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Dakshin Bharat Rajvansh

वातापी के चालुक्य (प्रारंभिक इतिहास एवं शासक)

वातापी के चालुक्य वंश का वास्तविक संस्थापक
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पुलकेशिन प्रथम
वातापी (बादामी) के चालुक्यों की राजधानी
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वातापी (कर्नाटक)
पुलकेशिन प्रथम द्वारा अपनी राजधानी स्थापित करने का स्थान
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वातापी दुर्ग
पुलकेशिन प्रथम द्वारा निष्पादित प्रमुख वैदिक यज्ञ
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अश्वमेध यज्ञ
पुलकेशिन प्रथम को अभिलेखों में प्राप्त उपाधि
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सत्याश्रय
पुलकेशिन प्रथम के बाद शासक बनने वाला उसका पुत्र
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कीर्तिवर्मन प्रथम
कीर्तिवर्मन प्रथम द्वारा विजित बनवासी का राजवंश
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कदंब राजवंश
वातापी नगर का वास्तविक निर्माता एवं सुंदर बनाने वाला शासक
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कीर्तिवर्मन प्रथम
कीर्तिवर्मन प्रथम को अभिलेखों में दी गई प्रसिद्ध उपाधि
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पुरुरणपराक्रम
कीर्तिवर्मन प्रथम की मृत्यु के समय पुलकेशिन द्वितीय के अल्पवयस्क होने पर संरक्षक बना
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मंगलेश
मंगलेश द्वारा गृहयुद्ध के बाद किसको पराजित कर साम्राज्य विस्तार किया गया
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बुद्धराज (कलचुरि)
बादामी के प्रसिद्ध गुफा मंदिर संख्या 3 का निर्माण कराने वाला शासक
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मंगलेश
गृहयुद्ध में चाचा मंगलेश को हराकर चालुक्य सिंहासन प्राप्त करने वाला शासक
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पुलकेशिन द्वितीय
चालुक्य वंश का सबसे महान एवं प्रतापी शासक
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पुलकेशिन द्वितीय
पश्चिमी चालुक्य साम्राज्य की मुख्य स्थापना किस आधुनिक राज्य में हुई
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कर्नाटक
चालुक्य काल में राज्य का राजकीय चिह्न
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वराह (सूअर)
पुलकेशिन प्रथम का शासनकाल समय
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540–566 ई.
कीर्तिवर्मन प्रथम के शासनकाल की अवधि
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566–597 ई.
मंगलेश द्वारा ली गई प्रमुख धार्मिक उपाधि
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परमभागवत
चालुक्यों की मूल व मुख्य शाखा
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वातापी के चालुक्य

