📚 Economy — Economy Notes
1991 के आर्थिक सुधार Part 1
1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि, भुगतान संतुलन संकट, विदेशी मुद्रा भंडार तथा राजकोषीय असंतुलन का गहन विश्लेषण
Quick Reference
महत्वपूर्ण तथ्य एवं योगदान
1991 के आर्थिक सुधार Part 1
| संकट/कारक | प्रमुख स्थिति या प्रभाव | सुधार से संबंध |
|---|---|---|
विदेशी मुद्रा भंडार का अभूतपूर्व क्षरण | उत्तर देखें जून 1991 में भंडार गिरकर मात्र $1.1 बिलियन (लगभग 2 से 3 सप्ताह का आयात कवर) रह जाना। | उत्तर देखें रुपये का दो चरणों में अवमूल्यन (~18-19%), 67 टन सोने की गिरवी, और LERMS दोहरी विनिमय दर प्रणाली की शुरुआत। |
भुगतान संतुलन (BoP) एवं चालू खाता घाटा | उत्तर देखें 1990-91 में चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के 3.1% (~$9.7 बिलियन) के खतरनाक स्तर पर पहुंचना। | उत्तर देखें मात्रात्मक आयात प्रतिबंधों की समाप्ति, एक्सिम स्क्रिप्स प्रणाली तथा चालू खाते पर रुपये की क्रमिक पूर्ण परिवर्तनीयता। |
उच्च एवं अनियंत्रित राजकोषीय घाटा | उत्तर देखें 1990-91 में केंद्र का सकल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 7.8% तथा राजस्व घाटा 3.5% दर्ज किया जाना। | उत्तर देखें उर्वरक व चीनी सब्सिडी में कटौती, बजटीय अनुशासन, सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश और आगे चलकर FRBM अधिनियम की नींव। |
घाटे का स्वचालित मुद्रीकरण और मुद्रास्फीति | उत्तर देखें तदर्थ ट्रेजरी बिलों (Ad-hoc TBs) द्वारा नोट छपाई से मुद्रा आपूर्ति बढ़ना और मुद्रास्फीति का 13-14% पहुंचना। | उत्तर देखें स्वचालित मुद्रीकरण प्रणाली की 1997 में औपचारिक समाप्ति (WMA की शुरुआत) और स्वतंत्र मौद्रिक नीति प्रबंधन। |
बाहरी ऋण और ऋण-सेवा का असहनीय बोझ | उत्तर देखें कुल बाह्य ऋण $83.8 बिलियन (जीडीपी का ~30%) तथा ऋण सेवा अनुपात का 35.3% के गंभीर स्तर पर जाना। | उत्तर देखें अल्पकालिक उच्च-लागत ऋणों से बचाव, अनिवासी भारतीय योजनाओं का पुनर्गठन और गैर-ऋण पूंजी प्रवाह (FDI/FII) को प्रोत्साहन। |
संप्रभु क्रेडिट रेटिंग में गिरावट व पूंजी पलायन | उत्तर देखें मूडीज और S&P द्वारा भारत की रेटिंग घटाकर सट्टेबाजी (Junk) श्रेणी में डालना; अनिवासी जमाराशियों (NRI Deposits) की भारी निकासी। | उत्तर देखें विदेशी निवेशकों में साख बहाली, FERA के प्रतिबंधात्मक प्रावधानों में ढील और इंडिया डेवलपमेंट बॉन्ड्स द्वारा पूंजी जुटाना। |
लाइसेंस-परमिट-कोटा राज और PSU अकुशलता | उत्तर देखें आंतरिक व बाह्य प्रतिस्पर्धा का अभाव, उच्च वृद्धिशील पूंजी-उत्पाद अनुपात (ICOR) और सार्वजनिक क्षेत्र का घाटा। | उत्तर देखें 24 जुलाई 1991 की नई औद्योगिक नीति (NIP 1991): अधिकांश उद्योगों को लाइसेंस-मुक्त करना व आरक्षण सूची का संकुचन। |
खाड़ी युद्ध (1990-91) का बाह्य आघात | उत्तर देखें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल से आयात बिल दोगुना होना तथा खाड़ी से प्रेषण (remittance) बंद होना। | उत्तर देखें ऊर्जा क्षेत्र के विविधीकरण, पेट्रोलियम मूल्य नियंत्रणों के क्रमिक युक्तिकरण और IMF से आपातकालीन ऋण (CCFF) प्राप्त करना। |
One-Liner Questions
1991 के भारतीय आर्थिक संकट का सबसे प्रमुख तात्कालिक बाह्य ट्रिगर (Immediate Trigger) क्या था?
अगस्त 1990 का खाड़ी युद्ध (Gulf War), जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र उछाल आया और खाड़ी देशों से विदेशी मुद्रा प्रेषण (remittances) अचानक ठप हो गया।
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1980 के दशक की आर्थिक नीतियों की किस बुनियादी प्रवृत्ति ने 1991 के संकट की नींव रखी?
विस्तारवादी राजकोषीय नीति (Expansionary Fiscal Policy), जिसके तहत सरकार ने बिना पर्याप्त राजस्व आधार के अनियंत्रित सार्वजनिक व उपभोग व्यय किया।
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स्वतंत्रता के बाद से 1980 के दशक तक भारत द्वारा अपनाई गई प्रमुख व्यापार रणनीति क्या थी?
आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण (Import Substitution Industrialization - ISI), जिसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को संरक्षण देकर विदेशी आयातों पर निर्भरता न्यूनतम करना था।
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'लाइसेंस-परमिट-कोटा राज' ने भारतीय औद्योगिक क्षेत्र की कार्यकुशलता को किस प्रकार क्षति पहुंचाई?
प्रतिस्पर्धा के अभाव और एकाधिकार को बढ़ावा देकर, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता निम्न, उत्पादन लागत अत्यधिक और तकनीकी प्रगति अवरुद्ध हो गई।
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1980 के दशक में भारत की औसत जीडीपी वृद्धि दर (लगभग 5.6%) को संधारणीय (Sustainable) क्यों नहीं माना गया?
