📚 Economy — Economy Notes
वित्तीय बाजार Part 1
वित्तीय बाजार का अर्थ, प्रमुख खंड, परिसंपत्तियों का व्यापार तथा मुद्रा बाजार (Call Money, T-Bills, CP, CD, Repo) का गहन विश्लेषण
Quick Reference
महत्वपूर्ण तथ्य एवं योगदान
वित्तीय बाजार Part 1
| वित्तीय बाजार घटक | प्रमुख विशेषता | आर्थिक भूमिका |
|---|---|---|
मुद्रा बाजार (Money Market) | उत्तर देखें अल्पकालिक वित्तीय परिसंपत्तियों (1 वर्ष तक परिपक्वता) का बाजार; उच्च तरलता, न्यूनतम डिफ़ॉल्ट जोखिम और कम लेन-देन लागत। | उत्तर देखें अर्थव्यवस्था में अल्पकालिक तरलता असंतुलनों को संतुलित करना तथा केंद्रीय बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति संचरण का मुख्य चैनल। |
पूंजी बाजार (Capital Market) | उत्तर देखें मध्यम एवं दीर्घकालिक वित्तीय साधनों (1 वर्ष से अधिक) का बाजार; शेयर (Equity) और ऋणपत्रों (Debentures/Bonds) का लेन-देन। | उत्तर देखें देश में दीर्घकालिक स्थायी पूंजी निर्माण, औद्योगिक परियोजनाओं का वित्तपोषण और परिवारों की बचतों को उत्पादक निवेश में बदलना। |
मांग व सूचना मुद्रा बाजार (Call/Notice Money) | उत्तर देखें अंतर-बैंक अल्पकालिक उधार बाजार; 1 दिन (Call Money) से 14 दिन (Notice Money) हेतु बिना किसी संपार्श्विक (Collateral-free) लेन-देन। | उत्तर देखें वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दैनिक CRR/SLR आवश्यकताओं की पूर्ति तथा अल्पावधि तरलता का त्वरित अंतर-बैंक समायोजन। |
ट्रेजरी बिल बाजार (T-Bills) | उत्तर देखें भारत सरकार की ओर से RBI द्वारा जारी शून्य-कूपन (Zero-Coupon) अल्पकालिक संप्रभु ऋण साधन (91-दिन, 182-दिन, 364-दिन)। | उत्तर देखें सरकार के अस्थायी नकदी असंतुलन को बिना मुद्रा छापे पूरा करना तथा संपूर्ण अर्थव्यवस्था हेतु जोखिम-मुक्त अल्पकालिक ब्याज दर बेंचमार्क। |
वाणिज्यिक पत्र (Commercial Paper - CP) | उत्तर देखें शीर्ष क्रेडिट रेटिंग वाली कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा जारी असुरक्षित वचन-पत्र (7 दिन से 1 वर्ष; न्यूनतम ₹5 लाख मूल्यवर्ग)। | उत्तर देखें कॉर्पोरेट जगत को कार्यशील पूंजी (Working Capital) हेतु बैंकों के पारंपरिक ऋणों से सस्ता और गैर-बैंकिंग वैकल्पिक वित्तपोषण। |
जमा प्रमाण पत्र (Certificate of Deposit - CD) | उत्तर देखें अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और AIFIs द्वारा सावधि जमा के बदले जारी परिक्राम्य (Negotiable) प्रपत्र (7 दिन से 1 वर्ष)। | उत्तर देखें ऋण विस्तार के दौर में बैंकों को थोक जमा (Wholesale Deposits) आकर्षित करने और तरलता की कमी को दूर करने में सहायता। |
वाणिज्यिक बिल बाजार (Commercial Bills) | उत्तर देखें माल की वास्तविक उधार खरीद-बिक्री के आधार पर जारी विनिमय पत्र (Bills of Exchange); व्यापारिक साख का विपणन योग्य साधन। | उत्तर देखें आपूर्तिकर्ताओं को बिल बट्टाकरण (Discounting) के माध्यम से तुरंत नकदी उपलब्ध कराना और व्यावसायिक कार्यशील पूंजी को सुगम बनाना। |
रेपो व त्रिपक्षीय रेपो (Repo & TREPS) | उत्तर देखें सरकारी प्रतिभूतियों के संपार्श्विक पर आधारित पुनर्खरीद अनुबंध; CCIL द्वारा केंद्रीय समाशोधित सुरक्षित अल्पकालिक बाजार। | उत्तर देखें वित्तीय संस्थानों को सुरक्षित अल्पकालिक उधार व निवेश की सुविधा तथा RBI द्वारा बैंकिंग प्रणाली की दैनिक तरलता (LAF) का प्रबंधन। |
One-Liner Questions
अर्थशास्त्र में 'वित्तीय बाजार' (Financial Market) की मानक प्रामाणिक परिभाषा क्या है?
वह संस्थागत और तकनीकी मंच जहां वित्तीय परिसंपत्तियों (शेयर, बॉन्ड, डिबेंचर, बिल, मुद्रा आदि) का सृजन, क्रय-विक्रय और हस्तांतरण किया जाता है।
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वित्तीय बाजार का सबसे बुनियादी आर्थिक कार्य (Core Economic Function) क्या होता है?
'वित्तीय मध्यस्थता' (Financial Intermediation); अर्थात् अधिशेष इकाइयों (बचतकर्ताओं) से धन को घाटे वाली इकाइयों (उद्यमियों/निवेशकों) की ओर गतिमान करना।
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वित्तीय बाजार में 'अधिशेष इकाइयां' (Surplus Units) और 'घाटे की इकाइयां' (Deficit Units) किन्हें कहा जाता है?
