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Aarthik Samajik Jivan

भूमि अनुदान, सामंतीकरण एवं इतिहासलेखन बहस

भारतीय सामंतवाद (Indian Feudalism) सिद्धांत के प्रमुख प्रतिपादक
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प्रो. रामशरण शर्मा
प्रो. रामशरण शर्मा की प्रसिद्ध क्लासिक पुस्तक
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'इंडियन फ्यूडलिज्म' (1965)
रामशरण शर्मा के अनुसार सामंतवाद के उदय का मुख्य प्रेरक कारण
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व्यापक भूमि अनुदान
पूर्व मध्यकाल में सामंतवाद की अवधारणा पर प्रश्न उठाने वाले इतिहासकार
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प्रो. हरबंस मुखिया
हरबंस मुखिया का प्रसिद्ध इतिहासलेखन शोध-पत्र
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'वाज देयर फ्यूडलिज्म इन इंडियन हिस्ट्री?'
सामंतीकरण के स्थान पर 'एकीकृत राज्य' (Integrative Polity) का सिद्धांत देने वाले
उत्तर देखें
बी. डी. चट्टोपाध्याय
बी. डी. चट्टोपाध्याय की विख्यात ऐतिहासिक कृति
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'द मेकिंग ऑफ अर्ली मेडिवल इंडिया'
दक्षिण भारत के संदर्भ में 'खंडीय राज्य' (Segmentary State) सिद्धांत प्रस्तुतकर्ता
उत्तर देखें
बर्टन स्टीन
पूर्व मध्यकाल में सिक्कों के अभाव और व्यापार ह्रास का सिद्धांत किसने दिया
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रामशरण शर्मा
व्यापार व नगरों के ह्रास की परिकल्पना का खंडन करने वाले विद्वान
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बी. डी. चट्टोपाध्याय
शासक द्वारा ब्राह्मणों को दिया जाने वाला व्यक्तिगत कर-मुक्त भूमि अनुदान
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ब्रह्मदेय
ब्राह्मणों की पूरी बस्ती या पूरे गाँव का कर-मुक्त सामूहिक अनुदान
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अग्रहार
मंदिरों और धार्मिक देवस्थानों को रखरखाव हेतु दी गई भूमि
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देवदान (देवदेय)
जैन या बौद्ध विहारों को दिया जाने वाला धार्मिक भूमि अनुदान
उत्तर देखें
पल्लीच्चंदम
सामंतों और सैन्य अधिकारियों को सेवाओं के बदले दी जाने वाली भूमि
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भोग या जीविका
भूमि अनुदान पत्रों को स्थायी रखने हेतु किस पर उत्कीर्ण किया जाता था
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ताम्रपत्रों पर
भूमि अनुदान प्राप्तकर्ता को राजा द्वारा हस्तांतरित मुख्य अधिकार
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कर वसूली एवं दंड अधिकार
भूमि अनुदान के साथ भूमि से बंधे कृषकों की स्थिति
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बद्ध-कृषक (अर्ध-दास)
पूर्व मध्यकाल में सामंती अधिपतियों द्वारा धारण सर्वोच्च उपाधियां
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महासामंत व महामंडलेश्वर
सामंतों द्वारा अपने अधिपति राजा को दी जाने वाली अनिवार्य सेवा
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सैनिक सहायता (सामंती सेना)
सामंतों द्वारा राजा के राजदरबार में नियमित उपस्थिति का नियम
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दरबार हाजिरी
सामंतों द्वारा अधिपति सम्राट को दी जाने वाली वार्षिक भेंट
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उपहार एवं नजराना
व्यापक भूमि अनुदानों से केंद्रीय राजसत्ता की स्थिति पर प्रभाव
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केंद्रीय शक्ति अत्यधिक कमजोर
सामंतों के बीच श्रेणीबद्धता (रैंकिंग) का मुख्य मापदंड
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नियंत्रित गाँवों की संख्या
12वीं सदी के कश्मीर में सामंती उपद्रवों का नेतृत्व करने वाला भूस्वामी वर्ग
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डामर
कल्हण की 'राजतरंगिणी' में डामर वर्ग को क्या कहा गया
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उपद्रवी सामंती भूस्वामी
भूमि अनुदानों में प्रयुक्त 'सर्व-कर-परिहार' का पारिभाषिक अर्थ
उत्तर देखें
समस्त करों से पूर्ण मुक्ति