क्योंकि यह वृद्धि अत्यधिक आंतरिक एवं बाह्य ऋणों पर आधारित थी, न कि उत्पादकता सुधार या सुदृढ़ राजकोषीय बचत पर।
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1980 के दशक में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की वित्तीय सेहत का मुख्य लक्षण क्या था?
पूंजी पर अत्यंत कम या ऋणात्मक प्रतिलाभ (Return on Capital) तथा उनके घाटे की भरपाई हेतु बजटीय समर्थन पर भारी निर्भरता।
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1989 से 1991 के दौरान भारत की घरेलू राजनीतिक स्थिति ने संकट को कैसे गहराया?
गठबंधन सरकारों की राजनीतिक अस्थिरता (वी. पी. सिंह और चंद्रशेखर सरकारें), जिसके कारण कड़े राजकोषीय और संरचनात्मक निर्णय समय पर नहीं लिए जा सके।
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1990-91 में भारत की मुद्रास्फीति की दर (Inflation Rate) किस स्तर तक पहुंच गई थी?
लगभग 13.8% से 14% (दोहरे अंकों में), जिसका मुख्य कारण घाटे का अत्यधिक मुद्रीकरण और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में रुकावट थी।
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1991 में अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों (Moody's एवं S&P) द्वारा भारत की संप्रभु रेटिंग डाउनग्रेड करने का क्या असर हुआ?
भारत की साख 'जंक/सट्टेबाजी श्रेणी' (Below Investment Grade) में आ गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक बाजारों से नया ऋण मिलना पूरी तरह बंद हो गया।
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क्रेडिट रेटिंग में गिरावट और दिवालियेपन की आशंका के बाद अनिवासी भारतीयों (NRIs) की क्या प्रतिक्रिया रही?
अनिवासी जमाराशियों (NRI Deposits) की बड़े पैमाने पर निकासी (Capital Flight), जिससे विदेशी मुद्रा संकट एकाएक चरम सीमा पर पहुंच गया।
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1980 के दशक के उत्तरार्ध में भारत सरकार ने रियायती विदेशी सहायता (Concessional Aid) घटने पर क्या विकल्प चुना था?
अल्पकालिक एवं उच्च ब्याज दर वाले बाह्य वाणिज्यिक ऋणों (Commercial Borrowings) और अनिवासी विदेशी मुद्रा खातों पर अत्यधिक निर्भरता।
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1991 के संकट को केवल तरलता संकट (Liquidity Crisis) न मानकर शोधन संकट (Solvency Crisis) का खतरा क्यों माना गया?
विदेशी मुद्रा भंडार के समाप्तप्राय होने से भारत द्वारा संप्रभु अंतरराष्ट्रीय ऋणों पर औपचारिक भुगतान चूक (Default) की वास्तविक संभावना उत्पन्न हो गई थी।
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1990-91 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में भारत के कुल सार्वजनिक ऋण का अनुपात क्या था?
जीडीपी का 55% से अधिक, जो आंतरिक और बाह्य दोनों मोर्चों पर ऋण संधारणीयता के संकट को दर्शाता था।
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1991 से पूर्व भारतीय निर्यातों की सबसे बड़ी संरचनात्मक कमजोरी क्या थी?
अतिमूल्यांकित रुपया और तकनीकी पिछड़ेपन के कारण निम्न प्रतिस्पर्धात्मकता, साथ ही प्राथमिक व गैर-विविध उत्पादों पर अत्यधिक निर्भरता।
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1990-91 में सोवियत संघ (USSR) का विखंडन भारत के लिए किस प्रकार एक बाह्य आर्थिक आघात सिद्ध हुआ?
रुपये-रूबल व्यापार व्यवस्था (Rupee-Rouble Trade) का पतन हो गया, जिससे भारत का एक बड़ा और संरक्षित निर्यात बाजार अचानक छिन गया।
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1980 के दशक में आंशिक आयात उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर क्या असंतुलित प्रभाव पड़ा?
आयात तीव्रता (Import Intensity) तेजी से बढ़ी, किंतु निर्यात संवर्धन के ठोस उपाय न होने से व्यापार घाटा अनियंत्रित हो गया।
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1991 के संकट के चरम दौर में सुधारों का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री कौन थे?
प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव तथा वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह।
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चंद्रशेखर सरकार के अंतरिम बजट (1991) में राजकोषीय संसाधन जुटाने हेतु किस ऐतिहासिक कदम का प्रस्ताव था?
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के 20% तक गैर-रणनीतिक विनिवेश (Disinvestment) का पहला औपचारिक प्रस्ताव।
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1980 के दशक में कृषि संबंधी किन मदों ने सरकारी राजकोष पर अत्यधिक दबाव डाला?
उर्वरक सब्सिडी, सिंचाई-बिजली पर अव्यवहारिक रियायतें और कृषि ऋण माफियों की शुरुआत।
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1991 से पूर्व भारत की बैंकिंग प्रणाली की मुख्य विफलता क्या थी?
उच्च CRR/SLR के माध्यम से बैंकों के संसाधनों का सरकारी घाटे में पूर्व-अधिग्रहण और ब्याज दरों पर कड़ा प्रशासनिक नियंत्रण।
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वित्तीय क्षेत्र के संकट के अध्ययन और सुधारों की रूपरेखा हेतु अगस्त 1991 में किस समिति का गठन हुआ?
एम. नरसिंहम समिति (Narasimham Committee-I)।
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1991 के आर्थिक संकट ने भारत की किस विकासवादी विचारधारा को हमेशा के लिए बदल दिया?
नेहरूवादी राज्य-निर्देशित बंद समाजवादी मॉडल (Fabian Socialism) को बाजार-समर्थक खुली अर्थव्यवस्था में रूपांतरित किया।
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1980 के दशक में भारत के 'वृद्धिशील पूंजी-उत्पाद अनुपात' (ICOR) की स्थिति क्या दर्शाती थी?