अधिशेष इकाइयां वे परिवार और संस्थाएं हैं जिनकी आय उनके व्यय से अधिक होती है (बचतकर्ता), जबकि घाटे की इकाइयां वे सरकारें व फर्में हैं जिन्हें निवेश हेतु अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होती है।
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वित्तीय बाजार द्वारा किए जाने वाले 'संसाधनों के आबंटन' (Allocative Function) का क्या महत्व है?
यह दुर्लभ पूंजीगत संसाधनों को उन आर्थिक गतिविधियों में निर्देशित करता है जहां पूंजी की सीमांत उत्पादकता (Marginal Productivity of Capital) और रिटर्न सर्वाधिक हो।
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वित्तीय बाजार 'मूल्य खोज' (Price Discovery) की प्रक्रिया को कैसे सुगम बनाता है?
मांग और आपूर्ति की पारदर्शी बाजार शक्तियों के आधार पर वित्तीय परिसंपत्तियों का वास्तविक और निष्पक्ष बाजार मूल्य तय करके।
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वित्तीय परिसंपत्तियों को 'तरलता' (Liquidity) प्रदान करने से क्या अभिप्राय है?
निवेशकों को यह सुविधा देना कि वे जब चाहें अपनी प्रतिभूतियों को न्यूनतम समय और बिना किसी बड़े मूल्य नुकसान के तुरंत नकद मुद्रा में बदल सकें।
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वित्तीय बाजार 'लेन-देन लागत' (Transaction Costs) और सूचना विषमता को कैसे कम करता है?
क्रेताओं और विक्रेताओं को एक साझा मंच प्रदान करके, जिससे खरीदारों को खोजने में लगने वाला समय, प्रयास और सूचना जुटाने की लागत न्यूनतम हो जाती है।
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किसी देश की 'वित्तीय प्रणाली' (Financial System) के चार प्रमुख स्तंभ कौन-से होते हैं?
1. वित्तीय बाजार (Markets), 2. वित्तीय मध्यस्थ/संस्थान (Institutions), 3. वित्तीय परिसंपत्तियां/उपकरण (Assets/Instruments), और 4. वित्तीय सेवाएं व विनियामक (Services & Regulators)।
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'प्रत्यक्ष वित्तपोषण' (Direct Finance) और 'अप्रत्यक्ष वित्तपोषण' (Indirect Finance) में क्या अंतर है?
प्रत्यक्ष वित्तपोषण में उधारकर्ता सीधे वित्तीय बाजार में शेयर/बॉन्ड बेचकर निवेशकों से धन जुटाते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष वित्तपोषण में बैंक जैसी मध्यस्थ संस्थाएं जमाकर्ताओं से धन लेकर उधारकर्ताओं को ऋण देती हैं।
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वित्तीय बाजार का विकास किसी देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को कैसे गति देता है?
निष्क्रिय पड़ी घरेलू बचतों को जुटाकर बड़े बुनियादी ढांचे, तकनीकी नवाचार और उत्पादक औद्योगिक निवेश में बदलकर।
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परिपक्वता अवधि (Maturity Period) के आधार पर वित्तीय बाजार को किन दो मुख्य खंडों में विभाजित किया जाता है?
1. मुद्रा बाजार (Money Market - अल्पकालिक, 1 वर्ष तक) तथा 2. पूंजी बाजार (Capital Market - मध्यम व दीर्घकालिक, 1 वर्ष से अधिक)।
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प्रतिभूतियों के निर्गमन के आधार पर वित्तीय बाजार को किन दो भागों में बांटा जाता है?
1. प्राथमिक बाजार (Primary Market - नए निर्गमों का बाजार) तथा 2. द्वितीयक बाजार (Secondary Market - पूर्व-जारी प्रतिभूतियों का बाजार)।
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'प्राथमिक बाजार' (Primary Market) का प्राथमिक कार्य क्या होता है?
नई प्रतिभूतियां (IPO, FPO, राइट्स इश्यू) जारी करके कंपनियों और सरकार हेतु सीधे नई पूंजी जुटाना।
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'द्वितीयक बाजार' (Secondary Market / Stock Exchange) की क्या भूमिका है?
पहले से जारी हो चुकी प्रतिभूतियों की मौजूदा निवेशकों के बीच परस्पर खरीद-बिक्री को सुगम बनाना और उन्हें तरलता प्रदान करना।
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दावे की प्रकृति (Nature of Claim) के आधार पर वित्तीय बाजार किन दो रूपों में वर्गीकृत होता है?
1. ऋण बाजार (Debt Market - बॉन्ड, डिबेंचर, लोन) तथा 2. इक्विटी बाजार (Equity Market - शेयर, स्वामित्व हिस्सेदारी)।
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ऋण बाजार (Debt Market) और इक्विटी बाजार (Equity Market) में निवेशक के अधिकार में क्या बुनियादी अंतर है?
ऋण बाजार में निवेशक लेनदार (Creditor) होता है जिसे निश्चित ब्याज और मूलधन वापसी का विधिक अधिकार होता है, जबकि इक्विटी में निवेशक कंपनी का आनुपातिक स्वामी (Owner) होता है जिसका रिटर्न कंपनी के लाभ पर निर्भर करता है।
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'संगठित वित्तीय बाजार' (Organized Financial Market) की क्या पहचान होती है?
वह बाजार जो औपचारिक कानूनी नियमों, मानकीकृत प्रक्रियाओं और वैधानिक विनियामकों (जैसे RBI, SEBI) के सख्त नियंत्रण में कार्य करता है।
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'असंगठित वित्तीय बाजार' (Unorganized Financial Market) के प्रमुख घटक कौन-से हैं?
