मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन का उद्भव सर्वप्रथम कहाँ हुआ
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दक्षिण भारत (तमिलनाडु)
| दार्शनिक आधार / तत्व | निर्गुण भक्ति परंपरा (संत काव्य) | सगुण भक्ति परंपरा (अवतार उपासना) |
|---|---|---|
ईश्वर का मूल स्वरूप |
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निराकार, निर्विशेष, सर्वव्यापी, अजन्मा व अगम्य परम तत्व
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साकार, सगुण, मानवीय भावनाओं से युक्त लीलाधारी भगवान (राम, कृष्ण)
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उपासना एवं आराधना पद्धति |
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नाम-स्मरण, शब्द-साधना, अंतर्मुखी ध्यान व गुरु-कृपा; मूर्तिपूजा का निषेध
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मूर्तिपूजा, मंदिर-अर्चन, कीर्तन, भजन, लीला-गान व दांपत्य/वात्सल्य भाव
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जाति व्यवस्था व कर्मकांड |
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जाति-पांति, बाह्य आडंबर, तीर्थ, उपवास व पुरोहितवाद पर कठोर प्रहार
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धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समन्वय, किंतु वर्ण-व्यवस्था का मर्यादापूर्ण स्वीकार
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प्रमुख प्रतिनिधि संत |
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कबीरदास, गुरु नानक देव, दादू दयाल, रैदास, मलूकदास
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गोस्वामी तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई, चैतन्य महाप्रभु, वल्लभाचार्य
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अभिव्यक्ति की भाषा |
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जनभाषा, सधुक्कड़ी (पंचमेल खिचड़ी), लोक बोलियां, उलटबांसी
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साहित्यिक अवधी, ब्रजभाषा, मैथिली, राजस्थानी एवं बांग्ला
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| संत एवं संप्रदाय | कार्यस्थल व भाषा | प्रमुख ग्रंथ एवं मुख्य शिक्षाएं |
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कबीरदास
(1398–1518 ई.) |
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वाराणसी व मगहर
सधुक्कड़ी (पंचमेल)
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बीजक (साखी, सबद, रमैनी); एकेश्वरवाद, हिंदू-मुस्लिम एकता, बाह्य आडंबरों व जातिप्रथा का कठोर विरोध
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गुरु नानक देव
(1469–1539 ई.) |
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पंजाब व करतारपुर
पंजाबी व हिंदवी
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जपुजी, असा दी वार, ओंकार; 'इक ओंकार' (एक ईश्वर), लंगर व पंगत प्रथा, अंधविश्वास का खंडन
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गोस्वामी तुलसीदास
(1532–1623 ई.) |
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अयोध्या व काशी
अवधी एवं ब्रजभाषा
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रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली; मर्यादित रामभक्ति, समन्वयवादी दृष्टिकोण, सामाजिक मर्यादा
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सूरदास
(1478–1583 ई.) |
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आगरा व मथुरा (गऊघाट)
ब्रजभाषा
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सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी; श्रीकृष्ण की बाललीला, वात्सल्य एवं भ्रमरगीत परंपरा
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मीराबाई
(1498–1546 ई.) |
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मेड़ता, चित्तौड़, द्वारका
राजस्थानी व ब्रज
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पदावली, राग गोविंद; श्रीकृष्ण की दांपत्य भाव ('गिरधर गोपाल') से अनन्य भक्ति, कुल-मर्यादा का त्याग
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चैतन्य महाप्रभु
(1486–1533 ई.) |
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नदिया व पुरी (ओडिशा)
संस्कृत व बांग्ला
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शिक्षाष्टक; अचिंत्य भेदाभेदवाद, संकीर्तन (हरे कृष्ण महामंत्र) द्वारा राधा-कृष्ण की रागानुगा भक्ति
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श्रीमंत शंकरदेव
(1449–1568 ई.) |
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असम (कामरूप)
असमिया व ब्रजावली
