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भारत में आर्थिक नियोजन Part 2

पंचवर्षीय योजनाओं की भूमिका, प्रमुख उद्देश्य, कृषि और उद्योग की बदलती प्राथमिकताएं तथा अंतर्संबंधों का गहन समष्टिगत विश्लेषण

Quick Reference
महत्वपूर्ण तथ्य एवं योगदान
भारत में आर्थिक नियोजन Part 2
योजना/नीतिप्रमुख उद्देश्यक्षेत्रीय/आर्थिक प्रभाव
प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56)
उत्तर देखें
कृषि विकास, वृहद बहुउद्देशीय सिंचाई नेटवर्क (भाखड़ा नांगल, डीवीसी, हीराकुंड) और युद्धोत्तर व विभाजन जनित खाद्यान्न संकट का समाधान।
उत्तर देखें
खाद्यान्न उत्पादन में 36% की ऐतिहासिक छलांग, मूल्य स्थिरता की बहाली और 2.1% के लक्ष्य के सापेक्ष 3.6% की उत्साहवर्धक वृद्धि दर।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61)
उत्तर देखें
नेहरू-महालनोबिस रणनीति के तहत बुनियादी और भारी पूंजीगत उद्योगों (Heavy Capital Goods) का त्वरित सार्वजनिक विकास।
उत्तर देखें
भिलाई, दुर्गापुर व राउरकेला इस्पात कारखानों की स्थापना; बुनियादी औद्योगिक ढांचा तैयार किंतु कृषि की सापेक्ष उपेक्षा से मुद्रास्फीति व खाद्य संकट का आरंभ।
तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-66)
उत्तर देखें
कृषि और भारी उद्योग दोनों में संतुलित संवृद्धि के माध्यम से आत्म-पोषक और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था (Self-Sustaining Economy) का निर्माण।
उत्तर देखें
1962 व 1965 के युद्धों और 1965-66 के भीषण सूखे से योजना बुरी तरह लड़खड़ाई; PL-480 खाद्यान्न आयातों पर भारी निर्भरता और 1966 में अवमूल्यन।
योजना अवकाश व चतुर्थ योजना (1966-74)
उत्तर देखें
हरित क्रांति तकनीक का सघन प्रसार, स्थिरता के साथ विकास और खाद्यान्न सुरक्षा में विदेशी निर्भरता की पूर्ण समाप्ति।
उत्तर देखें
गेहूं-चावल उत्पादन में क्रांतिकारी उछाल; भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना; 1969 में 14 बड़े बैंकों के राष्ट्रीयकरण से ग्रामीण ऋण प्रवाह में तेजी।
वकील-ब्रह्मानंद मजदूरी-वस्तु मॉडल (1956)
उत्तर देखें
महालनोबिस भारी उद्योग मॉडल के स्थान पर उपभोक्ता/मजदूरी वस्तुओं (खाद्यान्न, कपड़ा) और कृषि में त्वरित निवेश की वैकल्पिक वकालत।
उत्तर देखें
तत्कालीन योजनाकारों द्वारा उपेक्षित रहा किंतु कालांतर में यह स्पष्ट हुआ कि कृषि व मजदूरी वस्तुओं की उपेक्षा ही मुद्रास्फीति और बेरोजगारी का मूल कारण बनी।
पाँचवीं व छठी पंचवर्षीय योजना (1974-85)
उत्तर देखें
गरीबी उन्मूलन ('गरीबी हटाओ'), न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम (MNP) तथा ग्रामीण रोजगार व परिसंपत्ति सृजन (IRDP, NREP)।
उत्तर देखें
गरीबी अनुपात में गिरावट, ग्रामीण साख ढांचे का विस्तार (1982 में नाबार्ड स्थापना) और विकास दर का 'हिन्दू वृद्धि दर' (3.5%) के अवरोध को तोड़ना।
सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-90)
उत्तर देखें
'खाद्यान्न, कार्य और उत्पादकता' का तिहरा लक्ष्य; कृषि उत्पादकता में सुधार, तकनीक का आधुनिकीकरण और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन।
उत्तर देखें
6.0% की तीव्र संवृद्धि दर दर्ज; पहली बार सार्वजनिक क्षेत्र की तुलना में निजी पूंजी निवेश का आनुपातिक हिस्सा बढ़ा।
आठवीं से बारहवीं योजना (1992-2017)
उत्तर देखें
सांकेतिक नियोजन (Indicative Planning), मानव संसाधन विकास, तीव्र अवसंरचना निर्माण तथा 'तीव्र, संधारणीय और अधिक समावेशी संवृद्धि'।
उत्तर देखें
औसत 7-8% की उच्च विकास दर, डिजिटल व टेलीकॉम क्रांति, सेवा क्षेत्र का अभूतपूर्व उछाल किंतु कृषि और गैर-कृषि आय के बीच विषमता का गहराना।

One-Liner Questions

स्वतंत्र भारत में पंचवर्षीय योजनाओं (FYPs) की सबसे प्राथमिक समष्टिगत भूमिका क्या थी?
औपनिवेशिक गतिहीनता (Colonial Stagnation) को तोड़कर राज्य-निर्देशित निवेश के माध्यम से एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और एकीकृत राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का निर्माण करना।
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स्वतंत्रता प्राप्ति के समय 1900 से 1947 के बीच भारत की औसत वार्षिक आर्थिक संवृद्धि दर क्या थी?
वार्षिक 1% से भी कम (लगभग 0.7% से 0.9%), जबकि प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर व्यावहारिक रूप से लगभग शून्य (0.1%) थी।
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पंचवर्षीय योजनाओं ने भारत में 'सकल स्थायी पूंजी निर्माण' (Gross Fixed Capital Formation) को किस प्रकार गति दी?
घरेलू बचत दर को जीडीपी के 8-9% (1950) से बढ़ाकर 25-30% (1990 के दशक) तक पहुंचाया, जिससे बुनियादी बुनियादी ढांचे और कारखानों में सघन पूंजी निवेश संभव हुआ।
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योजनागत विकास के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को क्या ऐतिहासिक दायित्व सौंपा गया था?
अर्थव्यवस्था की 'कमांडिंग हाइट्स' (रणनीतिक शिखर) संभालना, बड़े पूंजीगत जोखिम उठाना और निजी क्षेत्र के विकास हेतु आधारभूत इनपुट्स (इस्पात, कोयला, बिजली) उपलब्ध कराना।
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पंचवर्षीय योजनाओं ने देश में वैज्ञानिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता की नींव कैसे रखी?
