📚 Economy — Economy Notes

गरीबी और असमानता Part 2

गरीबी आकलन समितियां (अलघ, लकड़ावाला, तेंदुलकर, रंगराजन), कार्यप्रणाली, उपभोग बास्केट, गरीबी रेखाएं, तुलनात्मक विश्लेषण तथा नीतिगत प्रभाव

Quick Reference
महत्वपूर्ण तथ्य एवं योगदान
गरीबी और असमानता Part 2
गरीबी समिति/पद्धतिप्रमुख विशेषतागरीबी मापन में भूमिका
डॉ. वाई. के. अलघ कार्यदल (1979)
उत्तर देखें
न्यूनतम पोषण आवश्यकता: ग्रामीण क्षेत्रों हेतु 2,400 किलोकैलोरी तथा शहरी क्षेत्रों हेतु 2,100 किलोकैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन।
उत्तर देखें
भारत में पहली बार आधिकारिक रूप से पोषण-आधारित उपभोग व्यय बास्केट द्वारा वैज्ञानिक गरीबी रेखा (ग्रामीण ₹49.09, शहरी ₹56.64) का निर्धारण।
प्रो. डी. टी. लकड़ावाला समिति (1993)
उत्तर देखें
1973-74 की उपभोग बास्केट को आधार बनाकर राज्य-विशिष्ट गरीबी रेखाएं (State-specific Poverty Lines); ग्रामीण हेतु CPI-AL तथा शहरी हेतु CPI-IW का उपयोग।
उत्तर देखें
राज्यों के बीच मूल्य स्तरों और जीवन-यापन लागत के अंतर को पहली बार गरीबी रेखा में समाहित करना तथा राष्ट्रीय अनुपात के स्थान पर क्षेत्रीय वास्तविकताएं प्रकट करना।
प्रो. सुरेश तेंदुलकर समिति (2009)
उत्तर देखें
कैलोरी मानदंड को छोड़ना, स्वास्थ्य और शिक्षा के निजी खर्चों को बास्केट में जोड़ना, तथा 1993-94 की शहरी उपभोग बास्केट को अखिल भारतीय मानक बनाना।
उत्तर देखें
मिश्रित संदर्भ अवधि (MRP) का प्रयोग; 2011-12 हेतु ग्रामीण ₹816 (₹27.20/दिन) व शहरी ₹1,000 (₹33.33/दिन) की रेखा तय कर राष्ट्रीय गरीबी दर 21.9% आंकना।
डॉ. सी. रंगराजन समिति (2014)
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पोषण के तीन घटकों (कैलोरी + प्रोटीन + वसा) के साथ-साथ आवश्यक गैर-खाद्य खर्चों (किराया, परिवहन, शिक्षा, कपड़े) का स्वतंत्र मानक सर्वेक्षण।
उत्तर देखें
संशोधित संदर्भ अवधि (MMRP); 2011-12 हेतु ग्रामीण ₹972 (₹32.40/दिन) व शहरी ₹1,407 (₹46.90/दिन) निर्धारित कर 29.5% (36.3 करोड़) आबादी को गरीब आंकना।
एन. सी. सक्सेना समिति (2009)
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ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ग्रामीण बीपीएल (BPL) परिवारों की स्वचालित समावेशन, स्वचालित अपवर्जन और ग्रेडिंग अंकों द्वारा पहचान हेतु गठित।
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लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) और कल्याणकारी योजनाओं में वास्तविक ग्रामीण गरीबों की पहचान हेतु प्रशासनिक रूपरेखा तैयार करना।
एस. आर. हाशिम समिति (2012)
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योजना आयोग द्वारा शहरी क्षेत्रों में गरीबों (Urban Poor) की पहचान हेतु तीन आयामी वंचनाओं (आवासीय, व्यावसायिक और सामाजिक) के आधार पर वर्गीकरण।
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शहरी बेघरों, अनौपचारिक कामगारों और सामाजिक रूप से बहिष्कृत परिवारों की पहचान कर शहरी गरीबी उन्मूलन योजनाओं का लक्ष्यीकरण।
अरविंद पनगढ़िया कार्यदल (2015)
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नीति आयोग द्वारा गरीबी रेखा और उन्मूलन रणनीतियों की समीक्षा हेतु गठित; केवल आय-आधारित रेखा के स्थान पर बहुआयामी वंचनाओं पर बल।
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पारंपरिक गरीबी रेखा को कल्याणकारी प्रगति मापने का ट्रैकर मानना तथा आकांक्षी विकास नीतियों व संतृप्तीकरण अभियानों की वकालत करना।
राष्ट्रीय बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (NITI Aayog)
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ऑक्सफोर्ड OPHI पद्धति पर आधारित 12 संकेतकों (स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर) पर परिवारों की समवर्ती वंचनाओं का समग्र मापन।
उत्तर देखें
मौद्रिक गरीबी रेखा से आगे बढ़कर वास्तविक भौतिक वंचनाओं को उजागर करना; 2013-14 से 2022-23 के बीच 24.8 करोड़ लोगों के गरीबी मुक्त होने का दस्तावेजीकरण।

One-Liner Questions

स्वतंत्रता के बाद भारत में गरीबी के आधिकारिक आकलन और मापन का दायित्व ऐतिहासिक रूप से किस संस्था के पास था?
