रॉलेट एक्ट किस वर्ष पारित हुआ था
उत्तर देखें
मार्च 1919
| वर्ष व तिथि | प्रमुख ऐतिहासिक घटना | तात्कालिक परिणाम एवं प्रभाव |
|---|---|---|
मार्च 1919 |
उत्तर देखें
रॉलेट एक्ट (काला कानून) का पारित होना
|
उत्तर देखें
बिना वकील, अपील, दलील के गिरफ्तारी अधिकार; गांधीजी द्वारा 6 अप्रैल को प्रथम राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान
|
13 अप्रैल 1919 |
उत्तर देखें
जलियांवाला बाग हत्याकांड (अमृतसर)
|
उत्तर देखें
जनरल डायर द्वारा 1000+ नागरिकों का संहार; पंजाब में मार्शल लॉ; रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा 'नाइटहुड' उपाधि का त्याग
|
23–24 नवंबर 1919 |
उत्तर देखें
अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन (दिल्ली)
|
उत्तर देखें
गांधीजी सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुने गए; हिंदू-मुस्लिम एकता का ऐतिहासिक मंच तैयार; ब्रिटिश माल बहिष्कार का निर्णय
|
1 अगस्त 1920 |
उत्तर देखें
असहयोग आंदोलन का औपचारिक प्रारंभ
|
उत्तर देखें
प्रातःकाल बाल गंगाधर तिलक का निधन; पूरे देश में हड़ताल; गांधीजी द्वारा 'कैसर-ए-हिंद' पदक की वापसी
|
4–9 सितंबर 1920 |
उत्तर देखें
कलकत्ता कांग्रेस का विशेष अधिवेशन
|
उत्तर देखें
लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में गांधीजी द्वारा प्रस्तुत असहयोग आंदोलन का ऐतिहासिक प्रस्ताव बहुमत से पारित
|
दिसंबर 1920 |
उत्तर देखें
नागपुर कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन
|
उत्तर देखें
सी. विजयराघवाचारी अध्यक्ष; सी. आर. दास द्वारा मुख्य प्रस्ताव प्रस्तुत; कांग्रेस के नए संविधान व 4 आना सदस्यता की स्वीकृति
|
31 मार्च 1921 |
उत्तर देखें
विजयवाड़ा कांग्रेस कार्यसमिति बैठक
|
उत्तर देखें
तिलक स्वराज फंड में 1 करोड़ रुपये एकत्र करने एवं 20 लाख चरखों के वितरण का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित
|
17 नवंबर 1921 |
उत्तर देखें
प्रिंस ऑफ वेल्स का भारत आगमन
|
उत्तर देखें
देशव्यापी पूर्ण हड़ताल व काले झंडे दिखाकर विरोध; बंबई में भीषण प्रदर्शन; विदेशी कपड़ों की सार्वजनिक होली
|
4 या 5 फरवरी 1922 |
उत्तर देखें
चौरी-चौरा की हिंसक घटना (गोरखपुर)
|
उत्तर देखें
पुलिस की गोलीबारी से भड़की भीड़ द्वारा थाने में आग; 22 पुलिसकर्मियों की जलकर मृत्यु; गांधीजी अत्यधिक व्यथित
|
12 फरवरी 1922 |
उत्तर देखें
बारदोली प्रस्ताव (आंदोलन वापसी)
|
उत्तर देखें
गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन स्थगित करने की औपचारिक घोषणा; नेताओं में असंतोष; 10 मार्च को गांधीजी गिरफ्तार
|
| आंदोलन का आयाम / पक्ष | प्रमुख नेता एवं मूल उद्देश्य | कांग्रेस का रुख एवं राजनीतिक प्रभाव |
|---|---|---|
मूल प्रेरणा एवं उद्देश्य |
उत्तर देखें
तुर्की के खलीफा के धार्मिक स्थलों (जजीरात-उल-अरब) की रक्षा व सेवर्स की अपमानजनक संधि को रद्द कराना
|
उत्तर देखें
मुस्लिम जनमानस में ब्रिटिश विरोधी आक्रोश; गांधीजी ने इसे साम्राज्यवाद विरोधी साझे मोर्चे के रूप में देखा
|
प्रमुख नेतृत्वकर्ता |
उत्तर देखें
मौलाना मुहम्मद अली, शौकत अली (अली बंधु), अबुल कलाम आजाद, हकीम अजमल खां, हसरत मोहानी
|
उत्तर देखें
गांधीजी अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन के अध्यक्ष बने; तिलक, नेहरू व सी. आर. दास ने बाद में पूर्ण समर्थन दिया
|
कांग्रेस से समन्वय |
उत्तर देखें
खिलाफत आंदोलन को असहयोग आंदोलन के मुख्य आधारों में सम्मिलित कर संयुक्त संघर्ष का संचालन
|
उत्तर देखें
सितंबर 1920 के कलकत्ता अधिवेशन में स्वीकृति; हिंदू-मुस्लिम एकता का ऐतिहासिक चरमोत्कर्ष स्थापित हुआ
|
आंदोलन का अवसान व प्रभाव |
उत्तर देखें
1924 में मुस्तफा कमाल पाशा द्वारा खलीफा पद की समाप्ति; तुर्की का धर्मनिरपेक्ष आधुनिकीकरण
|
उत्तर देखें
