📚 Subject-Wise Notes

Chola Samrajya

चोल शक्ति का पुनरुत्थान — विजयालय एवं आरंभिक शासक

मध्यकालीन चोल राजवंश के संस्थापक
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विजयालय
विजयालय द्वारा चोल सत्ता की पुनर्स्थापना का वर्ष
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850 ई. (लगभग)
सत्ता स्थापना से पूर्व विजयालय किस राजवंश के सामंत थे
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पल्लवों के
विजयालय ने किस शक्ति को पराजित कर तंजौर छीना
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मुत्तरैयर शासकों को
विजयालय द्वारा स्थापित चोल साम्राज्य की नई राजधानी
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तंजौर (तंजावुर)
विजयालय द्वारा तंजौर में निर्मित देवी मंदिर
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निशुम्भसूदिनी मंदिर
विजयालय द्वारा धारण की गई प्रमुख राजकीय उपाधि
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नरकेसरी
पल्लव राजा अपराजित को मारकर पल्लव सत्ता समाप्त करने वाले
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आदित्य प्रथम (871–907 ई.)
आदित्य प्रथम द्वारा धारण की गई उपाधि
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कोदंडराम
कावेरी नदी के दोनों तटों पर शिव मंदिर बनवाने वाले चोल शासक
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आदित्य प्रथम
पांड्य शासक मारवर्मन राजसिंह द्वितीय को हराने वाले
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परांतक प्रथम
मदुरै विजय के उपलक्ष्य में परांतक प्रथम की उपाधि
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मदुरैकोंड
चिदंबरम नटराज मंदिर की छत को स्वर्णमंडित कराने वाले
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परांतक प्रथम
949 ई. के ऐतिहासिक तक्कोलम् युद्ध में परांतक प्रथम को किसने हराया
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राष्ट्रकूट राजा कृष्ण तृतीय
तक्कोलम् के युद्ध में मारा जाने वाला चोल युवराज
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राजादित्य
चोल स्थानीय स्वशासन का विस्तृत विवरण देने वाला परांतक प्रथम का अभिलेख
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उत्तरमेरुर अभिलेख
उत्तरमेरुर अभिलेख किस वर्तमान जिले में स्थित है
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कांचीपुरम (तमिलनाडु)
उत्तरमेरुर के दोनों ऐतिहासिक अभिलेखों के जारी वर्ष
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919 ई. और 921 ई.
सुंदर चोल के नाम से विख्यात चोल शासक
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परांतक द्वितीय
राजराज प्रथम के राज्यारोहण से ठीक पूर्व के शासक
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उत्तम चोल
शासक एवं कालक्रम
प्रमुख चोल शासक — शासनकाल एवं ऐतिहासिक उपलब्धियां
विजयालय से लेकर कुलोत्तुंग तक प्रमुख शासकों का विवरण
शासक एवं शासनकाल उपाधियां व प्रमुख केंद्र प्रमुख सैन्य, प्रशासनिक व वास्तुकला उपलब्धियां
विजयालय (850–871 ई.)
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नरकेसरी राजधानी: तंजौर
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मुत्तरैयरों को हराकर तंजौर पर अधिकार; चोल साम्राज्य की पुनर्स्थापना; निशुम्भसूदिनी मंदिर का निर्माण
आदित्य प्रथम (871–907 ई.)
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कोदंडराम राजधानी: तंजौर
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पल्लव नरेश अपराजित का वध कर पल्लव साम्राज्य का विलय; कावेरी तट पर अनेक पाषाण शिव मंदिरों का निर्माण
परांतक प्रथम (907–955 ई.)
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मदुरैकोंड राजधानी: तंजौर
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पांड्यों पर विजय; चिदंबरम मंदिर की छत स्वर्णमंडित की; प्रसिद्ध उत्तरमेरुर अभिलेख जारी; तक्कोलम् युद्ध में पराजय
राजराज प्रथम (985–1014 ई.)
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मम्मुडीचोल, शिवपादशेखर राजधानी: तंजौर
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चेर-पांड्य विजय; उत्तरी श्रीलंका पर अधिकार (मम्मुडीचोलमंडलम्); भूमि सर्वेक्षण; तंजौर का विशाल बृहदेश्वर मंदिर
राजेंद्र प्रथम (1014–1044 ई.)
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गंगैकोंडचोल, मुडिकोंड राजधानी: गंगैकोंडचोलपुरम
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संपूर्ण श्रीलंका पर विजय; गंगा घाटी अभियान; श्रीविजय साम्राज्य पर सफल नौसैन्य विजय; चोलगंगम झील निर्माण
राजाधिराज प्रथम (1044–1054 ई.)
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जयंगोंड, कल्याणपुरमगोंड राजधानी: गंगैकोंडचोलपुरम
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कल्याणी के चालुक्यों से संघर्ष; 1054 ई. में कोप्पम के युद्धक्षेत्र में लड़ते हुए वीरगति (रणरंग में मृत्यु)
कुलोत्तुंग प्रथम (1070–1120 ई.)
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शुंगमतविर्त (करों को हटाने वाला) राजधानी: गंगैकोंडचोलपुरम
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चोल-चालुक्य वंश का विलय; भूमि का पुनः सर्वेक्षण; व्यापारिक चुंगी व कर हटाए; 1077 ई. में चीन में 72 सदस्यीय व्यापारिक दूत भेजा