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कीर्तन-घोष, गुणमाला; 'एकशरण धर्म', सत्रीया नृत्य, नामघर एवं सत्रों (मठों) की स्थापना
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| संत एवं काल | संप्रदाय व केंद्र | प्रमुख रचनाएं एवं मुख्य शिक्षाएं |
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संत ज्ञानेश्वर
(1275–1296 ई.) |
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वारकरी संप्रदाय
आलंदी व नेवासा
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ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका), अमृतानुभव; मराठी में गीता का ज्ञान, भक्ति मार्ग की दार्शनिक आधारशिला
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संत नामदेव
(1270–1350 ई.) |
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वारकरी संप्रदाय
पंढरपुर व पंजाब
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अभंग रचना; गुरु ग्रंथ साहिब में 61 पद; सगुण से निर्गुण की ओर झुकाव; उत्तर भारत में भक्ति का प्रचार
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संत एकनाथ
(1533–1599 ई.) |
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वारकरी संप्रदाय
पैठन (प्रतिष्ठान)
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भावार्थ रामायण, एकनाथी भागवत, रुक्मिणी स्वयंवर; सामाजिक समरसता, अछूतोद्धार व लोकभाषा मराठी का उत्थान
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संत तुकाराम
(1608–1649 ई.) |
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वारकरी संप्रदाय
देहू (पुणे)
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तुकाराम गाथा (4500+ अभंग); कीर्तन परंपरा, पाखंड व कर्मकांड विरोध; शिवाजी महाराज के समकालीन व प्रेरक
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समर्थ रामदास
(1608–1681 ई.) |
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धारकरी संप्रदाय
सज्जनगढ़ (सतारा)
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दासबोध, मनाचे श्लोक; कर्मयोग, राष्ट्र-चेतना, शारीरिक बल, मारुति (हनुमान) मंदिरों की स्थापना
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| सूफी सिलसिला व संस्थापक | भारत में प्रमुख केंद्र व संत | प्रमुख दार्शनिक विचार व विशेषताएं |
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चिश्ती सिलसिला
(ख्वाजा अबू इसहाक शमी) |
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अजमेर, दिल्ली, पंजाब, बदायूं
मुईनुद्दीन चिश्ती, बख्तियार काकी, फरीद, औलिया
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सादा जीवन, समा (संगीत) का प्रबल समर्थन, सत्ता व राजकीय संरक्षण से पूर्ण दूरी, सर्वधर्म समभाव
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सुहरावर्दी सिलसिला
(शेख शहाबुद्दीन सुहरावर्दी) |
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मुल्तान, उच्च, सिंध
शेख बहाउद्दीन जकारिया, रुकनुद्दीन
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अमीरी व वैभवपूर्ण जीवन, राजकीय पदों व संपदा का स्वीकार, संगीत (समा) का निषेध, कठोर शरीयत
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कादिरी सिलसिला
(शेख अब्दुल कादिर जिलानी) |
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पंजाब, सिंध, दक्कन
शाह नियामतुल्लाह, मियां मीर, मुल्ला शाह
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मध्यममार्गी दृष्टिकोण, दारा शिकोह का जुड़ाव; मियां मीर ने अमृतसर स्वर्ण मंदिर की नींव रखी
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नक्शबंदी सिलसिला
(ख्वाजा बहाउद्दीन नक्शबंद) |
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दिल्ली, सरहिंद (पंजाब)
ख्वाजा बाकी बिल्लाह, शेख अहमद सरहिंदी
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सर्वाधिक रूढ़िवादी व कट्टर; संगीत व समा का घोर विरोध; वहदत-उल-शुहूद; औरंगजेब का समर्थन
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सत्तारी सिलसिला
(शाह अब्दुल्लाह सत्तारी) |
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जौनपुर, मालवा, ग्वालियर
शेख मुहम्मद गौस
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योग साधना व हिंदू दर्शन का गहरा समन्वय; तानसेन के गुरु शेख मुहम्मद गौस; तीव्र आध्यात्मिक समाधि
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फिरदौसी सिलसिला
(शेख बदरुद्दीन समरकंदी) |
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बिहार (मनेर व राजगीर)
शेख शर्फुद्दीन यह्या मनेरी
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सुहरावर्दी की शाखा; बिहार में सर्वाधिक लोकप्रिय; मक्तूबात (पत्रों) द्वारा आध्यात्मिक उपदेश