आंदोलन का मूल आधार समाप्त; मालाबार मोपला विद्रोह से सांप्रदायिक तनाव बढ़ा; मुस्लिम जनसाधारण राजनीति से जुड़ा
|
| कार्यक्रम / नीति का स्वरूप | मुख्य उद्देश्य एवं अपनाए गए उपाय | विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी |
|---|---|---|
उपाधियों व पदों का त्याग
(नकारात्मक पक्ष) |
उत्तर देखें
ब्रिटिश सत्ता के नैतिक औचित्य को नकारना; 'कैसर-ए-हिंद' व रायबहादुर पदवियों की वापसी
|
उत्तर देखें
उच्च मध्यम वर्ग, बुद्धिजीवियों व सम्मानित नागरिकों द्वारा मानद पदों व उपाधियों का त्याग
|
शिक्षण संस्थाओं का बहिष्कार
(नकारात्मक व सकारात्मक) |
उत्तर देखें
सरकारी स्कूलों व कॉलेजों का बहिष्कार; समानांतर राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना
|
उत्तर देखें
हजारों छात्रों द्वारा सरकारी कॉलेज त्यागना; काशी, बिहार, गुजरात विद्यापीठ व जामिया में प्रवेश
|
अदालतों का बहिष्कार
(न्यायिक सुधार) |
उत्तर देखें
ब्रिटिश न्यायिक व्यवस्था को पंगु बनाना; विवादों के निपटारे हेतु ग्राम पंचायतों की स्थापना
|
उत्तर देखें
सी. आर. दास, मोतीलाल नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, पटेल जैसे शीर्ष वकीलों द्वारा वकालत का त्याग
|
विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार
(आर्थिक चोट) |
उत्तर देखें
विदेशी कपड़ों की सार्वजनिक होली; मैनचेस्टर के आयात को ध्वस्त कर स्वदेशी खादी को बढ़ावा
|
उत्तर देखें
महिलाओं, व्यापारियों व आम जनता की व्यापक भागीदारी; खादी व गांधी टोपी राष्ट्रीय परिधान बनी
|
शराब व ताड़ी दुकानों पर धरना
(सामाजिक शुद्धि) |
उत्तर देखें
सरकारी आबकारी राजस्व को क्षति पहुँचाना; श्रमिकों व परिवारों को नशामुक्त बनाना
|
उत्तर देखें
महिलाओं द्वारा मद्य-दुकानों की पिकेटिंग; ताड़ी के पेड़ों की कटाई; सरकारी राजस्व में भारी गिरावट
|
ग्रामीण व कृषक जन-उभार
(क्षेत्रीय विस्तार) |
उत्तर देखें
जमींदारी शोषण, बेगार व भारी लगान का अंत; अवध, गुंटूर व बिजौलिया में कर-रोको आंदोलन
|
उत्तर देखें
लाखों किसानों व आदिवासियों की सीधी सहभागिता; बाबा रामचंद्र, मदारी पासी व अल्लूरी राजू का उभार
|
| ऐतिहासिक घटना / पहलू | घटनाक्रम एवं गांधीजी का निर्णय | तात्कालिक व दूरगामी राजनीतिक प्रभाव |
|---|---|---|
चौरी-चौरा की घटना
(4/5 फरवरी 1922) |
उत्तर देखें
गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा में पुलिस लाठीचार्ज व गोलीबारी से उत्तेजित भीड़ ने थाने को घेरा; आग लगाने से 22 पुलिसकर्मी जलकर मरे
|
उत्तर देखें
गांधीजी का मानना था कि देश अभी पूर्ण अहिंसक आंदोलन हेतु तैयार नहीं है; सरकार को भीषण दमन का नैतिक बहाना मिल जाता
|
बारदोली प्रस्ताव
(12 फरवरी 1922) |
उत्तर देखें
बारदोली में कांग्रेस कार्यसमिति की आपात बैठक; सविनय अवज्ञा व असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का प्रस्ताव पारित
|
उत्तर देखें
किसानों को लगान देने का निर्देश; कांग्रेस को खादी, नशामुक्ति, राष्ट्रीय शिक्षा व अस्पृश्यता निवारण जैसे रचनात्मक कार्यों में लगाया
|
राष्ट्रवादी नेताओं की प्रतिक्रिया |
उत्तर देखें
सुभाष चंद्र बोस, सी. आर. दास, मोतीलाल नेहरू व लाला लाजपत राय द्वारा अत्यंत तीखी व क्षोभपूर्ण आलोचना; जनता में घोर निराशा
|
उत्तर देखें
डॉ. मुंजे द्वारा निंदा प्रस्ताव लाया गया; आंदोलन की अचानक वापसी से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में गहरा मतभेद उत्पन्न हुआ
|
ब्रिटिश दमन व गांधीजी की गिरफ्तारी
(10 मार्च 1922) |
उत्तर देखें
आंदोलन वापस होते ही जनता में बिखराव आया; ब्रिटिश सरकार ने गांधीजी को साबरमती से गिरफ्तार कर राजद्रोह (124A) का मुकदमा चलाया
|
उत्तर देखें
जज ब्रूमफील्ड द्वारा 6 वर्ष का कारावास; 1924 में खराब स्वास्थ्य पर रिहाई; राजनीतिक शून्यता से स्वराज पार्टी व क्रांतिकारी दल उभरे
|