ब्रिटिश सरकार द्वारा क्रिप्स मिशन भारत भेजने का वर्ष
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मार्च 1942
| आंदोलन का चरण व समय | संबद्ध क्षेत्र व प्रमुख नेता | मुख्य गतिविधियां व जन-प्रतिरोध |
|---|---|---|
प्रथम चरण (अगस्त 1942)
[शहरी व स्वतःस्फूर्त] |
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बंबई, कलकत्ता, दिल्ली, अहमदाबाद, पटना;
युवा छात्र, मजदूर व आम नागरिक
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ऑपरेशन जीरो आवर में शीर्ष नेतृत्व गिरफ्तार; शहरों में विशाल हड़तालें, प्रदर्शन, डाक-तार व रेलवे स्टेशनों पर हमले; भीषण पुलिस गोलीबारी
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द्वितीय चरण (मध्य अगस्त 1942)
[ग्रामीण व हिंसक उभार] |
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पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मिदनापुर (बंगाल), ओडिशा, महाराष्ट्र;
किसान, छात्र व स्थानीय नेता
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संचार माध्यम पूर्णतः ध्वस्त; सरकारी इमारतों, थानों व खजानों पर अधिकार; बलिया, तामलुक व सतारा में समानांतर सरकारों की स्थापना
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तृतीय चरण (सितंबर 1942–1944)
[भूमिगत क्रांतिकारी प्रतिरोध] |
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बंबई, नेपाल सीमा, गुजरात व कर्नाटक;
जेपी, अरुणा आसफ अली, लोहिया, उषा मेहता
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आजाद दस्ता द्वारा छापामार हमले; गुप्त कांग्रेस रेडियो का संचालन; पर्चे बांटना; 1943 में गांधीजी का 21 दिनी उपवास; 1944 में रिहाई
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| समानांतर सरकार व स्थान | प्रमुख नेतृत्वकर्ता व समयावधि | प्रमुख कार्य, संस्थाएं व विशेषताएं |
|---|---|---|
बलिया समानांतर सरकार
(उत्तर प्रदेश) |
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चित्तू पांडे ('बलिया का शेर')
अगस्त 1942 (लगभग 1 सप्ताह)
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भारत की प्रथम समानांतर सरकार; कलेक्ट्रेट पर अधिकार; जेल से सभी कांग्रेसी कैदियों को रिहा कराया; स्थानीय प्रशासन संभाला
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तामलुक जातीय सरकार
(मिदनापुर, बंगाल) |
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सतीश चंद्र सामंत, सुशील धारा
दिसंबर 1942 से सितंबर 1944 (दीर्घकालिक)
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'विद्युत वाहिनी' सैन्य दल; भगिनी सेना; चक्रवात राहत कार्य; 73 वर्षीया मातंगिनी हाजरा ('गांधी बूढ़ी') तिरंगा थामे शहीद हुईं
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सतारा प्रति सरकार
(महाराष्ट्र) |
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नाना पाटिल एवं वाई. बी. चव्हाण
मध्य 1943 से 1946 (सर्वाधिक लंबी)
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जन-अदालतें (न्यायदान मंडल); 'तूफान दल' छापामार सेना; साहुकारों के बही-खाते जब्त; गांधी विवाह पद्धति; राशन व्यवस्था
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तलचर समानांतर सरकार
(ओडिशा) |
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लक्ष्मण नायक व स्थानीय प्रजामंडल
अगस्त–सितंबर 1942
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जन-अदालतों द्वारा न्याय; ब्रिटिश संचार लाइनों का पूर्ण विनाश; पुलिस चौकी पर अधिकार; नायक को बाद में फांसी दी गई
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| सैन्य ब्रिगेड / इकाई | संबंधित कमांडर / नेतृत्व | सैन्य अभियान एवं ऐतिहासिक भूमिका |
|---|---|---|
सुभाष ब्रिगेड
(प्रथम गुरिल्ला रेजिमेंट) |
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शाहनवाज खान
(मेजर जनरल)
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अराकान व कलादान मोर्चे पर जापानी सेना संग संयुक्त अभियान; 1944 में कोहिमा-इंफाल सीमा पर भीषण युद्ध
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गांधी ब्रिगेड
(द्वितीय गुरिल्ला रेजिमेंट) |
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इनायत कियानी
(कर्नल)
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बर्मा सीमा रक्षा व इम्फाल कूच; ब्रिटिश सेना के विरुद्ध वीरतापूर्वक मोर्चा संभाला
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नेहरू ब्रिगेड
(तृतीय गुरिल्ला रेजिमेंट) |
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गुरबख्श सिंह ढिल्लों
(कर्नल)
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इरावदी नदी के तट पर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध ऐतिहासिक रक्षात्मक युद्ध; अंतिम समय तक समर्पण नहीं किया
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रानी झांसी रेजिमेंट
(एशिया की प्रथम महिला वाहिनी) |
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कैप्टन लक्ष्मी स्वामीनाथन
(लक्ष्मी सहगल)
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22 अक्टूबर 1943 को गठित; महिला लड़ाकू सैनिकों को हथियारों व नर्सिंग का पूर्ण प्रशिक्षण; अद्भुत रणकौशल
