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बैंकिंग सुधार Part 1

भारत में बैंकिंग सुधारों की आवश्यकता, नरसिम्हम समिति (I व II), गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) तथा IRAC मानदंडों का गहन विश्लेषण

Quick Reference
महत्वपूर्ण तथ्य एवं योगदान
बैंकिंग सुधार Part 1
सुधार उपायप्रमुख प्रावधानबैंकिंग क्षेत्र पर प्रभाव
आरक्षित अनुपातों (CRR व SLR) में चरणबद्ध कटौती
उत्तर देखें
नरसिम्हम समिति-I की संस्तुति पर CRR को 15% से घटाकर 3-5% और SLR को 38.5% से घटाकर 25% (वर्तमान में 18%) के स्तर पर लाना।
उत्तर देखें
बैंकों के वित्तीय पूर्व-अधिग्रहण (Financial Pre-emption) में कमी, वाणिज्यिक ऋण वितरण हेतु भारी तरलता की उपलब्धता और लाभप्रदता में वृद्धि।
ब्याज दरों का वि-नियमन (Deregulation of Interest Rates)
उत्तर देखें
जमा और अग्रिमों पर जटिल प्रशासनिक ब्याज नियंत्रण समाप्त; केवल बचत बैंक खाते और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र की चुनिंदा दरों को छोड़कर दरें बाजार-संचालित।
उत्तर देखें
बैंकों के बीच स्वस्थ मूल्य प्रतिस्पर्धा का विकास, निवल ब्याज मार्जिन (NIM) का पारदर्शी निर्धारण और जमाकर्ताओं को बाजार आधारित रिटर्न।
आय मान्यता एवं परिसंपत्ति वर्गीकरण (IRAC Norms)
उत्तर देखें
उपार्जन आधार (Accrual Basis) त्यागकर वास्तविक नकदी वसूली आधार पर आय दर्ज करना; परिसंपत्तियों का 4 श्रेणियों में वैज्ञानिक वर्गीकरण।
उत्तर देखें
छिपे हुए एनपीए बाहर आए, बैंकों की बैलेंस शीट में पारदर्शिता आई और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों से तालमेल स्थापित हुआ।
पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR / Basel Norms)
उत्तर देखें
जोखिम भारित परिसंपत्तियों के सापेक्ष न्यूनतम 8% (बाद में नरसिम्हम-II द्वारा 9-10%) पूंजी पर्याप्तता अनुपात बनाए रखना अनिवार्य।
उत्तर देखें
बैंकों की वित्तीय शोधन क्षमता और पूंजीगत आधार मजबूत हुआ; आर्थिक आघातों और भारी ऋण चूक को सहने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई।
निजी क्षेत्र के नए बैंकों को प्रवेश की अनुमति (1993)
उत्तर देखें
कठोर विनियामक शर्तों और न्यूनतम ₹100 करोड़ पूंजी के साथ एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, यूटीआई (एक्सिस) जैसे नए निजी बैंकों को लाइसेंस।
उत्तर देखें
बैंकिंग क्षेत्र में प्रौद्योगिकी, सीबीएस (कोर बैंकिंग), एटीएम, ग्राहक केंद्रित सेवाओं और कार्यकुशलता की अभूतपूर्व क्रांति।
ऋण वसूली अधिकरणों (DRT) की स्थापना (1993)
उत्तर देखें
RDDBFI अधिनियम 1993 के तहत बैंकों के ₹10 लाख (वर्तमान में ₹20 लाख) से अधिक के फंसे कर्जों की त्वरित न्यायिक वसूली हेतु समर्पित न्यायाधिकरण।
उत्तर देखें
पारंपरिक दीवानी अदालतों में वर्षों लंबी मुकदमेबाजी से मुक्ति; एनपीए की त्वरित वसूली प्रक्रिया को वैधानिक बल मिला।
शाखा लाइसेंसिंग नीति का उदारीकरण
उत्तर देखें
बैंकों को अपनी परिचालन आवश्यकताओं और लाभप्रदता के आधार पर नए वाणिज्यिक केंद्र खोलने और घाटे वाली शाखाओं को स्थानांतरित करने की स्वायत्तता।
उत्तर देखें
बैंकों की परिचालन लागत में कमी, शहरी व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शाखाओं का तर्कसंगत नेटवर्क और वाणिज्यिक व्यवहार्यता में सुधार।
प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (PSL) का युक्तिकरण
उत्तर देखें
कुल बैंक ऋण का 40% हिस्सा कृषि, एमएसएमई और कमजोर वर्गों हेतु अनिवार्य रखना, किंतु उप-लक्ष्यों और पात्रता श्रेणियों को लचीला व व्यावहारिक बनाना।
उत्तर देखें
सामाजिक बैंकिंग और वाणिज्यिक लाभप्रदता के बीच संतुलन; प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में खराब ऋणों (NPA) के संचय पर नियंत्रण।

One-Liner Questions

1969 में भारत में 14 प्रमुख निजी वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किस मुख्य उद्देश्य से किया गया था?
बैंकिंग सेवाओं का लोकतंत्रीकरण करना, बड़े औद्योगिक घरानों के एकाधिकार को तोड़ना और कृषि, लघु उद्योगों व ग्रामीण क्षेत्रों तक संस्थागत ऋण पहुंचाना।
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1980 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के दूसरे चरण में कितने निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था?
6 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों का (जिनकी कुल शुद्ध मांग एवं समय देनदारियां ₹200 करोड़ से अधिक थीं)।
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1991 से पूर्व भारतीय बैंकिंग प्रणाली की स्थिति को अर्थशास्त्री किस तकनीकी शब्द से वर्णित करते हैं?
'वित्तीय दमन' (Financial Repression), जहां राज्य कड़े प्रशासनिक नियंत्रणों के माध्यम से बैंकिंग संसाधनों का मनमाना दोहन करता था।
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अर्थशास्त्री रोनाल्ड मैकिनन और एडवर्ड शॉ के अनुसार 'वित्तीय दमन' का अर्थव्यवस्था पर क्या मुख्य प्रभाव पड़ता है?
