-संग्रहण स्थल
शृंगवेरपुर (प्रयागराज)
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कावेरी नदी पर दूसरी शताब्दी में चोल शासक करिकाल द्वारा निर्मित विख्यात बांध
कल्लणै बांध (ग्रैंड एनीकट)
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प्राचीन भारतीय नगर नियोजन में समकोण पर काटती सड़कों की रूपरेखा
ग्रिड पद्धति (शतरंज प्रारूप)
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परमार राजा भोज द्वारा 11वीं सदी में रचित स्थापत्य, वास्तु व यांत्रिक कला ग्रंथ
समरांगण सूत्रधार
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समरांगण सूत्रधार के 'यंत्राध्याय' में वर्णित स्वचालित यांत्रिक उपकरण
यंत्र (यंत्र विज्ञान)
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वृक्षों, पादप रोगों एवं कृषि संवर्धन पर सुरपाल द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथ
वृक्षायुर्वेद
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हाथियों के रोगों एवं उनकी चिकित्सा पर पालकाप्य मुनि रचित ग्रंथ
हस्त्यायुर्वेद
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अश्वों (घोड़ों) की चिकित्सा और देखभाल पर शालिहोत्र मुनि द्वारा रचित ग्रंथ
शालिहोत्र संहिता (अश्वशास्त्र)
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मयमुनि द्वारा रचित दक्षिण भारतीय द्रविड़ वास्तु स्थापत्य का प्रमाण ग्रंथ
मयमतम्
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कृषि मौसम विज्ञान, वर्षा पूर्वानुमान एवं फसल सुरक्षा पर रचित ग्रंथ
कृषिपराशर
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18वीं सदी में सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित सबसे बड़ी धूपघड़ी
वृहत् सम्राट यंत्र (जयपुर)
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प्राचीन भारतीय विज्ञान का मूल दार्शनिक आधार
प्रकृति और मनुष्य का समन्वय
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