आईआईटी (IITs), आईआईएम (IIMs), एम्स (AIIMS), परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC), इसरो (ISRO) और CSIR प्रयोगशालाओं की योजनाबद्ध स्थापना करके।
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दीर्घकालिक औद्योगिक परियोजनाओं को रियायती और सुलभ वित्त उपलब्ध कराने हेतु नियोजन काल में किन विकास वित्तीय संस्थानों (DFIs) का गठन हुआ?
IFCI (1948), ICICI (1955), IDBI (1964), और UTI (1964)।
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जुलाई 1969 में 14 बड़े वाणिज्यिक बैंकों के राष्ट्रीयकरण को योजनागत प्राथमिकताओं से कैसे जोड़ा गया?
बैंक साख को बड़े औद्योगिक घरानों के संकेंद्रण से मुक्त कर योजना की प्राथमिकताओं—कृषि, लघु उद्योगों, निर्यात और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर मोड़ना।
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आर्थिक नियोजन में 'आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण' (ISI) रणनीति की क्या केंद्रीय भूमिका थी?
विदेशी वस्तुओं के आयात पर निर्भरता घटाना, घरेलू विनिर्माण को टैरिफ और कोटा से संरक्षण देना और दुर्लभ विदेशी मुद्रा की बचत करना।
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1991 के पूर्व भारतीय पंचवर्षीय योजनाओं की प्रकृति किस प्रकार के नियोजन की थी?
आदेशात्मक और भौतिक नियोजन (Imperative and Physical Planning), जहां राज्य उत्पादन लक्ष्य, लाइसेंस और मूल्य प्रशासनिक रूप से तय करता था।
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आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97) से भारतीय नियोजन की कार्यप्रणाली में क्या मूलभूत परिवर्तन आया?
आदेशात्मक नियोजन से सांकेतिक नियोजन (Indicative Planning) की ओर बदलाव, जहां राज्य नियंत्रक के बजाय सुविधा प्रदाता और मार्गदर्शक बना।
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पंचवर्षीय योजनाओं ने भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) में वित्तीय संसाधनों के हस्तांतरण को कैसे प्रभावित किया?
योजना आयोग द्वारा गाडगिल-मुखर्जी फॉर्मूले के तहत राज्यों को योजनागत अनुदान और ऋण का आबंटन करके।
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पंचवर्षीय योजनाओं के दौर में 'योजनागत व्यय' (Plan Expenditure) का क्या अर्थ होता था?
चालू पंचवर्षीय योजना के तहत नई विकासात्मक परियोजनाओं, परिसंपत्ति निर्माण और सामाजिक कार्यक्रमों पर किया जाने वाला सरकारी व्यय।
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पंचवर्षीय योजनाओं के दौर में 'गैर-योजनागत व्यय' (Non-Plan Expenditure) किसे कहा जाता था?
सरकार के दिन-प्रतिदिन के प्रशासनिक संचालन, पूर्व योजनाओं में निर्मित परिसंपत्तियों के रखरखाव, वेतन, पेंशन, रक्षा और ऋणों के ब्याज भुगतान पर होने वाला व्यय।
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बजट में योजनागत और गैर-योजनागत व्यय के कृत्रिम विभाजन को कब और किस समिति की सिफारिश पर समाप्त किया गया?
केंद्रीय बजट 2017-18 से, डॉ. सी. रंगराजन समिति की सिफारिशों के आधार पर।
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भारतीय योजना आयोग (Planning Commission) की संवैधानिक स्थिति क्या थी?
यह एक गैर-संवैधानिक (Non-Constitutional) और गैर-सांविधिक (Extra-Statutory) संस्था थी, जिसका गठन 15 मार्च 1950 को मंत्रिमंडल के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा हुआ था।
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राष्ट्रीय विकास परिषद (National Development Council - NDC) की योजना प्रक्रिया में क्या भूमिका थी?
6 अगस्त 1952 को गठित NDC योजनाओं के प्रारूप पर विचार करने और उन्हें अंतिम संप्रभु स्वीकृति देने वाली शीर्ष संस्था थी।
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योजना आयोग और राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) के पदेन अध्यक्ष कौन होते थे?
भारत के प्रधानमंत्री।
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1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर किस नए निकाय की स्थापना की गई?
नीति आयोग (NITI Aayog - National Institution for Transforming India)।
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योजना आयोग के टॉप-डाउन दृष्टिकोण की तुलना में नीति आयोग का मार्गदर्शक दर्शन क्या है?
सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और प्रतिस्पर्धी संघवाद पर आधारित बॉटम-अप (Bottom-Up) नीतिगत मार्गदर्शन।
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नीति आयोग द्वारा 5-वर्षीय योजनाओं की सोवियत शैली को समाप्त कर कौन-सा नया नियोजन ढांचा अपनाया गया?
15-वर्षीय 'दृष्टि पत्र' (Vision Document), 7-वर्षीय 'रणनीति' (Strategy), और 3-वर्षीय 'कार्य एजेंडा' (Action Agenda)।
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पंचवर्षीय योजनाओं में वित्तीय संसाधनों को जुटाने हेतु घाटे के वित्तपोषण (Deficit Financing) का क्या स्थान था?
कर और घरेलू उधारी से कम पड़ने वाले संसाधनों की पूर्ति हेतु तदर्थ ट्रेजरी बिलों द्वारा नोट छापकर व्यय पूरा करना।
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अत्यधिक घाटे के वित्तपोषण का 1960 और 1970 के दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रतिकूल असर हुआ?
मुद्रा आपूर्ति (M3) में अत्यधिक विस्तार और दोहरे अंकों की गंभीर मुद्रास्फीति (Double-digit Inflation)।
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पंचवर्षीय योजनाओं के वित्तपोषण में विदेशी सहायता (Foreign Aid) का क्या प्रभाव रहा?
प्रारंभिक योजनाओं में विदेशी सहायता (एड इंडिया कंसोर्टियम) पर भारी निर्भरता रही, जिससे बाह्य ऋण का बोझ बढ़ा और भुगतान संतुलन पर दबाव आया।
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पंचवर्षीय योजनाओं ने घरेलू वित्तीय मध्यस्थता को बढ़ावा देने हेतु किन बचत संस्थानों का विस्तार किया?
डाकघर बचत बैंक, जीवन बीमा निगम (LIC - 1956), और यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (UTI - 1964)।
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योजनाबद्ध विकास ने भारत में परिवहन अवसंरचना को किस प्रकार रूपांतरित किया?
भारतीय रेल का व्यापक विद्युतीकरण और आधुनिकीकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार और प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता वृद्धि।
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ऊर्जा क्षेत्र में पंचवर्षीय योजनाओं की सबसे बड़ी रणनीतिक उपलब्धि क्या रही?
विद्युत उत्पादन क्षमता को 1950 के मात्र 1,362 मेगावाट से बढ़ाकर 12वीं योजना तक 3,00,000 मेगावाट से अधिक पहुंचाना।
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सार्वजनिक निवेश का निजी निवेश पर क्या प्रभाव देखा गया (Crowding-in vs Crowding-out)?
बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश ने निजी निवेश को आकर्षित किया (Crowding-in), यद्यपि अत्यधिक सरकारी उधारी ने कभी-कभी निजी साख को संकुचित (Crowding-out) भी किया।
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पंचवर्षीय योजनाओं के दौर में 'भौतिक नियंत्रण' (Physical Controls) का क्या रूप था?
मूल्य नियंत्रण, आयात लाइसेंसिंग, विदेशी मुद्रा राशनिंग और आवश्यक वस्तु अधिनियम (1955) के तहत जिंसों की आवाजाही पर प्रतिबंध।
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पंचवर्षीय योजनाओं के क्रियान्वयन में केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की मुख्य चुनौती क्या थी?
राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता में कमी और केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं (CSS) के माध्यम से राज्यों की प्राथमिकताओं पर केंद्रीय एजेंडा थोपना।
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पंचवर्षीय योजनाओं के मूल्यांकन हेतु योजना आयोग के भीतर कौन-सा विशेष प्रभाग कार्य करता था?
कार्यक्रम मूल्यांकन संगठन (Programme Evaluation Organisation - PEO)।
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योजनाओं के मध्यावधि मूल्यांकन (Mid-Term Appraisal) का क्या महत्व था?
योजना के ढाई-तीन वर्ष पूरे होने पर वास्तविक उपलब्धियों की समीक्षा करना और शेष अवधि हेतु प्राथमिकताओं और वित्तीय आबंटन को संशोधित करना।
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पंचवर्षीय योजनाओं ने भारत में राष्ट्रीय आय और सांख्यिकी के संकलन को कैसे सुदृढ़ किया?
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSSO) की स्थापना कर सटीक समष्टिगत डेटाबेस तैयार करना।
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योजनागत विकास के तहत भारत ने अंतरिक्ष अनुसंधान में क्या आत्मनिर्भरता हासिल की?
इसरो (ISRO) द्वारा इनसैट (INSAT) और आईआरएस (IRS) उपग्रह प्रणालियों का विकास कर संचार और रिमोट सेंसिंग में वैश्विक मुकाम पाना।
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परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में होमी जहांगीर भाभा के त्रि-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को नियोजन में क्या स्थान मिला?
थोरियम आधारित दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा हेतु अनुसंधान रिएक्टरों और तारापुर व रावतभाटा परमाणु संयंत्रों का निर्माण।
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पंचवर्षीय योजनाओं का भारत के राष्ट्रीय आर्थिक एकीकरण में क्या सबसे बड़ा ऐतिहासिक योगदान रहा?
सैकड़ों देशी रियासतों और ब्रिटिश प्रांतों में बंटे देश को एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार, एकल मौद्रिक व्यवस्था और साझा आर्थिक लक्ष्यों में बांधना।
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पंचवर्षीय योजनाओं के चार प्रमुख सर्वसमावेशी दीर्घकालिक उद्देश्य कौन-से रहे हैं?
1. आर्थिक संवृद्धि (Growth), 2. आधुनिकीकरण (Modernization), 3. आत्मनिर्भरता (Self-Reliance), और 4. समानता एवं सामाजिक न्याय (Equity)।
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नियोजन के संदर्भ में 'आर्थिक संवृद्धि' (Economic Growth) का वास्तविक पैमाना क्या होता है?
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में निरंतर और संधारणीय विस्तार।
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1950 से 1980 के बीच भारत की औसत 3.5% की निम्न संवृद्धि दर को अर्थशास्त्री प्रो. राज कृष्णा ने क्या नाम दिया था?
'हिन्दू वृद्धि दर' (Hindu Rate of Growth)।
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भारतीय नियोजन में 'हिन्दू वृद्धि दर' का अवरोध सर्वप्रथम किस पंचवर्षीय योजना में टूटा?
छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85) में, जब औसत संवृद्धि दर 5.66% दर्ज की गई।
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8वीं से 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने किस संवृद्धि पथ को छुआ?
औसत 6.8% से 8.0% की तीव्र संवृद्धि दर; जिससे भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ।
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नियोजन के उद्देश्य के रूप में 'आधुनिकीकरण' (Modernization) से क्या आशय है?
उत्पादन में आधुनिक विज्ञान व उन्नत प्रौद्योगिकी को अपनाना तथा सामाजिक संरचना में महिलाओं की समानता और प्रगतिशील दृष्टिकोण को बढ़ावा देना।
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संस्थागत आधुनिकीकरण के तहत नियोजन में किन बड़े सुधारों को आगे बढ़ाया गया?
मध्यवर्ती बिचौलियों का उन्मूलन, काश्तकारी सुधार, जमींदारी समाप्ति और पंचायती राज का संस्थागत विस्तार।
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भारतीय नियोजन में 'आत्मनिर्भरता' (Self-Reliance) का क्या रणनीतिक अर्थ था?
विदेशी खाद्य सहायता और बाह्य ऋणों पर निर्भरता को समाप्त करना तथा उन सभी आवश्यक वस्तुओं का घरेलू उत्पादन करना जिन्हें आयात किया जा सकता है।
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आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) और पूर्ण एकाकीपन (Autarky) में क्या बुनियादी अंतर है?
आत्मनिर्भरता विदेशी व्यापार को समाप्त नहीं करती, बल्कि अनिवार्य आयातों का वित्तपोषण अपने स्वयं के निर्यात अर्जनों से करने की क्षमता पैदा करती है।
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तीसरी और चौथी पंचवर्षीय योजना में 'आत्मनिर्भरता' को सर्वोच्च राष्ट्रीय लक्ष्य क्यों बनाया गया?
क्योंकि 1965 के युद्ध और सूखे के समय अमेरिका द्वारा PL-480 खाद्य आपूर्ति रोकने की कूटनीतिक धमकी ने राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरे में डाल दिया था।
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नियोजन में 'समानता और सामाजिक न्याय' (Equity & Social Justice) का क्या उद्देश्य था?
संविधान के अनुच्छेद 38 और 39 के अनुरूप आय, संपत्ति और आर्थिक शक्ति के संकेंद्रण को कम करना और समाज के कमजोर वर्गों को बुनियादी जीवन स्तर उपलब्ध कराना।
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प्रारंभिक पंचवर्षीय योजनाओं का 'ट्रिकल-डाउन सिद्धांत' (Trickle-Down Theory) क्या मानता था?
यह कि यदि जीडीपी की उच्च वृद्धि दर हासिल कर ली जाए, तो उसके आर्थिक लाभ रिस-रिसकर स्वतः समाज के सबसे निर्धन व्यक्ति तक पहुंच जाएंगे।
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1970 के दशक में योजना आयोग ने 'ट्रिकल-डाउन सिद्धांत' को क्यों खारिज कर दिया?