योजना आयोग (Planning Commission) के पास; जो समय-समय पर विशेषज्ञ समितियों और कार्यदलों का गठन करता था।
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वर्ष 2015 में योजना आयोग के समाप्त होने के बाद गरीबी और वंचना के विश्लेषण का नोडल दायित्व किसे सौंपा गया?
नीति आयोग (NITI Aayog) को।
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भारत में आधिकारिक गरीबी रेखाओं के निर्धारण हेतु उपभोग व्यय का प्राथमिक सर्वेक्षण डेटा किस संस्था द्वारा एकत्र किया जाता रहा है?
राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO / वर्तमान में NSO - सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय)।
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एनएसओ (NSO) द्वारा गरीबी आकलन हेतु आयोजित किया जाने वाला प्राथमिक सर्वेक्षण कौन-सा है?
घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (Household Consumption Expenditure Survey - HCES)।
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भारत में गरीबी आकलन हेतु गठित प्रमुख आधिकारिक विशेषज्ञ समितियों का सही कालानुक्रमिक क्रम क्या है?
1. वाई. के. अलघ कार्यदल (1977-1979), 2. डी. टी. लकड़ावाला समिति (1989-1993), 3. सुरेश तेंदुलकर समिति (2005-2009), और 4. सी. रंगराजन समिति (2012-2014)।
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योजना आयोग द्वारा 1977 में गठित कार्यदल का आधिकारिक नाम क्या था जिसके अध्यक्ष डॉ. वाई. के. अलघ थे?
न्यूनतम आवश्यकताओं और प्रभावी उपभोग मांग के प्रक्षेपण पर कार्यदल (Task Force on Projections of Minimum Needs and Effective Consumption Demand)।
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डॉ. वाई. के. अलघ कार्यदल ने अपनी ऐतिहासिक रिपोर्ट किस वर्ष योजना आयोग को प्रस्तुत की थी?
वर्ष 1979 में।
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अलघ कार्यदल (1979) द्वारा अनुशंसित पोषण संबंधी न्यूनतम दैनिक ऊर्जा आवश्यकता क्या थी?
ग्रामीण क्षेत्रों हेतु 2,400 किलोकैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तथा शहरी क्षेत्रों हेतु 2,100 किलोकैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन।
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अलघ कार्यदल ने ग्रामीण क्षेत्रों हेतु 2,400 और शहरी क्षेत्रों हेतु 2,100 किलोकैलोरी का अंतर क्यों रखा?
क्योंकि ग्रामीण आबादी कृषि और भारी शारीरिक श्रम में संलग्न होती है जिसके लिए अधिक जैविक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जबकि शहरी व्यवसाय अपेक्षाकृत कम शारीरिक श्रम वाले होते हैं।
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अलघ कार्यदल ने आवश्यक कैलोरी प्राप्त करने हेतु 1973-74 के मूल्यों पर प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय (MPCE) कितना निर्धारित किया था?
ग्रामीण क्षेत्रों हेतु ₹49.09 प्रति माह तथा शहरी क्षेत्रों हेतु ₹56.64 प्रति माह।
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अलघ कार्यदल की कार्यप्रणाली में उपभोग व्यय डेटा किस वर्ष के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSSO) से लिया गया था?
NSSO के 28वें दौर (1973-74) के उपभोग सर्वेक्षण से।
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योजना आयोग द्वारा सितंबर 1989 में गठित 'गरीबों के अनुपात और संख्या के आकलन पर विशेषज्ञ समूह' के अध्यक्ष कौन थे?
प्रो. डी. टी. लकड़ावाला (D. T. Lakdawala / पूर्व उपाध्यक्ष, योजना आयोग)।
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डी. टी. लकड़ावाला समिति ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट योजना आयोग को किस वर्ष सौंपी?
जुलाई 1993 में (सरकार द्वारा 1997 में औपचारिक रूप से स्वीकृत)।
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लकड़ावाला समिति (1993) की सबसे क्रांतिकारी और युगांतरकारी सिफारिश क्या थी?