पुलकेशिन द्वितीय एवं उपलब्धियां

पुलकेशिन द्वितीय के शासनकाल की अवधि
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609–642 ई.
पुलकेशिन द्वितीय की उपलब्धियों की जानकारी देने वाला मुख्य स्रोत
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ऐहोल अभिलेख
ऐहोल अभिलेख (प्रशस्ति) की रचना करने वाला जैन कवि
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रविकीर्ति
ऐहोल अभिलेख की भाषा एवं लिपि
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संस्कृत भाषा, ब्राह्मी लिपि
रविकीर्ति ने ऐहोल प्रशस्ति में स्वयं की तुलना किन संस्कृत कवियों से की
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कालिदास और भारवि
उत्तर भारत के सम्राट हर्षवर्धन को पराजित करने वाला दक्षिण का शासक
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पुलकेशिन द्वितीय
हर्षवर्धन और पुलकेशिन द्वितीय का युद्ध किस नदी के तट पर हुआ
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नर्मदा नदी
हर्षवर्धन को पराजित करने के बाद पुलकेशिन द्वितीय द्वारा धारण की गई उपाधि
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परमेश्वर
पुलकेशिन द्वितीय द्वारा पल्लव राजा महेंद्रवर्मन प्रथम को पराजित कर छीना गया क्षेत्र
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वेंगी प्रदेश
वेंगी में पूर्वी चालुक्य वंश की स्थापना करने वाला पुलकेशिन द्वितीय का भाई
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विष्णुवर्धन
फारस के शासक खुसरो द्वितीय के पास शिष्टमंडल भेजने वाला चालुक्य राजा
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पुलकेशिन द्वितीय
पुलकेशिन द्वितीय के शासनकाल में वातापी की यात्रा करने वाला चीनी यात्री
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ह्वेनसांग (641 ई.)
ऐहोल अभिलेख में पुलकेशिन द्वितीय द्वारा दक्षिण में जीती गई तीन शक्तियों का उल्लेख
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महाराष्ट्रक (तीन प्रांत)
पुलकेशिन द्वितीय की दक्षिण भारत में सर्वाधिक प्रसिद्ध उपाधि
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सत्याश्रय श्रीपृथ्वीवल्लभ
अजंता की गुफा संख्या 1 में फारसी शिष्टमंडल का स्वागत दृश्य किस राजा से संबंधित माना जाता है
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पुलकेशिन द्वितीय
शासक एवं उपलब्धियां
चालुक्य और पल्लव वंश के प्रमुख शासक एवं उनकी उपाधियां
शासकों का कालक्रम तथा ऐतिहासिक योगदान
राजवंश व शासक शासनकाल (लगभग) प्रमुख उपाधियाँ एवं उपलब्धियाँ
चालुक्य: पुलकेशिन प्रथम
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540–566 ई.
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सत्याश्रय, रणविक्रम; वातापी दुर्ग का निर्माण व प्रथम स्वतंत्र चालुक्य राजा।
चालुक्य: कीर्तिवर्मन प्रथम
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566–597 ई.
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पुरुरणपराक्रम; नलों, कदंबों व मौर्यों को हराकर वातापी नगर को समृद्ध किया।
चालुक्य: पुलकेशिन द्वितीय
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609–642 ई.
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परमेश्वर, सत्याश्रय; हर्षवर्धन को नर्मदा तट पर हराया, ऐहोल प्रशस्ति।
चालुक्य: विक्रमादित्य प्रथम
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655–681 ई.
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श्रीपृथ्वीवल्लभ; पल्लवों को हराकर वातापी का पुनरुद्धार किया।
पल्लव: सिंहविष्णु
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575–600 ई.
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अवनीसिंह; पल्लव शक्ति का वास्तविक संस्थापक, चोल-पांड्य पराजित।
पल्लव: महेंद्रवर्मन प्रथम
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600–630 ई.
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मत्तविलास, विचित्रचित्त; 'मत्तविलास प्रहसन' के रचयिता, मण्डप मंदिरों की शुरुआत।
पल्लव: नरसिंहवर्मन प्रथम
उत्तर देखें
630–668 ई.
उत्तर देखें
महामल्ल, वातापीकोंड; पुलकेशिन द्वितीय को हराकर वातापी जीती, महाबलीपुरम के रथ।
पल्लव: नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह)
उत्तर देखें
700–728 ई.
उत्तर देखें
राजसिंह, आगमप्रिय; कांची का कैलाशनाथ मंदिर एवं महाबलीपुरम का तटीय मंदिर।

कांची के पल्लव वंश का इतिहास

कांची के पल्लव वंश का वास्तविक संस्थापक
उत्तर देखें
सिंहविष्णु
पल्लवों की राजधानी कहाँ स्थित थी
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कांची (तमिलनाडु)
सिंहविष्णु किस धर्म का अनुयायी था
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वैष्णव धर्म
सिंहविष्णु के दरबार में निवास करने वाले प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान
उत्तर देखें
भारवि
महाकवि भारवि द्वारा रचित प्रसिद्ध महाकाव्य
उत्तर देखें
किरातार्जुनीयम्
सिंहविष्णु द्वारा धारण की गई प्रमुख उपाधि
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अवनीसिंह
सिंहविष्णु का उत्तराधिकारी शासक कौन बना
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महेंद्रवर्मन प्रथम
महेंद्रवर्मन प्रथम का शासनकाल
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600–630 ई.
जैन धर्मानुयायी महेंद्रवर्मन प्रथम को शैव धर्म में दीक्षित करने वाले संत
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अप्पार (तिरुनावुक्करासर)
प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य संस्कृत नाटक 'मत्तविलास प्रहसन' के रचयिता
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महेंद्रवर्मन प्रथम
महेंद्रवर्मन प्रथम द्वारा धारण की गई प्रमुख उपाधियाँ
उत्तर देखें
विचित्रचित्त, मत्तविलास, गुणभर
पत्थरों को काटकर गुफा मंदिर (मंडप) बनाने की कला का प्रारंभकर्ता पल्लव राजा
उत्तर देखें
महेंद्रवर्मन प्रथम
संगीत ग्रन्थ 'कुडुमियामलाई अभिलेख' से संबंधित पल्लव शासक
उत्तर देखें
महेंद्रवर्मन प्रथम
पल्लव-चालुक्य संघर्ष का प्रारंभ किस शासक के समय हुआ
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महेंद्रवर्मन प्रथम
पुलकेशिन द्वितीय ने पल्लव राजा महेंद्रवर्मन प्रथम को किस युद्ध में पराजित किया
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पुल्ललूर का युद्ध

नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) एवं उत्तराधिकारी

पल्लव वंश का सबसे शक्तिशाली शासक
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नरसिंहवर्मन प्रथम
नरसिंहवर्मन प्रथम का शासनकाल
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630–668 ई.
'महामल्ल' (महान पहलवान) की उपाधि धारण करने वाला पल्लव राजा
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन प्रथम
नरसिंहवर्मन प्रथम ने पुलकेशिन द्वितीय को किस स्थान पर पराजित किया
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मणिमंगलम्
चालुक्य राजधानी वातापी जीतने के बाद नरसिंहवर्मन प्रथम द्वारा ली गई उपाधि
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वातापीकोंड
महाबलीपुरम (मामल्लपुरम) नगर का संस्थापक
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नरसिंहवर्मन प्रथम
महाबलीपुरम में एकाश्मक रथ मंदिरों का निर्माण कराने वाला राजा
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन प्रथम
श्रीलंका के राजकुमार मानवर्म्मा की सहायता हेतु नौसैनिक अभियान भेजने वाला राजा
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन प्रथम
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किस पल्लव राजा के समय कांची की यात्रा की (640 ई.)
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन प्रथम
कांची की सुंदरता और समृद्ध बौद्ध शिक्षा केंद्र के रूप में प्रशंसा करने वाला यात्री
उत्तर देखें
ह्वेनसांग
नरसिंहवर्मन प्रथम के बाद पल्लव गद्दी पर बैठने वाला अल्पकालिक शासक
उत्तर देखें
महेंद्रवर्मन द्वितीय
नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह) का शासनकाल
उत्तर देखें
700–728 ई.
राजसिंह शैली का प्रवर्तक पल्लव शासक
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन द्वितीय
'दशकुमारचरित' के लेखक दंडी किस पल्लव शासक की राजसभा में थे
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन द्वितीय
चीन में बौद्ध मंदिर बनवाने के लिए दूत भेजने वाला पल्लव शासक
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन द्वितीय
वास्तुकला शैलियां
पल्लवकालीन वास्तुकला की प्रमुख शैलियां एवं प्रसिद्ध मंदिर
पल्लव स्थापत्य का चार चरणों में क्रमिक विकास
स्थापत्य शैली (विकास चरण) संरक्षक पल्लव शासक प्रमुख मंदिर व स्थापत्य उदाहरण
महेंद्र शैली (गुहा मंदिर/मंडप)
उत्तर देखें
महेंद्रवर्मन प्रथम (600–630 ई.)
उत्तर देखें
त्रिचनापल्ली, महेंद्रवाडी, मण्डगपट्टू व वल्लम् के गुफा मंडप मंदिर।
मामल्ल शैली (एकाश्मक रथ)
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन प्रथम (630–668 ई.)
उत्तर देखें
महाबलीपुरम के सप्त रथ मंदिर (धर्मराज, अर्जुन, द्रौपदी, भीम रथ) व वराह मण्डप।
राजसिंह शैली (संरचनात्मक मंदिर)
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन द्वितीय (700–728 ई.)
उत्तर देखें
कांची का कैलाशनाथ मंदिर, महाबलीपुरम का तटीय (Shore) मंदिर व ईश्वर मंदिर।
नंदीवर्मन शैली (अंतिम चरण)
उत्तर देखें
नंदीवर्मन द्वितीय व उत्तराधिकारी
उत्तर देखें
कांची का मुक्तेश्वर मंदिर, मातंगेश्वर मंदिर व वाथुर का परशुरामेश्वर मंदिर।