पारंपरिक साहूकार, महाजन, देशी बैंकर (Indigenous Bankers), चिट फंड और गैर-पंजीकृत वित्तीय मंडलियां।
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'गिल्ट-एज्ड बाजार' (Gilt-Edged Market) किसे कहा जाता है?
सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities - G-Secs) के बाजार को; जहां डिफ़ॉल्ट का शून्य जोखिम होने के कारण इन्हें 'स्वर्ण-किनारे वाली' (सर्वोत्तम सुरक्षित) प्रतिभूतियां कहा जाता है।
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'डेरिवेटिव्स बाजार' (Derivatives Market) की क्या विशेषता है?
ऐसा वित्तीय बाजार जहां उन वित्तीय अनुबंधों (वायदा/Futures, विकल्प/Options, स्वैप/Swaps) का व्यापार होता है जिनका मूल्य किसी अंतर्निहित परिसंपत्ति (शेयर, सूचकांक, मुद्रा, कमोडिटी) से निकलता है।
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भारत में वित्तीय बाजारों का शीर्ष विनियामक श्रम-विभाजन (Regulatory Architecture) कैसा है?
मुद्रा बाजार, सरकारी प्रतिभूतियां और विदेशी मुद्रा बाजार का नियमन RBI करता है; पूंजी बाजार, शेयर बाजार, कमोडिटी और म्यूचुअल फंड्स का नियमन SEBI करता है।
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बीमा बाजार और पेंशन बाजार का नियमन भारत में क्रमशः किन संस्थाओं द्वारा किया जाता है?
बीमा बाजार का नियमन IRDAI द्वारा तथा पेंशन बाजार का नियमन PFRDA द्वारा किया जाता है।
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विभिन्न वित्तीय विनियामकों (RBI, SEBI, IRDAI, PFRDA) के बीच समन्वय स्थापित करने वाली शीर्ष संस्था कौन-सी है?
वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (Financial Stability and Development Council - FSDC); जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं।
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FSDC की स्थापना किस समिति की सिफारिश पर और किस वर्ष की गई थी?
डॉ. रघुराम राजन समिति (2008) की सिफारिश पर, दिसंबर 2010 में।
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अर्थशास्त्र में 'वित्तीय परिसंपत्ति' (Financial Asset) की क्या परिभाषा है?
एक अमूर्त, गैर-भौतिक परिसंपत्ति जो किसी संविदात्मक दावे (Contractual Claim) के रूप में भविष्य के नकदी प्रवाह या आर्थिक मूल्य का प्रतिनिधित्व करती है।
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वित्तीय परिसंपत्ति और भौतिक परिसंपत्ति (Physical Asset) में क्या अंतर है?
भौतिक परिसंपत्ति (जैसे भूमि, भवन, मशीनरी) मूर्त होती है और उसका उपयोग सीधे उत्पादन में होता है, जबकि वित्तीय परिसंपत्ति केवल एक कानूनी व वित्तीय दावा होती है।
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वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रमुख उदाहरण कौन-से हैं?
बैंक जमाएं, शेयर, डिबेंचर, सरकारी बॉन्ड, ट्रेजरी बिल, वाणिज्यिक पत्र और म्यूचुअल फंड यूनिट्स।
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प्रतिभूतियों के 'भौतिक स्वरूप' (Physical Form) के स्थान पर 'अभौतिकीकरण' (Dematerialization / Demat) की शुरुआत भारत में किस अधिनियम द्वारा हुई?
डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 (Depositories Act, 1996) द्वारा।
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'डीमैट खाता' (Demat Account) क्या होता है?
एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक खाता जिसमें किसी निवेशक की प्रतिभूतियां (शेयर, बॉन्ड) भौतिक कागजी प्रमाणपत्रों के बजाय इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल रूप में सुरक्षित रखी जाती हैं।
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भारत में कार्यरत दो प्रमुख राष्ट्रीय डिपॉजिटरी संस्थाएं (Depositories) कौन-सी हैं?
1. NSDL (नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड - 1996) तथा 2. CDSL (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड - 1999)।
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भारत की पहली डिपॉजिटरी NSDL की स्थापना किस प्रमुख संस्थान के सहयोग से हुई थी?
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), IDBI और UTI के संयुक्त सहयोग से (अगस्त 1996)।
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CDSL की स्थापना मुख्य रूप से किस संस्था द्वारा प्रवर्तित की गई थी?
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों द्वारा (फरवरी 1999)।
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'डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट' (Depository Participant - DP) की क्या भूमिका होती है?
निवेशक और डिपॉजिटरी (NSDL/CDSL) के बीच का मध्यस्थ एजेंट (जैसे बैंक या ब्रोकरेज फर्म), जिसके माध्यम से आम नागरिक अपना डीमैट खाता खोलता है।
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वित्तीय प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री में 'ट्रेडिंग खाता' (Trading Account) और 'डीमैट खाता' में क्या अंतर है?
ट्रेडिंग खाते का उपयोग शेयर बाजार में शेयर खरीदने और बेचने के आदेश देने हेतु होता है, जबकि डीमैट खाते का उपयोग खरीदे गए शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में संचित (Store) रखने हेतु होता है।
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शेयर बाजार में 'समाशोधन और निपटान' (Clearing and Settlement) की क्या प्रक्रिया होती है?
समाशोधन सौदे के बाद दोनों पक्षों के दायित्वों (धन और प्रतिभूतियों की शुद्ध देयता) की गणना करता है, और निपटान में धन का वास्तविक भुगतान और शेयरों का वास्तविक हस्तांतरण पूरा होता है।
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भारत में शेयर बाजार में वर्तमान में कौन-सा निपटान चक्र (Settlement Cycle) मानक रूप से लागू है?