क्योंकि संवृद्धि के लाभ धनी वर्गों तक सीमित रहे और गरीबी जस-की-तस बनी रही; जिससे प्रत्यक्ष लक्षित गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की आवश्यकता पड़ी।
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पाँचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-79) का केंद्रीय और सबसे लोकप्रिय नारा क्या था?
'गरीबी हटाओ' (Garibi Hatao / Poverty Eradication)।
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पाँचवीं योजना में शुरू किया गया 'न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम' (MNP - 1974) क्या था?
ग्रामीण प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण स्वास्थ्य, पेयजल, पोषण, ग्रामीण विद्युतीकरण और आवास जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाओं की सरकारी गारंटी।
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1975 में घोषित 'बीस सूत्री कार्यक्रम' (Twenty Point Programme - TPP) का क्या प्राथमिक उद्देश्य था?
ग्रामीण निर्धनता, बंधुआ मजदूरी उन्मूलन, भूमिहीनों को आवास स्थल और कृषि श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी पर सीधा प्रहार करना।
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एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) का मुख्य तंत्र क्या था जिसे छठी योजना में राष्ट्रव्यापी बनाया गया?
गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को बैंक ऋण और सरकारी सब्सिडी के माध्यम से आय-सृजक परिसंपत्तियां (दुधारू पशु, सिलाई मशीन) प्रदान करना।
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नियोजन के उद्देश्य के रूप में 'पूर्ण रोजगार' (Full Employment) की क्या स्थिति रही?
भारी उद्योग मॉडल के कारण पूंजी-गहन तकनीकें अपनाई गईं, जिससे उत्पादन तो बढ़ा किंतु पर्याप्त रोजगार सृजित नहीं हो सके (रोजगार-विहीन संवृद्धि)।
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ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने हेतु 2005 में किस ऐतिहासिक योजना को वैधानिक रूप दिया गया?
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA - मनरेगा)।
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नियोजन में 'संतुलित क्षेत्रीय विकास' (Balanced Regional Development) हेतु क्या कदम उठाए गए?
पिछड़े और जनजातीय क्षेत्रों में सार्वजनिक इस्पात संयंत्रों (भिलाई, राउरकेला, बोकारो) की स्थापना और रियायती औद्योगिक ऋण देना।
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1952 की 'माल भाड़ा समानीकरण नीति' का पूर्वी राज्यों (बिहार, बंगाल, ओडिशा) के विकास पर क्या प्रभाव पड़ा?
खनिजों पर स्थानीय तुलनात्मक लाभ छिन गया, जिससे इन राज्यों में औद्योगीकरण पिछड़ गया और क्षेत्रीय असंतुलन गहरा गया।
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गाडगिल फॉर्मूले (1969) के तहत किन राज्यों को 'विशेष श्रेणी का दर्जा' (Special Category Status) दिया गया?
असम, नगालैंड और जम्मू-कश्मीर को (बाद में अन्य पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों को जोड़ा गया)।
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विशेष श्रेणी दर्जा प्राप्त राज्यों को केंद्रीय सहायता में क्या वित्तीय वरीयता दी जाती थी?
90% केंद्रीय अनुदान (Grant) और मात्र 10% ऋण (सामान्य राज्यों हेतु 30% अनुदान व 70% ऋण था)।
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दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007) की सबसे अनूठी योजनागत पद्धति क्या थी?
जीडीपी विकास के साथ-साथ गरीबी, साक्षरता, शिशु मृत्यु दर और वनावरण पर 11 विशिष्ट 'निगरानी योग्य लक्ष्यों' (Monitorable Targets) की शुरुआत।
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11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) का केंद्रीय विषय (Theme) क्या था?
'तीव्र और अधिक समावेशी संवृद्धि की ओर' (Towards Faster and More Inclusive Growth)।
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11वीं योजना में 'समावेशी विकास' को मापने हेतु किन संकेतकों को प्राथमिकता दी गई?
कृषि विकास दर (4%), गरीबी में 10% की कमी, 5.8 करोड़ नए गैर-कृषि रोजगार और लैंगिक असमानता में कमी।
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12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) का आधिकारिक ध्येय वाक्य क्या था?
'तीव्र, संधारणीय और अधिक समावेशी संवृद्धि' (Faster, Sustainable and More Inclusive Growth)।
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12वीं योजना में 'संधारणीयता' (Sustainability) शब्द जोड़कर किस आयाम को नियोजन का केंद्रीय स्तंभ बनाया गया?
पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन को।
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नियोजन के उद्देश्यों में 'आर्थिक शक्ति के संकेंद्रण पर अंकुश' लगाने हेतु 1969 में कौन-सा कानून बनाया गया था?
एकाधिकार एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम (MRTP Act 1969)।
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नियोजन में मूल्य स्थिरता (Price Stability) को बनाए रखने हेतु किस प्रणाली का निर्माण किया गया?
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से बफर स्टॉक प्रबंधन।
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नियोजन के तहत मानव विकास सूचकांक (HDI) में सुधार हेतु किन प्राथमिक सामाजिक क्षेत्रों पर व्यय बढ़ाया गया?
सर्व शिक्षा अभियान (SSA), राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM), और एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS)।
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प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) में कुल योजना व्यय का सर्वाधिक हिस्सा किस क्षेत्र को दिया गया था?
कृषि, सामुदायिक विकास, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण को (कुल व्यय का लगभग 31% से अधिक)।
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प्रथम योजना में कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के पीछे क्या तर्क था?
विभाजन के कारण 82% जनसंख्या भारत में रह गई थी जबकि उपजाऊ सिंचित भूमि का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान चला गया था; भुखमरी और मुद्रास्फीति को रोकना जीवन-मरण का प्रश्न था।
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प्रथम पंचवर्षीय योजना के दौरान खाद्यान्न उत्पादन में कितनी वृद्धि दर्ज की गई?
खाद्यान्न उत्पादन 52 मिलियन टन से बढ़कर 66 मिलियन टन हो गया (लगभग 27% से 36% की असाधारण वृद्धि)।
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प्रथम योजना में कृषि के साथ-साथ किन वृहद सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण शुरू हुआ?
भाखड़ा नांगल (पंजाब-हिमाचल), दामोदर घाटी (बिहार-बंगाल), और हीराकुंड (ओडिशा)।
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द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) में प्राथमिकताओं में क्या नाटकीय बदलाव आया?
