वातापी के चालुक्य वंश का वास्तविक संस्थापक
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पुलकेशिन प्रथम
| राजवंश व शासक | शासनकाल (लगभग) | प्रमुख उपाधियाँ एवं उपलब्धियाँ |
|---|---|---|
चालुक्य: पुलकेशिन प्रथम |
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540–566 ई.
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सत्याश्रय, रणविक्रम; वातापी दुर्ग का निर्माण व प्रथम स्वतंत्र चालुक्य राजा।
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चालुक्य: कीर्तिवर्मन प्रथम |
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566–597 ई.
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पुरुरणपराक्रम; नलों, कदंबों व मौर्यों को हराकर वातापी नगर को समृद्ध किया।
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चालुक्य: पुलकेशिन द्वितीय |
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609–642 ई.
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परमेश्वर, सत्याश्रय; हर्षवर्धन को नर्मदा तट पर हराया, ऐहोल प्रशस्ति।
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चालुक्य: विक्रमादित्य प्रथम |
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655–681 ई.
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श्रीपृथ्वीवल्लभ; पल्लवों को हराकर वातापी का पुनरुद्धार किया।
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पल्लव: सिंहविष्णु |
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575–600 ई.
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अवनीसिंह; पल्लव शक्ति का वास्तविक संस्थापक, चोल-पांड्य पराजित।
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पल्लव: महेंद्रवर्मन प्रथम |
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600–630 ई.
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मत्तविलास, विचित्रचित्त; 'मत्तविलास प्रहसन' के रचयिता, मण्डप मंदिरों की शुरुआत।
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पल्लव: नरसिंहवर्मन प्रथम |
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630–668 ई.
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महामल्ल, वातापीकोंड; पुलकेशिन द्वितीय को हराकर वातापी जीती, महाबलीपुरम के रथ।
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पल्लव: नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह) |
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700–728 ई.
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राजसिंह, आगमप्रिय; कांची का कैलाशनाथ मंदिर एवं महाबलीपुरम का तटीय मंदिर।
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| स्थापत्य शैली (विकास चरण) | संरक्षक पल्लव शासक | प्रमुख मंदिर व स्थापत्य उदाहरण |
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महेंद्र शैली (गुहा मंदिर/मंडप) |
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महेंद्रवर्मन प्रथम (600–630 ई.)
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त्रिचनापल्ली, महेंद्रवाडी, मण्डगपट्टू व वल्लम् के गुफा मंडप मंदिर।
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मामल्ल शैली (एकाश्मक रथ) |
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नरसिंहवर्मन प्रथम (630–668 ई.)
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महाबलीपुरम के सप्त रथ मंदिर (धर्मराज, अर्जुन, द्रौपदी, भीम रथ) व वराह मण्डप।
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राजसिंह शैली (संरचनात्मक मंदिर) |
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नरसिंहवर्मन द्वितीय (700–728 ई.)
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कांची का कैलाशनाथ मंदिर, महाबलीपुरम का तटीय (Shore) मंदिर व ईश्वर मंदिर।
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नंदीवर्मन शैली (अंतिम चरण) |
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नंदीवर्मन द्वितीय व उत्तराधिकारी
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कांची का मुक्तेश्वर मंदिर, मातंगेश्वर मंदिर व वाथुर का परशुरामेश्वर मंदिर।
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| प्रमुख केंद्र व मंदिर | संबंधित राजवंश व शासक | स्थापत्य शैली एवं मुख्य विशेषताएं |
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एहोल: लाढ़ खाँ व दुर्गा मंदिर |
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वातापी के चालुक्य (प्रारंभिक)
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मंदिर स्थापत्य का पालना; छाजनदार छत, बौद्ध चैत्य जैसी गजपृष्ठाकार योजना।
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बादामी: गुफा मंदिर (1 से 4) |
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चालुक्य: कीर्तिवर्मन व मंगलेश
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पहाड़ियों को काटकर निर्मित गुहा मंदिर; शैव, वैष्णव तथा जैन कलाकृतियाँ।
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पट्टदकल: विरूपाक्ष मंदिर |
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चालुक्य: विक्रमादित्य II (रानी लोकमहादेवी)
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द्रविड़ शैली का सर्वोत्कृष्ट मंदिर; यूनेस्को स्थल, कांची मंदिर से प्रेरित।
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महाबलीपुरम: सप्त रथ मंदिर |
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पल्लव: नरसिंहवर्मन प्रथम
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एकाश्मक चट्टान काट मंदिर; द्रौपदी रथ छोटा तथा धर्मराज रथ विशालतम।
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कांची: कैलाशनाथ मंदिर |
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पल्लव: नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह)
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द्रविड़ स्थापत्य का आधार; स्वतंत्र संरचनात्मक पत्थरों का गोपुरमयुक्त मंदिर।
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| संघर्ष का नाम/वर्ष | संबंधित चालुक्य व पल्लव शासक | कारण, स्थान एवं परिणाम/प्रभाव |
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प्रथम चरण (610–630 ई.) |
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पुलकेशिन द्वितीय (चालुक्य) vs महेंद्रवर्मन I (पल्लव)
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स्थान: पुल्ललूर; दोआब नियंत्रण हेतु; चालुक्य विजयी, वेंगी क्षेत्र छीना।
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द्वितीय चरण (642 ई.) |
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पुलकेशिन द्वितीय (चालुक्य) vs नरसिंहवर्मन I (पल्लव)
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स्थान: मणिमंगलम् व वातापी; पल्लव विजयी, पुलकेशिन II मृत, वातापीकोंड उपाधि।
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तृतीय चरण (670–680 ई.) |
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विक्रमादित्य प्रथम (चालुक्य) vs परमेश्वरवर्मन I (पल्लव)
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स्थान: पेरुवलनल्लूर; चालुक्यों द्वारा वातापी का पुनरुद्धार व कांची पर हमला।
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अंतिम चरण (731–740 ई.) |
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विक्रमादित्य द्वितीय (चालुक्य) vs नंदीवर्मन II (पल्लव)
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स्थान: कांची; चालुक्य शासक ने कांची जीती, मंदिरों को सुरक्षित रख दान दिया।
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| प्रशासनिक पहलू / संस्था | संबंधित राजवंश | मुख्य विशेषताएं एवं कार्य |
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मण्डलम् व कोट्टम |
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पल्लव प्रशासन
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साम्राज्य का राष्ट्र/मण्डलम् तथा विषयानुकूल कोट्टम (ज़िले) में विभाजन।
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उर (Ur) |
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पल्लव स्थानीय शासन
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सामान्य सर्वसाधारण किसानों/निवासियों की ग्राम सभा।
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सभा / महासभा |
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पल्लव स्थानीय शासन
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अग्रहार (ब्राह्मण) गाँवों की स्वायत्त प्रशासनिक सभा।
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नगरम (Nagaram) |
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पल्लव व चालुक्य
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व्यापारियों, वणिकों तथा शिल्पियों की व्यावसायिक संस्था।
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कांची घटिका |
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पल्लव काल
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दक्षिण भारत का सर्वोच्च वैदिक शिक्षा व ज्ञान केंद्र।
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महिला प्रशासनिक पद |
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चालुक्य शासन
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राजपरिवार की नारियों को प्रांतीय गवर्नर बनाने के प्रमाण।
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