वित्तीय मध्यस्थता कमजोर होती है, वास्तविक ब्याज दरें ऋणात्मक हो जाती हैं और उत्पादक निवेश हेतु पूंजी की गंभीर कमी हो जाती है।
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1991 से पूर्व बैंकों की निधियों के 'पूर्व-अधिग्रहण' (Pre-emption of Funds) का क्या अर्थ था?
अत्यधिक उच्च CRR और SLR के माध्यम से बैंकों की कुल जमाराशियों का आधे से अधिक हिस्सा (53.5% से अधिक) सरकार द्वारा कम ब्याज पर अपने घाटे की भरपाई हेतु ब्लॉक कर दिया जाना।
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1990-91 में सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) और नकद आरक्षित अनुपात (CRR) किस चरम स्तर पर पहुंच गए थे?
SLR लगभग 38.5% और CRR 15% (कुल पूर्व-अधिग्रहण 53.5%) के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया था।
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1991 से पूर्व SLR प्रतिभूतियों पर बैंकों को मिलने वाले प्रतिफल (Yield) की क्या स्थिति थी?
बाजार दरों से काफी कम प्रशासनिक ब्याज दर मिलती थी, जिससे बैंकों को सरकार को अनिवार्य उधार देने पर भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ता था।
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1991 से पूर्व भारत में ब्याज दर निर्धारण की क्या प्रणाली थी?
प्रशासित ब्याज दर व्यवस्था (Administered Interest Rate Regime), जहां बचत, सावधि जमा और ऋणों की ब्याज दरें बाजार मांग-आपूर्ति के बजाय RBI द्वारा जटिल तालिकाओं में तय होती थीं।
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प्रशासित ब्याज दर प्रणाली का बैंकों की लाभप्रदता पर क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ा?
जमा की लागत और ऋण पर प्रतिफल के बीच का अंतर (Spreads) संकुचित हो गया, जिससे बैंकों की परिचालन लाभप्रदता नगण्य रह गई।
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1980 के दशक में राजनीतिक दबाव में आयोजित होने वाले किन आयोजनों ने बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता को गंभीर क्षति पहुंचाई?
'ऋण मेले' (Loan Melas), जहां बिना किसी ऋण साख जांच या संपार्श्विक के राजनीतिक आधार पर ऋण बांटे गए और वसूली पूरी तरह ठप हो गई।
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1991 से पूर्व भारतीय बैंकों में परिसंपत्तियों की गुणवत्ता मापने हेतु कौन-सी अपारदर्शी प्रणाली प्रचलित थी?
'स्वास्थ्य कोड प्रणाली' (Health Code System - 1 से 8 श्रेणियों में), जिसमें बैंक खराब ऋणों को छुपाकर उन पर काल्पनिक ब्याज आय जोड़ते रहते थे।
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1991 से पूर्व बैंकों द्वारा अपनाई जाने वाली 'उपार्जन लेखांकन पद्धति' (Accrual Basis of Accounting) की मुख्य खामी क्या थी?
न मिले हुए और अनिश्चित ब्याज को भी बैंक अपनी आय के रूप में दर्ज कर लेते थे, जिससे घाटे में चल रहे बैंक भी कागजों पर भारी मुनाफा दिखाते थे।
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1990-91 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शुद्ध लाभप्रदता (Return on Assets - RoA) किस स्तर पर गिर गई थी?
मात्र 0.15% से भी कम (कई बड़े बैंक भारी वास्तविक घाटे में थे)।
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1991 से पूर्व बैंक शाखाओं के विस्तार के संबंध में क्या कठोर विनियामक नियम लागू था?
कठोर शाखा लाइसेंसिंग प्रणाली, जिसके तहत बैंक RBI की पूर्व-अनुमति के बिना कोई नई शाखा नहीं खोल सकते थे और उन्हें 4:1 अनुपात में ग्रामीण शाखाएं खोलनी अनिवार्य थीं।
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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अत्यधिक राजनीतिक और नौकरशाही हस्तक्षेप का बैंक प्रबंधन पर क्या असर हुआ?
व्यावसायिक स्वायत्तता समाप्त हो गई, ऋण आवंटन में क्रोनी-कैपिटलिज्म पनपा और ऋण जोखिम मूल्यांकन की जवाबदेही खत्म हो गई।
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1991 से पूर्व बैंकों के पास ग्राहकों को आकर्षित करने हेतु मूल्य प्रतिस्पर्धा (Price Competition) क्यों नहीं थी?
क्योंकि सभी बैंकों की जमा और ऋण दरें RBI द्वारा एक समान तय थीं और निजी क्षेत्र की उपस्थिति नगण्य थी।
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1991 के पूर्व भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहक सेवा की गुणवत्ता कैसी थी?
अत्यंत दयनीय और सुस्त, जिसमें कागजी लेजर प्रविष्टियां, चेक समाशोधन में हफ्तों की देरी और आधुनिक तकनीक का पूर्ण अभाव था।
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बैंकों द्वारा औद्योगिक क्षेत्र को दिए जाने वाले कार्यशील पूंजी ऋण पर 1991 से पूर्व किस समिति के कठोर मानदंड लागू थे?
टंडन समिति (1975) और चोरे समिति (1979) के मानदंड, जिन्होंने ऋण सीमा पर अत्यधिक प्रशासनिक प्रतिबंध लगा रखे थे।
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1991 से पूर्व प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (PSL) का राष्ट्रीय लक्ष्य कितना निर्धारित किया गया था?
कुल बैंक ऋण का 40% (कृषि, कमजोर वर्ग, छोटे निर्यातक आदि हेतु)।
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PSL लक्ष्यों की कठोरता और कमजोर वसूली तंत्र ने बैंकों के बही-खातों को कैसे प्रभावित किया?