भूमि अनुदान में 'अ-चाट-भट-प्रवेश्य' शर्त का अर्थ
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शाही सैनिकों व पुलिस का अप्रवेश
भूमि अनुदान पत्र तैयार करने वाले विशेष राजकीय अधिकारी
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सांधिविग्रहिक व करणिक
पूर्व मध्यकाल में भूमि पर निजी व वंशानुगत स्वामित्त्व के विस्तार का कारण
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वंशानुगत भूमि अनुदान प्रथा
आर्थिक संस्थाएं
भूमि अनुदान के प्रमुख प्रकार, शब्दावली और उनका स्वरूप
पूर्व मध्यकालीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं भूमि अधिकारों का वर्गीकरण
भूमि अनुदान / पारिभाषिक पद अनुदान का स्वरूप एवं धारक सामाजिक, प्रशासनिक व आर्थिक प्रभाव
ब्रह्मदेय (Brahmadeya)
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विद्वान ब्राह्मणों को व्यक्तिगत रूप से दिया गया कर-मुक्त भूमि अनुदान
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ब्राह्मणों का भूस्वामी वर्ग के रूप में उदय; कृषि का नए क्षेत्रों में विस्तार
अग्रहार (Agrahara)
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ब्राह्मणों के संपूर्ण गाँव अथवा समूह को सामूहिक रूप से प्रदत्त कर-मुक्त भूमि
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स्वायत्त ग्रामीण बस्तियों का निर्माण; वैदिक शिक्षा एवं मंदिर संस्कृति का सुदृढ़ीकरण
देवदान / देवदेय (Devadana)
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मंदिरों, मठों और देवस्थानों के नित्य पूजन व संधारण हेतु स्थायी अनुदान
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मंदिरों का शक्तिशाली आर्थिक बैंक एवं विशाल भूस्वामी केंद्र के रूप में रूपांतरण
पल्लीच्चंदम (Pallichchandam)
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जैन मंदिरों, वसतियों और बौद्ध विहारों को दिया गया भूमि अनुदान
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गैर-ब्राह्मणीय श्रमण संप्रदायों का आर्थिक संवर्धन एवं संस्थागत संरक्षण
भोग / जीविका (Bhoga/Jivika)
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सैन्य व प्रशासनिक अधिकारियों को वेतन के बदले दी गई राजस्व-अधिकार भूमि
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सामंती संप्रभुता का विकास; प्रशासनिक विकेंद्रीकरण एवं केंद्रीय नियंत्रण का क्षय
भूमिछिद्रविधान (Bhumichhidra)
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जंगली या बंजर भूमि को आबाद करने वाले को दी गई कर-मुक्त/रियायती भूमि
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कृषि योग्य भूमि का भौगोलिक विस्तार एवं जनजातीय क्षेत्रों का मुख्यधारा में समावेशन

कृषि विस्तार, सिंचाई साधन एवं ग्रामीण उत्पादन

पूर्व मध्यकाल में कृषि के अभूतपूर्व विस्तार का प्राथमिक आधार
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नए क्षेत्रों में भूमि अनुदान
पूर्व मध्यकाल में सिंचाई हेतु प्रयुक्त प्रसिद्ध घटीयंत्र (पहिया)
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अरघट्ट (रेंट)
अरघट्ट का प्राथमिक तकनीकी कार्य
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गहरे कुओं से जल निकालना
दक्षिण भारत में वर्षा जल संचयन हेतु सर्वाधिक निर्मित संरचनाएं
उत्तर देखें
विशाल तड़ाग (तालाब)
चोल काल में कावेरी डेल्टा में निर्मित विशाल जल प्रबंधन संरचनाएं
उत्तर देखें
तटबंध एवं नहर प्रणालियां
बंगाल और असम में पूर्व मध्यकाल की प्रमुख खाद्यान्न फसल
उत्तर देखें
चावल (धान)
उत्तर भारत में रबी मौसम की मुख्य खाद्यान्न फसलें
उत्तर देखें
गेहूँ और जौ
पूर्व मध्यकाल में प्रमुख व्यावसायिक (नकदी) फसलें
उत्तर देखें
गन्ना, कपास और नील
किसानों से लिया जाने वाला नियमित भू-राजस्व
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भाग (उपज का 1/6)
राजा को दैनिक उपभोग हेतु दिए जाने वाले फल-फूल व साग-सब्जी का कर
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भोग
मुद्रा के रूप में नकद लिया जाने वाला विशिष्ट कर
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हिरण्य
अभिलेखों में आपातकालीन या सामयिक उपकर के लिए प्रयुक्त शब्द
उत्तर देखें
उपरिकर