पल्लव वास्तुकला एवं महाबलीपुरम

पल्लवकालीन वास्तुकला का वर्गीकरण मुख्य रूप से कितने चरणों में होता है
उत्तर देखें
चार शैलियों में
एक ही चट्टान को तराशकर बनाए गए मंदिरों को क्या कहा जाता है
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एकाश्मक (Monolithic) रथ मंदिर
महाबलीपुरम के रथ मंदिरों में आकार में सबसे बड़ा रथ मंदिर
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धर्मराज रथ
महाबलीपुरम के रथ मंदिरों में सबसे छोटा और सादा रथ मंदिर
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द्रौपदी रथ
द्रौपदी रथ पर किस देवी का चित्र उत्कीर्ण है
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दुर्गा माता
महाबलीपुरम में नकुल-सहदेव रथ किस आकार में निर्मित है
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गजपृष्ठाकार (Apsidal)
महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकाश्मक रथों को अन्य किस नाम से जाना जाता है
उत्तर देखें
सप्त पगोडा
द्रौपदी रथ के शिखर की वास्तुकला शैली
उत्तर देखें
झोपड़ीनुमा (कुटीर शैली)
पल्लव कला में ईंट-पत्थर के स्वतंत्र संरचनात्मक मंदिरों की शुरुआत किस शैली में हुई
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राजसिंह शैली
द्रविड़ स्थापत्य शैली का प्रारंभिक और उत्कृष्ट उदाहरण माना जाने वाला कांची का मंदिर
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कैलाशनाथ मंदिर
महाबलीपुरम का प्रसिद्ध तटीय मंदिर (Shore Temple) बनवाने वाला शासक
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह)
महाबलीपुरम में विशाल चट्टान पर उकेरी गई प्रसिद्ध पाषाण मूर्ति कलाकृति
उत्तर देखें
गंगावतरण / अर्जुन की तपस्या
कांची के वैकुंठ पेरुमल मंदिर का निर्माण कराने वाला पल्लव शासक
उत्तर देखें
नंदीवर्मन द्वितीय
पल्लव मंदिरों के अलंकृत प्रवेश द्वार को क्या कहा जाता था
उत्तर देखें
गोपुरम
पल्लव वास्तुकला में मंडपों के स्तंभों के आधार पर किस पशु की आकृति बनी होती थी
उत्तर देखें
सिंह (शेर)

चालुक्य वास्तुकला (एहोल, बादामी, पट्टदकल)