प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में फंसे ऋणों (NPA) का अंबार लग गया, जिसकी भरपाई हेतु बैंकों के पास कोई पूंजीगत बफर उपलब्ध नहीं था।
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1991 के पूर्व भारतीय बैंकों की पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) की क्या स्थिति थी?
पूंजी आधार अत्यंत क्षीण था; बैंकों के पास जोखिम भारित परिसंपत्तियों के सापेक्ष मात्र 1% से 2% की ही वास्तविक पूंजी उपलब्ध थी।
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1991 से पूर्व भारत में ऋणों की न्यायिक वसूली में कौन-सी सबसे बड़ी विधिक बाधा थी?
समर्पित वसूली कानून का अभाव; बैंकों को वसूली हेतु पारंपरिक दीवानी अदालतों में जाना पड़ता था जहां मुकदमों के निपटारे में 15 से 20 वर्ष लग जाते थे।
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क्या 1991 से पूर्व बैंकों के पास गिरवी रखी गई संपार्श्विक संपत्ति (Collateral) को सीधे जब्त करने का अधिकार था?
नहीं, अदालत के आदेश के बिना बैंक किसी भी बंधक संपत्ति को न तो जब्त कर सकते थे और न ही बेच सकते थे।
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1980 के दशक के अंत में भारतीय बैंकिंग प्रणाली में 'सिस्टमैटिक रिस्क' (Systemic Risk) का मुख्य कारण क्या था?
सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकांश बैंकों का दिवालियापन के कगार पर होना, यदि अंतरराष्ट्रीय लेखांकन मानकों से उनका मूल्यांकन किया जाता।
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1991 के पूर्व बैंक कर्मचारियों के संघों (Trade Unions) का बैंकों के कम्प्यूटरीकरण के प्रति क्या रुख था?
कड़ा विरोध; यूनियनों का मानना था कि कंप्यूटर आने से नौकरियों में भारी कटौती होगी, जिससे बैंकों का तकनीकी आधुनिकीकरण दशकों तक रुका रहा।
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बैंकों में कम्प्यूटरीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी के क्रमिक उपयोग हेतु 1980 के दशक में किस समिति ने संस्तुति दी थी?
डॉ. सी. रंगराजन समिति (1984 एवं 1989)।
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1991 के पूर्व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) की वित्तीय स्थिति कैसी थी?
अत्यंत दयनीय; लगभग सभी आरआरबी भारी संचित घाटे में थे और उनकी ऋण वसूली दर 40% से भी कम थी।
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1991 के आर्थिक संकट ने बैंकिंग सुधारों को अपरिहार्य क्यों बना दिया?
क्योंकि एक पंगु, बीमार और पूंजी-विहीन बैंकिंग प्रणाली खुली बाजार अर्थव्यवस्था और विदेशी व्यापार को वित्तपोषित करने में पूरी तरह असमर्थ थी।
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बैंकिंग सुधारों का प्राथमिक उद्देश्य क्या तय किया गया?
बैंकों को वित्तीय रूप से व्यावहारिक, परिचालन रूप से दक्ष, स्वायत्त और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धी बनाना।
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अगस्त 1991 में भारत सरकार द्वारा गठित ऐतिहासिक 'वित्तीय प्रणाली समिति' (CFS) के अध्यक्ष कौन थे?
मैदावोलू नरसिम्हम (M. Narasimham), जो भारतीय रिजर्व बैंक के 13वें गवर्नर रह चुके थे।
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नरसिम्हम समिति-I ने अपनी युगांतरकारी रिपोर्ट सरकार को कब सौंपी थी?
नवंबर 1991 में।
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नरसिम्हम समिति-I का मुख्य मार्गदर्शक दर्शन क्या था?
बैंकिंग प्रणाली को राजनीतिक एवं प्रशासनिक नियंत्रणों से मुक्त कर व्यावसायिक स्वायत्तता, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन प्रदान करना।
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नरसिम्हम समिति-I ने वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) को 38.5% से घटाकर कितने प्रतिशत करने की सिफारिश की थी?
चरणबद्ध तरीके से घटाकर 25% पर लाने की संस्तुति।
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वर्तमान समय में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित SLR की दर लगभग कितनी है?
18.0%।
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नरसिम्हम समिति-I ने नकद आरक्षित अनुपात (CRR) के संबंध में क्या संस्तुति दी थी?
CRR के अत्यधिक उच्च स्तर को घटाकर 3% से 5% के स्तर पर लाना, ताकि बैंकों के पास उत्पादक ऋण देने हेतु तरलता बचे।
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वर्तमान समय में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित CRR की दर लगभग कितनी है?
4.50% (4% से 4.5% के दायरे में)।
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नरसिम्हम समिति-I ने ब्याज दरों के संबंध में क्या क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा?
ब्याज दरों का पूर्ण वि-नियमन (Deregulation); बैंकों को अपने जोखिम मूल्यांकन के आधार पर जमा और अग्रिम दरें तय करने की छूट देना।
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नरसिम्हम समिति-I ने प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (PSL) के अनिवार्य 40% लक्ष्य के संदर्भ में क्या विवादास्पद संस्तुति की थी जिसे सरकार ने स्वीकार नहीं किया?
PSL लक्ष्य को 40% से घटाकर 10% करने की सिफारिश की थी (सामाजिक-राजनीतिक कारणों से सरकार ने इसे खारिज कर 40% ही बनाए रखा)।
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नरसिम्हम समिति-I ने अंतरराष्ट्रीय बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के किन मानकों को भारतीय बैंकों पर लागू करने की सिफारिश की?
बासेल-I पूंजी पर्याप्तता मानदंड (Basel-I Capital Adequacy Norms), जिसके तहत न्यूनतम 8% जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (CRAR) तय किया गया।
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नरसिम्हम समिति-I ने ऋणों की वसूली हेतु किस विशेष न्यायिक तंत्र की स्थापना की सिफारिश की?