अखिल भारतीय एकल गरीबी रेखा के स्थान पर 'राज्य-विशिष्ट गरीबी रेखाओं' (State-Specific Poverty Lines) का निर्धारण करना।
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लकड़ावाला समिति ने राज्य-विशिष्ट गरीबी रेखाओं की सिफारिश क्यों की थी?
क्योंकि विभिन्न राज्यों में मूल्य स्तर, मुद्रास्फीति की दर और जीवन-यापन की लागत में भारी अंतर पाया जाता है (जैसे पंजाब बनाम बिहार)।
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लकड़ावाला समिति के मॉडल में ग्रामीण गरीबी रेखा को समय के साथ अद्यतन (Update) करने हेतु किस मूल्य सूचकांक का उपयोग किया जाता था?
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक - कृषि श्रमिक (CPI-AL / Consumer Price Index for Agricultural Labourers)।
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लकड़ावाला समिति के मॉडल में शहरी गरीबी रेखा को अद्यतन करने हेतु किस मूल्य सूचकांक का उपयोग किया जाता था?
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक - औद्योगिक श्रमिक (CPI-IW / Consumer Price Index for Industrial Workers)।
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लकड़ावाला समिति ने पोषण के किस बुनियादी मानक को बरकरार रखा था?
अलघ कार्यदल द्वारा निर्धारित 2,400 किलोकैलोरी (ग्रामीण) और 2,100 किलोकैलोरी (शहरी) के कैलोरी मानदंड को।
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लकड़ावाला समिति ने राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी रेखा की गणना किस प्रकार की?
सभी राज्यों की गरीबी रेखाओं और गरीबों की संख्या के भारित औसत (Weighted Average) के रूप में।
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लकड़ावाला पद्धति के अनुसार वित्तीय वर्ष 1993-94 में भारत में कुल गरीबी अनुपात (HCR) कितना दर्ज किया गया?
36.0% (ग्रामीण क्षेत्रों में 37.3% तथा शहरी क्षेत्रों में 32.4%)।
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लकड़ावाला समिति की कार्यप्रणाली की सबसे बड़ी सीमा या कमजोरी क्या मानी गई?
यह 1973-74 की 20 वर्ष पुरानी स्थिर उपभोग टोकरी पर आधारित थी और इसमें स्वास्थ्य व शिक्षा पर होने वाले बढ़ते निजी जेब खर्च की उपेक्षा की गई थी।
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योजना आयोग द्वारा दिसंबर 2005 में गरीबी रेखा के निर्धारण की समीक्षा हेतु गठित विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष कौन थे?
प्रो. सुरेश डी. तेंदुलकर (Suresh D. Tendulkar / पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग)।
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सुरेश तेंदुलकर समिति ने अपनी ऐतिहासिक रिपोर्ट योजना आयोग को किस वर्ष प्रस्तुत की थी?
नवंबर 2009 में।
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सुरेश तेंदुलकर समिति द्वारा अपनाए गए तीन सबसे प्रमुख वैचारिक और सांख्यिकीय बदलाव कौन-से थे?
1. कैलोरी उपभोग के कठोर मानदंड को पूरी तरह छोड़ना, 2. स्वास्थ्य और शिक्षा के निजी खर्चों को शामिल करना, और 3. ग्रामीण व शहरी दोनों हेतु एक समान संदर्भ उपभोग बास्केट अपनाना।
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तेंदुलकर समिति ने गरीबी मापन में कैलोरी उपभोग के पुराने मानदंड को क्यों खारिज कर दिया?
क्योंकि कैलोरी उपभोग और पोषण/स्वास्थ्य स्तर में सीधा संबंध नहीं पाया गया और वास्तविक जीवन में लोगों का उपभोग पैटर्न अनाज से हटकर गैर-खाद्य मदों की ओर झुक रहा था।
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तेंदुलकर समिति ने अखिल भारतीय स्तर पर किस उपभोग बास्केट को संदर्भ मानक (Reference Basket) बनाया?
1993-94 की आधिकारिक शहरी उपभोग बास्केट (Urban Consumption Basket) को।
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तेंदुलकर समिति ने ग्रामीण गरीबी रेखा को शहरी उपभोग बास्केट के बराबर लाने हेतु किस सांख्यिकीय विधि का उपयोग किया?
फिशर मूल्य सूचकांक (Fisher Price Index) का उपयोग कर ग्रामीण और शहरी जीवन यापन लागत के अंतर को समायोजित किया।
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तेंदुलकर समिति ने NSSO के किस उपभोग मापन दृष्टिकोण को अनिवार्य रूप से अपनाया?