कृषि से प्राथमिकता हटाकर भारी, बुनियादी पूंजीगत उद्योगों (Heavy & Basic Industries) और खनिजों पर सर्वोच्च बल दिया गया।
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द्वितीय योजना में औद्योगिक क्षेत्र का योजनागत आबंटन प्रथम योजना के 4% से बढ़कर कितना हो गया?
कुल योजना व्यय का लगभग 20% से 24% तक।
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द्वितीय योजना में भारी उद्योगों को प्राथमिकता देने के पीछे नेहरू-महालनोबिस का क्या आर्थिक तर्क था?
दीर्घकाल में आत्मनिर्भर बनने हेतु भारी मशीनरी, लोहा-इस्पात और ऊर्जा का घरेलू उत्पादन आवश्यक है; कृषि उपकरण भी तभी बनेंगे जब देश में इस्पात उद्योग होगा।
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द्वितीय योजना के दौरान स्थापित तीन बड़े सार्वजनिक इस्पात संयंत्र कौन-से थे?
भिलाई (रूस के सहयोग से), राउरकेला (जर्मनी के सहयोग से), और दुर्गापुर (ब्रिटेन के सहयोग से)।
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द्वितीय योजना में कृषि की सापेक्ष उपेक्षा का 1960 के दशक के मध्य में क्या विनाशकारी परिणाम हुआ?
देश में खाद्यान्न का भीषण अकाल पड़ा, मुद्रास्फीति अनियंत्रित हो गई और भारत अमेरिकी PL-480 खाद्यान्न सहायता पर पूरी तरह निर्भर हो गया।
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तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-66) में कृषि और उद्योग के बीच प्राथमिकताओं को कैसे साधने का प्रयास किया गया?
कृषि को पुनः शीर्ष प्राथमिकता दी गई ताकि खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता मिले, और साथ ही भारी उद्योगों के विकास को भी जारी रखने का दोहरा प्रयास किया गया।
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तृतीय योजना के दौरान 1964 में किस बड़े इस्पात कारखाने की स्थापना सोवियत संघ के सहयोग से की गई?
बोकारो स्टील प्लांट (Bokaro Steel Plant, झारखंड)।
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तृतीय योजना के विफल होने पर योजना अवकाश (1966-69) के दौरान कृषि नीति में क्या ऐतिहासिक रणनीतिक बदलाव आया?
संस्थागत सुधारों (भूमि सुधार) के बजाय तकनीकी सुधारों (हरित क्रांति - HYV बीज, उर्वरक, नलकूप) को प्राथमिकता दी गई।
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योजना अवकाश के दौरान कृषि मूल्य नीति को संस्थागत रूप देने हेतु 1965 में किन दो निकायों का गठन हुआ?
कृषि मूल्य आयोग (APC / वर्तमान CACP) तथा भारतीय खाद्य निगम (FCI)।
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चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-74) में कृषि क्षेत्र की प्राथमिकता का क्या रूप था?
हरित क्रांति के सघन प्रसार द्वारा खाद्यान्न में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करना और बफर स्टॉक (Buffer Stock) का निर्माण करना।
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पाँचवीं और छठी योजना में औद्योगिक प्राथमिकताओं में भारी उद्योगों के साथ किन उद्योगों को शामिल किया गया?
लघु, कुटीर व ग्रामीण उद्योग (SSIs) तथा ऊर्जा क्षेत्र (बॉम्बे हाई में तेल खोज और ताप विद्युत)।
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छठी पंचवर्षीय योजना के दौरान ग्रामीण और कृषि वित्तपोषण को समर्पित किस शीर्ष संस्था का गठन 1982 में हुआ?
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD - शिवरामन समिति की सिफारिश पर)।
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सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-90) में कृषि और उद्योग की प्राथमिकताओं का समन्वय किस नारे में दिखा?
'खाद्यान्न, कार्य और उत्पादकता'; कृषि में उत्पादकता वृद्धि और औद्योगिक विनिर्माण में तकनीकी आधुनिकीकरण।
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सातवीं योजना में पहली बार पूंजी निवेश में किसकी हिस्सेदारी सार्वजनिक क्षेत्र से अधिक हो गई?
निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी (निजी क्षेत्र: ~52%, सार्वजनिक क्षेत्र: ~48%)।
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1991 के सुधारों के बाद 8वीं से 12वीं योजना तक प्राथमिकताओं का झुकाव किस नए क्षेत्र की ओर बढ़ा?
सेवा क्षेत्र (सॉफ्टवेयर, टेलीकॉम, बैंकिंग) और कोर बुनियादी ढांचा (सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे, मेट्रो रेल)।
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11वीं योजना (2007-12) में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने हेतु कौन-सा मिशन प्रारंभ किया गया था?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM - 2007), चावल, गेहूं और दालों के उत्पादन विस्तार हेतु।
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11वीं योजना में राज्यों को कृषि योजनाओं में लचीलापन देने हेतु कौन-सी योजना शुरू हुई?
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY - 2007)।
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12 पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि और उद्योग की हिस्सेदारी में क्या ऐतिहासिक बदलाव आया?
जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी 1950 के ~55% से घटकर ~15-16% पर आ गई, जबकि उद्योग की हिस्सेदारी ~15% से बढ़कर ~28-30% पर स्थिर हुई।
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भारतीय अर्थव्यवस्था में 'संरचनात्मक विषमता' (Structural Asymmetry) का क्या प्रमाण है जो नियोजन की सीमा को दर्शाता है?
जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी गिरकर 15-16% रह गई, किंतु देश की लगभग 45-46% कार्यशील जनसंख्या आज भी आजीविका हेतु कृषि पर ही निर्भर है।
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सेवा क्षेत्र (Services Sector) का भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना में क्या स्थान बन गया?
जीडीपी में 54% से अधिक का सबसे बड़ा योगदानकर्ता क्षेत्र, यद्यपि यह कुल रोजगार का मात्र लगभग 30-32% ही समाहित करता है।
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भारतीय विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) की वह कौन-सी विफलता है जिसे नियोजन काल में दूर नहीं किया जा सका?
'विनिर्माण गतिहीनता' (Manufacturing Stagnation); जीडीपी में विनिर्माण की हिस्सेदारी दशकों तक 15-17% के संकीर्ण दायरे में ही फंसी रही।
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कृषि और उद्योग के बीच नियोजन में किस प्रकार की 'पारस्परिक निर्भरता' (Interdependence) पाई जाती है?
कृषि उद्योग को कच्चा माल, खाद्यान्न (मजदूरी वस्तुएं) और विशाल बाजार देती है; जबकि उद्योग कृषि को आधुनिक इनपुट्स (ट्रैक्टर, उर्वरक, कीटनाशक, ट्यूबवेल) प्रदान करता है।
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कृषि क्षेत्र द्वारा उद्योगों को प्रदान किए जाने वाले 'अग्रगामी संबंध' (Forward Linkages) क्या हैं?