किसानों और शिल्पियों से लिया जाने वाला जबरन अवैतनिक श्रम
उत्तर देखें
विष्टि (बेगार)
पूर्व मध्यकाल में अधिकांश स्वतंत्र किसान किस सामाजिक वर्ण में समाहित हुए
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शूद्र वर्ण
ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृत्तांत में भारतीय कृषकों को क्या कहा
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शूद्र
प्राचीन धर्मशास्त्रों में शूद्रों का मूल कर्तव्य क्या माना गया था
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उच्च वर्णों की सेवा
पूर्व मध्यकाल में शूद्रों के मुख्य पेशे के रूप में क्या स्थापित हुआ
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कृषि कार्य
दक्षिण भारत में मुख्य प्रभावशाली कृषक जाति
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वेल्लाल
वेल्लाल जाति के बड़े और संपन्न भूस्वामी क्या कहलाते थे
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पेरुन्तार
भूमिहीन कृषि मजदूर एवं सामाजिक रूप से बहिष्कृत खेत-मजदूर
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परैयार एवं पुलायर
बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने हेतु प्रोत्साहित करने वाला नियम
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भूमिछिद्रविधान
कृषि पंचांग, मौसम और वर्षा पूर्वानुमान की प्रसिद्ध लोक सूक्तियां
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घाघ और भड्डरी की कहावतें
पूर्व मध्यकाल में सिंचाई कर हेतु प्रयुक्त पारिभाषिक शब्द
उत्तर देखें
उदकभाग
दक्षिण भारत में तालाबों की मरम्मत व सफाई हेतु वसूला जाने वाला कर
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एरि-अयं (तालाब कर)
अकाल के समय किसानों को राज्य द्वारा दिया जाने वाला अग्रिम ऋण
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तकावी सदृश ऋण
सामाजिक स्तरीकरण
पूर्व मध्यकालीन समाज के प्रमुख सामाजिक वर्ग एवं समुदाय
वर्ण व्यवस्था, नवीन जातियां एवं उनकी सामाजिक-आर्थिक भूमिका
सामाजिक वर्ग / समुदाय सामाजिक स्थिति व आधार प्रमुख आर्थिक व सामाजिक भूमिका
सामंत / महामंडलेश्वर
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सर्वोच्च शासक एवं सैन्य अभिजात वर्ग; विशाल भूमि क्षेत्रों के स्वामी
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सैन्य बल संधारण, स्थानीय न्याय, कर वसूली एवं केंद्रीय सत्ता को चुनौती
पुरोहित / ब्राह्मण वर्ग
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सर्वोच्च सामाजिक प्रतिष्ठा; अग्रहारों एवं ब्रह्मदेय भूमि के स्वामी
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धार्मिक अनुष्ठान, शिक्षा, राजनैतिक परामर्श एवं कृषि विस्तार का नेतृत्व
कायस्थ वर्ग
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लेखक, लिपिक एवं राजस्व प्रबंधक; स्वतंत्र प्रभावशाली जाति के रूप में उदय
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राजकीय अभिलेख संधारण, भूमि कर निर्धारण एवं प्रशासनिक मध्यस्थता
कृषक समुदाय (शूद्र/वेल्लाल)
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विशाल उत्पादक वर्ग; शूद्रों का मुख्य रूप से कृषक स्थिति में रूपांतरण
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अन्न उत्पादन, बेगार एवं राज्य व सामंतों को भू-राजस्व अदायगी
वैश्य व व्यापारिक गिल्ड
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शहरी व तटीय व्यापारी; आर्थिक रूप से अत्यंत समृद्ध व प्रभावशाली
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अंतर्देशीय व समुद्री व्यापार, नगर प्रशासन एवं मंदिरों को अकूत दान
अंत्यज / अस्पृश्य वर्ग
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गाँवों व नगरों की परिधि से बाहर बसे सामाजिक रूप से बहिष्कृत समूह
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चर्मशिल्प, सफाई, शवदाह, शिकार एवं अत्यधिक कठिन श्रम कार्य

शिल्प, आंतरिक व बाह्य व्यापार तथा व्यापारिक गिल्ड

पूर्व मध्यकाल में सूती व रेशमी वस्त्र निर्माण के प्रमुख केंद्र
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बंगाल, गुजरात और मालवा
ढाका (बंगाल) किस विशिष्ट वस्त्र उत्पादन हेतु विश्वविख्यात था
