औरंगजेब का जन्म कब और कहाँ हुआ था
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3 नवंबर 1618, दोहद (गुजरात)
| धार्मिक निर्णय / नीति व वर्ष | संबंधित क्षेत्र / वर्ग व स्वरूप | ऐतिहासिक प्रभाव एवं प्रमाण |
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सिक्कों पर कलमा व नवरोज निषेध
(1659 ई.) |
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मुद्रा एवं दरबारी उत्सव; पारसी त्योहार नवरोज व कलमा अंकन समाप्त
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इस्लामी धर्मशास्त्र के कड़े नियमों का क्रियान्वयन; दरबारी परंपराओं का सरलीकरण
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मुहतसिबों की नियुक्ति
(1659 ई.) |
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समस्त नगर व बाजार; आचार-निरीक्षक अधिकारियों की स्थायी नियुक्ति
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शराब, भांग, जुआ, वेश्यावृत्ति पर रोक; नाप-तौल व सार्वजनिक नैतिकता का कड़ा निरीक्षण
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संगीत, झरोखा व तुलादान रोक
(1668–1670 ई.) |
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शाही दरबार एवं दरबारी संस्कृति; व्यक्तिगत वंदना व विलासिता समाप्त
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दरबारी संगीतकार निष्कासित; इतिहास लेखन पर रोक; सादगीपूर्ण सुन्नी परंपरा को बढ़ावा
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मंदिर विध्वंस का शाही फरमान
(1669 ई.) |
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बनारस, मथुरा, काठियावाड़; नए मंदिर निर्माण व पुराने जीर्णोद्धार पर रोक
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काशी विश्वनाथ (1669), मथुरा केशवराय (1670) व सोमनाथ खंडित; हिंदू असंतोष व विद्रोह
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जजिया कर का पुनरागमन
(12 अप्रैल 1679) |
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समस्त गैर-मुस्लिम प्रजा (जिम्मी); 115 वर्ष बाद अकबर का नियम पलटा
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धार्मिक असंतोष में तीव्र वृद्धि; राजपूत, मराठा व व्यापारियों का खुला विरोध; राजकोषीय लाभ अल्प
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व्यापारिक चुंगी में भेदभाव
(1665–1667 ई.) |
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मुस्लिम व्यापारियों हेतु कर 2.5% और बाद में शून्य; हिंदू व्यापारियों पर 5% कर
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व्यापारिक वर्ग में तीव्र असंतोष; आर्थिक दृष्टि से अनुत्पादक एवं भेदभावपूर्ण व्यवस्था
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| विद्रोह / संघर्ष व काल | प्रमुख नेता एवं विद्रोही पक्ष | विद्रोह का कारण एवं दमन/परिणाम |
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जाट विद्रोह
(1669–1688 ई.) |
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गोकुला, राजाराम एवं चूरामन जाट
(मथुरा, भरतपुर व आगरा)
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अब्दुन नबी के अत्याचार व भू-राजस्व शोषण; गोकुला शहीद; राजाराम ने अकबर की अस्थियां जलाईं; चूरामन ने स्वतंत्र भरतपुर राज्य की नींव रखी
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सतनामी विद्रोह
(1672 ई.) |
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सतनामी साधु (मुंडिया संप्रदाय)
(नारनौल व मेवात, हरियाणा)
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मुगल सैनिक द्वारा सतनामी किसान से दुर्व्यवहार; धार्मिक व कृषक असंतोष; औरंगजेब ने तोपखाने से भारी नरसंहार कर दमन किया
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सिख संघर्ष
(1675 व 1699–1705 ई.) |
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गुरु तेग बहादुर एवं गुरु गोविंद सिंह
(पंजाब व आनंदपुर साहिब)
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कश्मीरी पंडितों के उत्पीड़न का विरोध करने पर गुरु तेग बहादुर का 1675 में शीश काटा; 1699 में खालसा पंथ की स्थापना; चमकौर युद्ध
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बुंदेला विद्रोह
(1671–1707 ई.) |
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राजा छत्रसाल बुंदेला
(बुंदेलखंड)
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मुगल धार्मिक संकीर्णता व शोषण; छत्रसाल ने शिवाजी से प्रेरणा ली; मुगलों को हराकर स्वतंत्र पन्ना राज्य स्थापित किया
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अफगान विद्रोह
(1667 व 1672 ई.) |
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भागू (यूसुफजई) व अकमल खां (अफरीदी)
(पश्चिमोत्तर सीमांत)
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स्वतंत्रता की चाह; मुगलों के कई सेनापति (शुजात खां) मारे गए; औरंगजेब को स्वयं हसन अबदाल जाकर कूटनीति से दमन करना पड़ा
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| दक्कन अभियान व काल | लक्षित राज्य व प्रमुख विरोधी | सामरिक कार्रवाई एवं ऐतिहासिक परिणाम |
|---|---|---|
दक्कन प्रस्थान
(1681 ई.) |
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विद्रोही शहजादा अकबर व मराठा राज्य
(महाराष्ट्र)
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शहजादा अकबर का पीछा करते हुए औरंगजेब दक्कन गया; जीवन के अंतिम 25 वर्ष वहीं बीते; दिल्ली कभी वापस नहीं लौटा
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बीजापुर विजय
(1685–1686 ई.) |
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आदिलशाही सल्तनत
शासक: सिकंदर आदिल शाह