कपास से वस्त्र उद्योग, गन्ने से चीनी उद्योग, तिलहन से खाद्य तेल और जूट से बोरी निर्माण जैसे कृषि-आधारित उद्योगों (Agro-industries) को कच्चा माल देना।
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औद्योगिक क्षेत्र द्वारा कृषि को प्रदान किए जाने वाले 'पश्चगामी संबंध' (Backward Linkages) क्या हैं?
रासायनिक उर्वरक (यूरिया, डीएपी), कीटनाशक, विद्युत पंपसेट, डीजल इंजन, ट्रैक्टर, थ्रेशर और ड्रिप सिंचाई उपकरण की आपूर्ति।
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अर्थशास्त्र में 'मजदूरी वस्तुएं' (Wage Goods) किन्हें कहा जाता है?
वे आवश्यक बुनियादी उपभोग वस्तुएं (विशेषकर खाद्यान्न जैसे गेहूं, चावल, दालें) जो श्रमिकों के जीवित रहने और कार्य करने हेतु अनिवार्य हैं।
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औद्योगिक विकास की प्रक्रिया में खाद्यान्न (मजदूरी वस्तु) की आपूर्ति की क्या महत्वपूर्ण भूमिका होती है?
यदि खाद्यान्न की आपूर्ति पर्याप्त और सस्ती होगी, तो औद्योगिक श्रमिकों की मजदूरी लागत और मुद्रास्फीति कम रहेगी, जिससे उद्योगों का मुनाफा और निवेश बढ़ेगा।
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प्रो. सी. एन. वकील और डॉ. पी. आर. ब्रह्मानंद ने 1956 में महालनोबिस मॉडल के विकल्प के रूप में कौन-सा प्रसिद्ध मॉडल प्रस्तुत किया था?
'मजदूरी-वस्तु मॉडल' (Wage-Goods Model of Development)।
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वकील-ब्रह्मानंद के मजदूरी-वस्तु मॉडल का मुख्य केंद्रीय तर्क क्या था?
अविकसित देशों में विकास की मुख्य बाधा भारी मशीनों की कमी नहीं, बल्कि मजदूरी वस्तुओं (खाद्यान्न व कपड़ों) की कमी है; अतः निवेश कृषि और उपभोक्ता वस्तुओं में होना चाहिए।
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वकील-ब्रह्मानंद मॉडल के अनुसार कृषि और मजदूरी वस्तुओं में निवेश करने से रोजगार पर क्या प्रभाव पड़ता?
श्रम-सघन होने के कारण यह मॉडल करोड़ों बेरोजगार और प्रच्छन्न रूप से बेरोजगार ग्रामीणों को तत्काल उत्पादक रोजगार दे सकता था।
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तत्कालीन योजनाकारों ने 1956 में वकील-ब्रह्मानंद के मजदूरी-वस्तु मॉडल को क्यों अस्वीकार कर दिया था?
क्योंकि नेहरू और महालनोबिस सोवियत भारी औद्योगीकरण मॉडल से अत्यधिक प्रभावित थे और भारत को शीघ्रता से एक सैन्य व औद्योगिक महाशक्ति बनाना चाहते थे।
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1960 के दशक के मध्य के संकट ने वकील-ब्रह्मानंद मॉडल की किस भविष्यवाणी को सच साबित किया?
यह कि कृषि की उपेक्षा करने पर खाद्यान्न की कमी औद्योगिक विकास को रोक देगी, मुद्रास्फीति भड़केगी और देश विदेशी खाद्य सहायता का मोहताज हो जाएगा।
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सोवियत अर्थशास्त्री येवगेनी प्रेओब्राझेंस्की (Yevgeni Preobrazhensky) की 'आदिम समाजवादी संचय' (Primitive Accumulation) की बहस क्या थी?
भारी उद्योगों के निर्माण हेतु आवश्यक पूंजी जुटाने के लिए कृषि क्षेत्र पर कर लगाकर या कृषि उत्पादों के दाम दबाकर अधिशेष (Surplus) को उद्योग में खींचना।
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क्या भारत ने अपने नियोजन में सोवियत संघ की तरह कृषि पर जबरन कर लगाकर उद्योग हेतु अधिशेष खींचा?
नहीं; भारत एक लोकतांत्रिक देश था जहां किसानों का भारी चुनावी प्रभाव था; अतः कृषि पर कोई सीधा आयकर नहीं लगाया गया, बल्कि उर्वरक, बिजली और जल पर भारी सब्सिडी दी गई।
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'कृषि और उद्योग के बीच व्यापार की शर्तें' (Terms of Trade - ToT between Agriculture and Industry) से क्या आशय है?
कृषि उत्पादों के मूल्य सूचकांक और औद्योगिक विनिर्मित उत्पादों के मूल्य सूचकांक का अनुपात (Pa / Pi × 100)।
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जब व्यापार की शर्तें (Terms of Trade) कृषि के प्रतिकूल (Against Agriculture) होती हैं, तो क्या होता है?
किसानों को अपनी उपज के कम दाम मिलते हैं जबकि उन्हें ट्रैक्टर, खाद और उपभोक्ता सामान महंगे खरीदने पड़ते हैं (मूल्य कैंची - Price Scissors)।
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अर्थशास्त्री डॉ. अशोक मित्रा ने अपनी पुस्तक 'टर्म्स ऑफ ट्रेड एंड क्लास रिलेशंस' (1977) में क्या तर्क दिया था?
हरित क्रांति के बाद धनी किसान लॉबी के राजनीतिक प्रभाव के कारण व्यापार की शर्तें कृषि के पक्ष में झुक गईं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र का मुनाफा घटा और औद्योगीकरण सुस्त पड़ा।
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ब्रिटिश अर्थशास्त्री माइकल लिप्टन (Michael Lipton) का 'शहरी पक्षपात सिद्धांत' (Urban Bias Thesis) क्या कहता है?
विकासशील देशों के योजनाकार और राजनेता शहरी अभिजात वर्ग के दबाव में नीतियों और संसाधनों को शहरों और उद्योगों की ओर मोड़ते हैं, जिससे बहुसंख्यक ग्रामीण जनता गरीब बनी रहती है।
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आर्थर लुईस (W. Arthur Lewis) का 'द्वैध अर्थव्यवस्था मॉडल' (Dual Economy Model) कृषि और उद्योग के संबंध को कैसे देखता है?
पारंपरिक कृषि क्षेत्र में अतिरिक्त श्रम की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है; इस श्रम को स्थिर निर्वाह मजदूरी पर आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित कर औद्योगीकरण संभव होता है।
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भारत में लुईस का मॉडल पूरी तरह सफल क्यों नहीं हो सका?