अत्यधिक उच्च ICOR, जिसका अर्थ था कि उत्पादन की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई प्राप्त करने के लिए अनुचित रूप से अत्यधिक पूंजी का अपव्यय हो रहा था।
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1991 के आरंभ में विदेशी वाणिज्यिक बैंकों ने भारतीय बैंकों के साथ किस प्रकार का असहयोग किया?
भारतीय साख-पत्रों (Letters of Credit - LCs) की गारंटी लेने से मना कर दिया, जिससे नियमित आयात व्यापार भी बाधित होने लगा।
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1991 के संकट को भारतीय आर्थिक इतिहास में 'वाटरशेड मोमेंट' (Watershed Moment) क्यों माना जाता है?
क्योंकि इसने नियंत्रण और संरक्षण के चार दशकों के आर्थिक प्रतिमान को समाप्त कर उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) के युग की शुरुआत की।
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1991 से पूर्व विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के संदर्भ में कौन सा कानून सबसे बड़ा अवरोधक माना जाता था?
विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम 1973 (FERA 1973), जिसने विदेशी स्वामित्व को सामान्यतः 40% तक सीमित कर रखा था।
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1991 के संकट की प्रकृति को व्यक्त करने वाले दो मुख्य मैक्रोइकॉनॉमिक घाटे कौन से थे?
आंतरिक मोर्चे पर 'राजकोषीय घाटा' तथा बाह्य मोर्चे पर 'चालू खाता घाटा' (ट्विन डेफिसिट)।
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1969 में लागू किस कानून ने भारत में बड़े व्यापारिक घरानों के क्षमता विस्तार और विविधीकरण को अत्यधिक बाधित किया?
एकाधिकार एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम 1969 (MRTP Act), जिसे 1991 के सुधारों में समाप्तप्राय कर दिया गया।
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1985 में गठित किस समिति ने भारत की मौद्रिक प्रणाली और ब्याज दर संरचना के युक्तिकरण की पहली व्यापक संस्तुति दी थी?
प्रोफेसर सुखमय चक्रवर्ती समिति (1985)।
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1950 से 1980 के दशक के दौरान भारत की निम्न औसत विकास दर (3.5%) को अर्थशास्त्री प्रो. राज कृष्णा ने क्या नाम दिया था?
'हिन्दू वृद्धि दर' (Hindu Rate of Growth), जिससे बाहर निकलने का प्रयास 1980 के दशक में अत्यधिक ऋण लेकर किया गया।
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लघु उद्योग आरक्षण (SSI Reservation) नीति ने भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को कैसे प्रभावित किया?
बड़े पैमाने की मितव्ययिताओं (Economies of Scale) को रोककर, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक मानकों की तुलना में महंगे और अप्रतिस्पर्धी बने रहे।
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मई 1991 में किस राजनीतिक घटना ने विदेशी निवेशकों और अनिवासी भारतीयों के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया?
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या, जिससे भारत में राजनीतिक अस्थिरता और अनिश्चितता का चरम माहौल बन गया।
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1980 के दशक के उत्तरार्ध में गैर-विकासात्मक व्यय में कौन से दो घटक सबसे तेजी से बढ़े?
रक्षा व्यय तथा आंतरिक सुरक्षा एवं सीमा सुरक्षा पर होने वाला सरकारी व्यय।
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अर्थशास्त्र में 'भुगतान संतुलन' (Balance of Payments - BoP) की प्रामाणिक परिभाषा क्या है?
किसी देश के निवासियों और शेष विश्व के बीच एक वित्तीय वर्ष में निष्पादित समस्त आर्थिक लेन-देन का क्रमबद्ध लेखा-जोखा।
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भुगतान संतुलन के दो प्रमुख खाते कौन से होते हैं?
चालू खाता (Current Account) और पूंजी खाता (Capital Account)।
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चालू खाता घाटा (Current Account Deficit - CAD) की स्थिति कब उत्पन्न होती है?
जब वस्तुओं, सेवाओं और एकपक्षीय अंतरणों के आयात का कुल मूल्य उनके कुल निर्यात मूल्य से अधिक हो जाता है।
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वर्ष 1990-91 में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कितना प्रतिशत पहुंच गया था?
जीडीपी का 3.1% (लगभग 9.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर), जो उस समय के नगण्य विदेशी मुद्रा भंडार के संदर्भ में पूरी तरह विनाशकारी था।
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छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85) के दौरान भारत का औसत चालू खाता घाटा कितना था?
जीडीपी का मात्र लगभग 1.3%, जो सातवीं योजना में बढ़कर दोगुने से अधिक हो गया।
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व्यापार संतुलन (Balance of Trade) और चालू खाते (Current Account) में क्या मूलभूत अंतर है?
व्यापार संतुलन केवल दृश्य वस्तुओं (Merchandise) के आयात-निर्यात को मापता है, जबकि चालू खाते में अदृश्य मदें (सेवाएं, प्रेषण, आय) भी शामिल होती हैं।
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वर्ष 1990-91 में भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) लगभग कितना दर्ज किया गया था?
लगभग 9,449 करोड़ रुपये (लगभग 5.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर)।
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1985-90 की अवधि में व्यापार घाटे के अनियंत्रित विस्तार का मुख्य कारण क्या था?
निर्यात की तुलना में आयात व्यय में असाधारण वृद्धि, विशेषकर पीओएल (पेट्रोलियम, तेल और स्नेहक) तथा पूंजीगत वस्तुओं के आयात में।
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1980 के दशक के अंतिम वर्षों में भारत अपने भारी चालू खाता घाटे की वित्तीय भरपाई कैसे कर रहा था?
अल्पकालिक बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECBs) और अनिवासी भारतीयों (NRI) की उच्च-ब्याज जमाराशियों के सहारे।
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ऋण-आधारित पूंजी प्रवाह (Debt-creating Capital Flows) पर निर्भरता को खतरनाक क्यों माना गया?