T+1 निपटान चक्र (सौदा होने के अगले कार्यदिवस पर पूर्ण निपटान); तथा चुनिंदा शेयरों हेतु प्रायोगिक तौर पर T+0 (उसी दिन निपटान) भी शुरू किया गया है।
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T+1 निपटान प्रणाली को पूर्णतः लागू करने वाला विश्व का दूसरा प्रमुख देश कौन-सा बना?
भारत (जनवरी 2023 में चीन के बाद पूर्णतः T+1 अपनाने वाला पहला बड़ा बाजार)।
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वित्तीय परिसंपत्तियों के लेन-देन में 'प्रतिपक्ष जोखिम' (Counterparty Risk) क्या होता है?
यह जोखिम कि लेन-देन का दूसरा पक्ष (क्रेता या विक्रेता) अपने दायित्व (धन देने या शेयर देने) का समय पर पालन करने में विफल हो जाए।
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शेयर बाजार में प्रतिपक्ष जोखिम को समाप्त करने का दायित्व किसका होता है?
'समाशोधन निगम' (Clearing Corporation - जैसे NSCCL, ICCL) का; जो केंद्रीय प्रतिपक्ष (CCP) बनकर प्रत्येक सौदे के निपटान की 100% विधिक गारंटी देता है।
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वित्तीय बाजारों में 'रोलिंग सेटलमेंट' (Rolling Settlement) का क्या अर्थ है?
प्रत्येक कारोबारी दिन किए गए सौदों का निपटान एक निश्चित दिनों के चक्र (T+1) के आधार पर अलग-अलग क्रमिक रूप से पूरा होना।
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'मुद्रा बाजार' (Money Market) की मानक आर्थिक परिभाषा क्या है?
अल्पकालिक वित्तीय परिसंपत्तियों (जिनकी मूल परिपक्वता अवधि 1 दिन से लेकर अधिकतम 1 वर्ष तक होती है) के उधार, निवेश और व्यापार का बाजार।
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मुद्रा बाजार के वित्तीय साधनों की तीन प्रमुख अंतर्निहित विशेषताएं क्या हैं?
1. अल्पकालिक परिपक्वता (1 वर्ष तक), 2. उच्च तरलता (तुरंत नकदी में परिवर्तन), और 3. न्यूनतम डिफ़ॉल्ट जोखिम (Near-Money Assets)।
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मुद्रा बाजार के वित्तीय साधनों को अर्थशास्त्र में 'समीप मुद्रा' (Near Money) क्यों कहा जाता है?
क्योंकि वे स्वयं वैध मुद्रा नहीं होते किंतु उन्हें अत्यंत कम लागत और बिना किसी बड़े मूल्य ह्रास के तुरंत नकद मुद्रा में बदला जा सकता है।
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भारतीय मुद्रा बाजार के विकास और सुधार हेतु 1987 में किस ऐतिहासिक समिति ने अपनी सिफारिशें दी थीं?
एन. वाघुल समिति (N. Vaghul Committee on Money Market)।
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वाघुल समिति (1987) की मुख्य सिफारिशों के आधार पर किन नए मुद्रा बाजार साधनों और संस्थाओं की स्थापना हुई?
वाणिज्यिक पत्र (CP), जमा प्रमाण पत्र (CD), अंतर-बैंक सहभागिता प्रमाण पत्र (IBPC) तथा DFHI की स्थापना।
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भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 1988 में स्थापित 'डिस्काउंट एंड फाइनेंस हाउस ऑफ इंडिया' (DFHI) का क्या मुख्य उद्देश्य था?
मुद्रा बाजार के अल्पकालिक उपकरणों (T-Bills, वाणिज्यिक बिल आदि) को द्वितीयक बाजार में निरंतर तरलता और छूट (Discounting) सुविधा प्रदान करना।
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मुद्रा बाजार और पूंजी बाजार में सबसे बड़ा नियामक अंतर क्या है?
मुद्रा बाजार का प्राथमिक विनियामक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) है, जबकि पूंजी बाजार का प्राथमिक विनियामक सेबी (SEBI) है।
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मुद्रा बाजार में 'थोक बाजार' (Wholesale Market) की क्या प्रकृति होती है?
लेन-देन विशाल वित्तीय आकार (करोड़ों रुपये) में होते हैं और इसमें मुख्य रूप से बैंक, वित्तीय संस्थान, प्राथमिक डीलर और बड़े कॉर्पोरेट्स ही भाग लेते हैं।
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मुद्रा बाजार का कौन-सा ब्याज दर संकेतक RBI की मौद्रिक नीति का आधिकारिक 'परिचालन लक्ष्य' (Operating Target) है?
भारित औसत कॉल मनी दर (Weighted Average Call Rate - WACR)।
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मौद्रिक नीति संचरण (Monetary Policy Transmission) में मुद्रा बाजार को पहला चरण क्यों माना जाता है?
क्योंकि जब RBI रेपो दर बदलता है, तो उसका सबसे पहला और त्वरित प्रभाव मुद्रा बाजार की अंतर-बैंक कॉल मनी दरों और T-Bills की यील्ड पर पड़ता है।
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अंतर-बैंक मुद्रा बाजार को ऋण अवधि के आधार पर किन तीन खंडों में बांटा जाता है?
1. कॉल मनी (Call Money - 1 दिन / ओवरनाइट), 2. नोटिस मनी (Notice Money - 2 से 14 दिन), और 3. टर्म मनी (Term Money - 15 दिन से 1 वर्ष)।
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'कॉल मनी' (Call Money / ओवरनाइट मनी) का क्या अर्थ है?