विशेष ऋण वसूली अधिकरणों (Debt Recovery Tribunals - DRTs) की स्थापना की।
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नरसिम्हम समिति-I ने भारतीय बैंकिंग की भविष्य की संरचना हेतु किस त्रि-स्तरीय मॉडल का प्रस्ताव दिया था?
1. अंतरराष्ट्रीय स्तर के 3-4 बड़े बैंक, 2. राष्ट्रीय स्तर के 8-10 बैंक, और 3. स्थानीय व क्षेत्रीय स्तर के बैंक (RRBs आदि)।
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नरसिम्हम समिति-I की सिफारिश पर भारतीय रिजर्व बैंक ने निजी क्षेत्र के नए बैंकों को लाइसेंस देने हेतु दिशा-निर्देश कब जारी किए?
जनवरी 1993 में।
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1993 के दिशा-निर्देशों के तहत स्थापित होने वाले भारत के पहले नए युग के निजी बैंक (New Private Banks) कौन-से थे?
UTI बैंक (वर्तमान एक्सिस बैंक), HDFC बैंक, ICICI बैंक और इंडसइंड बैंक।
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नरसिम्हम समिति-I ने बैंकों के पर्यवेक्षण (Bank Supervision) को मजबूत करने हेतु RBI के तहत किस निकाय के गठन की सिफारिश की?
वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्ड (Board for Financial Supervision - BFS), जिसकी स्थापना 1994 में RBI के अधीन की गई।
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दिसंबर 1997 में गठित 'बैंकिंग क्षेत्र सुधार समिति' (नरसिम्हम समिति-II) ने अपनी रिपोर्ट कब प्रस्तुत की?
अप्रैल 1998 में।
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नरसिम्हम समिति-II का प्राथमिक फोकस किन मुद्दों पर था?
बैंकिंग प्रणाली का सुदृढ़ीकरण, संरचनात्मक विलय, एनपीए में भारी कमी, आईटी एकीकरण और विनियामक स्वतंत्रता।
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नरसिम्हम समिति-II ने पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) को 8% से बढ़ाकर कितने प्रतिशत करने की सिफारिश की?
वर्ष 2000 तक 9% और बाद में 10% करने की सिफारिश।
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नरसिम्हम समिति-II ने कमजोर और बीमार बैंकों (Weak Banks) के संकट को टालने हेतु किस अनूठी अवधारणा की वकालत की?
'संकीर्ण बैंकिंग' (Narrow Banking), जिसके तहत कमजोर बैंकों को जोखिम भरे वाणिज्यिक ऋण देने से रोककर केवल जोखिम-मुक्त सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की अनुमति दी जाए।
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नरसिम्हम समिति-II ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी घटाकर कितने प्रतिशत करने की संस्तुति दी थी?
घटाकर 33% तक करने की सिफारिश।
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नरसिम्हम समिति-II ने बैंक विलय (Bank Mergers) के संबंध में क्या स्पष्ट सिद्धांत प्रतिपादित किया था?
केवल दो मजबूत बैंकों का विलय होना चाहिए; किसी मजबूत बैंक का किसी कमजोर/बीमार बैंक के साथ जबरन विलय कभी नहीं किया जाना चाहिए।
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नरसिम्हम समिति-II ने एनपीए के त्वरित समाधान हेतु किस विशेष परिसंपत्ति पुनर्गठन तंत्र का सुझाव दिया था?
परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों (Asset Reconstruction Companies - ARCs) की स्थापना का।
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नरसिम्हम समिति-II ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की दोहरी भूमिका पर क्या आपत्ति उठाई थी?
RBI एक ही समय में बैंकों का विनियामक (Regulator) और सार्वजनिक बैंकों (जैसे SBI) का मालिक (Owner) नहीं हो सकता; स्वामित्व सरकार को स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
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नरसिम्हम समिति-II की सिफारिश पर SBI में RBI की संपूर्ण शेयरधारिता केंद्र सरकार को कब स्थानांतरित की गई?
वर्ष 2007-08 में (RBI ने SBI में अपनी 59.7% हिस्सेदारी सरकार को बेच दी)।
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नरसिम्हम समिति ने बैंकों के निदेशकमंडल (Board of Directors) के संबंध में क्या सुधार सुझाए?
राजनीतिक नियुक्तियों पर पूर्ण रोक, स्वतंत्र व पेशेवर निदेशकों की नियुक्ति और प्रबंधन को परिचालन स्वायत्तता।
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नरसिम्हम समिति ने बैंकों के शाखा लाइसेंसिंग नियंत्रण के संबंध में क्या सुझाव दिया?
शाखा लाइसेंसिंग को पूरी तरह समाप्त करना; सुदृढ़ बैंकों को अपनी व्यावसायिक आवश्यकतानुसार कहीं भी शाखा खोलने की आजादी देना।
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नरसिम्हम समिति-II ने विदेशी बैंकों के भारत में प्रवेश के संबंध में क्या नीतिगत सिफारिश की?
विदेशी बैंकों को पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों (WOS) के रूप में कार्य करने और भारतीय निजी बैंकों में हिस्सेदारी लेने की अनुमति देना।
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नरसिम्हम समितियों की सिफारिशों को भारतीय बैंकिंग इतिहास में किस रूप में जाना जाता है?
भारतीय बैंकिंग का मैग्ना कार्टा (Magna Carta of Indian Banking), जिसने भारतीय बैंकों को आधुनिक, डिजिटल और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढाला।
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भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 'गैर-निष्पादित परिसंपत्ति' (Non-Performing Asset - NPA) की मानक परिभाषा क्या है?
कोई भी अग्रिम या ऋण जिस पर ब्याज या मूलधन की किस्त की देय तिथि के बाद लगातार 90 दिनों तक भुगतान न किया गया हो (90-day overdue norm)।
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भारत में एनपीए की पहचान हेतु 90 दिनों का अतिदेय मानदंड (90-day Norm) औपचारिक रूप से कब लागू किया गया?