'भारतीय मंदिर वास्तुकला का पालना' (Cradle of Indian Temple Architecture)
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एहोल (Aihole)
एहोल में स्थित कुल मंदिरों की संख्या (लगभग)
उत्तर देखें
लगभग 70 मंदिर
एहोल का प्रसिद्ध 'लाढ़ खाँ मंदिर' किस देवता को समर्पित है
उत्तर देखें
शिव जी को
एहोल का प्रसिद्ध 'दुर्गा मंदिर' किस योजनाकार आकृति में बना है
उत्तर देखें
गजपृष्ठाकार (Apsidal)
एहोल का मेगुती जैन मंदिर किस वर्ष में रविकीर्ति द्वारा निर्मित हुआ
उत्तर देखें
634 ई.
बादामी (वातापी) में स्थित प्रसिद्ध गुफा मंदिरों की कुल संख्या
उत्तर देखें
चार गुफा मंदिर
बादामी की गुफा संख्या 1, 2, 3 और 4 क्रमशः किन संप्रदायों से संबंधित हैं
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शैव, वैष्णव, वैष्णव, जैन
यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल में शामिल चालुक्य स्थापत्य का प्रमुख केंद्र
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पट्टदकल (Pattadakal)
पट्टदकल में नागर और द्रविड़ दोनों शैलियों के कुल कितने प्रमुख मंदिर हैं
उत्तर देखें
10 मंदिर
पट्टदकल का सबसे विशाल और प्रसिद्ध द्रविड़ शैली का मंदिर
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विरूपाक्ष मंदिर
पट्टदकल के विरूपाक्ष मंदिर का निर्माण कराने वाली चालुक्य रानी
उत्तर देखें
लोकमहादेवी
कांची के कैलाशनाथ मंदिर से प्रेरित होकर विरूपाक्ष मंदिर बनवाने वाले चालुक्य सम्राट
उत्तर देखें
विक्रमादित्य द्वितीय
पट्टदकल के विरूपाक्ष मंदिर के मुख्य वास्तुकार (Architect)
उत्तर देखें
गुंडन अनवारीताचारी
पट्टदकल का संगमेश्वर मंदिर किस चालुक्य राजा द्वारा बनवाया गया था
उत्तर देखें
विजयादित्य
पट्टदकल में नागर शैली में निर्मित सबसे उत्कृष्ट मंदिर
उत्तर देखें
पापनाथ मंदिर
स्थापत्य केंद्र
चालुक्य और पल्लव वास्तुकला के प्रमुख केंद्र, मंदिर एवं विशेषताएं
एहोल, बादामी, पट्टदकल तथा महाबलीपुरम का स्थापत्य विश्लेषण
प्रमुख केंद्र व मंदिर संबंधित राजवंश व शासक स्थापत्य शैली एवं मुख्य विशेषताएं
एहोल: लाढ़ खाँ व दुर्गा मंदिर
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वातापी के चालुक्य (प्रारंभिक)
उत्तर देखें
मंदिर स्थापत्य का पालना; छाजनदार छत, बौद्ध चैत्य जैसी गजपृष्ठाकार योजना।
बादामी: गुफा मंदिर (1 से 4)
उत्तर देखें
चालुक्य: कीर्तिवर्मन व मंगलेश
उत्तर देखें
पहाड़ियों को काटकर निर्मित गुहा मंदिर; शैव, वैष्णव तथा जैन कलाकृतियाँ।
पट्टदकल: विरूपाक्ष मंदिर
उत्तर देखें
चालुक्य: विक्रमादित्य II (रानी लोकमहादेवी)
उत्तर देखें
द्रविड़ शैली का सर्वोत्कृष्ट मंदिर; यूनेस्को स्थल, कांची मंदिर से प्रेरित।
महाबलीपुरम: सप्त रथ मंदिर
उत्तर देखें
पल्लव: नरसिंहवर्मन प्रथम
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एकाश्मक चट्टान काट मंदिर; द्रौपदी रथ छोटा तथा धर्मराज रथ विशालतम।
कांची: कैलाशनाथ मंदिर
उत्तर देखें
पल्लव: नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह)
उत्तर देखें
द्रविड़ स्थापत्य का आधार; स्वतंत्र संरचनात्मक पत्थरों का गोपुरमयुक्त मंदिर।