राजराज प्रथम एवं तंजौर का बृहदेश्वर मंदिर

राजराज प्रथम का मूल नाम
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अरुलमोझिवर्मन
राजराज प्रथम का शासनकाल
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985–1014 ई.
अभिलेखों के आरंभ में 'ऐतिहासिक प्रशस्ति' लिखवाने की प्रथा किसने शुरू की
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राजराज प्रथम
राजराज प्रथम की प्रशस्तियों का आरंभिक तमिल वाक्य
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तिरुमगल पोल
कंदलूर शालै में चेर नौसेना को नष्ट करने वाला चोल शासक
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राजराज प्रथम
राजराज प्रथम द्वारा विजित उत्तरी श्रीलंका का नया नाम
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मम्मुडीचोलमंडलम्
श्रीलंका में अनुराधापुर को नष्ट कर बनाई गई नई चोल राजधानी
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पुलत्थिनगरुवा (पोलन्नरुवा)
पोलन्नरुवा में राजराज प्रथम द्वारा निर्मित शिव मंदिर
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जगन्नाथ मंदिर
राजराज प्रथम द्वारा विजित हिंद महासागरीय द्वीप समूह
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मालदीव (12000 द्वीप)
साम्राज्य में व्यापक भूमि सर्वेक्षण कराने वाला प्रथम चोल शासक
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राजराज प्रथम (1001 ई.)
तंजौर के प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर के निर्माता
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राजराज प्रथम
बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण काल
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1003–1010 ई.
बृहदेश्वर मंदिर का अन्य लोकप्रिय नाम
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राजराजेश्वर मंदिर
बृहदेश्वर मंदिर किस हिंदू देवता को समर्पित है
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भगवान शिव
बृहदेश्वर मंदिर किस विशिष्ट स्थापत्य शैली की पराकाष्ठा है
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द्रविड़ शैली
बृहदेश्वर मंदिर के विमान की ऊंचाई (लगभग)
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216 फीट (66 मीटर)
बृहदेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थापित एकाश्मक गुंबद का भार
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लगभग 80 टन
बृहदेश्वर मंदिर परिसर में स्थित विशाल नंदी की प्रतिमा की विशेषता
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एक ही पाषाण खंड (एकाश्मक)
नागपट्टिनम में बौद्ध चूड़ामणि विहार निर्माण की अनुमति देने वाले
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राजराज प्रथम
चूड़ामणि विहार बनवाने वाले श्रीविजय के शैलेंद्र शासक
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श्री मारविजयोत्तुंगवर्मन
नागपट्टिनम बौद्ध विहार को दान में दिया गया गाँव
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आनैमंगलम्
बृहदेश्वर मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने का वर्ष
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1987 ई.
मंदिर स्थापत्य
प्रमुख चोल मंदिर — निर्माता, स्थल एवं स्थापत्य विशेषताएं
द्रविड़ मंदिर वास्तुकला के चोल युगीन प्रमुख प्रतिमान
मंदिर एवं अवस्थिति निर्माता / संरक्षक शासक प्रमुख स्थापत्य एवं कलात्मक विशेषताएं
बृहदेश्वर (राजराजेश्वर) मंदिर (तंजौर, तमिलनाडु)
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राजराज प्रथम (1010 ई.)
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द्रविड़ शैली का सर्वोच्च शिखर; 216 फीट ऊंचा 13 मंजिला विमान; 80 टन का एकाश्मक पाषाण शीर्ष; विशाल एकाश्मक नंदी
बृहदेश्वर मंदिर (गंगैकोंडचोलपुरम, तमिलनाडु)
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राजेंद्र प्रथम (1035 ई.)
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तंजौर जैसा भव्य स्वरूप; विमान में सौम्य व वक्राकार रेखाएं; विशाल प्रांगण एवं महीन पाषाण शिल्प मूर्तिकला
ऐरावतेश्वर मंदिर (दारासुरम, तमिलनाडु)
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राजराज द्वितीय (12वीं सदी)
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रथ के आकार का मंडप जिसमें पत्थर के पहिए व घोड़े बने हैं; लघु व अत्यंत उत्कृष्ट नक्काशीयुक्त स्तंभ
कंपहरेश्वर (त्रिभुवनम) मंदिर (त्रिभुवनम, तमिलनाडु)
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कुलोत्तुंग तृतीय (12वीं सदी का अंत)
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उत्तर चोल स्थापत्य का अंतिम महान प्रतिमान; सारंगधर रूप में शिव; विशाल गोपुरम व अलंकृत मूर्तियां
कोरुंगनाथ मंदिर (श्रीनिवासनाल्लूर, तमिलनाडु)
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परांतक प्रथम (10वीं सदी का आरंभ)
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प्रारंभिक चोल वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण; सादगीपूर्ण विमान एवं भित्ति पर सुंदर अर्धनारीश्वर मूर्तियां