31 मार्च 2004 से (इससे पूर्व 1993 में यह 180 दिन और 1992 में 360 दिन था)।
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कृषि ऋणों (Agricultural Loans) के मामले में कोई ऋण एनपीए कब घोषित किया जाता है?
अल्पकालिक मौसमी फसलों के लिए 2 फसल मौसमों (Crop Seasons) तक और दीर्घकालिक फसलों के लिए 1 फसल मौसम तक अतिदेय रहने पर।
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सकल एनपीए (Gross NPA - GNPA) से क्या अभिप्राय है?
बैंक द्वारा दिए गए कुल ऋणों में से उन सभी ऋणों का कुल जोड़ जिन्हें एनपीए के रूप में वर्गीकृत किया गया है, बिना किसी प्रोविजनिंग या कटौती के।
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सकल एनपीए अनुपात (Gross NPA Ratio) ज्ञात करने का सूत्र क्या है?
(कुल सकल एनपीए / कुल सकल अग्रिम) × 100।
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शुद्ध एनपीए (Net NPA - NNPA) की गणना कैसे की जाती है?
सकल एनपीए में से बैंक द्वारा अलग रखे गए कुल प्रोविजन (Provisioning) और अन्य स्वीकार्य कटौतियों को घटाकर (NNPA = GNPA - Provisions)।
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शुद्ध एनपीए (Net NPA) बैंक की वित्तीय सेहत का सकल एनपीए से अधिक सटीक संकेतक क्यों माना जाता है?
क्योंकि यह बैंक की पूंजी पर खराब ऋणों के उस वास्तविक जोखिम को दर्शाता है जिसकी भरपाई हेतु बैंक ने पहले से कोई वित्तीय सुरक्षा बफर नहीं बनाया है।
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'विलफुल डिफॉल्टर' (Willful Defaulter / इरादतन चूककर्ता) की कानूनी परिभाषा क्या है?
ऐसा उधारकर्ता जिसके पास ऋण चुकाने की पूर्ण वित्तीय क्षमता होने के बावजूद वह जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाता, अथवा ऋण राशि का उपयोग उस उद्देश्य से इतर अन्यत्र डायवर्ट/गबन कर देता है।
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विल्फुल डिफॉल्टर्स पर RBI के नियमों के अनुसार क्या दंडात्मक पाबंदियां लगाई जाती हैं?
वे 5 वर्षों तक किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान से नया ऋण नहीं ले सकते, किसी नई कंपनी के बोर्ड में निदेशक नहीं बन सकते और उनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज होता है।
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'ऋणों की सदाबहार व्यवस्था' (Evergreening of Loans) का बैंकिंग में क्या अर्थ है?
किसी संकटग्रस्त उधारकर्ता को पुराने डिफॉल्ट से बचाने हेतु गुपचुप तरीके से नया ऋण स्वीकृत करना, ताकि वह पुराने ऋण का ब्याज चुका सके और खाता एनपीए दर्ज होने से बच जाए।
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भारतीय अर्थव्यवस्था में 'ट्विन बैलेंस शीट समस्या' (Twin Balance Sheet Problem) से क्या आशय था?
एक ही समय में अत्यधिक कर्ज में दबे कॉर्पोरेट घरानों की बैलेंस शीट का बिगड़ना और उन पर दिए गए खराब ऋणों के कारण सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट का एनपीए से पंगु हो जाना।
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वर्ष 2015 में तत्कालीन RBI गवर्नर डॉ. रघुराम राजन द्वारा प्रारंभ किए गए 'एसेट क्वालिटी रिव्यू' (AQR) का क्या उद्देश्य था?
बैंकों द्वारा बही-खातों में छिपाए गए और रिस्ट्रक्चर किए गए फंसे कर्जों की गहरी फोरेंसिक जांच कर वास्तविक एनपीए को जबरन उजागर करवाना।
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AQR (2015-16) के क्रियान्वयन का भारतीय बैंकिंग क्षेत्र पर क्या तात्कालिक प्रभाव पड़ा?
सार्वजनिक बैंकों का सकल एनपीए 2015 के ~5% से उछलकर मार्च 2018 में लगभग 11.5% (₹10 लाख करोड़ से अधिक) के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया और बैंकों को भारी घाटा हुआ।
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एनपीए बढ़ने से बैंकों के 'निवल ब्याज मार्जिन' (Net Interest Margin - NIM) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
NIM में भारी गिरावट आती है; क्योंकि फंसे कर्जों पर ब्याज आय शून्य हो जाती है जबकि बैंक को अपनी जमाराशियों पर लगातार ब्याज चुकाना पड़ता है।
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एनपीए का आम ईमानदार और अच्छे उधारकर्ताओं (Creditworthy Borrowers) पर क्या अप्रत्यक्ष प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है?
बैंक अपने एनपीए के नुकसान की भरपाई हेतु ऋणों पर ब्याज दरें (Spreads) बढ़ा देते हैं, जिससे अच्छे ग्राहकों हेतु पूंजी महंगी हो जाती है।
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'क्रेडिट फ्रीज' (Credit Freeze / Risk Aversion) की स्थिति कब उत्पन्न होती है?
जब उच्च एनपीए के डर और सतर्कता के कारण बैंक नई परियोजनाओं और निजी उद्योग को ऋण देना लगभग बंद कर देते हैं, जिससे आर्थिक विकास सुस्त पड़ जाता है।
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2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद भारत में भारी एनपीए संचय का मुख्य बाह्य व नीतिगत कारण क्या था?
बुनियादी ढांचा, इस्पात और बिजली क्षेत्रों में अनियंत्रित ऋण वितरण, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण विवाद, पर्यावरणीय मंजूरियों में अड़चनें और कोयला ब्लॉक रद्दीकरण से परियोजनाएं ठप हो गईं।
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कॉर्पोरेट ऋण पुनर्गठन (Corporate Debt Restructuring - CDR) प्रणाली की सबसे बड़ी विफलता क्या रही?