क्योंकि इनमें पुनर्भुगतान की निश्चित समय-सीमा होती है और बाजार में विश्वास डगमगाते ही निवेशक अपनी पूंजी तुरंत वापस निकाल लेते हैं।
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1991 के संकट के दौरान पूंजी खाते में किस प्रमुख घटना ने भुगतान संतुलन को पंगु बना दिया?
NRI जमाराशियों का भारी बहिर्वाह (Capital Flight) और अंतरराष्ट्रीय बैंकों द्वारा अल्पकालिक क्रेडिट लाइनों का नवीनीकरण (Rollover) करने से इंकार।
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1991 में विदेशी मुद्रा अनिवासी खातों (FCNR Accounts) से लगभग कितनी पूंजी बाहर निकाली गई थी?
लगभग 1 बिलियन डॉलर से अधिक की शुद्ध निकासी, जिसने देश की विदेशी मुद्रा तरलता को पूरी तरह सुखा दिया।
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1991 से पूर्व भारत में किस प्रकार की विनिमय दर व्यवस्था (Exchange Rate Regime) लागू थी?
मुद्रा टोकरी से बंधी प्रबंधित विनिमय दर (Basket-pegged Managed Exchange Rate), जिसमें रुपये की दर केंद्रीय बैंक द्वारा प्रशासनिक रूप से तय होती थी।
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प्रशासनिक रूप से तय अतिमूल्यांकित रुपये (Overvalued Rupee) का भारतीय व्यापार पर क्या विपरीत प्रभाव पड़ा?
भारतीय निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे और अप्रतिस्पर्धी हो गए, जबकि आयात कृत्रिम रूप से सस्ते होकर प्रोत्साहित हुए।
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भुगतान संतुलन को बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 1990-91 में कौन सा तात्कालिक रक्षात्मक कदम उठाया?
आयात संकुचन (Import Compression), जिसके तहत आयातों पर 200% तक की भारी नकद मार्जिन (Cash Margin) अनिवार्य कर दी गई।
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कड़े आयात संकुचन (Import Compression) उपायों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या नकारात्मक असर पड़ा?
कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं की कमी से औद्योगिक उत्पादन (IIP) की वृद्धि दर गिरकर ऋणात्मक हो गई और गंभीर आर्थिक मंदी छा गई।
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खाड़ी युद्ध के कारण भारत के अदृश्य खाते (Invisibles Account) को कौन सा दोहरा आघात लगा?
कुवैत और इराक से आने वाले भारतीय कामगारों के प्रेषण (Remittances) बंद हो गए और वहां फंसे नागरिकों को एयरलिफ्ट करने पर भारी विदेशी मुद्रा व्यय हुई।
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BoP संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने सर्वप्रथम IMF की किस विशेष सुविधा से आपात ऋण लिया था?
प्रतिकारी और आकस्मिक वित्तपोषण सुविधा (CCFF) तथा जनवरी 1991 में प्रथम क्रेडिट ट्रेंच स्टैंड-बाय अरेंजमेंट।
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आईएमएफ (IMF) ने भारत को आपातकालीन वित्तीय पैकेज देने के बदले क्या मुख्य संरचनात्मक मांगें रखीं?
रुपये का वास्तविक अवमूल्यन, राजकोषीय घाटे में तेज कटौती, आयात शुल्कों में कमी और व्यापार का गैर-नियंत्रण।
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'ट्विन डेफिसिट परिकल्पना' (Twin Deficit Hypothesis) 1991 के संदर्भ में क्या स्पष्ट करती है?
राजकोषीय घाटे में होने वाली अनियंत्रित वृद्धि सीधे चालू खाता घाटे (CAD) को बढ़ाती है, क्योंकि सरकारी घाटा घरेलू समग्र मांग को बढ़ाकर अतिरिक्त आयात खींचता है।
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राष्ट्रीय आय लेखांकन के अनुसार बचत-निवेश अंतराल (Saving-Investment Gap) और चालू खाता घाटे का क्या संबंध है?
CAD = (I - S) + (G - T); अर्थात् जब निजी निवेश घरेलू बचत से अधिक हो और सरकारी व्यय राजस्व से अधिक हो, तो चालू खाता घाटा उत्पन्न होना अनिवार्य है।
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1990-91 में भारत का निर्यात-आयात कवरेज अनुपात (Export-to-Import Coverage) किस स्तर पर था?
मात्र लगभग 60% से 66%, जिसका अर्थ था कि भारत की निर्यात आय उसके आयात बिल के दो-तिहाई हिस्से को भी पूरा करने में असमर्थ थी।
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1991 के संकट में तरलता बेमेल (Maturity Mismatch) से क्या आशय था?
भारत के पास देय देनदारियां अत्यंत अल्पकालिक थीं, जबकि उसकी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां नगण्य थीं और वे तत्काल नकदीकरण योग्य नहीं थीं।
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विदेशी मुद्रा के गंभीर संकट के बीच अनिवासी भारतीयों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने कौन से बॉन्ड जारी किए?
इंडिया डेवलपमेंट बॉन्ड्स (India Development Bonds - IDBs), जिन्होंने डॉलर व पाउंड में महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा जुटाई।
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जुलाई 1991 में व्यापार क्षेत्र में आयात लाइसेंसिंग की कठोरता को कम करने हेतु कौन सी नई प्रणाली शुरू की गई?
एक्सिम स्क्रिप्स (Exim Scrips) प्रणाली, जिसने सीधे आयातों को निर्यात प्रदर्शन से जोड़ दिया।
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एक्सिम स्क्रिप्स (Exim Scrips) योजना किस प्रकार कार्य करती थी?
निर्यातकों को उनके निर्यात मूल्य के 30% के बराबर व्यापार योग्य (Freely Tradable) आयात लाइसेंस दिए जाते थे, जिनका बाजार में प्रीमियम पर क्रय-विक्रय हो सकता था।
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विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA) 1973 के अत्यधिक कठोर प्रावधानों का अप्रत्यक्ष दुष्परिणाम क्या निकला था?