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महीन मलमल
गुजरात का अणहिलवाड़ (पाटन) किस कलात्मक वस्त्र निर्माण हेतु विख्यात था
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पटोला रेशम
पूर्व मध्यकाल में भारतीय धातु शिल्प का विश्वप्रसिद्ध उत्पाद
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भारतीय तलवारें (दमिश्क स्टील)
पश्चिमी एशिया में अत्यधिक मांग वाली भारतीय तलवार की संज्ञा
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हिंदवानी तलवार
पूर्व मध्यकाल में स्थानीय ग्रामीण हाट-बाजारों में मुख्य विनिमय माध्यम
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कौड़ियां (कपर्दक)
उत्तर भारत में सोने के सिक्कों का पुनरुद्धार करने वाले कलचुरि शासक
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गांगेयदेव
गांगेयदेव के सिक्कों पर किस हिंदू देवी की आकृति उत्कीर्ण थी
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पद्मासना देवी लक्ष्मी
चोल काल में प्रचलित मानक स्वर्ण सिक्का
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कासु एवं कलंजु
व्यापारियों और शिल्पियों के स्वायत्त संगठनों को क्या कहा जाता था
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श्रेणी या गिल्ड
व्यापारिक कारवां का संचालन व नेतृत्व करने वाला प्रमुख व्यापारी
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सार्थवाह
दक्षिण भारत का 500 स्वामियों वाला सुविख्यात व्यापारिक निगम
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अय्यावोल (ஐந்நூற்றுவர்)
दक्षिण भारत के दो अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक निगम
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मणिग्रामम और नानादेशी
पश्चिमी व अरब व्यापारियों का तटीय संगठन जो भारत में सक्रिय था
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अंजुवन्नम
दक्षिण भारतीय व्यापारिक गिल्डों के हथियारबंद सुरक्षा दस्ते
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वीरकोडि
भारत के पश्चिमी तट का सर्वाधिक व्यस्त अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह
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खंभात (स्तंभतीर्थ)
मालाबार तट का सर्वाधिक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह
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कोल्लम (क्विलोन)
बंगाल की खाड़ी में स्थित प्रमुख पूर्वी बंदरगाह
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ताम्रलिप्ति
पूर्व मध्यकाल में भारत द्वारा अरब व मध्य एशिया से मुख्य आयात
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उच्च नस्ल के युद्धक घोड़े
भारत से विदेशों को निर्यात की जाने वाली सर्वाधिक प्रमुख वस्तुएं
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मसाले, वस्त्र, औषधियां व रत्न
चीन के साथ समुद्री व्यापार में प्रयुक्त होने वाले बड़े जहाज
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जंक
9वीं सदी में भारत आने वाला अरब व्यापारी जिसने विवरण लिखा
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सुलेमान (851 ई.)
10वीं सदी में भारत आकर प्रतिहारों व राष्ट्रकूटों का वर्णन करने वाला यात्री
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अल-मसूदी (915 ई.)
पूर्व मध्यकाल में अंतर-क्षेत्रीय व्यापारिक मंडियों को क्या कहा जाता था
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मंडपिका (मंडी)
व्यापारिक मार्गों पर चुंगी व पथकर वसूलने वाले राजकीय केंद्र
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शुल्क-स्थान (घटिका)
वाणिज्य एवं व्यापार
पूर्व मध्यकालीन प्रमुख व्यापारिक निगम (गिल्ड) एवं उनकी गतिविधियां
अंतर्देशीय व समुद्रपारीय व्यापार नेटवर्क का संगठन
व्यापारिक निगम (गिल्ड) प्रभाव क्षेत्र व संरचना प्रमुख व्यापारिक एवं आर्थिक गतिविधियां
मणिग्रामम (Manigramam)
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दक्षिण भारत के प्रमुख तटीय व आंतरिक व्यापारिक नगर
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अंतर्देशीय थोक व्यापार; खाद्यान्न, वस्त्र, मसाले व स्थानीय कृषि उत्पादों का विपणन