क्योंकि भारतीय उद्योगों ने श्रम-सघन के बजाय पूंजी-सघन तकनीकें अपनाईं, जिससे वे कृषि से आने वाले करोड़ों अतिरिक्त श्रमिकों को खपाने में असमर्थ रहे।
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कृषि क्षेत्र भारत के घरेलू औद्योगिक विनिर्मित सामानों के लिए किस प्रकार सबसे बड़ा 'मांग चालक' (Demand Driver) है?
देश की 65% ग्रामीण आबादी एफएमसीजी (FMCG), दोपहिया वाहनों, वस्त्रों, सीमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स का विशाल घरेलू उपभोग बाजार बनाती है।
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जब भारत में मानसून विफल होता है और कृषि उत्पादन घटता है, तो उसका औद्योगिक विनिर्माण पर क्या प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है?
ग्रामीण क्रय शक्ति ध्वस्त हो जाती है, जिससे कारखानों के उत्पादों की मांग घट जाती है और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में मंदी छा जाती है।
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कृषि और उद्योग के बीच सेतु के रूप में 'खाद्य प्रसंस्करण उद्योग' (Food Processing Industry - FPI) का क्या महत्व है?
यह कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition) करता है, कटाई उपरांत बर्बादी को रोकता है, किसानों की आय बढ़ाता है और ग्रामीण क्षेत्रों में भारी गैर-कृषि रोजगार पैदा करता है।
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मेगा फूड पार्क (Mega Food Parks) योजना का मुख्य संरचनात्मक उद्देश्य क्या है?
खेत से लेकर खुदरा बाजार तक एक निर्बाध कोल्ड चेन और आधुनिक प्रसंस्करण ढांचा स्थापित कर किसानों, प्रोसेसर्स और खुदरा विक्रेताओं को सीधे जोड़ना।
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कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक पूंजी निर्माण (Public Capital Formation) घटने से उद्योग पर क्या असर पड़ता है?
सिंचाई, नहरी नेटवर्क और ग्रामीण बुनियादी ढांचा कमजोर होता है, जिससे कृषि उत्पादकता घटती है और उद्योगों को मिलने वाला कच्चा माल महंगा हो जाता है।
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नियोजन के दौरान कृषि उत्पादों के मूल्य स्थिरीकरण हेतु CACP द्वारा अनुशंसित कौन-सा तंत्र कार्य करता है?
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP); जो 22 अधिदिष्ट फसलों और गन्ने के उचित लाभकारी मूल्य (FRP) हेतु घोषित होता है।
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अशोक दलवई समिति (2017-18) ने कृषि और गैर-कृषि संबंधों को मजबूत करने हेतु क्या मुख्य संस्तुति दी?
किसानों की आय दोगुनी करने हेतु कृषि को केवल उत्पादन-केंद्रित न रखकर कृषि-व्यवसाय, प्रसंस्करण और ग्रामीण गैर-कृषि उद्यमों से जोड़ना।
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ग्रामीण औद्योगीकरण में 'किसान उत्पादक संगठनों' (FPOs) की क्या भूमिका है?
छोटे किसानों को संगठित कर सामूहिक प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और कॉर्पोरेट उद्योग से सीधी मूल्य-वार्ता की क्षमता प्रदान करना।
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कृषि में 'प्रच्छन्न बेरोजगारी' (Disguised Unemployment) का औद्योगिक विकास से क्या संबंध है?
कृषि में लगे उस अतिरिक्त श्रम को उद्योगों में लगाना जिसकी कृषि में सीमांत उत्पादकता शून्य है, ताकि कुल राष्ट्रीय उत्पादन में शुद्ध वृद्धि हो सके।
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1956 की औद्योगिक नीति संकल्प (IPR 1956) में उद्योगों को किन तीन अनुसूचियों में बांटा गया था?
अनुसूची A (17 पूर्णतः सरकारी उद्योग), अनुसूची B (12 मिश्रित उद्योग), और अनुसूची C (निजी क्षेत्र हेतु शेष उद्योग)।
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1951 का उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम - IDRA 1951 किस व्यवस्था का जनक बना?
'लाइसेंस-परमिट-कोटा राज' (License-Permit Raj) का, जिसने निजी उद्योगों की क्षमता विस्तार और स्थापना पर कड़ा नौकरशाही नियंत्रण थोप दिया।
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लाइसेंस राज की जांच हेतु 1969 में गठित किस समिति ने बड़े औद्योगिक घरानों द्वारा लाइसेंसों के दुरुपयोग का पर्दाफाश किया?
दत्त समिति (Dutt Committee / Industrial Licensing Policy Inquiry Committee)।
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हजारी समिति (Hazari Committee - 1967) की रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष क्या था?
बिड़ला जैसे बड़े औद्योगिक घरानों ने प्रतिस्पर्धियों को रोकने हेतु क्षमता से अधिक अग्रिम लाइसेंस हथियाकर एकाधिकार बना लिया था।
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लघु उद्योग (Small Scale Industries - SSI) क्षेत्र के संरक्षण हेतु नियोजन में कौन-सी नीति लागू की गई थी?
वस्तुओं का आरक्षण (Reservation of Products); जिसके तहत सैकड़ों वस्तुओं का उत्पादन केवल लघु इकाइयों हेतु आरक्षित कर दिया गया।
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लघु उद्योगों हेतु उत्पादों के अनिवार्य आरक्षण की नीति का क्या नकारात्मक आर्थिक प्रभाव पड़ा?
भारतीय उद्योग बड़े पैमाने की मितव्ययिताएं (Economies of Scale) हासिल नहीं कर सके और वैश्विक निर्यात बाजारों में चीन और पूर्वी एशियाई देशों से पिछड़ गए।
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लघु उद्योगों के आरक्षण की नीति को समाप्त करने की सिफारिश 1997 में किस समिति ने की थी?
आबिद हुसैन समिति (Abid Hussain Committee on Small Scale Enterprises)।
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एमएसएमई विकास अधिनियम (MSMED Act) किस वर्ष पारित किया गया था?
वर्ष 2006 में; जिसने विनिर्माण और सेवा उद्यमों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणियों में वर्गीकृत किया।
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वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत MSME की नई समग्र परिभाषा में किन दो मानदंडों को शामिल किया गया?
संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश तथा वार्षिक टर्नओवर (कारोबार) दोनों का संयुक्त मानदंड।
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नई MSME परिभाषा (2020) के अनुसार 'सूक्ष्म उद्यम' (Micro Enterprise) की सीमा क्या है?
निवेश ₹1 करोड़ तक और टर्नओवर ₹5 करोड़ तक।
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नई MSME परिभाषा के अनुसार 'लघु उद्यम' (Small Enterprise) की सीमा क्या है?