राजेंद्र प्रथम — गंगैकोंडचोलपुरम एवं साम्राज्य विस्तार

राजेंद्र प्रथम का शासनकाल
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1014–1044 ई.
संपूर्ण श्रीलंका (सिंहल द्वीप) को जीतकर चोल साम्राज्य में मिलाने वाले
उत्तर देखें
राजेंद्र प्रथम (1017 ई.)
राजेंद्र प्रथम द्वारा बंदी बनाए गए सिंहली राजा
उत्तर देखें
महेंद्र पंचम
गंगा घाटी के सफल सैन्य अभियान का नेतृत्व करने वाले चोल सम्राट
उत्तर देखें
राजेंद्र प्रथम (1022 ई.)
गंगा अभियान में राजेंद्र प्रथम की सेना ने किस पाल शासक को हराया
उत्तर देखें
महिपाल प्रथम
गंगा विजय के उपलक्ष्य में राजेंद्र प्रथम द्वारा धारण उपाधि
उत्तर देखें
गंगैकोंडचोल
गंगा विजय की स्मृति में बसाई गई नई चोल राजधानी
उत्तर देखें
गंगैकोंडचोलपुरम
गंगैकोंडचोलपुरम में राजेंद्र प्रथम द्वारा निर्मित विशाल कृत्रिम जलाशय
उत्तर देखें
चोलगंगम (विशाल झील)
चोलगंगम जलाशय को किस उपनाम से जाना गया
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गंगा का जल-स्तंभ
चालुक्यों से तुंगभद्रा नदी को चोल सीमा बनाने वाले शासक
उत्तर देखें
राजेंद्र प्रथम
राजेंद्र प्रथम द्वारा स्थापित वैदिक शिक्षा का बड़ा केंद्र
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एन्नारम (महाविद्यालय)
कोप्पम के युद्ध में वीरगति पाने वाले चोल राजा
उत्तर देखें
राजाधिराज प्रथम (1054 ई.)
युद्धक्षेत्र में ही अपना राज्याभिषेक कराने वाले चोल शासक
उत्तर देखें
राजेंद्र द्वितीय
कुडालसंगमम के युद्ध में चालुक्य सोमेश्वर प्रथम को हराने वाले
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वीरराजेंद्र
चोल और पूर्वी चालुक्य राजवंश के संयुक्त रक्त से जन्मे शासक
उत्तर देखें
कुलोत्तुंग प्रथम
कुलोत्तुंग प्रथम का मूल चालुक्य नाम
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राजेंद्र चालुक्य
कर समाप्त करने के कारण कुलोत्तुंग प्रथम को मिली पदवी
उत्तर देखें
शुंगमतविर्त
1077 ई. में चीन में 72 सौदागरों का दूत-मंडल भेजने वाले शासक
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कुलोत्तुंग प्रथम
प्रसिद्ध वैष्णव आचार्य रामानुजाचार्य किस चोल शासक के समकालीन थे
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कुलोत्तुंग प्रथम एवं अधिरजेंद्र
चोल राजवंश का अंतिम ज्ञात स्वतंत्र शासक
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राजेंद्र तृतीय (1279 ई.)