विदेशी मुद्रा का आधिकारिक बैंकिंग चैनलों से विचलन और समानांतर अनौपचारिक हवाला बाजार का अनियंत्रित विस्तार।
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1991 का BoP संकट 1966 के संकट से किस रूप में अधिक चुनौतीपूर्ण था?
1966 का संकट मुख्यतः कृषि सूखे और खाद्य सहायता पर केंद्रित था, जबकि 1991 का संकट बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक ऋण, संप्रभु साख और विदेशी मुद्रा तरलता का संकट था।
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जुलाई 1991 में निर्यात संवर्धन हेतु दी जाने वाली किस वित्तीय सब्सिडी को राजकोषीय बोझ घटाने हेतु तत्काल बंद किया गया?
नकद प्रतिपूरक समर्थन (Cash Compensatory Support - CCS) योजना।
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1991 से पूर्व भारत में शीर्ष सीमा शुल्क (Peak Customs Tariff) की दर किस सीमा तक थी?
300% से अधिक (औसत टैरिफ दरें 100% से ऊपर थीं), जिसने भारतीय उद्योगों को अत्यधिक अक्षम और वैश्विक रूप से अलग-थलग बना दिया था।
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मात्रात्मक प्रतिबंधों (Quantitative Restrictions - QRs) द्वारा आयातों को नियंत्रित करने का मुख्य नुकसान क्या था?
घरेलू उत्पादकों के लिए एकाधिकारवादी परिस्थितियां बनना और नवाचार व लागत प्रतिस्पर्धा की भावना पूरी तरह समाप्त होना।
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1991 से पूर्व भारत के पूंजी खाते में गैर-ऋण पूंजी प्रवाह (FDI और FII) की क्या स्थिति थी?
व्यावहारिक रूप से नगण्य (प्रति वर्ष $100 मिलियन से भी कम), क्योंकि विदेशी निवेश के प्रति नीतियां अत्यधिक कठोर और भयभीत थीं।
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1991 के संकट के चरम दौर में आधिकारिक विनिमय दर और अनौपचारिक हवाला दर में कितना अंतर (हवाला प्रीमियम) देखा गया था?
लगभग 20% से 25% का अंतर, जिससे प्रेषण आधिकारिक चैनलों के बजाय हवाला बाजार में जा रहे थे।
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1991 के सुधारों के बाद भारत ने भुगतान संतुलन को मजबूत करने हेतु किस दीर्घकालिक व्यापार नीति को अपनाया?
बहिर्मुखी एवं निर्यात-उन्मुख विकास नीति (Export-Led Growth Strategy), जिसमें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण पर बल दिया गया।
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किसी देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) के अंतर्गत कौन से चार घटक शामिल होते हैं?
1. विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA), 2. स्वर्ण (Gold), 3. विशेष आहरण अधिकार (SDR), और 4. आईएमएफ में रिजर्व ट्रेंच स्थिति (RTP)।
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जून 1991 के अंतिम सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर किस ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर आ गया था?
लगभग 1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹2,500 करोड़ से भी कम)।
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जून 1991 में उपलब्ध विदेशी मुद्रा भंडार कितने समय के आयात की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही शेष बचा था?
मात्र 2 से 3 सप्ताह (लगभग 13 से 15 दिन) के आवश्यक आयातों के लिए (आयात कवर)।
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अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मानकों के अनुसार किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार न्यूनतम कितने समय के आयात के लिए सुरक्षित माना जाता है?
कम से कम 3 महीने (12 सप्ताह) के आयात व्यय के बराबर।
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मार्च 1990 से जून 1991 के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कितनी प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई थी?
लगभग 65% से अधिक की गिरावट (मार्च 1990 के $3.37 बिलियन से घटकर $1.1 बिलियन पर)।
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विदेशी मुद्रा भंडार के खत्म होने का भारत की अंतरराष्ट्रीय साख पर सबसे बड़ा आसन्न खतरा क्या था?
अंतरराष्ट्रीय ऋणों की किस्तों पर डिफॉल्ट (Sovereign Default) घोषित होना, जिससे भारत का वैश्विक व्यापारिक बहिष्कार हो सकता था।
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जब विदेशी वाणिज्यिक ऋण के सभी रास्ते बंद हो गए, तो भारत सरकार ने आपात तरलता जुटाने हेतु किसे संपार्श्विक (Collateral) बनाया?
देश के आधिकारिक स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) को।
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मई 1991 में चंद्रशेखर सरकार के दौरान सोने के हस्तांतरण का पहला गुप्त कदम क्या था?
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड (UBS) को 20 मीट्रिक टन सोना बेचना/स्वाप करना, जिससे लगभग $200 मिलियन जुटाए गए।
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जुलाई 1991 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सोना गिरवी रखने का दूसरा बड़ा चरण क्या था?
46.91 मीट्रिक टन सोना 'बैंक ऑफ इंग्लैंड' और 'बैंक ऑफ जापान' के पास गिरवी रखकर लगभग $405 मिलियन का आपातकालीन ऋण प्राप्त किया गया।
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मई और जुलाई 1991 के दौरान भारत द्वारा कुल कितना सोना विदेशी बैंकों को भेजा (एयरलिफ्ट) गया था?
कुल लगभग 67 मीट्रिक टन सोना (20 टन SBI द्वारा तथा 47 टन RBI द्वारा)।
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सोने को हवाई मार्ग से लंदन और ज्यूरिख भेजे जाने की घटना को भारतीय जनमानस और राजनीति में किस रूप में देखा गया?
राष्ट्रीय स्वाभिमान पर गहरा आघात और संप्रभु शर्मिंदगी के रूप में, जिससे आर्थिक नीतियों में आमूलचूल परिवर्तन की अनिवार्यता निर्विवाद हो गई।
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क्या भारत सरकार ने बाद में गिरवी रखे गए 67 टन सोने को विदेशी बैंकों से छुड़ा लिया था?