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बालक सेना / आजाद दस्ता
(किशोर स्वयंसेवक) |
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सुभाष चंद्र बोस के मार्गदर्शन में
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गुप्त संदेशों का आदान-प्रदान, रसद आपूर्ति व प्राथमिक चिकित्सा में सहयोग
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| वर्ष व तिथि | ऐतिहासिक घटना | प्रमुख विवरण एवं प्रभाव |
|---|---|---|
16–17 जनवरी 1941 |
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नेताजी का महाभिनिष्क्रमण (कलकत्ता)
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एल्गिन रोड आवास से जियाउद्दीन पठान के भेष में गुप्त पलायन; पेशावर व काबुल होते हुए मास्को व बर्लिन यात्रा
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1 सितंबर 1942 |
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INA की प्रथम डिवीजन की स्थापना
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कैप्टन मोहन सिंह द्वारा मलाया में 16,300 युद्धबंदियों को लेकर आजाद हिंद फौज का प्रथम औपचारिक गठन
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2 जुलाई 1943 |
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नेताजी का सिंगापुर आगमन
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पनडुब्बी यात्रा द्वारा टोक्यो से सिंगापुर पहुँचे; रासबिहारी बोस ने INA व लीग की कमान विधिवत सौंपी
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21 अक्टूबर 1943 |
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अस्थायी आजाद हिंद सरकार की स्थापना
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सिंगापुर के कैथे हॉल में सरकार का गठन; 'दिल्ली चलो' का नारा; 9 मित्र राष्ट्रों द्वारा कूटनीतिक मान्यता
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6 नवंबर 1943 |
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अंडमान-निकोबार का हस्तांतरण
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जापान द्वारा दोनों द्वीप आजाद हिंद सरकार को सौंपे गए; नेताजी ने नाम 'शहीद' व 'स्वराज' द्वीप रखा
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18 मार्च 1944 |
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मोइरांग (मणिपुर) में तिरंगा ध्वज
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कर्नल शौकत मलिक के नेतृत्व में INA ने भारत की मुख्य भूमि पर प्रवेश कर प्रथम बार राष्ट्रीय तिरंगा फहराया
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18 अगस्त 1945 |
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नेताजी का कथित विमान हादसा
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ताइहोकु (ताइवान) में विमान दुर्घटना में नेताजी के शहीद होने की घोषणा; मृत्यु पर आज भी रहस्य बरकरार
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नवंबर 1945 |
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लाल किले में ऐतिहासिक मुकदमा प्रारंभ
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सहगल, ढिल्लों व शाहनवाज पर देशद्रोह का मुकदमा; देशव्यापी जन-उभार; वेवेल द्वारा सजा माफ
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| मुकदमे का पहलू / अभियुक्त | संबंधित सैन्य अधिकारी व वकील | ब्रिटिश फैसला व ऐतिहासिक प्रभाव |
|---|---|---|
प्रमुख अभियुक्त
(तीन सैन्य अधिकारी) |
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कर्नल प्रेम कुमार सहगल (हिंदू),
कर्नल गुरबख्श सिंह ढिल्लों (सिख),
मेजर जनरल शाहनवाज खान (मुस्लिम)
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ब्रिटिश सम्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ने (राजद्रोह) का आरोप; तीनों अधिकारियों की साझी एकता ने पूरे देश में अभूतपूर्व सांप्रदायिक सद्भाव जगाया
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बचाव पक्ष की कांग्रेस समिति
(लीगल डिफेंस टीम) |
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भूलाभाई देसाई (मुख्य वकील),
पंडित जवाहरलाल नेहरू, सर तेजबहादुर सप्रू, डॉ. कैलाश नाथ काटजू, आसफ अली
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अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत तर्क: 'किसी पराधीन राष्ट्र को स्वतंत्रता हेतु युद्ध लड़ने का पूर्ण अधिकार है'; पूरे देश में रक्षा कोष हेतु चंदा जुटाया गया
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अदालत का निर्णय व परिणाम
(वेवेल का विशेषाधिकार) |
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कोर्ट मार्शल द्वारा तीनों को दोषी मानकर मृत्युदंड (फांसी) की सजा घोषित की गई
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देशव्यापी उग्र जन-आंदोलन व भारतीय सैनिकों में असंतोष देख वायसराय लॉर्ड वेवेल ने अपने विशेषाधिकार से मृत्युदंड पूर्णतः माफ कर दिया
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