मिश्रित संदर्भ अवधि (Mixed Recall Period - MRP)।
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तेंदुलकर समिति के अनुसार वित्तीय वर्ष 2004-05 में भारत का कुल राष्ट्रीय गरीबी अनुपात कितना आंका गया?
37.2% (ग्रामीण क्षेत्रों में 41.8% तथा शहरी क्षेत्रों में 25.7%)।
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तेंदुलकर समिति द्वारा 2004-05 के लिए आंका गया 37.2% का आंकड़ा पुरानी लकड़ावाला पद्धति (27.5%) से अधिक क्यों आया?
क्योंकि तेंदुलकर पद्धति ने स्वास्थ्य, शिक्षा और कपड़ों पर होने वाले आवश्यक खर्चों को शामिल किया जिससे ग्रामीण गरीबी रेखा का स्तर ऊपर उठ गया।
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तेंदुलकर समिति की कार्यप्रणाली के अनुसार वित्तीय वर्ष 2011-12 के मूल्यों पर ग्रामीण और शहरी गरीबी रेखा कितनी तय हुई?
ग्रामीण क्षेत्रों हेतु ₹816 प्रति माह (लगभग ₹27.20 प्रतिदिन) तथा शहरी क्षेत्रों हेतु ₹1,000 प्रति माह (लगभग ₹33.33 प्रतिदिन)।
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तेंदुलकर समिति के अनुसार 2011-12 में पांच सदस्यों वाले एक औसत परिवार हेतु मासिक गरीबी रेखा व्यय क्या था?
ग्रामीण क्षेत्रों में ₹4,080 प्रति परिवार प्रति माह तथा शहरी क्षेत्रों में ₹5,000 प्रति परिवार प्रति माह।
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तेंदुलकर पद्धति के आधार पर वित्तीय वर्ष 2011-12 में भारत में कुल गरीबी अनुपात (HCR) कितना दर्ज हुआ?
21.9% (ग्रामीण क्षेत्रों में 25.7% तथा शहरी क्षेत्रों में 13.7%)।
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तेंदुलकर समिति के आंकड़ों के अनुसार 2011-12 में भारत में कुल गरीबों की संख्या कितनी थी?
लगभग 26.98 करोड़ (269.8 मिलियन गरीब; ग्रामीण 21.67 करोड़ और शहरी 5.31 करोड़)।
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तेंदुलकर पद्धति के अनुसार 2004-05 (37.2%) से 2011-12 (21.9%) के बीच गरीबी दर में कितनी प्रतिशत अंकों की गिरावट आई?
15.3 प्रतिशत अंकों की ऐतिहासिक गिरावट (प्रतिवर्ष औसतन 2.18 प्रतिशत अंकों की तीव्र कमी)।
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तेंदुलकर समिति के 2011-12 के गरीबी अनुमानों में सबसे अधिक गरीबी अनुपात (HCR) किस राज्य में दर्ज किया गया था?
छत्तीसगढ़ (39.93%) में (इसके बाद झारखंड 36.96% और मणिपुर 36.89%)।
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तेंदुलकर पद्धति के अनुसार 2011-12 में गरीबों की निरपेक्ष संख्या (Absolute Number of Poor) के मामले में शीर्ष राज्य कौन-सा था?
उत्तर प्रदेश (लगभग 5.98 करोड़ गरीब)।
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तेंदुलकर पद्धति के अनुसार 2011-12 में सबसे कम गरीबी अनुपात किन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में था?
गोवा (5.09%), केरल (7.05%), हिमाचल प्रदेश (8.06%) तथा अंडमान निकोबार (1.0%)।
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तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट को लेकर नागरिक समाज और अर्थशास्त्रियों में मुख्य विवाद क्या था?
₹27.20 (ग्रामीण) और ₹33.33 (शहरी) की दैनिक सीमा का अमानवीय रूप से अत्यंत निम्न होना; जिस पर किसी व्यक्ति का गरिमापूर्ण जीवन निर्वाह असंभव माना गया।
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तेंदुलकर समिति के निष्कर्षों पर उठे विवादों के बाद योजना आयोग ने जून 2012 में किस नई विशेषज्ञ समिति का गठन किया?
डॉ. सी. रंगराजन विशेषज्ञ समिति (C. Rangarajan Committee / पूर्व गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक)।
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सी. रंगराजन समिति ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट योजना आयोग को किस माह और वर्ष में सौंपी?
जून 2014 में।
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रंगराजन समिति ने न्यूनतम पोषण आवश्यकताओं के निर्धारण हेतु किस संस्था के वैज्ञानिक मानदंडों को अपनाया?
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) के 2010 के संशोधित पोषण मानकों को।
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रंगराजन समिति के अनुसार पोषण संबंधी न्यूनतम दैनिक आवश्यकताएं क्या निर्धारित की गईं?