चोल नौसेना एवं दक्षिण-पूर्व एशिया अभियान

चोल काल में बंगाल की खाड़ी को किस उपनाम से जाना गया
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चोलों की झील
दक्षिण-पूर्व एशिया में श्रीविजय साम्राज्य पर चोल नौसैन्य अभियान का वर्ष
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1025 ई.
श्रीविजय अभियान का नेतृत्व करने वाले महान चोल सम्राट
उत्तर देखें
राजेंद्र प्रथम
चोल सेना द्वारा पराजित श्रीविजय (सुमात्रा) के शासक
उत्तर देखें
संग्राम विजयोत्तुंगवर्मन
श्रीविजय साम्राज्य पर आक्रमण का मुख्य कारण
उत्तर देखें
चीन व्यापार मार्ग की बाधाएं हटाना
चोल नौसेना द्वारा विजित मलाया प्रायद्वीप का प्रमुख बंदरगाह
उत्तर देखें
कडारम (केदाह)
कडारम विजय के बाद राजेंद्र प्रथम की उपाधि
उत्तर देखें
कडारमकोंड
चोल नौसेना द्वारा नियंत्रित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य
उत्तर देखें
मलक्का जलडमरूमध्य
सुमात्रा में मिला प्रसिद्ध तमिल अभिलेख (1088 ई.)
उत्तर देखें
लोबु तुवा अभिलेख
लोबु तुवा अभिलेख किस तमिल व्यापारिक निगम का है
उत्तर देखें
अय्यावोल (ஐந்நூற்றுவர்)
कंबोडिया (कम्बुज) के किस अंकोर शासक ने राजेंद्र प्रथम से मैत्री संबंध रखे
उत्तर देखें
सूर्यवर्मन प्रथम
चोल कालीन प्रमुख पूर्वी अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह
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नागपट्टिनम एवं महाबलीपुरम
चीन के सांग कालीन स्रोतों में चोल देश को क्या कहा गया
उत्तर देखें
चू-लियन
चोल नौसेना के जहाजी बेड़े का मुख्य आधार
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नौसैनिक छावनियां एवं कुशल पोत-निर्माण
प्राचीन व मध्यकालीन भारत में सर्वाधिक शक्तिशाली नौसेना
उत्तर देखें
चोल साम्राज्य की
चोलों के समुद्री अभियानों का प्राथमिक उद्देश्य
उत्तर देखें
समुद्री व्यापार मार्गों पर एकाधिकार
समुद्री इतिहास
चोल समुद्री अभियान — प्रमुख क्षेत्र एवं दक्षिण-पूर्व एशिया संबंध
नौसैन्य प्रभुत्व, विजित क्षेत्र एवं अंतरराष्ट्रीय कूटनीति
अभियान / विजित क्षेत्र संबंधित चोल सम्राट प्रमुख उद्देश्य, ऐतिहासिक घटना एवं परिणाम
उत्तरी श्रीलंका (अनुराधापुर) (993 ई.)
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राजराज प्रथम
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सिंहली शक्ति का दमन; अनुराधापुर ध्वस्त कर पोलन्नरुवा को राजधानी बनाया; मम्मुडीचोलमंडलम् नामकरण
मालदीव द्वीप समूह (लगभग 1012 ई.)
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राजराज प्रथम
उत्तर देखें
अरब सागर के व्यापारिक मार्गों पर प्रभुत्व; पश्चिमी हिंद महासागर में चोल नौसेना की सर्वोच्चता स्थापित
संपूर्ण श्रीलंका (रोहण सहित) (1017 ई.)
उत्तर देखें
राजेंद्र प्रथम
उत्तर देखें
राजा महेंद्र पंचम बंदी बनाए गए; संपूर्ण सिंहल द्वीप चोल साम्राज्य का अभिन्न प्रांत बना
श्रीविजय एवं कडारम (मलाया व सुमात्रा, 1025 ई.)
उत्तर देखें
राजेंद्र प्रथम
उत्तर देखें
मलक्का जलडमरूमध्य पर आधिपत्य; राजा संग्राम विजयोत्तुंगवर्मन पराजित; चीन व्यापारिक मार्ग का खुला एकाधिकार
चीन (सांग साम्राज्य) दूत-मंडल (1015, 1033, 1077 ई.)
उत्तर देखें
राजराज प्रथम, राजेंद्र प्रथम, कुलोत्तुंग प्रथम
उत्तर देखें
व्यापारिक रियायतें प्राप्त करना; रेशम, कांच व मसालों के द्विपक्षीय व्यापार का अत्यधिक संवर्धन