एक कारोबारी दिन (Overnight) की अवधि हेतु बिना किसी संपार्श्विक (Uncollateralized) के लिया या दिया जाने वाला अंतर-बैंक ऋण।
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'नोटिस मनी' (Notice Money) की समयावधि कितनी होती है?
2 दिन से लेकर 14 दिन तक की अवधि हेतु दिया जाने वाला अल्पकालिक ऋण।
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'टर्म मनी' (Term Money) की क्या समय-सीमा होती है?
15 दिन से अधिक और अधिकतम 1 वर्ष तक की अवधि हेतु अंतर-बैंक उधार।
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वाणिज्यिक बैंक कॉल और नोटिस मनी बाजार से मुख्य रूप से किस वैधानिक आवश्यकता की पूर्ति हेतु उधार लेते हैं?
दैनिक नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) की अनिवार्य आवश्यकताओं के अस्थायी घाटे को पूरा करने हेतु।
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कॉल मनी बाजार में उधार लेने और देने की पात्रता (Eligibility) किन संस्थाओं तक सीमित है?
केवल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों सहित), सहकारी बैंक और प्राथमिक डीलर (Primary Dealers - PDs)।
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क्या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs), म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां कॉल मनी बाजार में सीधे उधार ले सकती हैं?
नहीं; RBI ने अंतर-बैंक बाजार की शुद्धि बनाए रखने हेतु गैर-बैंक संस्थाओं को कॉल मनी बाजार में उधार लेने से बाहर कर दिया है (वे रेपो/TREPS में भाग ले सकते हैं)।
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कॉल मनी बाजार में ब्याज दर (Call Rate) का निर्धारण कैसे होता है?
पूरी तरह बाजार में बैंकों की दैनिक मांग और आपूर्ति की प्रतिस्पर्धा द्वारा (अत्यधिक अस्थिर दर)।
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जब बैंकिंग प्रणाली में नकदी की भारी कमी होती है, तो कॉल मनी दर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
कॉल मनी दर तेजी से बढ़कर नीतिगत रेपो दर से ऊपर निकल जाती है और कभी-कभी MSF दर को भी छू लेती है।
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कॉल मनी बाजार में किसी बैंक की उधार लेने की अधिकतम सीमा (Prudential Limit) कौन तय करता है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI); जो बैंक की चुकता पूंजी और आरक्षित निधियों के एक निश्चित प्रतिशत तक सीमित होती है।
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'ट्रेजरी बिल' (Treasury Bills / T-Bills) की मानक परिभाषा क्या है?
भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए जाने वाले अल्पकालिक संप्रभु ऋण साधन।
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क्या राज्य सरकारें ट्रेजरी बिल जारी कर सकती हैं?
नहीं; ट्रेजरी बिल केवल केंद्र सरकार (भारत सरकार) द्वारा ही जारी किए जाते हैं; राज्य सरकारें अर्थोपाय अग्रिम (WMA) और राज्य विकास ऋण (SDLs) का उपयोग करती हैं।
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वर्तमान में भारत सरकार द्वारा नियमित रूप से किन तीन परिपक्वता अवधियों के T-Bills जारी किए जाते हैं?
1. 91-दिवसीय T-Bills, 2. 182-दिवसीय T-Bills, और 3. 364-दिवसीय T-Bills।
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T-Bills पर ब्याज का भुगतान किस रूप में किया जाता है?
ये 'शून्य-कूपन प्रतिभूतियां' (Zero-Coupon Securities) हैं; इन पर कोई नियमित ब्याज नहीं दिया जाता, बल्कि इन्हें बट्टे (Discount) पर जारी किया जाता है और परिपक्वता पर अंकित मूल्य (Face Value) पर भुनाया जाता है।
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यदि ₹100 अंकित मूल्य का 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल ₹98.20 पर जारी होता है और परिपक्वता पर ₹100 वापस मिलते हैं, तो निवेशक का रिटर्न क्या है?
₹1.80 (अंकित मूल्य और निर्गम मूल्य का अंतर ہی निवेशक का ब्याज/प्रतिफल है)।
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ट्रेजरी बिलों में न्यूनतम निवेश राशि (Minimum Investment Amount) कितनी निर्धारित है?
न्यूनतम ₹25,000 और उसके बाद ₹25,000 के गुणकों में।
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T-Bills की नीलामी (Auction) का संचालन किसके द्वारा और किस प्लेटफॉर्म पर किया जाता है?
RBI द्वारा अपने इलेक्ट्रॉनिक कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म 'ई-कुबेर' (E-Kuber) पर।
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T-Bills की नीलामी में 'प्रतियोगी बोली' (Competitive Bidding) और 'गैर-प्रतियोगी बोली' (Non-Competitive Bidding) में क्या अंतर है?
प्रतियोगी बोली में बड़े संस्थागत निवेशक मूल्य/यील्ड उद्धृत करते हैं, जबकि गैर-प्रतियोगी बोली में खुदरा निवेशक व राज्य सरकारें नीलामी में निकली भारित औसत दर पर सीधे T-Bills प्राप्त करते हैं।
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खुदरा निवेशकों को सीधे T-Bills और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की सुविधा देने हेतु RBI ने कौन-सा पोर्टल शुरू किया है?
आरबीआई रिटेल डायरेक्ट (RBI Retail Direct Scheme - नवंबर 2021)।
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'कैश मैनेजमेंट बिल' (Cash Management Bills - CMBs) क्या होते हैं?
केंद्र सरकार की तात्कालिक और अप्रत्याशित नकदी कमियों को पूरा करने हेतु 91 दिनों से कम परिपक्वता अवधि वाले अल्पकालिक T-Bills।
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भारत में सर्वप्रथम कैश मैनेजमेंट बिल (CMBs) किस वर्ष जारी किए गए थे?