ग्रामीण क्षेत्रों हेतु: 2,155 कैलोरी, 48 ग्राम प्रोटीन, 26 ग्राम वसा; तथा शहरी क्षेत्रों हेतु: 2,090 कैलोरी, 50 ग्राम प्रोटीन, 28 ग्राम वसा।
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रंगराजन समिति ने पोषण के अतिरिक्त गैर-खाद्य खर्चों (Non-food Expenses) का निर्धारण किस आधार पर किया?
कपड़े, आवास, शिक्षा और परिवहन जैसे आवश्यक गैर-खाद्य खर्चों के वास्तविक उपभोग स्तर का अलग से सांख्यिकीय अध्ययन करके।
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रंगराजन समिति ने NSSO के किस उपभोग सर्वेक्षण दृष्टिकोण को अपनाया?
संशोधित मिश्रित संदर्भ अवधि (Modified Mixed Recall Period - MMRP)।
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रंगराजन समिति के अनुसार वित्तीय वर्ष 2011-12 के मूल्यों पर ग्रामीण और शहरी गरीबी रेखा कितनी तय हुई?
ग्रामीण क्षेत्रों हेतु ₹972 प्रति माह (लगभग ₹32.40 प्रतिदिन) तथा शहरी क्षेत्रों हेतु ₹1,407 प्रति माह (लगभग ₹46.90 प्रतिदिन)।
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रंगराजन समिति के अनुसार 2011-12 में पांच सदस्यों वाले एक औसत परिवार हेतु मासिक गरीबी रेखा व्यय क्या था?
ग्रामीण क्षेत्रों में ₹4,860 प्रति परिवार प्रति माह तथा शहरी क्षेत्रों में ₹7,035 प्रति परिवार प्रति माह।
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रंगराजन समिति की कार्यप्रणाली के अनुसार वर्ष 2011-12 में भारत में कुल गरीबी अनुपात (HCR) कितना आंका गया?
29.5% (ग्रामीण क्षेत्रों में 30.9% तथा शहरी क्षेत्रों में 26.4%)।
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रंगराजन समिति के अनुसार वर्ष 2011-12 में भारत में गरीबों की कुल निरपेक्ष संख्या कितनी आंकी गई?
लगभग 36.3 करोड़ (363 मिलियन गरीब; ग्रामीण 26.05 करोड़ और शहरी 10.25 करोड़)।
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रंगराजन समिति और तेंदुलकर समिति के 2011-12 के अनुमानों में कुल गरीबों की संख्या में कितना अंतर था?
रंगराजन समिति के अनुसार गरीबों की संख्या तेंदुलकर समिति की तुलना में लगभग 9.32 करोड़ (93.2 मिलियन) अधिक थी।
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रंगराजन समिति के अनुसार 2009-10 (38.2%) से 2011-12 (29.5%) के बीच कितने लोग गरीबी से बाहर निकले?
मात्र दो वर्षों में लगभग 9.16 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए।
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क्या भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से रंगराजन समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लागू किया?
नहीं; सरकार ने रंगराजन समिति की रिपोर्ट पर कोई औपचारिक नीतिगत निर्णय नहीं लिया और तेंदुलकर पद्धति को ही आधिकारिक संदर्भ माना गया।
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तेंदुलकर और रंगराजन दोनों पद्धतियों में किस एक बात पर पूर्ण सहमति थी?
यह कि 2004-05 के बाद भारत में गरीबी में तेज गिरावट आई और गिरावट की दर 1990 के दशक की तुलना में काफी तेज थी।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीएल (BPL) परिवारों की पहचान हेतु ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 2008-09 में गठित समिति के अध्यक्ष कौन थे?
डॉ. एन. सी. सक्सेना (N. C. Saxena Committee)।
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एन. सी. सक्सेना समिति ने ग्रामीण बीपीएल सूची तैयार करने हेतु कौन-सी त्रि-स्तरीय पद्धति सुझाई थी?
1. स्वचालित अपवर्जन (कच्चे/पक्के साधन संपन्न परिवार बाहर), 2. स्वचालित समावेशन (अति-कमजोर/आदिम जनजातियां स्वतः शामिल), और 3. शेष परिवारों की ग्रेडिंग अंक प्रणाली।
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सक्सेना समिति के अनुसार उस समय ग्रामीण भारत में कितने प्रतिशत परिवारों को बीपीएल संरक्षण की आवश्यकता थी?
लगभग 50% ग्रामीण परिवारों को।
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शहरी क्षेत्रों में बीपीएल परिवारों की पहचान हेतु मई 2010 में योजना आयोग द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष कौन थे?