चोल केंद्रीय एवं प्रांतीय शासन व्यवस्था

चोल प्रशासनिक व्यवस्था का सर्वोच्च प्रधान
उत्तर देखें
सम्राट (वंशानुगत राजा)
राजा के मौखिक आदेशों को लिपिबद्ध करने वाले विशेष अधिकारी
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तिरुमंद्र ओलै
चोल प्रशासन में उच्च श्रेणी के अधिकारियों का वर्ग
उत्तर देखें
पेरुंदनम्
चोल प्रशासन में निम्न श्रेणी के अधिकारियों का वर्ग
उत्तर देखें
सिरुंदनम्
चोल साम्राज्य की सबसे बड़ी प्रांतीय प्रशासनिक इकाई
उत्तर देखें
मंडलम् (प्रांत)
साम्राज्य में सामान्यतः मंडलम् की कुल संख्या
उत्तर देखें
8 या 9 मंडलम्
मंडलम् के प्रशासक के रूप में प्रायः किसकी नियुक्ति होती थी
उत्तर देखें
राजपरिवार के राजकुमारों की
मंडलम् का उप-विभाजन किस प्रशासनिक इकाई में था
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वलनाडु (कमिश्नरी/जिला समूह)
वलनाडु के अंतर्गत आने वाली जिला स्तर की इकाई
उत्तर देखें
नाडु (जिला)
नाडु की प्रशासनिक सभा को क्या कहा जाता था
उत्तर देखें
नाट्टार
नाडु के अंतर्गत कई गाँवों का संघ
उत्तर देखें
कुर्रम या कोट्टम
चोल साम्राज्य की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई
उत्तर देखें
ग्राम (ग्रामम्)
चोल सेना में सम्राट के अंगरक्षक एवं निष्ठावान सैनिक
उत्तर देखें
वेलेक्कार
चोल सेना के पैदल सैनिकों की टुकड़ी
उत्तर देखें
वडैगल
चोल कालीन नौसेना की छावनी को क्या कहा जाता था
उत्तर देखें
कडगम
चोल साम्राज्य में भू-राजस्व विभाग की संज्ञा
उत्तर देखें
पुरवुवरितिनाईक्कलम
चोल काल में सामान्य भू-राजस्व की दर
उत्तर देखें
उपज का 1/3 भाग
भू-राजस्व के रूप में दिए जाने वाले मुख्य कर का नाम
उत्तर देखें
कडमई (इरै)
चोल अभिलेखों में बेगार (अवैतनिक श्रम) हेतु प्रयुक्त शब्द
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वेत्ति
ब्राह्मणों को कर-मुक्त दी जाने वाली भूमि
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ब्रह्मदेय
प्रशासनिक संरचना
चोल साम्राज्य की प्रशासनिक इकाइयां एवं उनका स्वरूप
साम्राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक का क्रमिक प्रशासनिक ढांचा
प्रशासनिक इकाई विभाजन व स्वरूप प्रशासनिक सभा / नियंत्रक अधिकारी
मंडलम् (Mandalam)
उत्तर देखें
प्रांत; संपूर्ण साम्राज्य 8-9 मंडलों में विभक्त था
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राजपुत्र, राजकुमार या उच्च सामंती वायसराय
वलनाडु (Valanadu)
उत्तर देखें
कमिश्नरी स्तर की इकाई; कई नाडु मिलकर एक वलनाडु बनाते थे
उत्तर देखें
पेरुंदनम् श्रेणी के वरिष्ठ शाही अधिकारी
नाडु (Nadu)
उत्तर देखें
जिला स्तर की प्रशासनिक इकाई; कृषि बस्तियों का समूह
उत्तर देखें
नाट्टार (स्थानीय भूस्वामी कुलीनों की प्रशासनिक सभा)
कुर्रम / कोट्टम (Kurram)
उत्तर देखें
गाँवों का समूह या तहसील स्तर की उप-इकाई
उत्तर देखें
ग्राम प्रतिनिधियों एवं स्थानीय सामंतों का समूह
ग्राम / तनियूर (Village/Taniyur)
उत्तर देखें
सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई; तनियूर स्वतंत्र रूप से अलग होता था
उत्तर देखें
उर, सभा (महासभा) और नगरम् जैसी स्थानीय संस्थाएं