पल्लव-चालुक्य संघर्ष एवं साम्राज्य पतन

पल्लव और चालुक्य वंशों के बीच दीर्घकालिक संघर्ष का मुख्य भौगोलिक कारण
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कृष्णा-तुंगभद्रा दोआब (रायचूर दोआब)
पल्लव-चालुक्य संघर्ष की शुरुआत किन दो समकालीन शासकों के बीच हुई
उत्तर देखें
पुलकेशिन द्वितीय एवं महेंद्रवर्मन प्रथम
पुल्ललूर के युद्ध में पुलकेशिन द्वितीय ने किस पल्लव राजा को पराजित किया
उत्तर देखें
महेंद्रवर्मन प्रथम
पिता महेंद्रवर्मन प्रथम की पराजय का बदला लेने वाला पल्लव शासक
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन प्रथम
मणिमंगलम् के प्रसिद्ध युद्ध (642 ई.) में किसने किसको पराजित किया
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन प्रथम ने पुलकेशिन द्वितीय को
पुलकेशिन द्वितीय की हत्या कर वातापी पर 13 वर्षों तक पल्लवों का अधिकार रखने वाला शासक
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन प्रथम
वातापी पर पल्लव अधिकार के बाद चालुक्य साम्राज्य का पुनरुद्धार करने वाला शासक
उत्तर देखें
विक्रमादित्य प्रथम
विक्रमादित्य प्रथम ने किस पल्लव राजा को पराजित कर कांची पर पुनः अधिकार किया
उत्तर देखें
परमेश्वरवर्मन प्रथम
चालुक्य शासक विक्रमादित्य द्वितीय ने कांची पर कितनी बार आक्रमण कर विजय प्राप्त की
उत्तर देखें
तीन बार
विक्रमादित्य द्वितीय ने कांची विजय के बाद कैलाशनाथ मंदिर को दान देकर कौन सी उपाधि ली
उत्तर देखें
कांचीकोंड
पल्लव-चालुक्य संघर्ष का अंतिम परिणाम
उत्तर देखें
दोनों साम्राज्य दुर्बल होकर नष्ट हुए
वातापी के चालुक्य वंश का अंतिम राजा कौन था
उत्तर देखें
कीर्तिवर्मन द्वितीय
कीर्तिवर्मन द्वितीय को पराजित कर राष्ट्रकूट वंश की स्थापना करने वाला सामंत
उत्तर देखें
दंतीदुर्ग (753 ई.)
पल्लव वंश का अंतिम महत्वपूर्ण शासक
उत्तर देखें
अपराजित वर्मन
पल्लव शासक अपराजित वर्मन को पराजित कर पल्लव साम्राज्य का अंत करने वाला चोल राजा
उत्तर देखें
आदित्य प्रथम (897 ई.)
ऐतिहासिक संघर्ष
प्रमुख चालुक्य-पल्लव संघर्ष, संबंधित शासक एवं परिणाम
दक्षिण भारत के दो महान साम्राज्यों के बीच ऐतिहासिक युद्धों का विवरण
संघर्ष का नाम/वर्ष संबंधित चालुक्य व पल्लव शासक कारण, स्थान एवं परिणाम/प्रभाव
प्रथम चरण (610–630 ई.)
उत्तर देखें
पुलकेशिन द्वितीय (चालुक्य) vs महेंद्रवर्मन I (पल्लव)
उत्तर देखें
स्थान: पुल्ललूर; दोआब नियंत्रण हेतु; चालुक्य विजयी, वेंगी क्षेत्र छीना।
द्वितीय चरण (642 ई.)
उत्तर देखें
पुलकेशिन द्वितीय (चालुक्य) vs नरसिंहवर्मन I (पल्लव)
उत्तर देखें
स्थान: मणिमंगलम् व वातापी; पल्लव विजयी, पुलकेशिन II मृत, वातापीकोंड उपाधि।
तृतीय चरण (670–680 ई.)
उत्तर देखें
विक्रमादित्य प्रथम (चालुक्य) vs परमेश्वरवर्मन I (पल्लव)
उत्तर देखें
स्थान: पेरुवलनल्लूर; चालुक्यों द्वारा वातापी का पुनरुद्धार व कांची पर हमला।
अंतिम चरण (731–740 ई.)
उत्तर देखें
विक्रमादित्य द्वितीय (चालुक्य) vs नंदीवर्मन II (पल्लव)
उत्तर देखें
स्थान: कांची; चालुक्य शासक ने कांची जीती, मंदिरों को सुरक्षित रख दान दिया।

चालुक्य एवं पल्लव प्रशासन व स्थानीय संस्थाएं

पल्लव राज्य में केंद्रीय प्रशासन का सर्वोच्च प्रमुख
उत्तर देखें
राजा
पल्लव काल में साम्राज्य की सबसे बड़ी प्रशासनिक इकाई
उत्तर देखें
राष्ट्र या मण्डलम्
मण्डलम् के नीचे की प्रशासनिक इकाई
उत्तर देखें
कोट्टम या विषय
पल्लव काल में साधारण सर्वसाधारण ग्रामवासियों की सभा
उत्तर देखें
उर (Ur)
पल्लव काल में अग्रहार (ब्राह्मण) गाँवों की स्वायत्त प्रशासनिक सभा
उत्तर देखें
सभा या महासभा
पल्लव तथा दक्षिण भारत में व्यापारियों व नगरवासियों की संस्था
उत्तर देखें
नगरम (Nagaram)
चालुक्य प्रशासन की मुख्य विशेषता
उत्तर देखें
उच्च प्रशासनिक विकेंद्रीकरण
चालुक्य काल में ग्राम प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी
उत्तर देखें
गावुंडा (Gavunda)
चालुक्य अभिलेखों में प्रशासनिक अधिकारों से युक्त महिलाओं की नियुक्ति का प्रमाण
उत्तर देखें
विजयाभट्टारिका (प्रांतीय शासक)
पल्लव काल में सिंचित भूमि और सिंचाई कर प्रबंध करने वाली समिति
उत्तर देखें
एरि वारियम (तालाब समिति)
पल्लव प्रशासन में राजा के प्रमुख सलाहकारों का मंडल
उत्तर देखें
मंत्रिमंडल या अमात्य
पल्लवकालीन गुप्तचर विभाग का प्रमुख अधिकारी
उत्तर देखें
गूढ़पुरुष
चालुक्य काल में राजस्व संग्रह का प्रमुख अधिकारी
उत्तर देखें
महत्तर
पल्लवकालीन कर-मुक्त भूमि अनुदान को क्या कहा जाता था
उत्तर देखें
ब्रह्मदेय
चालुक्य साम्राज्य में सेनापति को दी जाने वाली प्रशासनिक उपाधि
उत्तर देखें
महादंडनायक