प्रो. एस. आर. हाशिम (S. R. Hashim Committee / रिपोर्ट 2012)।
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हाशिम समिति ने शहरी गरीबों की पहचान हेतु किन तीन व्यापक वंचनाओं (Deprivations) का मूल्यांकन करने की सिफारिश की?
1. आवासीय वंचना (कच्चा घर/बेघर), 2. व्यावसायिक वंचना (अनौपचारिक/अस्थिर कार्य), और 3. सामाजिक वंचना (महिला-प्रधान, दिव्यांग आदि)।
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सक्सेना और हाशिम समितियों की सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार ने 2011 में कौन-सा विशाल अखिल भारतीय सर्वेक्षण कराया?
सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना 2011 (Socio-Economic and Caste Census - SECC 2011)।
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SECC 2011 डेटा का उपयोग भारत सरकार ने किन प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के लक्षित लाभार्थियों के चयन में किया?
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), आयुष्मान भारत (AB-PMJAY), उज्ज्वला योजना और सौभाग्य योजना में।
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नीति आयोग द्वारा 2015 में गठित 'गरीबी उन्मूलन कार्यदल' के अध्यक्ष कौन थे?
डॉ. अरविंद पनगढ़िया (Arvind Panagariya / तत्कालीन उपाध्यक्ष, नीति आयोग)।
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अरविंद पनगढ़िया कार्यदल ने भारत में गरीबी रेखा के निर्धारण पर क्या अंतिम सुझाव दिया?
कि एक नई आधिकारिक गरीबी रेखा तय करने हेतु एक अलग विशेषज्ञ समिति बनाई जाए, तथा योजनाओं के वितरण हेतु SECC वंचना डेटा का उपयोग किया जाए।
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नीति आयोग द्वारा प्रकाशित 'राष्ट्रीय बहुआयामी निर्धनता सूचकांक' (National MPI) का आधार कौन-सा वैश्विक मॉडल है?
अल्कायर-फोस्टर पद्धति (Alkire-Foster Methodology / OPHI व UNDP)।
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नीति आयोग के राष्ट्रीय MPI में प्रयुक्त 12 संकेतकों में से 'स्वास्थ्य' आयाम में कौन-से 3 संकेतक हैं?
1. पोषण (Nutrition), 2. बाल एवं किशोर मृत्यु दर, और 3. प्रसवपूर्व देखभाल (Antenatal Care)।
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नीति आयोग के राष्ट्रीय MPI में 'शिक्षा' आयाम में कौन-से 2 संकेतक शामिल हैं?
1. स्कूली शिक्षा के वर्ष (Years of Schooling), तथा 2. स्कूल में उपस्थिति (School Attendance)।
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नीति आयोग के राष्ट्रीय MPI में 'जीवन स्तर' आयाम के अंतर्गत कौन-से 7 संकेतक आते हैं?
1. रसोई ईंधन, 2. स्वच्छता (शौचालय), 3. पेयजल, 4. बिजली, 5. आवास, 6. परिसंपत्तियां, और 7. बैंक खाता।
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नीति आयोग के राष्ट्रीय MPI (2023 रिपोर्ट) के अनुसार भारत में बहुआयामी गरीबों का प्रतिशत 2015-16 से 2019-21 के बीच कितना घटा?
24.85% से घटकर 14.96% हो गया (लगभग 13.5 करोड़ लोग सीधे बाहर निकले)।
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नीति आयोग के जनवरी 2024 के चर्चा पत्र (Discussion Paper) के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के 9 वर्षों में कितने लोग बहुआयामी गरीबी से मुक्त हुए?
लगभग 24.82 करोड़ (248.2 मिलियन) नागरिक।
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नीति आयोग के अनुसार 2022-23 में भारत में बहुआयामी गरीबी का स्तर घटकर कितना अनुमानित किया गया?
मात्र 11.28%।
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नीति आयोग के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच किस राज्य में सर्वाधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले?
उत्तर प्रदेश (लगभग 5.94 करोड़ लोग), इसके बाद बिहार (3.77 करोड़) और मध्य प्रदेश (2.30 करोड़)।
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विश्व बैंक द्वारा जारी 'गरीबी और साझा समृद्धि' (Poverty and Shared Prosperity) रिपोर्ट में अत्यधिक गरीबी का क्या अंतरराष्ट्रीय मानक है?
$2.15 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (2017 PPP $ पर)।
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विश्व बैंक के अनुसार भारत में अत्यधिक गरीबी ($2.15 रेखा पर) की वर्तमान स्थिति क्या आंकी गई है?