हाँ, नवंबर-दिसंबर 1991 तक विदेशी मुद्रा स्थिति सुधरने पर भारत ने संपूर्ण ऋण ब्याज सहित चुकाकर अपना पूरा सोना वापस हासिल कर लिया था।
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जुलाई 1991 में रुपये का अवमूल्यन (Rupee Devaluation) कितने चरणों में संपन्न किया गया?
दो सुनियोजित चरणों में: पहला 1 जुलाई 1991 को (~9%) और दूसरा 3 जुलाई 1991 को (~11%), कुल संचयी अवमूल्यन लगभग 18.5% से 19% था।
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अवमूल्यन को एक ही झटके में करने के बजाय दो चरणों में (1 और 3 जुलाई) क्यों बांटा गया?
विदेशी मुद्रा बाजार की तात्कालिक प्रतिक्रिया मापने, सट्टेबाजी रोकने और बाजार में घबराहट (Panic) टालने हेतु।
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अर्थशास्त्र में मुद्रा के 'अवमूल्यन' (Devaluation) और 'मूल्यह्रास' (Depreciation) में क्या वैधानिक अंतर है?
अवमूल्यन निश्चित विनिमय दर में सरकार/केंद्रीय बैंक के आदेश द्वारा होता है, जबकि मूल्यह्रास फ्लोटिंग विनिमय दर में बाजार की मांग-आपूर्ति द्वारा स्वतः होता है।
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जुलाई 1991 में रुपये के भारी अवमूल्यन का तात्कालिक आर्थिक उद्देश्य क्या था?
विदेशी मुद्रा के बाह्य पलायन को तुरंत रोकना, भारतीय निर्यातों को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाना और NRI प्रेषणों को आधिकारिक चैनलों पर वापस लाना।
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अवमूल्यन के बाद भारत ने मार्च 1992 के बजट में कौन सी अंतरिम विनिमय दर प्रणाली लागू की?
उदारीकृत विनिमय दर प्रबंधन प्रणाली (LERMS), जिसे दोहरी विनिमय दर प्रणाली (Dual Exchange Rate System) भी कहा जाता है।
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LERMS प्रणाली के अंतर्गत विदेशी मुद्रा अर्जनों के रूपांतरण हेतु क्या अनुपात निर्धारित किया गया था?
40:60 का अनुपात; अर्थात् 40% विदेशी मुद्रा आधिकारिक दर पर सरकार को आवश्यक आयातों हेतु देनी होती थी और 60% बाजार दर पर भुनाई जा सकती थी।
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भारत ने एकीकृत बाजार-निर्धारित विनिमय दर प्रणाली (Unified Exchange Rate System) को कब अपनाया?
मार्च 1993 के बजट में, जब LERMS की दोहरी दर को समाप्त कर विनिमय दर को पूर्णतः बाजार मांग-आपूर्ति पर छोड़ दिया गया।
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भारत ने किस वर्ष अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुच्छेद VIII के तहत चालू खाते पर रुपये की पूर्ण परिवर्तनीयता स्वीकार की?
अगस्त 1994 में।
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विदेशी मुद्रा के संदर्भ में 'मार्शल-लर्नर शर्त' (Marshall-Lerner Condition) क्या प्रतिपादित करती है?
मुद्रा अवमूल्यन व्यापार संतुलन को तभी सुधारेगा जब निर्यात और आयात की मांग की मूल्य लोच का योग 1 से अधिक हो (|e_x + e_m| > 1)।
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1991 के अवमूल्यन के तुरंत बाद व्यापार संतुलन पर 'जे-वक्र प्रभाव' (J-Curve Effect) कैसे परिलक्षित हुआ?
शुरुआती महीनों में महंगे आयात अनुबंधों के कारण व्यापार घाटा पहले बढ़ा, किंतु कुछ समय बाद निर्यात विस्तार होने से व्यापार संतुलन में टिकाऊ सुधार आया।
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1991 के विदेशी मुद्रा संकट के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर कौन थे?
एस. वेंकिटरमणन (S. Venkitaramanan), जिन्होंने स्वर्ण हस्तांतरण और तरलता प्रबंधन का कुशल संचालन किया।
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1991 के आर्थिक संकट के समय भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) कौन थे?
डॉ. दीपक नय्यर (Deepak Nayyar)।
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सोने की विदेशी रवानगी की प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय क्यों रखा गया था?
संसद, मीडिया और जनता में राजनीतिक आक्रोश, घबराहट और वित्तीय बाज़ारों में अनियंत्रित सट्टेबाजी से बचने के लिए।
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सुधारों के क्रियान्वयन के मात्र दो वर्ष बाद (मार्च 1993 तक) भारत का विदेशी मुद्रा भंडार किस संतोषजनक स्थिति में पहुंच गया था?
बढ़कर 6.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, और 1994 तक $15 बिलियन पार कर गया, जिससे संकट का पूर्ण निवारण हुआ।
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को गति देने हेतु सेबी द्वारा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए भारतीय बाजार कब खोला गया?
सितंबर 1992 में, जिसके बाद भारतीय पूंजी बाजार में विदेशी मुद्रा का सतत अंतर्प्रवाह शुरू हुआ।
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विदेशी मुद्रा भंडार में भारी वृद्धि होने पर घरेलू मुद्रास्फीति को रोकने हेतु केंद्रीय बैंक द्वारा की जाने वाली प्रक्रिया क्या कहलाती है?
बंध्यीकरण या स्टेरलाइजेशन (Sterilization), जिसमें RBI खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियां बेचकर अतिरिक्त तरलता सोखता है।
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पूंजी खाता परिवर्तनीयता (Capital Account Convertibility) की शर्तों और रोडमैप की समीक्षा हेतु 1997 में किस समिति का गठन हुआ?
एस. एस. तारापोर समिति (Tarapore Committee-I)।
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भारत वर्तमान में विनिमय दर निर्धारण की किस व्यवस्था का पालन करता है?