वर्ष 2010 में (मई 2010)।
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1997 में बंद किए गए 'तदर्थ ट्रेजरी बिल' (Ad-hoc Treasury Bills) क्या थे और उन पर क्यों रोक लगाई गई?
बजट घाटे को पूरा करने हेतु सीधे नोट छापकर RBI द्वारा स्वतः खरीदे जाने वाले बिल; जिससे अनियंत्रित मुद्रास्फीति फैलती थी; 1997 के समझौते द्वारा इन्हें बंद कर WMA शुरू किया गया।
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क्या ट्रेजरी बिलों को बैंकों द्वारा वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) की अनिवार्यता पूरी करने हेतु मान्य किया जाता है?
हाँ; T-Bills उच्च-गुणवत्ता वाली तरल सरकारी प्रतिभूतियां हैं जो SLR निवेश के रूप में 100% मान्य हैं।
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T-Bills को वित्तीय प्रणाली में 'जोखिम-मुक्त प्रतिभूति' (Risk-free Asset) क्यों माना जाता है?
क्योंकि इनके पीछे भारत सरकार की संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee) होती है, जिससे मूलधन और प्रतिफल डूबने का शून्य जोखिम होता है।
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'वाणिज्यिक पत्र' (Commercial Paper - CP) की मानक परिभाषा क्या है?
शीर्ष क्रेडिट रेटिंग प्राप्त अग्रणी कॉर्पोरेट कंपनियों, प्राथमिक डीलरों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों द्वारा अल्पकालिक कार्यशील पूंजी जुटाने हेतु जारी किया जाने वाला असुरक्षित वचन-पत्र (Unsecured Promissory Note)।
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भारत में वाणिज्यिक पत्र (CP) की औपचारिक शुरुआत किस वर्ष और किसकी सिफारिश पर की गई थी?
वर्ष 1990 में, वाघुल समिति की सिफारिश पर।
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वाणिज्यिक पत्र (CP) की न्यूनतम और अधिकतम परिपक्वता अवधि (Maturity Period) क्या होती है?
न्यूनतम 7 दिन तथा अधिकतम 1 वर्ष (निर्गम तिथि से)।
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वाणिज्यिक पत्र (CP) का न्यूनतम मूल्यवर्ग (Minimum Denomination) कितना होना अनिवार्य है?
न्यूनतम ₹5 लाख और उसके बाद ₹5 लाख के गुणकों में।
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किसी कॉर्पोरेट कंपनी को CP जारी करने के लिए कौन-सी वित्तीय पात्रता शर्तें पूरी करनी होती हैं?
कंपनी की मूर्त निवल संपत्ति (Tangible Net Worth) न्यूनतम ₹4 करोड़ हो, बैंक से कार्यशील पूंजी सीमा स्वीकृत हो, और उसका ऋण खाता मानक श्रेणी में हो।
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CP जारी करने हेतु किसी सेबी-पंजीकृत क्रेडिट रेटिंग एजेंसी से न्यूनतम कितनी क्रेडिट रेटिंग प्राप्त होना अनिवार्य है?
न्यूनतम 'A-2' या उसके समकक्ष अल्पकालिक क्रेडिट रेटिंग।
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वाणिज्यिक पत्र (CP) किस प्रारूप में जारी और रखे जाते हैं?
डिमैटेरियलाइज्ड (Demat) प्रारूप में, NSDL या CDSL डिपॉजिटरी के माध्यम से (प्रॉमिसरी नोट के रूप में)।
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कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए बैंक से वर्किंग कैपिटल लोन लेने की तुलना में CP जारी करना अधिक आकर्षक क्यों होता है?
क्योंकि उच्च साख वाली कंपनियों को CP के माध्यम से बैंक की ब्याज दरों की तुलना में कम लागत/सस्ते ब्याज पर बाजार से धन मिल जाता है।
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वाणिज्यिक पत्र में 'इश्यूइंग एंड पेइंग एजेंट' (IPA) की क्या भूमिका होती है?
एक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक जो CP निर्गमन के संपूर्ण दस्तावेजों का सत्यापन करता है और भुगतान एजेंट के रूप में कार्य करता है।
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'जमा प्रमाण पत्र' (Certificate of Deposit - CD) क्या होता है?
अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों (AIFIs) द्वारा एक निश्चित समयावधि हेतु जमा की गई एकमुश्त राशि के बदले जारी किया जाने वाला एक विधिक व परिक्राम्य (Negotiable) वित्तीय प्रपत्र।
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भारत में जमा प्रमाण पत्र (CD) की शुरुआत किस वर्ष की गई थी?
वर्ष 1989 में (वाघुल समिति की सिफारिश पर)।
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जमा प्रमाण पत्र (CD) जारी करने की पात्रता किन संस्थानों को प्राप्त है?
सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (लघु वित्त बैंक सहित, किंतु RRBs और भुगतान बैंकों को छोड़कर) तथा RBI द्वारा अधिकृत अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान (NABARD, EXIM Bank, SIDBI, NHB)।
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वाणिज्यिक बैंकों द्वारा जारी किए जाने वाले CD की न्यूनतम और अधिकतम परिपक्वता अवधि क्या होती है?
न्यूनतम 7 दिन तथा अधिकतम 1 वर्ष।
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अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों (AIFIs) द्वारा जारी CD की परिपक्वता अवधि कितनी हो सकती है?
न्यूनतम 1 वर्ष और अधिकतम 3 वर्ष।
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जमा प्रमाण पत्र (CD) का न्यूनतम निर्गम मूल्यवर्ग (Minimum Denomination) कितना निर्धारित है?