बैंकों ने इसका दुरुपयोग एनपीए छुपाने और लोन एवरग्रीनिंग के औजार के रूप में किया, जिससे 2014 तक अधिकांश पुनर्गठित ऋण अंततः विशाल एनपीए में बदल गए।
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एनपीए की समस्या से निपटने हेतु केंद्र सरकार द्वारा 2015 में घोषित सात-सूत्रीय सुधार योजना का नाम क्या था?
'इंद्रधनुष' (Indradhanush Plan); जिसमें नियुक्तियां, बैंक बोर्ड ब्यूरो, पूंजीकरण, तनाव मुक्ति, सशक्तिकरण, जवाबदेही और सुधार शामिल थे।
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एनपीए के दबाव से निपटने हेतु सरकार द्वारा जारी 'पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड' (Recapitalization Bonds) क्या हैं?
विशेष सरकारी बॉन्ड जिन्हें बैंक खरीदते हैं और सरकार उस धन का उपयोग बैंकों में नई इक्विटी पूंजी डालकर उनकी शोधन क्षमता बहाल करने हेतु करती है।
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IRAC का पूर्ण रूप (Full Form) क्या है?
आय मान्यता और परिसंपत्ति वर्गीकरण (Income Recognition and Asset Classification)।
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भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा IRAC दिशा-निर्देश सर्वप्रथम किस वर्ष लागू किए गए थे?
वित्तीय वर्ष 1992-93 में (नरसिम्हम समिति-I की सिफारिशों के आधार पर)।
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IRAC मानदंडों के तहत आय मान्यता (Income Recognition) का स्वर्ण नियम क्या है?
एनपीए खातों पर ब्याज आय को केवल तभी बही-खातों में आय दर्ज किया जा सकता है जब वह वास्तव में नकद में वसूल (Cash Realization) हो चुकी हो, उपार्जन (Accrual) के आधार पर कभी नहीं।
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यदि किसी मानक खाते (Standard Asset) को चालू वित्तीय वर्ष में एनपीए घोषित किया जाता है, तो पिछले न मिले ब्याज का क्या होगा?
पिछले तिमाहियों में दर्ज किए गए किंतु वास्तव में अप्राप्त ब्याज को बैंक को अपनी चालू लाभ-हानि खाते में रिवर्स (Reverse / बट्टे खाते) करना पड़ता है।
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IRAC मानदंडों के अनुसार बैंकों की परिसंपत्तियों (ऋणों) को मुख्य रूप से किन दो व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया जाता है?
1. निष्पादित परिसंपत्तियां / मानक परिसंपत्तियां (Performing / Standard Assets), और 2. गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (Non-Performing Assets - NPAs)।
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'मानक परिसंपत्ति' (Standard Asset) की क्या पहचान है?
ऐसा ऋण खाता जिसमें मूलधन और ब्याज का नियमित भुगतान हो रहा हो और जिसमें चूक (Default) का कोई सामान्य से अधिक जोखिम मौजूद न हो।
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IRAC मानदंडों के अंतर्गत गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) को किन तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है?
1. उप-मानक परिसंपत्तियां (Sub-Standard Assets), 2. संदिग्ध परिसंपत्तियां (Doubtful Assets), और 3. हानि परिसंपत्तियां (Loss Assets)।
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'उप-मानक परिसंपत्ति' (Sub-Standard Asset) किसे कहा जाता है?
ऐसा ऋण खाता जो 12 महीने या उससे कम अवधि तक लगातार एनपीए (NPA) बना रहा हो।
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'संदिग्ध परिसंपत्ति' (Doubtful Asset) की क्या परिभाषा है?
ऐसा ऋण खाता जो 12 महीने से अधिक अवधि तक 'उप-मानक' (Sub-Standard) श्रेणी में बना रहा हो।
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संदिग्ध परिसंपत्तियों (Doubtful Assets) को जोखिम और समय के आधार पर किन तीन उप-श्रेणियों में बांटा जाता है?
1. D1 (1 वर्ष तक संदिग्ध), 2. D2 (1 से 3 वर्ष तक संदिग्ध), और 3. D3 (3 वर्ष से अधिक समय तक संदिग्ध)।
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'हानि परिसंपत्ति' (Loss Asset) की क्या तकनीकी परिभाषा है?
ऐसी परिसंपत्ति जिसे बैंक, उसके आंतरिक/बाहरी लेखा परीक्षकों या RBI निरीक्षकों द्वारा पूर्णतः अप्राप्य (Uncollectible) मान लिया गया हो, भले ही उसे बही-खातों से औपचारिक रूप से पूरी तरह बट्टे खाते (Write-off) न डाला गया हो।
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ऋण खातों में शुरुआती तनाव को पकड़ने हेतु RBI द्वारा शुरू किए गए 'विशेष उल्लेख खातों' (Special Mention Accounts - SMA) की क्या प्रणाली है?
एनपीए बनने से पूर्व (1 से 90 दिन के भीतर) अतिदेय ऋणों की प्रारंभिक पहचान और अग्रिम चेतावनी प्रणाली।
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SMA-0 श्रेणी के अंतर्गत कौन-से ऋण खाते आते हैं?
वे खाते जिनमें मूलधन या ब्याज 1 से 30 दिन तक अतिदेय (Overdue) हो, अथवा जिनमें तनाव के अन्य प्रारंभिक लक्षण दिख रहे हों।
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SMA-1 श्रेणी की समयावधि क्या है?
वे ऋण खाते जिनमें भुगतान 31 से 60 दिन तक लगातार अतिदेय रहता है।
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SMA-2 श्रेणी की समयावधि क्या है?
वे ऋण खाते जिनमें भुगतान 61 से 90 दिन तक लगातार अतिदेय रहता है (एनपीए बनने से ठीक पहले का अंतिम चरण)।
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बैंकिंग में 'प्रोविजनिंग' (Provisioning) से क्या तात्पर्य है?