नानादेशी (Nanadesi)
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विभिन्न राज्यों एवं समुद्रपार (श्रीलंका, सुमात्रा, मलाया व बर्मा)
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हाथी-दांत, कीमती रत्न, मसाले, विदेशी घोड़े और सुगंधित द्रव्यों का आयात-निर्यात
अय्यावोल / 500 (Ayyavole)
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मूल केंद्र ऐहोल (कर्नाटक); संपूर्ण प्रायद्वीप एवं दक्षिण-पूर्व एशिया
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सशस्त्र अंगरक्षकों (वीरकोडि) सहित कारवां व्यापार; व्यापक बैंकिंग व विनिमय
अंजुवन्नम (Anjuvannam)
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पश्चिमी व पूर्वी तटीय बंदरगाह (अरब, यहूदी, सीरियाई ईसाई व्यापारी)
उत्तर देखें
पश्चिमी एशिया व चीन के साथ समुद्री जहाजरानी, घोड़ों का व्यापार व विदेशी मुद्रा विनिमय
सार्थवाह संगठन (Sarthavaha)
उत्तर देखें
उत्तर भारत, मध्य भारत एवं सिल्क रूट से जुड़े अंतर्देशीय मार्ग
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सशस्त्र काफिलों के साथ दूरस्थ अंतर-क्षेत्रीय मंडपिकाओं (मंडियों) में व्यापारिक माल परिवहन

जाति व्यवस्था, सामाजिक स्तरीकरण, कायस्थ एवं अंत्यज

पूर्व मध्यकाल में जातियों की संख्या में तीव्र वृद्धि का मुख्य कारण
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उपजातियों का विभाजन व जनजातीय समावेशन
जनजातियों और विदेशी समूहों को समाज में किस रूप में शामिल किया गया
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नवीन जातियां व उपजातियां
पूर्व मध्यकाल में एक स्वतंत्र प्रशासनिक एवं लेखक जाति के रूप में उदय
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कायस्थ जाति
'कायस्थ' शब्द का प्रथम उल्लेख एक अधिकारी के रूप में कहाँ मिलता है
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याज्ञवल्क्य स्मृति
'कायस्थ' का एक स्वतंत्र जाति के रूप में प्रथम उल्लेख किस स्मृति में है
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ओशनस स्मृति
कायस्थों का मुख्य व्यावसायिक एवं सामाजिक कार्य
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राजकीय लेखाकार, लिपिक व अभिलेखक
ब्राह्मणों के बाद समाज में तेजी से प्रभुत्व स्थापित करने वाला शिक्षित वर्ग
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कायस्थ वर्ग
समाज में अस्पृश्य (अछूत) जातियों के लिए प्रयुक्त समूहवाची शब्द
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अंत्यज
अलबरूनी ने 'किताब-उल-हिंद' में कितने अंत्यज (बहिष्कृत) वर्गों का उल्लेख किया
उत्तर देखें
आठ अंत्यज वर्ग
अलबरूनी द्वारा उल्लिखित आठ अंत्यज व्यवसायों के उदाहरण
उत्तर देखें
धोबी, चर्मकार, नट, टोकरी निर्माता
चांडालों के नगर प्रवेश पर लकड़ी पीटकर सूचना देने की प्रथा का उल्लेख
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फाह्यान एवं पूर्व मध्यकालीन स्मृतियां
दक्षिण भारत में समाज का अनूठा द्विध्रुवीय विभाजन
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इडंगै (बायां हाथ) व वलंगै (दायां हाथ)
वलंगै (Valangai) सामाजिक गुट में मुख्य रूप से कौन शामिल थे
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कृषक एवं भूस्वामी जातियां
इडंगै (Idangai) सामाजिक गुट में मुख्य रूप से कौन शामिल थे
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दस्तकार, शिल्पी एवं व्यापारी
अनुलोम और प्रतिलोम विवाहों के परिणामस्वरूप उत्पन्न जातियां
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वर्णसंकर जातियां
पूर्व मध्यकालीन समाज में 'राजपूत' पहचान का औपचारिक सुदृढ़ीकरण
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8वीं से 12वीं सदी में
राजपूतों के 36 कुलों की पारंपरिक सूची का ऐतिहासिक उल्लेख
उत्तर देखें
कुमारपालचरित एवं राजतरंगिणी
विदेशी हूणों और शकों का भारतीय समाज में समावेशन किस रूप में हुआ
उत्तर देखें
क्षत्रिय (राजपूत) के रूप में
पूर्व मध्यकाल में ब्राह्मणों की सर्वोच्चता का मुख्य भौतिक आधार
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भूमि अनुदान एवं अकूत संपदा