चोल स्थानीय स्वशासन — उर, सभा और नगरम्

चोल शासन प्रणाली की सर्वाधिक विशिष्ट एवं प्रसिद्ध विशेषता
उत्तर देखें
स्वायत्त स्थानीय स्वशासन
चोल कालीन सर्वसाधारण गाँवों की स्थानीय सभा
उत्तर देखें
उर
उर के कार्यसमिति सदस्यों को क्या कहा जाता था
उत्तर देखें
आलुंगणम्
ब्राह्मणों को दान दिए गए गाँवों (अग्रहार) की स्वायत्त सभा
उत्तर देखें
सभा या महासभा
महासभा के सदस्यों को किस आदरणीय उपाधि से जाना जाता था
उत्तर देखें
पेरुमक्कल
व्यापारिक नगरों एवं बाजारों की प्रशासनिक सभा
उत्तर देखें
नगरम्
नगरम् के सदस्यों को क्या कहा जाता था
उत्तर देखें
नगरत्तार
सभा की विभिन्न प्रशासनिक उप-समितियों की संज्ञा
उत्तर देखें
वरियम
वरियम के सदस्यों को क्या कहा जाता था
उत्तर देखें
वरियर
ग्राम सभाओं की बैठकें सामान्यतः कहाँ आयोजित होती थीं
उत्तर देखें
मंदिर प्रांगण या वृक्ष तले
ग्राम में सिंचाई, तालाब एवं नहरों की देखभाल करने वाली समिति
उत्तर देखें
एरि वरियम (तड़ाग समिति)
गाँव के उद्यानों और फलों के बगीचों का प्रबंधन करने वाली समिति
उत्तर देखें
तोट्ट वरियम (उद्यान समिति)
ग्राम की वार्षिक सामान्य प्रशासन समिति
उत्तर देखें
संवत्सर वरियम
सोने के परीक्षण एवं मुद्रा शुद्धता की जांच करने वाली समिति
उत्तर देखें
पोन वरियम (स्वर्ण समिति)
भूमि माप एवं कृषि भूमि बंदोबस्त की समिति
उत्तर देखें
भूमि वरियम
चोल स्थानीय स्वशासन का सामाजिक आधार
उत्तर देखें
कुलीन एवं भूस्वामी वर्ग
क्या चोल स्थानीय स्वशासन आधुनिक सार्वभौमिक मताधिकार पर आधारित था
उत्तर देखें
नहीं, यह संपत्ति-आधारित था
गाँव के अभिलेखों एवं बहियों को रखने वाला मध्यस्थ अधिकारी
उत्तर देखें
मध्यस्थ (कर्णिक)
ग्राम सभा को न्याय करने तथा जुर्माना लगाने का अधिकार था या नहीं
उत्तर देखें
पूर्ण न्यायिक अधिकार था
चोल ग्राम सभाओं पर शाही हस्तक्षेप कब होता था
उत्तर देखें
गबन या वित्तीय विवाद होने पर
स्थानीय संस्थाएं
चोल स्थानीय स्वशासन — सभा, उर और नगरम् की कार्यप्रणाली
संस्थागत स्वरूप, दायित्व एवं ऐतिहासिक अभिलेखीय स्रोत
संस्था / निकाय स्वरूप एवं प्रमुख कार्य प्रतिनिधित्व एवं संबंधित स्रोत
उर (Ur)
उत्तर देखें
सर्वसाधारण करदाता किसानों का गाँव; सार्वजनिक तालाब, पथ निर्माण, कर संग्रह व स्थानीय व्यवस्था
उत्तर देखें
गाँव के समस्त भूस्वामी किसान; तिरुवालंगाडु व स्थानीय चोल ताम्रपत्र
सभा / महासभा (Sabha)
उत्तर देखें
अग्रहार (ब्राह्मण) बस्तियों की स्वायत्त संस्था; समितियां बनाकर शिक्षा, मंदिर, भूमि व न्याय संचालन
उत्तर देखें
वेद ज्ञाता व भूस्वामी ब्राह्मण (पेरुमक्कल); उत्तरमेरुर अभिलेख (परांतक प्रथम)
नगरम् (Nagaram)
उत्तर देखें
व्यापारिक केंद्रों व मंडियों की प्रबंधकारी सभा; चुंगी, माप-तौल, बाजार नियंत्रण व व्यापारियों का संरक्षण
उत्तर देखें
श्रेष्ठी, चेत्ती व नगरत्तार (व्यापारी वर्ग); नागपट्टिनम एवं मामल्लपुरम अभिलेख