संभावित या वास्तविक ऋण हानियों की भरपाई हेतु बैंक द्वारा अपने परिचालन लाभ में से एक निश्चित राशि को अलग सुरक्षित कोष में रखना।
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क्या बैंकों को पूरी तरह नियमित 'मानक परिसंपत्तियों' (Standard Assets) पर भी सामान्य प्रोविजनिंग करनी पड़ती है?
हाँ; सामान्य मानक अग्रिमों पर 0.40%, कृषि व लघु उद्योगों पर 0.25%, और वाणिज्यिक रियल एस्टेट (CRE) ऋणों पर 1.0% का सामान्य प्रोविजन अनिवार्य है।
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उप-मानक परिसंपत्तियों (Sub-Standard Assets) पर सुरक्षित ऋणों (Secured Portion) हेतु न्यूनतम कितनी प्रोविजनिंग अनिवार्य है?
कुल बकाया राशि का 15%।
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उप-मानक परिसंपत्तियों के असुरक्षित हिस्से (Unsecured Portion) पर प्रोविजनिंग दर क्या होती है?
कुल असुरक्षित राशि का 25% (बुनियादी ढांचा ऋणों में 20%)।
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D1 श्रेणी की संदिग्ध परिसंपत्तियों (1 वर्ष तक Doubtful) के सुरक्षित हिस्से पर कितना प्रोविजन अनिवार्य है?
सुरक्षित हिस्से का 25% (तथा असुरक्षित हिस्से का 100%)।
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D2 श्रेणी की संदिग्ध परिसंपत्तियों (1 से 3 वर्ष तक Doubtful) के सुरक्षित हिस्से पर प्रोविजनिंग दर क्या है?
सुरक्षित हिस्से का 40% (तथा असुरक्षित हिस्से का 100%)।
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D3 श्रेणी की संदिग्ध परिसंपत्तियों (3 वर्ष से अधिक Doubtful) पर अनिवार्य प्रोविजनिंग कितनी होती है?
संपूर्ण बकाया राशि (सुरक्षित और असुरक्षित दोनों) पर 100% प्रोविजनिंग।
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हानि परिसंपत्तियों (Loss Assets) के लिए RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार कितनी प्रोविजनिंग आवश्यक है?
शत-प्रतिशत (100%) प्रोविजनिंग अनिवार्य है, अथवा उसे बही-खातों से तुरंत पूरी तरह अपलिखित (Write-off) करना होता है।
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'प्रोविजन कवरेज अनुपात' (Provisioning Coverage Ratio - PCR) की क्या परिभाषा है?
बैंक द्वारा अपने कुल सकल एनपीए के सापेक्ष बनाए गए कुल संचयी प्रोविजन का प्रतिशत (Total Provisions / Gross NPA × 100)।
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भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार वाणिज्यिक बैंकों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित PCR बेंचमार्क क्या माना जाता है?
कम से कम 70% या उससे अधिक (वर्तमान में अधिकांश मजबूत भारतीय बैंकों का PCR 75% से 80% पार कर चुका है)।
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उच्च प्रोविजन कवरेज अनुपात (High PCR) बैंक की वित्तीय सुरक्षा को कैसे बढ़ाता है?
यदि भविष्य में फंसे ऋणों की बिल्कुल भी वसूली न हो, तब भी बैंक की पूंजी और इक्विटी सुरक्षित रहती है क्योंकि नुकसान का पूरा प्रावधान पहले ही किया जा चुका होता है।
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बैंकिंग में 'राइट-ऑफ' (Technical / Prudential Write-off) और 'वेवर' (Loan Waiver / कर्ज माफी) में क्या बुनियादी अंतर है?
राइट-ऑफ केवल बैलेंस शीट स्वच्छ करने की एक लेखांकन प्रक्रिया है जिसमें कानूनी वसूली जारी रहती है, जबकि लोन वेवर में कर्जदार का कर्ज पूरी तरह माफ कर दिया जाता है और कोई वसूली नहीं होती।
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केंद्रीय बैंक द्वारा स्थापित 'CRILC' का पूर्ण रूप क्या है?
केंद्रीय बड़े ऋण सूचना भंडार (Central Repository of Information on Large Credits)।
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CRILC प्रणाली के तहत बैंकों को कितने रुपये या उससे अधिक के सभी बड़े उधारकर्ताओं के ऋण खातों की स्थिति RBI को रिपोर्ट करनी होती है?
₹5 करोड़ और उससे अधिक के कुल फंड-आधारित व गैर-फंड आधारित एक्सपोजर वाले खातों की।
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SARFAESI अधिनियम किस वर्ष संसद द्वारा पारित किया गया था?
वर्ष 2002 में (वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम)।
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SARFAESI अधिनियम 2002 ने बैंकों को कौन-सी असाधारण शक्ति प्रदान की?
बिना किसी अदालत या न्यायाधिकरण के हस्तक्षेप के डिफॉल्ट होने पर सुरक्षित बंधक संपत्तियों को सीधे अपने कब्जे में लेने और नीलामी द्वारा बेचने का वैधानिक अधिकार।
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SARFAESI अधिनियम किन संपत्तियों पर लागू नहीं होता?
कृषि भूमि (Agricultural Land) पर तथा ₹1 लाख से कम के बकाया ऋणों या जहाँ बकाया राशि मूलधन और ब्याज के 20% से कम बची हो।
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SARFAESI अधिनियम के तहत बंधक संपत्ति पर कब्जा करने से पूर्व बैंक को उधारकर्ता को कितने दिनों का वैधानिक नोटिस देना अनिवार्य है?
60 दिनों का मांग नोटिस (Demand Notice under Section 13(2))।
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भारत में पहली परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी (ARC) कौन-सी थी और कब स्थापित हुई?
ARCIL (Asset Reconstruction Company of India Limited), वर्ष 2002-03 में।
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ARCs बैंकों से खराब ऋणों को खरीदकर किस रूप में भुगतान करती हैं?