निवेश ₹10 करोड़ तक और टर्नओवर ₹5 करोड़ से ₹50 करोड़ तक।
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नई MSME परिभाषा के अनुसार 'मध्यम उद्यम' (Medium Enterprise) की सीमा क्या है?
निवेश ₹50 करोड़ तक और टर्नओवर ₹50 करोड़ से ₹250 करोड़ तक।
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हरित क्रांति का भारतीय औद्योगीकरण पर क्या मांग-पक्षीय (Demand-side) प्रभाव पड़ा?
पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के धनी किसानों की आय बढ़ने से ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, डीजल इंजन और उपभोक्ता सामानों की मांग में भारी उछाल आया।
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हरित क्रांति की सबसे गंभीर क्षेत्रीय सीमा क्या रही जिसने क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ाया?
यह केवल उत्तर-पश्चिमी भारत (पंजाब, हरियाणा, प.उ.प्र.) और तटीय आंध्र तक सीमित रही; पूर्वी भारत, मध्य भारत और वर्षा-आधारित शुष्क क्षेत्र इससे वंचित रहे।
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कृषि क्षेत्र में 'द्वितीय हरित क्रांति' (Second Green Revolution) का मुख्य जोर किन क्षेत्रों और फसलों पर है?
पूर्वी भारत (BGREI कार्यक्रम), शुष्क भूमि कृषि, मोटे अनाज (मिलेट्स / श्री अन्न), दालें और तिलहन।
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कृषि और उद्योग दोनों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने हेतु 2015 में शुरू की गई फीडर पृथक्करण योजना कौन-सी है?
दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY)।
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किसानों को सौर पंप उपलब्ध कराने और सिंचाई लागत घटाने हेतु केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना कौन-सी है?
पीएम-कुसुम (PM-KUSUM - प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान)।
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कृषि आधारित उद्योग के रूप में 'एथेनॉल संमिश्रण कार्यक्रम' (EBP) का गन्ना किसानों और चीनी मिलों पर क्या प्रभाव पड़ा है?
अतिरिक्त गन्ने और चीनी को एथेनॉल में बदलकर पेट्रोल में मिलाने से मिलों की तरलता बढ़ी और किसानों के बकाये का त्वरित भुगतान हुआ।
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वस्त्र उद्योग (Textile Industry) भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के अंतर्संबंध का सबसे बड़ा उदाहरण क्यों है?
यह कृषि (कपास किसान) से सीधे जुड़ा है, देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है और औद्योगिक उत्पादन व कुल निर्यात में विशाल योगदान देता है।
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वस्त्र क्षेत्र में बड़े पैमाने के विश्वस्तरीय विनिर्माण क्लस्टर बनाने हेतु कौन-सी योजना शुरू की गई है?
पीएम मित्र योजना (PM MITRA - मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क)।
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गैर-कृषि रोजगार (Non-Farm Employment) का आनुपातिक महत्व क्यों बढ़ रहा है?
क्योंकि कृषि में जोतों का आकार छोटा होता जा रहा है (औसत जोत 1.08 हेक्टेयर), जिससे केवल खेती से परिवार का जीवन-यापन असंभव हो गया है।
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कृषि में पूंजी निर्माण की दर बढ़ाने हेतु नाबार्ड द्वारा संचालित कौन-सा वैधानिक कोष सबसे महत्वपूर्ण है?
ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष (Rural Infrastructure Development Fund - RIDF)।
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RIDF कोष में वित्तीय संसाधन कहाँ से आते हैं?
वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अपने प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (PSL) के अनिवार्य 40% लक्ष्य को पूरा न कर पाने पर जमा कराई गई कमी की राशि से।
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राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) प्लेटफॉर्म कृषि और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को कैसे जोड़ता है?
देश भर की एपीएमसी मंडियों को ऑनलाइन जोड़कर 'एक राष्ट्र, एक कृषि बाजार' स्थापित करना, जिससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सीधे किसानों से पारदर्शी बोली द्वारा खरीद सकें।
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नियोजन में 'फसल विविधीकरण' (Crop Diversification) का औद्योगिक कच्चे माल की सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
गेहूं-चावल के चक्र से हटकर दालों, तिलहन, कपास और बागवानी फसलों को बढ़ावा देकर खाद्य तेल और वस्त्र उद्योगों को घरेलू कच्चा माल सुनिश्चित करना।
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औद्योगिक विनिर्माण में आत्मनिर्भरता लाने हेतु 14 रणनीतिक क्षेत्रों में शुरू की गई आधुनिक योजना कौन-सी है?
उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (Production Linked Incentive - PLI) योजना।
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भारतीय नियोजन में 'योजना आयोग से नीति आयोग' का संस्थागत बदलाव क्या सिद्ध करता है?
केंद्रीकृत टॉप-डाउन योजना निर्माण से हटकर प्रतिस्पर्धी सहकारी संघवाद, रणनीतिक नीति निर्माण और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी की ओर प्रस्थान।
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नीति आयोग द्वारा संचालित 'आकांक्षी जिला कार्यक्रम' (ADP) का क्या मुख्य उद्देश्य है?
देश के 112 सबसे पिछड़े जिलों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन और बुनियादी ढांचे का डेटा-आधारित रैंकिंग और जनभागीदारी द्वारा तीव्र रूपांतरण।
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आकांक्षी जिला कार्यक्रम सीमित संसाधनों के कुशलतम उपयोग का मॉडल क्यों कहलाता है?
क्योंकि इसमें कोई नया बड़ा बजट देने के बजाय मौजूदा सरकारी योजनाओं के अभिसरण (Convergence) और प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया जाता है।
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गांधीवादी ग्राम-स्वराज और आधुनिक नियोजन के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण कौन-सी ग्राम-स्तरीय योजना है?
ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP / 'सबकी योजना सबका विकास')।
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भारत को 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने का राष्ट्रीय विजन क्या कहलाता है?
'विकसित भारत @2047' (Viksit Bharat @2047)।
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विकसित भारत @2047 के विजन में कृषि और उद्योग की क्या संयुक्त भूमिका होगी?
कृषि को उच्च-मूल्य, तकनीकी और कृषि-व्यवसाय केंद्र बनाना तथा विनिर्माण व उद्योग को विश्वस्तरीय निर्यात केंद्र बनाकर लाखों युवाओं को उच्च उत्पादक रोजगार देना।
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कृषि और उद्योग के बीच संतुलित आर्थिक नियोजन का अंतिम और स्थायी निष्कर्ष क्या है?
कृषि और उद्योग एक-दूसरे के विरोधी या प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू और अनिवार्य पूरक हैं; एक मजबूत, उत्पादक और समृद्ध कृषि क्षेत्र ही टिकाऊ औद्योगीकरण की सबसे ठोस नींव बन सकता है।
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