उत्तरमेरुर अभिलेख — निर्वाचन प्रणाली एवं योग्यताएं

उत्तरमेरुर अभिलेख किस चोल सम्राट के शासनकाल का है
उत्तर देखें
परांतक प्रथम
उत्तरमेरुर गाँव कितने वार्डों (कुडुम्बु) में विभाजित था
उत्तर देखें
30 वार्डों में
समिति (वरियम) चुनाव की लॉटरी पद्धति को क्या कहते थे
उत्तर देखें
कुडुवोलाइ प्रणाली
कुडुवोलाइ पद्धति में प्रत्याशियों के नाम किस पर लिखे जाते थे
उत्तर देखें
ताड़पत्र (पाम लीफ) पर
ताड़पत्र पर्चियों को किसमें डालकर हिलाया जाता था
उत्तर देखें
मिट्टी के घड़े (कुडम) में
घड़े में से पर्ची निकालने का कार्य किसे सौंपा जाता था
उत्तर देखें
मासूम अबोध बालक को
समिति सदस्य बनने हेतु न्यूनतम व अधिकतम आयु सीमा
उत्तर देखें
35 से 70 वर्ष
प्रत्याशी के लिए आवश्यक न्यूनतम भू-स्वामित्व
उत्तर देखें
1/4 वेली (कर-युक्त भूमि)
प्रत्याशी के लिए आवासीय अनिवार्य शर्त
उत्तर देखें
स्वयं की भूमि पर बना मकान
प्रत्याशी के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता
उत्तर देखें
वैदिक मंत्रों व भाष्य का ज्ञान
विगत कितने वर्षों तक समिति में रहे व्यक्ति को दोबारा चुनाव लड़ने की मनाही थी
उत्तर देखें
पिछले 3 वर्षों तक
अपने कार्यकाल का लेखा-जोखा प्रस्तुत न करने वाले सदस्य को क्या सजा थी
उत्तर देखें
अयोग्य (परिवार सहित अयोग्य)
गंभीर नैतिक पाप (महापातक) करने वाले को चुनाव में क्या पात्रता थी
उत्तर देखें
आजीवन अयोग्यता
कुडुवोलाइ प्रणाली द्वारा चुने गए कुल सदस्यों की संख्या
उत्तर देखें
30 सदस्य
संवत्सर वरियम (वार्षिक समिति) में कितने सदस्य चुने जाते थे
उत्तर देखें
12 सदस्य
तोटा वरियम (उद्यान समिति) में कितने सदस्य रखे जाते थे
उत्तर देखें
12 सदस्य
एरि वरियम (तालाब समिति) में कितने सदस्य होते थे
उत्तर देखें
6 सदस्य
वरियम के सदस्यों का कार्यकाल कितना होता था
उत्तर देखें
1 वर्ष (360 दिन)
अभिलेखीय साक्ष्य
उत्तरमेरुर अभिलेख — समिति व्यवस्था (वरियम) एवं निर्वाचन नियम
कुडुवोलाइ चयन पद्धति, सदस्यता योग्यताएं एवं अयोग्यताएं
समिति / विषय पात्रता एवं चुनाव पद्धति (कुडुवोलाइ) प्रमुख कार्य एवं प्रशासनिक अधिकार
निर्वाचन पद्धति (कुडुवोलाइ)
उत्तर देखें
30 वार्डों से पर्चियों को घड़े में डालकर अबोध बालक द्वारा निष्पक्ष चयन
उत्तर देखें
ग्राम के 30 योग्य प्रतिनिधियों का चयन कर विभिन्न समितियों में विभाजन
सदस्यता की योग्यताएं
उत्तर देखें
आयु 35–70 वर्ष; 1/4 वेली कर-युक्त भूमि; निजी मकान; वेद एवं मंत्र ब्राह्मण का ज्ञान
उत्तर देखें
संवत्सर (12), तोट्ट (12) एवं एरि (6) समितियों में नियुक्ति की पात्रता
सदस्यता की अयोग्यताएं
उत्तर देखें
लेखा-जोखा न देना; विगत 3 वर्ष में सदस्य रहा होना; नैतिक भ्रष्टाचार व महापातक
उत्तर देखें
प्रत्याशी और उसके निकट संबंधियों को चुनाव लड़ने से पूर्ण निष्कासन
एरि वरियम (तड़ाग समिति)
उत्तर देखें
अनुभवी एवं जल-प्रबंधन में दक्ष 6 सम्मानित सदस्यों का चयन
उत्तर देखें
तालाबों की सफाई, तटबंध मरम्मत, नहरों से जल वितरण व जल कर संग्रह
पोन वरियम (स्वर्ण समिति)
उत्तर देखें
स्वर्ण व धातुओं के पारखी अनुभवी वरिष्ठ सदस्यों का मनोनयन
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मुद्रा की शुद्धता, तोल, स्वर्ण आभूषणों की गुणवत्ता का परीक्षण व प्रमाणीकरण