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15 माह का कड़ा घेरा; रसद रोककर आत्मसमर्पण कराया; 12 सितंबर 1686 को बीजापुर मुगल साम्राज्य का सूबा बना
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गोलकुंडा विजय
(1687 ई.) |
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कुतुबशाही सल्तनत
शासक: अबुल हसन (ताना शाह)
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8 माह का घेरा; अब्दुल्ला खां पन्नी को घूस देकर फाटक खुलवाया; 21 सितंबर 1687 को विलय; अकूत खजाना मिला
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शंभाजी का वध
(1689 ई.) |
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मराठा छत्रपति
स्थान: संगमेश्वर व तुलापुर
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मुकर्रब खां ने संगमेश्वर में पकड़ा; इस्लाम न स्वीकारने पर 11 मार्च 1689 को तुलापुर में क्रूरतापूर्वक वध कराया
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मराठा स्वतंत्रता संग्राम
(1689–1707 ई.) |
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छत्रपति राजाराम व महारानी ताराबाई
(जिंजी व सतारा)
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मराठों का जनयुद्ध व छापामार प्रहार; मुगलों के खजाने व प्रतिष्ठा का विनाश; नेपोलियन के स्पैनिश नासूर की भांति दक्कन घातक सिद्ध
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| सल्तनत व विलय वर्ष | अंतिम शासक एवं राजधानी | घेराबंदी की घटनाएं एवं ऐतिहासिक परिणाम |
|---|---|---|
बीजापुर सल्तनत
(12 सितंबर 1686) |
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सिकंदर आदिल शाह (अल्पवयस्क)
राजधानी: बीजापुर
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औरंगजेब ने स्वयं घेरे की कमान संभाली; जल व रसद आपूर्ति बंद; सिकंदर बंदी बना (1 लाख वार्षिक पेंशन); दौलताबाद कैद में मृत्यु
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गोलकुंडा सल्तनत
(21 सितंबर 1687) |
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अबुल हसन कुतुब शाह (ताना शाह)
राजधानी: गोलकुंडा दुर्ग
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अभियान का नेतृत्व पहले शहजादा आजम ने किया; तोपों से दीवार न टूटने पर अफगान द्वारपाल अब्दुल्ला पन्नी को रिश्वत देकर खिड़की खुलवाई
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मदन्ना और अकन्ना की हत्या
(1685 ई.) |
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गोलकुंडा के दो शक्तिशाली हिंदू ब्राह्मण मंत्री
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मुगल दबाव व षड्यंत्र से हैदराबाद में दोनों भाइयों की निर्मम हत्या; गोलकुंडा का प्रशासनिक ढांचा पूर्णतः छिन्न-भिन्न हुआ
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विलय का भू-राजनीतिक प्रभाव |
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दक्कन से शिया राज्यों की मध्यस्थता का अंत
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मुगल सीमाएं सीधे मराठों से टकराईं; मराठों को समाप्त करने के बजाय मुगलों ने दक्कन का सुरक्षा संतुलन नष्ट कर लिया
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| चुनौती का आयाम / क्षेत्र | संरचनात्मक संकट एवं कारण | मुगल साम्राज्य के पतन पर प्रभाव |
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जागीरदारी संकट
(बे-जागीरी की स्थिति) |
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मनसबदारों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि (विशेषकर दक्कनी अमीर); उपजाऊ जागीरों (पैबाकी) का अभाव
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सतीश चंद्र के अनुसार मनसबदारों का गुटीय संघर्ष; सैनिकों के वेतन बकाये से सैन्य निष्ठा का पूर्ण ह्रास
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कृषक असंतोष व विद्रोह
(जमींदारी संकट) |
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इरफान हबीब अनुसार अत्यधिक भू-राजस्व मांग (उपज का 50%); बिचौलियों व जमींदारों का तीव्र शोषण
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जाट, सतनामी, सिख व मराठों के रूप में कृषकों का हिंसक विद्रोह; ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विध्वंस
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दक्कन की सामरिक दलदल
(साम्राज्यीय अति-विस्तार) |
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25 वर्षों तक सम्राट का राजधानी से दूर रहना; संचार साधनों के अभाव में उत्तर भारत में प्रशासनिक ढिलाई
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राजकोष पूर्णतः रिक्त; सेनापति व सैनिक युद्ध से थककर हताश; केंद्रीय नियंत्रण समाप्तप्राय
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धार्मिक व सामाजिक अलगाव
(राजपूत विमुखता) |
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जजिया, मंदिर ध्वंस व मारवाड़-मेवाड़ उत्तराधिकार में अनुचित हस्तक्षेप; रूढ़िवादी शरिया नीति
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मुगल साम्राज्य के सबसे मजबूत सैन्य स्तंभ 'राजपूतों' का निष्ठावान समर्थन सदा के लिए समाप्त
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उत्तराधिकार नियम का अभाव
(दरबारी गुटबंदी) |
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तलवार के बल पर गद्दी का निर्णय; औरंगजेब की मृत्यु के बाद अयोग्य, विलासी व अल्पकालिक शासकों की बाढ़
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सैयद बंधु (किंग मेकर) जैसी दरबारी गुटबंदियों का जन्म; 1739 में नादिर शाह के आक्रमण से साम्राज्य का शव दफन
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