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| सूफी संत व काल | खानकाह / दरगाह स्थल | प्रमुख उपाधि, विचार व शिक्षाएं |
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ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती
(1142–1236 ई.) |
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अजमेर
(राजस्थान)
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'गरीब नवाज', 'सुल्तान-उल-हिंद'; दीन-दुखियों की सेवा, मानवीय प्रेम, ईश्वर की प्राप्ति हेतु संगीत साधना
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बाबा फरीदुद्दीन गंज-ए-शकर
(1175–1265 ई.) |
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हांसी व अजोधन (पाकपट्टन)
(पंजाब)
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कठोर तपस्या व उपवास; पंजाबी भाषा में पदों की रचना; गुरु ग्रंथ साहिब में 112 श्लोक संकलित
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हजरत निजामुद्दीन औलिया
(1238–1325 ई.) |
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गियासपुर (दिल्ली)
दरगाह: निजामुद्दीन
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'महबूब-ए-इलाही'; योग साधना में पारंगत (सिद्ध पुरुष); सुल्तानों के उपहारों व दरबारी राजनीति से पूर्ण विरक्ति
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शेख बहाउद्दीन जकारिया
(1182–1262 ई.) |
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मुल्तान
(पंजाब-सिंध सीमा)
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सुहरावर्दी सिलसिले के संस्थापक; 'शेख-उल-इस्लाम' पद स्वीकार; वैध सांसारिक संपत्ति संचय का समर्थन
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शेख अहमद सरहिंदी
(1564–1624 ई.) |
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सरहिंद
(पंजाब)
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'मुजद्दिद अल्फ-ए-सानी' (द्वितीय सहस्राब्दी का सुधारक); अकबर की सुलह-ए-कुल का विरोध; वहदत-उल-शुहूद
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मियां मीर
(1550–1635 ई.) |
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लाहौर
(पंजाब)
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कादिरी सिलसिला; सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव के परम मित्र; अमृतसर हरमंदिर साहिब की आधारशिला रखी
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| साहित्यिक धारा / शैली | प्रमुख भाषाएं व केंद्र | प्रमुख रचनाएं एवं रचयिता |
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सगुण रामभक्ति साहित्य |
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अवधी एवं ब्रजभाषा
(अयोध्या, काशी, चित्रकूट)
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रामचरितमानस, विनयपत्रिका, दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास)
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सगुण कृष्णभक्ति साहित्य |
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ब्रजभाषा, राजस्थानी व मैथिली
(मथुरा, मेड़ता, मिथिला)
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सूरसागर (सूरदास), पदावली (मीराबाई व विद्यापति), प्रेमवाटिका (रसखान)
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निर्गुण संत काव्य |
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सधुक्कड़ी, पंजाबी, पूर्वी हिंदी
(काशी, पंजाब, राजस्थान)
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बीजक (कबीरदास), आदि ग्रंथ वाणी (गुरु नानक), दादू वाणी (दादू दयाल)
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सूफी प्रेमाख्यानक मसनवी |
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ठेठ अवधी एवं फारसी
(अवध, जौनपुर, दिल्ली)
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पद्मावत (मलिक मुहम्मद जायसी), चंदायन (मुल्ला दाऊद), मृगावती (कुतुबन)
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दार्शनिक समन्वय साहित्य |
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फारसी एवं संस्कृत
(दिल्ली, लाहौर, कश्मीर)
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सिर्र-ए-अकबर, मज्म-उल-बहरीन (दारा शिकोह), दलायल-ए-फिरोजशाही
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प्रांतीय भक्ति साहित्य |
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मराठी, बांग्ला एवं असमिया
(महाराष्ट्र, बंगाल, असम)
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ज्ञानेश्वरी (ज्ञानेश्वर), तुकाराम गाथा, कृत्तिवासी रामायण, कीर्तन-घोष (शंकरदेव)
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