न्यूनतम ₹1 लाख और उसके बाद ₹1 लाख के गुणकों में (RBI के संशोधित दिशानिर्देशानुसार)।
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सामान्य सावधि बैंक जमा (Bank Fixed Deposit - FD) और जमा प्रमाण पत्र (CD) में क्या सबसे बड़ा अंतर है?
FD अहस्तांतरणीय (Non-transferable) होती है, जबकि CD एक परिक्राम्य प्रपत्र (Negotiable Instrument) है जिसे परिपक्वता से पूर्व द्वितीयक बाजार में किसी अन्य को बेचा/हस्तांतरित किया जा सकता है।
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क्या बैंक अपने स्वयं के द्वारा जारी किए गए जमा प्रमाण पत्रों (CDs) के बदले ऋण दे सकते हैं?
नहीं; RBI के नियमों के अनुसार बैंक अपने CD के विरुद्ध ऋण नहीं दे सकते और न ही परिपक्वता से पहले उन्हें वापस खरीद (Buyback) सकते हैं।
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बैंक जमा प्रमाण पत्र (CD) जारी करने का सहारा मुख्य रूप से कब लेते हैं?
जब अर्थव्यवस्था में ऋण की मांग बहुत तीव्र होती है किंतु सामान्य खुदरा बैंक जमाओं की संवृद्धि सुस्त होती है, तो थोक तरलता जुटाने हेतु बैंक उच्च दरों पर CD जारी करते हैं।
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'वाणिज्यिक बिल' या 'व्यापारिक बिल' (Commercial Bills / Trade Bills) क्या होते हैं?
व्यापारिक लेन-देन में वस्तुओं और सेवाओं की उधार बिक्री के आधार पर विक्रेता द्वारा क्रेता पर लिखा गया एक औपचारिक विनिमय पत्र (Bill of Exchange)।
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व्यापारिक बिल (Trade Bill) 'वाणिज्यिक बिल' (Commercial Bill) में कब परिवर्तित होता है?
जब उस व्यापारिक बिल को किसी वाणिज्यिक बैंक द्वारा स्वीकार (Accept) कर लिया जाता है या भुना (Discount) दिया जाता है।
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विनिमय पत्र (Bill of Exchange) में किन तीन प्रमुख पक्षों की कानूनी भूमिका होती है?
1. आहरणकर्ता (Drawer - विक्रेता), 2. अदाकर्ता (Drawee - क्रेता/देनदार), और 3. आदाता (Payee - भुगतान प्राप्त करने वाला)।
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बिल बट्टाकरण (Bill Discounting) की प्रक्रिया क्या होती है?
विक्रेता परिपक्वता तिथि की प्रतीक्षा किए बिना बैंक को बिल सौंप देता है और बैंक अपना मामूली कमीशन (बट्टा) काटकर तुरंत नकद भुगतान कर देता है; परिपक्वता पर बैंक क्रेता से पूरी राशि वसूलता है।
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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के व्यापारिक बिलों के ऑनलाइन बट्टाकरण हेतु RBI द्वारा शुरू किया गया विशेष प्लेटफॉर्म कौन-सा है?
टीआरईडीएस (TReDS - Trade Receivables Discounting System)।
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TReDS प्लेटफॉर्म का MSME क्षेत्र को क्या सबसे बड़ा लाभ होता है?
कॉर्पोरेट खरीदारों द्वारा भुगतान में होने वाली देरी से मुक्ति मिलती है और कई प्रतिस्पर्धी वित्तीय संस्थानों की ऑनलाइन बोलियों के माध्यम से न्यूनतम ब्याज दर पर त्वरित नकदी प्राप्त होती है।
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'रेपो' (Repo - Repurchase Agreement) की प्रामाणिक परिभाषा क्या है?
एक ऐसा औपचारिक अनुबंध जिसके तहत एक पक्ष अनुमोदित प्रतिभूतियां (G-Secs) दूसरे पक्ष को नकद बेचता है और साथ ही भविष्य की किसी निश्चित तिथि पर पूर्व-निर्धारित उच्च कीमत पर उन्हें वापस खरीदने का वचन देता है।
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'रिवर्स रेपो' (Reverse Repo) क्या होता है?
रेपो का ठीक उल्टा दृष्टिकोण; जिसके तहत एक पक्ष नकदी देकर प्रतिभूतियां खरीदता है और भविष्य में पूर्व-निर्धारित मूल्य पर उन्हें वापस बेचने का अनुबंध करता है (अतिरिक्त नकदी का सुरक्षित निवेश)।
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रेपो अनुबंध में 'रेपो दर' (Repo Rate) क्या दर्शाती है?
प्रतिभूतियों के बिक्री मूल्य और पुनर्खरीद मूल्य के बीच का अंतर, जो वास्तव में उधारकर्ता द्वारा चुकाई गई ब्याज दर होती है।
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भारत में 'तरलता समायोजन सुविधा' (Liquidity Adjustment Facility - LAF) के तहत रेपो का क्या उपयोग है?
RBI वाणिज्यिक बैंकों को उनकी दैनिक तरलता की कमी को पूरा करने हेतु सरकारी प्रतिभूतियों के संपार्श्विक पर अल्पकालिक ऋण (रेपो) देता है।
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'बाजार रेपो' (Market Repo) और 'आरबीआई एलएएफ रेपो' (RBI LAF Repo) में क्या अंतर है?