भारत में अत्यधिक गरीबी घटकर 2% से 3% से भी कम (लगभग समाप्त होने की कगार पर) आ चुकी है।
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सुरिजीत भल्ला और करण भसीन के 2022 के अध्ययन के अनुसार भारत में अत्यधिक गरीबी घटने का मुख्य श्रेय किस कार्यक्रम को दिया गया?
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त खाद्यान्न वितरण को।
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घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES 2022-23) के अनुसार ग्रामीण और शहरी मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) कितना दर्ज हुआ?
ग्रामीण MPCE ₹3,773 तथा शहरी MPCE ₹6,459 (2011-12 के बाद उपभोग व्यय में 2.5 गुना से अधिक की वास्तविक वृद्धि)।
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HCES 2022-23 के अनुसार भारतीय परिवारों के कुल बजट में 'भोजन पर होने वाले खर्च' (Share of Food Expenditure) में क्या ऐतिहासिक बदलाव आया?
ग्रामीण क्षेत्रों में भोजन का हिस्सा पहली बार घटकर 50% से नीचे (लगभग 46.4%) तथा शहरी क्षेत्रों में घटकर लगभग 39.2% पर आ गया।
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भोजन पर खर्च के प्रतिशत में गिरावट अर्थशास्त्र के किस प्रसिद्ध नियम की पुष्टि करती है?
एंजेल का नियम (Engel's Law); जिसके अनुसार आय बढ़ने पर कुल व्यय में भोजन का प्रतिशत हिस्सा घट जाता है।
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गरीबी रेखा के निर्धारण में 'कैलोरी मानदंड' पर आधारित दृष्टिकोण को तकनीकी रूप से क्या कहा जाता है?
जैविक आवश्यकता दृष्टिकोण (Biological / Nutritional Approach)।
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गरीबी रेखा के संदर्भ में 'मूल्य सूचकांक पूर्वाग्रह' (Price Index Bias) की क्या समस्या होती है?
जब उपयोग किया जाने वाला मूल्य सूचकांक (CPI) गरीबों द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं के वास्तविक स्थानीय खुदरा मूल्यों को सटीक रूप से नहीं दर्शाता।
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तेंदुलकर समिति ने गरीबी रेखा के मूल्य समायोजन हेतु किन दो मूल्य सूचकांकों के पुराने उपयोग को बंद किया था?
CPI-AL (कृषि श्रमिक) तथा CPI-IW (औद्योगिक श्रमिक) के अलग-अलग उपयोग को समाप्त किया था।
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तेंदुलकर समिति ने राज्यों के बीच मूल्य अंतर मापने हेतु किस सूचकांक का निर्माण किया था?
राज्य-स्तरीय मूल्य तुलनात्मक सूचकांक (State-level Cost of Living Indices)।
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रंगराजन समिति के अनुसार 2011-12 में ग्रामीण भारत में गरीबों का प्रतिशत कितना था?
30.9% (तेंदुलकर के अनुसार यह 25.7% था)।
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रंगराजन समिति के अनुसार 2011-12 में शहरी भारत में गरीबों का प्रतिशत कितना था?
26.4% (तेंदुलकर के अनुसार यह 13.7% था)।
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तेंदुलकर की तुलना में रंगराजन पद्धति में शहरी गरीबी में अत्यधिक उछाल (13.7% से 26.4%) का मुख्य कारण क्या था?
रंगराजन समिति द्वारा शहरी क्षेत्रों में मकान किराया, परिवहन और महंगे स्वास्थ्य/शिक्षा खर्चों का यथार्थवादी उच्च मूल्यांकन करना।
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गरीबी मापन में 'समान संदर्भ अवधि' (URP) की 30-दिवसीय सीमा में क्या स्मृति पूर्वाग्रह (Recall Bias) होता है?
लोग 30 दिन पहले खरीदी गई छोटी-मोटी खाने-पीने की चीजों को भूल जाते हैं जिससे उपभोग कम दर्ज होता है और गरीबी अधिक दिखती है।
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MMRP (संशोधित मिश्रित संदर्भ अवधि) में 7-दिवसीय रिकॉल का क्या लाभ होता है?
सब्जी, फल, दूध और मांस जैसी शीघ्र खराब होने वाली मदों का खर्च लोग आसानी से और सटीक रूप से याद रख पाते हैं।
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गरीबी उन्मूलन रणनीतियों में 'ट्रिकल-डाउन सिद्धांत' (Trickle-Down Theory) के विफल होने के बाद भारत ने कौन-सा दृष्टिकोण अपनाया?