भूमि अनुदान प्राप्त करने वाले ब्राह्मणों का नया सामाजिक वर्ग
उत्तर देखें
सामंती भूस्वामी अभिजात वर्ग
विभिन्न शिल्पी श्रेणियों का स्वतंत्र जातियों में रूपांतरण का कारण
उत्तर देखें
वंशानुगत व्यवसाय व्यवस्था
किसी व्यक्ति को जाति से बहिष्कृत करने का अंतिम अधिकार किसके पास था
उत्तर देखें
जाति पंचायत के पास
पूर्व मध्यकाल में भोजन एवं वैवाहिक संबंधों के नियम कैसे हो गए
उत्तर देखें
अत्यधिक कठोर एवं संकीर्ण
क्या पूर्व मध्यकाल में सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) पूर्णतः बंद थी
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नहीं, कायस्थों व व्यापारियों में संभव
पूर्व मध्यकालीन समाज में जाति व्यवस्था की सबसे मुख्य प्रवृत्ति
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व्यापक विखंडन एवं जटिलता

स्त्रियों की स्थिति, संपत्ति अधिकार, सती एवं देवदासी परंपरा

प्राचीन काल की तुलना में पूर्व मध्यकाल में स्त्रियों की समग्र सामाजिक स्थिति
उत्तर देखें
गिरावट एवं संकुचन
पूर्व मध्यकाल में बालिकाओं के विवाह की सामान्य उम्र क्या मानी जाने लगी
उत्तर देखें
8 से 10 वर्ष (गौरी दान)
उच्च वर्गीय समाज में विधवाओं के पुनर्विवाह पर क्या रुख था
उत्तर देखें
पूर्णतः वर्जित (निषेध)
पति की मृत्यु पर पत्नी के जीवित चिता पर जलने की प्रथा
उत्तर देखें
सती प्रथा (सहमरण)
सती प्रथा का प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य
उत्तर देखें
510 ई. का एरण अभिलेख (भानुगुप्त)
पूर्व मध्यकाल में सती प्रथा का सर्वाधिक प्रचलन किस वर्ग में देखा गया
उत्तर देखें
राजपूत/क्षत्रिय शासक वर्ग
किस प्रसिद्ध संस्कृत लेखक ने सती प्रथा को आत्महत्या बताते हुए घोर निंदा की
उत्तर देखें
बाणभट्ट (कादंबरी में)
प्रसिद्ध हिंदू विधि ग्रंथ 'मिताक्षरा' के रचयिता
उत्तर देखें
विज्ञानेश्वर
विज्ञानेश्वर किस चालुक्य सम्राट के राजदरबार में थे
उत्तर देखें
विक्रमादित्य षष्ठ (कल्याणी)
प्रसिद्ध हिंदू विधि ग्रंथ 'दायभाग' के रचयिता
उत्तर देखें
जीमूतवाहन
दायभाग विधि प्रणाली भारत के किस भौगोलिक क्षेत्र में लागू थी
उत्तर देखें
बंगाल और असम
मिताक्षरा व्यवस्था में पुत्र को पिता की संपत्ति में अधिकार कब मिलता है
उत्तर देखें
जन्म लेते ही (जन्मना अधिकार)
दायभाग व्यवस्था में पुत्र को संपत्ति में अधिकार कब प्राप्त होता है
उत्तर देखें
पिता की मृत्यु के उपरांत
पुत्रहीन पति की मृत्यु के बाद विधवा को संपत्ति में उपभोग का अधिकार किसने दिया
उत्तर देखें
याज्ञवल्क्य, विज्ञानेश्वर व जीमूतवाहन
विवाह के समय स्त्री को उपहार व आभूषण रूप में मिली निजी संपत्ति
उत्तर देखें
स्त्रीधन
स्त्रीधन पर किसका अनन्य एवं पूर्ण अधिकार माना जाता था
उत्तर देखें
केवल स्त्री का
मंदिरों में देवताओं की सेवा और नृत्य हेतु कन्याओं को समर्पित करने की प्रथा
उत्तर देखें
देवदासी प्रथा
देवदासी प्रथा का सर्वाधिक विस्तार किस क्षेत्र के मंदिरों में देखा गया
उत्तर देखें
दक्षिण भारत व ओडिशा
कश्मीर पर स्वतंत्र व शक्तिशाली रूप से शासन करने वाली प्रसिद्ध रानियां
उत्तर देखें
दिद्दा और सुगंधा
रानी दिद्दा ने कश्मीर पर किस काल में शासन किया
उत्तर देखें
10वीं सदी के उत्तरार्ध में
काकतीय वंश की विख्यात महिला शासक जिन्होंने वारंगल पर शासन किया
उत्तर देखें
रानी रुद्रमादेवी
इतालवी यात्री मार्को पोलो ने किस भारतीय महिला शासक के सुशासन की प्रशंसा की
उत्तर देखें
रानी रुद्रमादेवी
कल्याणी चालुक्य राजकुमारी जिन्होंने कई प्रांतों का शासन कुशलतापूर्वक संभाला
उत्तर देखें
अक्कदेवी
राजशेखर की विदुषी पत्नी जिन्होंने काव्यमीमांसा में महत्वपूर्ण योगदान दिया
उत्तर देखें
अवंतिसुंदरी
पूर्व मध्यकाल में उच्च वर्गीय महिलाओं की शिक्षा का मुख्य माध्यम
उत्तर देखें
घरेलू व्यक्तिगत शिक्षण

शिक्षा केंद्र, आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य एवं दार्शनिक पुनरुत्थान

पूर्व मध्यकाल में उच्च शिक्षा के प्रमुख संस्थागत केंद्र
उत्तर देखें
घटिका, मठ, अग्रहार और मंदिर
दक्षिण भारत में पल्लव और चोल काल के प्रसिद्ध उच्च शिक्षण संस्थान
उत्तर देखें
घटिका
नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों को नष्ट करने वाला तुर्क आक्रमणकारी
उत्तर देखें
बख्तियार खिलजी (1202-03 ई.)