शिक्षा केंद्र, घटिका, धर्म एवं साहित्य

दक्षिण भारत में उच्च शिक्षा तथा वैदिक अध्ययन का प्रमुख केंद्र
उत्तर देखें
घटिका (Ghatika)
दक्षिण भारत का सबसे प्रसिद्ध एवं विशाल घटिका (शिक्षा केंद्र) कहाँ था
उत्तर देखें
कांची में
कदंब वंश के संस्थापक मयूरशर्मन ने किस घटिका में शिक्षा प्राप्त की थी
उत्तर देखें
कांची घटिका
चालुक्य शासक मुख्य रूप से किस धर्म के पोषक थे
उत्तर देखें
वैष्णव एवं शैव धर्म
पल्लव काल में दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन चलाने वाले संत
उत्तर देखें
नायनार (शैव) एवं आलवार (वैष्णव)
नायनार संतों की कुल प्रामाणिक संख्या
उत्तर देखें
63 नायनार संत
आलवार संतों की कुल प्रामाणिक संख्या
उत्तर देखें
12 आलवार संत
दक्षिण भारत की एकमात्र प्रसिद्ध महिला आलवार संत
उत्तर देखें
आंडाल
'किरातार्जुनीयम्' ग्रन्थ के रचयिता भारवि किसके दरबार में थे
उत्तर देखें
सिंहविष्णु (पल्लव)
'दशकुमारचरित' तथा 'काव्यादर्श' के रचयिता दंडी किस राजा के राजकवि थे
उत्तर देखें
नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह)
चालुक्य काल के प्रसिद्ध विधिवेत्ता जिन्होंने 'मित्राक्षरा' की रचना की
उत्तर देखें
विज्ञानेश्वर
पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख की मूल भाषा
उत्तर देखें
संस्कृत भाषा
पल्लव काल में प्रसिद्ध कांची विश्वविद्यालय का मुख्य माध्यम
उत्तर देखें
संस्कृत भाषा
आलवार संतों की तमिल रचनाओं के संग्रह को क्या कहा जाता है
उत्तर देखें
दिव्य प्रबंधम्
प्रसिद्ध तमिल शैव संकलन 'तेवारम' किन संतों की रचनाओं का संग्रह है
उत्तर देखें
नायनार संत
प्रशासन एवं शिक्षा
चालुक्य और पल्लव प्रशासन, संस्थाएं तथा शिक्षा केंद्र
प्रशासनिक संरचना, स्थानीय निकाय तथा कांची घटिका की विशेषताएं
प्रशासनिक पहलू / संस्था संबंधित राजवंश मुख्य विशेषताएं एवं कार्य
मण्डलम् व कोट्टम
उत्तर देखें
पल्लव प्रशासन
उत्तर देखें
साम्राज्य का राष्ट्र/मण्डलम् तथा विषयानुकूल कोट्टम (ज़िले) में विभाजन।
उर (Ur)
उत्तर देखें
पल्लव स्थानीय शासन
उत्तर देखें
सामान्य सर्वसाधारण किसानों/निवासियों की ग्राम सभा।
सभा / महासभा
उत्तर देखें
पल्लव स्थानीय शासन
उत्तर देखें
अग्रहार (ब्राह्मण) गाँवों की स्वायत्त प्रशासनिक सभा।
नगरम (Nagaram)
उत्तर देखें
पल्लव व चालुक्य
उत्तर देखें
व्यापारियों, वणिकों तथा शिल्पियों की व्यावसायिक संस्था।
कांची घटिका
उत्तर देखें
पल्लव काल
उत्तर देखें
दक्षिण भारत का सर्वोच्च वैदिक शिक्षा व ज्ञान केंद्र।
महिला प्रशासनिक पद
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चालुक्य शासन
उत्तर देखें
राजपरिवार की नारियों को प्रांतीय गवर्नर बनाने के प्रमाण।
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