प्रबंधित फ्लोटिंग विनिमय दर (Managed Floating Exchange Rate), जहां बाजार दर तय करता है किंतु अत्यधिक अस्थिरता रोकने हेतु RBI हस्तक्षेप करता है।
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विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA) के स्थान पर अधिक उदार विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) किस वर्ष पारित हुआ?
वर्ष 1999 में (जो 1 जून 2000 से प्रभावी हुआ), जिसने विदेशी मुद्रा उल्लंघनों को आपराधिक के स्थान पर दीवानी अपराध बनाया।
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1991 के बाद भारत द्वारा विशाल विदेशी मुद्रा भंडार संचित करने के पीछे मुख्य रणनीतिक उद्देश्य क्या रहा है?
बाह्य आघातों से सुरक्षा (Self-Insurance / War Chest) और वैश्विक वित्तीय संकटों के दौरान देश की संप्रभु स्वायत्तता की रक्षा।
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विदेशी मुद्रा आकर्षित करने हेतु अनिवासी भारतीयों के लिए गैर-प्रत्यावर्तनीय (Non-Repatriable) जमा योजनाओं का क्या उद्देश्य था?
दीर्घकालिक स्थिर पूंजी जुटाना, ताकि विदेशी निवेशक घबराहट की स्थिति में तत्काल पूंजी देश से बाहर न खींच सकें।
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सकल राजकोषीय घाटा (Gross Fiscal Deficit) की मानक तकनीकी परिभाषा क्या है?
सरकार के कुल व्यय (राजस्व + पूंजीगत व्यय) का गैर-ऋण प्राप्तियों (राजस्व प्राप्तियां + ऋणों की वसूली + अन्य पूंजीगत प्राप्तियां) पर आधिक्य।
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वर्ष 1990-91 में भारत सरकार का सकल राजकोषीय घाटा जीडीपी का कितना प्रतिशत दर्ज किया गया था?
जीडीपी का लगभग 7.8% (तथा राज्यों को मिलाकर समेकित सार्वजनिक क्षेत्र का घाटा 9.4% से 10% के स्तर पर था)।
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वर्ष 1990-91 में भारत सरकार का राजस्व घाटा (Revenue Deficit) जीडीपी का कितना प्रतिशत था?
जीडीपी का लगभग 3.3% से 3.5%।
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राजस्व घाटे का लगातार बने रहना सकल राजकोषीय घाटे की तुलना में अधिक हानिकारक क्यों माना जाता है?
क्योंकि इसका अर्थ है कि सरकार दिन-प्रतिदिन के उपभोग व्यय के लिए भी उधार ले रही है, जिससे भविष्य में आय देने वाली कोई उत्पादक परिसंपत्ति सृजित नहीं होती।
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प्राथमिक घाटा (Primary Deficit) क्या है और 1990-91 में इसकी स्थिति क्या थी?
राजकोषीय घाटे में से पूर्व में लिए गए ऋणों के ब्याज भुगतान को घटाने पर प्राप्त शेष; 1990-91 में यह जीडीपी का लगभग 4% था।
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1980 के दशक में भारत के राजकोषीय असंतुलन का सबसे बड़ा संरचनात्मक चालक कौन सा व्यय था?
गैर-योजनागत राजस्व व्यय (Non-Plan Revenue Expenditure), जिसमें रक्षा व्यय, उर्वरक-खाद्य सब्सिडी और ऋणों पर ब्याज भुगतान मुख्य थे।
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1990-91 में केंद्र सरकार के कुल राजस्व का कितना प्रतिशत केवल पुराने ऋणों के ब्याज भुगतान में समाप्त हो जाता था?
कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 39% से 40%, जो ऋण के दुष्चक्र का स्पष्ट प्रमाण था।
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'घाटे का मुद्रीकरण' (Monetization of Deficit) क्या कहलाता है?
सरकार द्वारा अपने राजकोषीय घाटे की भरपाई के लिए केंद्रीय बैंक से सीधे नए नोट छपवाकर उधार लेना।
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1991 से पूर्व भारत में घाटे का स्वचालित मुद्रीकरण किस वित्तीय लिखत (Instrument) के माध्यम से होता था?
तदर्थ ट्रेजरी बिलों (91-दिवसीय Ad-hoc Treasury Bills) के माध्यम से, जिसे सरकार अपनी आवश्यकतानुसार रिजर्व बैंक को सीधे जारी कर देती थी।
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तदर्थ ट्रेजरी बिलों द्वारा स्वचालित मुद्रीकरण ने अर्थव्यवस्था को किस प्रकार क्षति पहुंचाई?
रिजर्व मनी और समग्र मुद्रा आपूर्ति (M3) में बेलगाम वृद्धि हुई, जिसने मांग-प्रेरित मुद्रास्फीति को 14% के पार पहुंचा दिया।
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Ad-hoc Treasury Bills की स्वचालित मुद्रीकरण प्रणाली को औपचारिक रूप से कब समाप्त किया गया?
1997 में RBI और वित्त मंत्रालय के बीच हुए समझौते द्वारा, और इसके स्थान पर अर्थोपाय अग्रिम (Ways and Means Advances - WMA) प्रणाली लाई गई।
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मार्च 1991 के अंत तक भारत का कुल बाह्य ऋण (Total External Debt) कितना पहुंच चुका था?
लगभग 83.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर, जिसके चलते भारत विकासशील दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऋणी देश बन गया था।
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1990-91 में भारत का बाह्य ऋण-जीडीपी अनुपात (External Debt-to-GDP Ratio) क्या था?
लगभग 28.7% से 30% (जो जुलाई 1991 में रुपये के अवमूल्यन के उपरांत 1991-92 में बढ़कर लगभग 38% हो गया था)।
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'ऋण सेवा अनुपात' (Debt Service Ratio) से क्या अभिप्राय है?
किसी वित्तीय वर्ष में विदेशी ऋणों के मूलधन और ब्याज के कुल भुगतान का देश की कुल चालू विदेशी मुद्रा प्राप्तियों (निर्यात आय) से अनुपात।
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1990-91 में भारत का ऋण सेवा अनुपात (Debt Service Ratio) किस खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था?