अद्वैत वेदांत दर्शन के महान संस्थापक एवं पुनरुद्धारक
उत्तर देखें
आदि शंकराचार्य
आदि शंकराचार्य का जन्म स्थल
उत्तर देखें
कालड़ी (केरल)
आदि शंकराचार्य का सामान्यतः स्वीकृत काल
उत्तर देखें
788–820 ई.
आदि शंकराचार्य के दीक्षा गुरु कौन थे
उत्तर देखें
गोविंद भगवत्पाद
शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन का केंद्रीय मूल महावाक्य
उत्तर देखें
'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या'
शंकराचार्य के अनुसार जीव और ब्रह्म का वास्तविक संबंध
उत्तर देखें
पूर्णतः अभिन्न (अद्वैत)
शंकराचार्य द्वारा मोक्ष प्राप्ति का एकमात्र प्रामाणिक साधन
उत्तर देखें
विशुद्ध ज्ञान (ज्ञानमार्ग)
शंकराचार्य के दर्शन को आलोचकों ने बौद्ध प्रभाव के कारण क्या उपाधि दी
उत्तर देखें
प्रच्छन्न बौद्ध
शंकराचार्य ने किन तीन प्रमुख ग्रंथों पर अपने प्रसिद्ध भाष्य लिखे (प्रस्थानत्रयी)
उत्तर देखें
उपनिषद, भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र
आदि शंकराचार्य द्वारा भारत की चारों दिशाओं में स्थापित चार प्रमुख मठ
उत्तर देखें
श्रृंगेरी, द्वारका, पुरी और बद्रीनाथ
दक्षिण में स्थापित श्रृंगेरी मठ किस पीठ के रूप में विख्यात है
उत्तर देखें
शारदा पीठ (कर्नाटक)
पश्चिम में गुजरात में स्थापित शंकराचार्य का मठ
उत्तर देखें
द्वारका मठ (कालिका पीठ)
पूर्व में ओडिशा में स्थापित शंकराचार्य का मठ
उत्तर देखें
गोवर्धन मठ (पुरी)
उत्तर में उत्तराखंड में स्थापित शंकराचार्य का मठ
उत्तर देखें
ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ)
विशिष्टाद्वैत वेदांत दर्शन के महान संस्थापक आचार्य
उत्तर देखें
रामानुजाचार्य
रामानुजाचार्य का जन्म स्थल
उत्तर देखें
श्रीपेरुंबुदूर (तमिलनाडु, 1017 ई.)
रामानुजाचार्य किस प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय वैष्णव संप्रदाय के आचार्य थे
उत्तर देखें
श्री वैष्णव संप्रदाय
रामानुजाचार्य द्वारा ब्रह्मसूत्र पर रचित विश्वविख्यात भाष्य
उत्तर देखें
श्रीभाष्य
रामानुजाचार्य की अन्य प्रमुख दार्शनिक रचना
उत्तर देखें
वेदार्थसंग्रह एवं गीताभाष्य
रामानुजाचार्य के अनुसार परम तत्व (ईश्वर) का स्वरूप
उत्तर देखें
सगुण एवं सविशेष (विष्णु/नारायण)
रामानुजाचार्य के अनुसार मोक्ष प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ व सुलभ मार्ग
उत्तर देखें
भक्ति और प्रपत्ति (शरणागति)
रामानुजाचार्य के अनुसार जीव, जगत और ब्रह्म का संबंध
उत्तर देखें
शरीर-आत्मा जैसा विशिष्ट अद्वैत
रामानुजाचार्य ने सभी वर्गों हेतु किस आध्यात्मिक साधना का द्वार खोला
उत्तर देखें
भक्ति साधना
द्वैताद्वैत (भेदाभेद) दर्शन के प्रतिपादक आचार्य
उत्तर देखें
निम्बार्काचार्य
शुद्धाद्वैत दर्शन के महान प्रतिपादक आचार्य
उत्तर देखें
वल्लभाचार्य
पूर्ण द्वैतवाद दर्शन के मुख्य प्रतिपादक आचार्य
उत्तर देखें
माध्वाचार्य
पूर्व मध्यकाल में मंदिरों के विशाल आर्थिक प्रभुत्व का मुख्य आधार
उत्तर देखें
अकूत भूमि व स्वर्ण दान
दार्शनिक पुनरुत्थान
पूर्व मध्यकालीन प्रमुख दार्शनिक, उनका काल, दर्शन एवं कृतियां
भारतीय दर्शन के प्रमुख आचार्य एवं उनकी वैचारिक परंपरा
आचार्य एवं काल दर्शन एवं संप्रदाय प्रमुख ग्रंथ व ऐतिहासिक योगदान
आदि शंकराचार्य (788–820 ई.)