अर्थव्यवस्था, व्यापारिक निगम, कांस्य मूर्तिकला एवं नटराज

चोल साम्राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख मूल आधार
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उन्नत कृषि एवं कावेरी डेल्टा
चोल काल में मंदिर किस रूप में कार्य करते थे
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आर्थिक, सामाजिक व बैंक केंद्र
चोल राजाओं द्वारा निर्मित प्राचीन कावेरी बाँध का सुदृढ़ीकरण
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कल्लनै (ग्रैंड एनीकट)
मंदिरों को उपहार स्वरूप दी गई भूमि को क्या कहते थे
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देवदान
जैन संस्थानों को दान में दी गई भूमि की संज्ञा
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पल्लीच्चंदम
शैक्षणिक संस्थानों के रख-रखाव हेतु भूमि
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शालाभोग
चोल काल का सर्वाधिक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक निगम
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मणिक्रामम एवं नानादेशी
500 स्वामियों का प्रसिद्ध व्यापारिक गिल्ड
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अय्यावोल (ஐந்நूற்றுவர்)
समुद्रपारीय व्यापार करने वाले व्यापारियों का संगठन
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नानादेशी
चोल कालीन सोने के मानक सिक्कों की संज्ञा
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कासु एवं कलंजु
चोल धातु मूर्तिकला का सर्वश्रेष्ठ माध्यम
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कांस्य (कांसा)
कांस्य मूर्तियां ढालने की प्राचीन तकनीकी विधि
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लुप्त-मोम विधि (Cire-perdue)
चोल कांस्य कला की विश्वप्रसिद्ध मूर्तिकला कृति
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नटराज (नृत्यरत शिव)
नटराज प्रतिमा किस मुद्रा में नृत्य करते हुए दिखाई गई है
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आनंद तांडव
नटराज प्रतिमा की कितनी भुजाएं होती हैं
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चार भुजाएं
नटराज के ऊपरी दाहिने हाथ में क्या स्थित है
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डमरू (सृष्टि का प्रतीक)
नटराज के ऊपरी बाएं हाथ में क्या है
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अग्नि (विनाश का प्रतीक)
नटराज का निचला दाहिना हाथ किस मुद्रा में है
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अभय मुद्रा (संरक्षण)
नटराज अपने पैरों के नीचे किस बौने राक्षस को कुचल रहे हैं
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अपस्मार पुरुष (अज्ञान का प्रतीक)
नटराज के चारों ओर बना वृत्ताकार प्रभामंडल किसका प्रतीक है
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प्रकृति और काल-चक्र
तमिल रामायण (रामावतारम्) के प्रसिद्ध रचयिता
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कंबन
महाकवि कंबन किस चोल शासक के राजदरबार में थे
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कुलोत्तुंग तृतीय
तमिल साहित्य के 'त्रिरत्न' कवि कौन कहलाते हैं
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कंबन, कुट्टन और पुगलेंदी
'पेरियपुराणम' (शैव संतों का महाकाव्य) के रचयिता
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सेक्किझार
सेक्किझार किस चोल शासक के प्रधानमंत्री व दरबारी थे
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कुलोत्तुंग द्वितीय
चोल युगीन प्रसिद्ध शैव संत कवि
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नम्बियांडार नम्बि
आर्थिक संगठन
चोल कालीन व्यापारिक निगम (गिल्ड) — नाम एवं गतिविधियां
अंतरराष्ट्रीय एवं अंतर्देशीय व्यापार में सक्रिय प्रमुख श्रेणियां
व्यापारिक निगम (गिल्ड) कार्यक्षेत्र एवं प्रभाव प्रमुख व्यापारिक गतिविधियां व वस्तुएं
मणिक्रामम (Manigramam)
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दक्षिण भारत के प्रमुख तटीय व आंतरिक नगर; अंतर्देशीय व्यापार
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अन्न, वस्त्र, मसाले, धातु एवं स्थानीय कृषि उत्पादों का थोक व खुदरा क्रय-विक्रय
नानादेशी (Nanadesi)
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विभिन्न राज्यों एवं समुद्रपार (श्रीलंका, मलाया, सुमात्रा, बर्मा)
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हाथी-दांत, कीमती रत्न, मसाले, विदेशी घोड़े और सुगंधित द्रव्यों का आयात-निर्यात
अय्यावोल / 500 (Ayyavole)
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मूल केंद्र ऐहोल (कर्नाटक); संपूर्ण प्रायद्वीप एवं दक्षिण-पूर्व एशिया
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सशस्त्र सुरक्षा दस्ते (वीरकोडि) सहित विशाल व्यापारिक कारवां; विदेशी विनिमय
अंजुवन्नम (Anjuvannam)
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पश्चिमी व पूर्वी तटीय बंदरगाह (अरब, यहूदी, ईसाई व्यापारी संगठन)
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पश्चिमी एशिया व चीन के साथ समुद्री जहाजरानी, घोड़ों का व्यापार व विदेशी विनिमय
वालंजियर (Valanjiyar)
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दक्षिण भारतीय बंदरगाह एवं सीलोन (श्रीलंका)
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समुद्री माल परिवहन, जहाजी गोदामों का प्रबंधन व कीमती पत्थरों का विपणन
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