प्रत्यक्ष लक्षित गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम (Direct Targeted Anti-Poverty Programmes - जैसे IRDP, NREP, मनरेगा)।
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भारत में ग्रामीण गरीबों को सीधे स्वरोजगार और सूक्ष्म ऋण दिलाने हेतु 1978-79 में शुरू किया गया प्रमुख छत्र कार्यक्रम कौन-सा था?
एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP - Integrated Rural Development Programme)।
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1 अप्रैल 1999 को IRDP और उसके सभी संबद्ध कार्यक्रमों को समाहित कर किस नई स्वरोजगार योजना की शुरुआत की गई थी?
स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY)।
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वर्ष 2011 में SGSY का पुनर्गठन कर किस प्रमुख राष्ट्रीय आजीविका मिशन में बदल दिया गया?
दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)।
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DAY-NRLM किस संगठनात्मक मॉडल पर आधारित विश्व का सबसे बड़ा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम है?
महिला स्वयं सहायता समूह (Self Help Group - SHG) मॉडल पर।
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भारत में ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के अकुशल शारीरिक मजदूरी रोजगार की विधिक गारंटी देने वाला ऐतिहासिक अधिनियम कौन-सा है?
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (MGNREGA 2005)।
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मनरेगा (MGNREGA) ने ग्रामीण भारत में गरीबी और असमानता को कम करने में क्या प्रत्यक्ष योगदान दिया?
ग्रामीण मजदूरी की न्यूनतम सीमा तय की, संकटकालीन पलायन (Distress Migration) रोका और ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता बढ़ाई।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA 2013) के तहत देश की लक्षित जनसंख्या का कितना अनुपात कानूनी रूप से कवर किया गया है?
कुल आबादी का 67% हिस्सा (75% ग्रामीण आबादी तथा 50% शहरी आबादी)।
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भारत सरकार द्वारा गरीबों को विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय से बचाने हेतु संचालित दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना कौन-सी है?
आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY / प्रति परिवार ₹5 लाख वार्षिक)।
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गरीबों के वित्तीय समावेशन हेतु 'जैम त्रिमूर्ति' (JAM Trinity) के तीन घटक कौन-से हैं?
जन धन बैंक खाता, बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली तथा मोबाइल कनेक्टिविटी।
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JAM त्रिमूर्ति ने भारत में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए गरीबी उन्मूलन में क्या क्रांतिकारी सुधार किया?
कल्याणकारी योजनाओं में होने वाले बिचौलियों के भ्रष्टाचार, फर्जी लाभार्थियों और भारी वित्तीय रिसाव को समाप्त कर 100% नकद लाभ सीधे खाते में पहुंचाया।
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असंगठित क्षेत्र के कामगारों और गरीबों हेतु प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत कितना जीवन बीमा मिलता है?
₹2 लाख का मियादी जीवन बीमा (वार्षिक प्रीमियम ₹436 पर)।
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प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के तहत दुर्घटना मृत्यु पर कितने रुपये का कवर मिलता है?
₹2 लाख का दुर्घटना बीमा (वार्षिक प्रीमियम मात्र ₹20 पर)।
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अटल पेंशन योजना (APY) के तहत असंगठित क्षेत्र के गरीबों को 60 वर्ष बाद कितनी मासिक न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिलती है?
अंशदान के आधार पर ₹1,000 से लेकर ₹5,000 प्रति माह की निश्चित आजीवन पेंशन।
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शहरी रेहड़ी-पटरी वालों (Street Vendors) को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने वाली संपार्श्विक-मुक्त ऋण योजना कौन-सी है?
पीएम स्वनिधि योजना (PM SVANidhi / ₹10,000 से ₹50,000 तक का कार्यशील पूंजी ऋण)।
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गरीबों को पक्का आवास उपलब्ध कराने हेतु संचालित फ्लैगशिप राष्ट्रीय योजना कौन-सी है?
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY - ग्रामीण एवं शहरी)।
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गरीब ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने वाला राष्ट्रीय मिशन कौन-सा है?
जल जीवन मिशन (हर घर जल - 2019 से)।
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गरीबी रेखा निर्धारण की संपूर्ण यात्रा का भारत की आर्थिक नीतियों के विकास में क्या अंतिम निष्कर्ष है?
अलघ से लेकर तेंदुलकर और रंगराजन तक की समितियों ने भारत में गरीबी को केवल कैलोरी उपभोग से मुक्त कर शिक्षा, स्वास्थ्य और बहुआयामी वंचनाओं तक विस्तारित किया; आज भारत निरपेक्ष अत्यधिक गरीबी को समाप्त करने के ऐतिहासिक मुकाम पर खड़ा है और नीतिगत फोकस आय असमानता को पाटने तथा मानव पूंजी के चहुंमुखी विकास पर केंद्रित हो चुका है।
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