LAF रेपो केवल RBI और बैंकों के बीच का नीतिगत लेन-देन है, जबकि मार्केट रेपो विभिन्न वित्तीय संस्थानों, बैंकों, म्यूचुअल फंड्स और प्राथमिक डीलरों के बीच परस्पर संपार्श्विक उधार का खुला बाजार है।
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रेपो अनुबंध में 'हेयरकट' (Haircut / Margin) की क्या भूमिका होती है?
प्रतिभूतियों के वास्तविक बाजार मूल्य और उसके बदले दिए जाने वाले वास्तविक ऋण की राशि के बीच का सुरक्षा मार्जिन (जैसे ₹100 के बॉन्ड पर ₹95 का ऋण देना = 5% हेयरकट)।
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'त्रिपक्षीय रेपो' (Tri-Party Repo - TREPS) क्या है जिसे 2018 में शुरू किया गया?
एक ऐसा संपार्श्विक रेपो बाजार जहां एक निष्पक्ष तीसरा पक्ष (भारतीय समाशोधन निगम - CCIL) मध्यस्थ बनकर संपार्श्विक चयन, मूल्यांकन, मार्जिन और निपटान का प्रबंधन करता है।
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त्रिपक्षीय रेपो (TREPS) ने भारतीय मुद्रा बाजार में किस पुराने लोकप्रिय साधन का स्थान लिया?
सीबीएलओ (CBLO - Collateralized Borrowing and Lending Obligation) का स्थान लिया (नवंबर 2018 से)।
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TREPS बाजार का सबसे बड़ा लाभ गैर-बैंकिंग संस्थाओं (जैसे म्यूचुअल फंड्स) को क्या होता है?
वे बिना बैंक मध्यस्थता के अपनी अत्यधिक अधिशेष नकदी को सरकारी प्रतिभूतियों के पूर्ण सुरक्षित संपार्श्विक पर रातों-रात (Overnight) ब्याज पर उधार दे सकते हैं।
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भारतीय समाशोधन निगम (Clearing Corporation of India Limited - CCIL) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
अप्रैल 2001 में (RBI के समर्थन से प्रमुख बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रवर्तित)।
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मुद्रा बाजार और सरकारी प्रतिभूति बाजार में CCIL की क्या रीढ़-जैसी भूमिका है?
यह रेपो, TREPS, विदेशी मुद्रा और सरकारी प्रतिभूतियों के सभी लेन-देनों हेतु 'केंद्रीय प्रतिपक्ष' (Central Counterparty - CCP) के रूप में कार्य कर शून्य निपटान जोखिम की गारंटी देता है।
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'मुद्रा बाजार म्यूचुअल फंड' (Money Market Mutual Funds - MMMFs / Liquid Funds) क्या होते हैं?
म्यूचुअल फंड की वे योजनाएं जो खुदरा और संस्थागत निवेशकों का धन केवल 91 दिनों तक की परिपक्वता वाले अत्यधिक सुरक्षित मुद्रा बाजार साधनों (T-Bills, CP, CD, TREPS) में निवेश करती हैं।
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लिक्विड फंड्स (Liquid Funds) खुदरा और कॉर्पोरेट निवेशकों के बीच इतने लोकप्रिय क्यों हैं?
क्योंकि इनमें बचत बैंक खाते से अधिक रिटर्न मिलता है, पूंजी हानि का जोखिम नगण्य होता है और T+1 दिन में तत्काल निकासी की सुविधा होती है।
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लिक्विड म्यूचुअल फंड्स का विनियामक पर्यवेक्षण किसके अधीन होता है?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अधीन (RBI के मुद्रा बाजार दिशानिर्देशों के समन्वय में)।
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भारतीय मुद्रा बाजार की ऐतिहासिक संरचनात्मक कमियां (Weaknesses) क्या रही हैं?
कॉल मनी बाजार का अत्यधिक बैंक-केंद्रित होना, वाणिज्यिक बिलों के द्वितीयक बाजार का अविकसित होना, और तरलता का कुछ बड़े सार्वजनिक बैंकों के पास संकेंद्रित होना।
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RBI द्वारा शुरू की गई 'स्थायी जमा सुविधा' (Standing Deposit Facility - SDF) क्या है?
अप्रैल 2022 में शुरू की गई एक ऐसी गैर-संपार्श्विक सुविधा जिसके तहत बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी बिना किसी सरकारी प्रतिभूति के बदले सीधे RBI के पास जमा कर ब्याज कमा सकते हैं।
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सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility - MSF) का मुद्रा बाजार में क्या महत्व है?
आपातकालीन स्थिति में जब अंतर-बैंक तरलता सूख जाती है, तो बैंक अपनी SLR प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर रेपो दर से उच्च दंडात्मक ब्याज दर पर RBI से ओवरनाइट ऋण ले सकते हैं।
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मुद्रा बाजार की ब्याज दरों का देश की संपूर्ण अर्थव्यवस्था की साख लागत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
मुद्रा बाजार की दरें ही बैंकों की कोषों की सीमांत लागत (MCLR) और बाहरी बेंचमार्क आधारित ऋण दरों (EBLR) का आधार बनती हैं, जिससे आम जनता के होम लोन, ऑटो लोन और व्यावसायिक ऋणों की ब्याज दरें तय होती हैं।
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वित्तीय बाजार और मुद्रा बाजार के संपूर्ण अध्ययन का अंतिम समष्टिगत निष्कर्ष क्या है?
वित्तीय बाजार देश की जीवनरेखा हैं जहां मुद्रा बाजार अल्पकालिक वित्तीय स्थिरता और दैनिक तरलता संतुलन प्रदान करता है, जबकि पूंजी बाजार दीर्घकालिक औद्योगिक विकास की नींव रखता है; एक दक्ष, पारदर्शी और गतिशील मुद्रा बाजार ही केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को अंतिम नागरिक तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
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