नकद (Cash) और सुरक्षा रसीदों (Security Receipts - SRs) के संयोजन में।
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ऋण समाधान में तेजी लाने हेतु वर्ष 2016 में किस ऐतिहासिक कानून को लागू किया गया जिसने भारत के कॉर्पोरेट ऋण परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया?
दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code - IBC, 2016)।
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IBC 2016 के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने हेतु कंपनियों के मामलों की सुनवाई कौन-सा न्यायाधिकरण करता है?
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (National Company Law Tribunal - NCLT)।
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IBC 2016 ने ऋण संस्कृति में 'उधारकर्ता के नियंत्रण' (Debtor in Control) को बदलकर किस मॉडल में स्थापित किया?
'लेनदारों के नियंत्रण' (Creditors in Control) मॉडल में, जहां डिफॉल्ट होते ही कंपनी का प्रबंधन प्रमोटर से छिनकर रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) के हाथ चला जाता है।
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IBC 2016 के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) को पूरा करने की अधिकतम कानूनी समय-सीमा क्या निर्धारित है?
180 दिन (जिसे 90 दिन और बढ़ाया जा सकता है) तथा मुकदमों सहित अधिकतम 330 दिन।
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भारतीय बैड बैंक (Bad Bank) के रूप में 2021 में किस दोहरी संरचना का गठन किया गया?
NARCL (राष्ट्रीय परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी लिमिटेड) और IDRCL (भारत ऋण समाधान कंपनी लिमिटेड)।
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NARCL द्वारा बैंकों से अधिग्रहित किए जाने वाले खराब ऋणों के भुगतान में क्या अनुपात तय है?
15% नकद (Cash) तथा 85% सरकार द्वारा गारंटीकृत सुरक्षा रसीदें (Security Receipts)।
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केंद्र सरकार ने NARCL द्वारा जारी की जाने वाली सुरक्षा रसीदों (SRs) के भुगतान हेतु कितनी संप्रभु गारंटी स्वीकृत की है?
₹30,600 करोड़ की संप्रभु गारंटी (5 वर्षों की अवधि हेतु)।
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आरबीआई द्वारा कमजोर और संकटग्रस्त बैंकों के परिचालन सुधार हेतु लागू 'त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई' (PCA) ढांचा क्या है?
प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (Prompt Corrective Action - PCA Framework), जो CRAR, शुद्ध एनपीए और लाभप्रदता के पूर्व-निर्धारित ट्रिगर्स टूटने पर बैंक के नए ऋण देने, लाभांश बांटने और शाखा विस्तार पर प्रतिबंध लगाता है।
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PCA ढांचे के तहत बैंकों की वित्तीय स्थिति की निगरानी हेतु किन तीन प्राथमिक वित्तीय पैमानों (Financial Metrics) का उपयोग किया जाता है?
1. पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR/CET-1), 2. शुद्ध एनपीए अनुपात (NNPA), और 3. उत्तोलन अनुपात (Leverage Ratio)।
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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शीर्ष प्रबंधन और निदेशकों के चयन में पारदर्शिता लाने हेतु 2016 में पी. जे. नायक समिति की सिफारिश पर क्या स्थापित किया गया था?
बैंक बोर्ड ब्यूरो (Banks Board Bureau - BBB), जिसे 2022 में 'वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो' (FSIB) के रूप में पुनर्गठित किया गया।
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वर्ष 2019-20 में 10 बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का 4 बड़े बैंकों में मेगा-विलय (Mega Merger) करने का मुख्य आर्थिक औचित्य क्या था?
पैमाने की मितव्ययिताएं (Economies of Scale) हासिल करना, बैलेंस शीट को मजबूत करना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बड़े राष्ट्रीय बैंक तैयार करना।
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मेगा-विलय के उपरांत भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) की कुल संख्या घटकर कितनी रह गई है?
कुल 12 बैंक (SBI सहित)।
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IRAC मानदंडों के सख्त अनुपालन और दिवाला संहिता (IBC) के संयुक्त प्रभाव से 2018 के 11.5% के चरम स्तर से मार्च 2024-2026 तक भारतीय बैंकों का सकल एनपीए गिरकर किस स्तर पर आ गया है?
लगभग 2.8% से 3.0% के दशक के ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर, और शुद्ध एनपीए 0.6% से 0.8% के अत्यंत सुरक्षित स्तर पर।
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ऋण सूचना कंपनियों (CICs जैसे CIBIL, Experian) का एनपीए नियंत्रण में क्या महत्व है?
यह उधारकर्ताओं के क्रेडिट इतिहास का व्यापक रिकॉर्ड उपलब्ध कराती हैं, जिससे बैंकों को ऋण स्वीकृति से पूर्व डिफ़ॉल्ट के जोखिम का सटीक आकलन करने में मदद मिलती है।
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छोटे मूल्य के विवादों में बिना अदालत जाए बैंकों के फंसे कर्जों के त्वरित समझौते हेतु कौन-सा मंच अत्यंत लोकप्रिय है?
लोक अदालतें (Lok Adalats - ₹20 लाख तक के ऋणों हेतु)।
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बैंकिंग लोकपाल योजना (Banking Ombudsman Scheme) को एकीकृत कर 2021 में किस नए रूप में लागू किया गया?
भारतीय रिजर्व बैंक - एकीकृत लोकपाल योजना 2021 (Reserve Bank - Integrated Ombudsman Scheme)।
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बैंकिंग क्षेत्र में 'सदाबहार सुधारों' (Continuous Reforms) का दीर्घकालिक समष्टिगत लक्ष्य क्या है?
भारतीय बैंकिंग प्रणाली को इतना सुदृढ़, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाना कि वह बिना किसी एनपीए संकट के देश की 5 ट्रिलियन से 10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की विशाल ऋण आवश्यकताओं को सुरक्षित रूप से वित्तपोषित कर सके।
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