लगभग 35.3%; अर्थात् भारत की निर्यात आय का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा केवल पुराने विदेशी ऋणों की किस्तों और ब्याज को चुकाने में स्वाहा हो रहा था।
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1980 के दशक में भारत के बाह्य ऋण की संरचना में कौन सा जोखिमपूर्ण गुणात्मक बदलाव आया?
रियायती बहुपक्षीय सहायता (जैसे IDA) का हिस्सा घटा और कठोर बाजार शर्तों वाले बाह्य वाणिज्यिक ऋणों (ECBs) तथा NRI जमाराशियों का हिस्सा 5% से बढ़कर 30% पार कर गया।
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1990-91 में कुल बाह्य ऋण में अल्पकालिक ऋणों (Short-term Debt) की हिस्सेदारी और उसके जोखिम का स्तर क्या था?
कुल ऋण का लगभग 10.2%, परंतु यह राशि भारत के तत्कालीन विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में 140% से अधिक थी।
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1991 के पूर्व भारत किस प्रकार के 'आंतरिक ऋण जाल' (Internal Debt Trap) में फंसता जा रहा था?
सरकार पुराने आंतरिक ऋणों का केवल ब्याज चुकाने के लिए नए ऋण लेने पर मजबूर थी, क्योंकि प्राथमिक घाटा लगातार ऋणात्मक बना हुआ था।
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सुखमय चक्रवर्ती समिति (Sukhamoy Chakravarty Committee, 1985) ने सरकारी वित्तीय संतुलन के आकलन हेतु क्या संस्तुति दी थी?
पारंपरिक संकीर्ण बजटीय घाटे के स्थान पर 'सकल राजकोषीय घाटे' (Gross Fiscal Deficit) को समग्र मैक्रोइकॉनॉमिक असंतुलन का मुख्य पैमाना बनाने की।
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24 जुलाई 1991 को पेश किए गए ऐतिहासिक बजट में राजकोषीय घाटे को कम करने का क्या तात्कालिक लक्ष्य रखा गया था?
राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 8.4% (1990-91 संशोधित) से घटाकर 1991-92 में 6.5% पर लाना।
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1991-92 के बजट में व्यय घटाने हेतु सब्सिडी के मोर्चे पर कौन सा कठोर राजकोषीय निर्णय लिया गया?
उर्वरक की कीमतों में 30% की भारी वृद्धि की गई और चीनी पर दी जाने वाली बजटीय सब्सिडी को समाप्त कर दिया गया।
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1991 में भारतीय कर संरचना के व्यापक पुनर्गठन और सरलीकरण हेतु किस उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया?
डॉ. राजा जे. चेलैया कर सुधार समिति (Raja Chelliah Tax Reforms Committee, 1991)।
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राजा चेलैया समिति की कर सुधारों संबंधी मुख्य दर्शन क्या था?
कर की दरों को मध्यम/निम्न रखना, कर स्लैबों की संख्या कम करना, कर आधार का विस्तार करना और कठोर अनुपालन सुनिश्चित करना।
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1991 के संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम (Structural Adjustment Programme - SAP) के दो मुख्य स्तंभ कौन से थे?
1. अल्पकालिक समष्टिगत स्थिरीकरण उपाय (Macroeconomic Stabilization) और 2. दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार (Structural Reforms)।
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1991 के आर्थिक संकट के दीर्घकालिक समाधान और स्थायी राजकोषीय अनुशासन हेतु वर्ष 2003 में कौन सा ऐतिहासिक कानून संसद द्वारा पारित किया गया?
राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम 2003 (FRBM Act, 2003)।
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FRBM अधिनियम 2003 के तहत केंद्र सरकार के लिए कौन से दो अनिवार्य मात्रात्मक लक्ष्य तय किए गए थे?
राजस्व घाटे को पूरी तरह समाप्त (0%) करना और राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3% तक सीमित करना।
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1991 से पूर्व भारत में प्रत्यक्ष आयकर (Income Tax) की शीर्ष सीमांत दर कितनी ऊंची थी?
50% से अधिक (1970 के दशक में तो यह अधिभार सहित 97% तक थी), जिससे बड़े पैमाने पर कर वंचना और काला धन पनपा था।
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अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में व्यापक सुधार हेतु 1986 में शुरू की गई किस प्रणाली का 1990 के दशक में विस्तार किया गया?
संशोधित मूल्य वर्धित कर (MODVAT) प्रणाली, जिसका उद्देश्य कर-पर-कर (Cascading Effect) के प्रभाव को दूर करना था।
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सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में विनिवेश की कार्यप्रणाली तय करने हेतु 1993 में किस समिति का गठन किया गया?
डॉ. सी. रंगराजन विनिवेश समिति (C. Rangarajan Committee on PSU Disinvestment, 1993)।
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1992 में सरकारी ऋण प्रबंधन में वित्तीय अनुशासन लाने हेतु किस बाजार-आधारित प्रणाली की शुरुआत की गई?
सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) की नीलामी प्रणाली, जिससे सरकारी उधारी बाजार-निर्धारित दरों पर होने लगी।
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1991 से पूर्व बैंकों के लिए सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) और नकद आरक्षित अनुपात (CRR) किस चरम स्तर पर थे?
SLR लगभग 38.5% और CRR 15% तक पहुंच चुका था, जिससे बैंकों की 53% से अधिक जमाराशियां सरकारी नियंत्रण में अवरुद्ध थीं।
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नरसिंहम समिति (1991) ने बैंकों की लाभप्रदता और ऋण प्रवाह बढ़ाने हेतु SLR को घटाकर कितने प्रतिशत करने की सिफारिश की थी?
चरणबद्ध तरीके से घटाकर 25% करने की संस्तुति।
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1991 के राजकोषीय एवं बाह्य संकट का स्थायी सबक भारतीय नीति-निर्माताओं के लिए क्या रहा?
संधारणीय विकास केवल विवेकपूर्ण राजकोषीय नीति, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता से ही संभव है।
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