उत्तर देखें
अद्वैत वेदांत (स्मार्त संप्रदाय)
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शारीरिकभाष्य (ब्रह्मसूत्र भाष्य), गीताभाष्य, उपनिषद भाष्य; प्रस्थानत्रयी पर भाष्य व चार दिशाओं में चार मठों की स्थापना
रामानुजाचार्य (1017–1137 ई.)
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विशिष्टाद्वैत (श्री संप्रदाय)
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श्रीभाष्य, वेदार्थसंग्रह, गीताभाष्य; सगुण ईश्वर (नारायण) की भक्ति व प्रपत्ति (शरणागति) का सिद्धांत
माध्वाचार्य (1199–1278 ई.)
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द्वैतवाद (ब्रह्म संप्रदाय)
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अणुभाष्य, तत्वविवेक; जीव और ईश्वर में शाश्वत व वास्तविक भेद; विष्णु सर्वोच्च स्वतंत्र तत्व
निम्बार्काचार्य (12वीं सदी)
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द्वैताद्वैत (भेदाभेद) (सनक संप्रदाय)
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वेदांत पारिजात सौरभ; जीव व ब्रह्म में भेद और अभेद दोनों का सह-अस्तित्व; राधा-कृष्ण उपासना
कुमारिल भट्ट व प्रभाकर (8वीं सदी)
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पूर्व मीमांसा दर्शन
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श्लोकवार्तिक, तंत्रवार्तिक; वेदों की अपौरुषेयता व वैदिक कर्मकांडों की दार्शनिक पुनर्स्थापना
दार्शनिक तुलना
शंकराचार्य और रामानुजाचार्य के दर्शन की तुलनात्मक विशेषताएं
अद्वैत वेदांत बनाम विशिष्टाद्वैत — तत्वमीमांसा एवं मोक्ष मार्ग
दार्शनिक आधार / तत्व आदि शंकराचार्य (अद्वैत वेदांत) रामानुजाचार्य (विशिष्टाद्वैत)
ब्रह्म का मूल स्वरूप
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निर्गुण, निराकार, निर्विशेष एवं अनिर्वचनीय विशुद्ध चैतन्य
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सगुण, साकार, अनंत कल्याणकारी गुणों से युक्त सविशेष पुरुषोत्तम (विष्णु)
जगत की वास्तविकता
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जगत माया (अविद्या) जनित प्रातिभासिक सत्य है; पारमार्थिक स्तर पर मिथ्या
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जगत वास्तविक और सत्य है; यह ब्रह्म का ही प्रत्यक्ष शरीर (प्रकार) है
जीव और ब्रह्म का संबंध
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जीव और ब्रह्म मूलतः एक ही हैं (अद्वैत); 'तत्त्वमसि', 'अहं ब्रह्मास्मि'
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जीव ब्रह्म का अभिन्न अंश व शरीर है, किंतु व्यक्तित्व में भिन्न रहता है
मोक्ष प्राप्ति का साधन
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विशुद्ध ज्ञान (ज्ञानमार्ग); अविद्या के नाश से आत्मज्ञान ही मुक्ति
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भक्ति और प्रपत्ति (शरणागति); ईश्वरानुग्रह से वैकुंठ धाम की प्राप्ति
सामाजिक व व्यावहारिक दृष्टि
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पारमार्थिक स्तर पर संन्यास व ज्ञान; व्यावहारिक स्तर पर वर्ण-व्यवस्था मान्य
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भक्ति का मार्ग सभी वर्णों व अंत्यजों हेतु सुलभ; सामाजिक समन्वय का प्रसार
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