दिल्ली सल्तनत में शासन व्यवस्था का सर्वोच्च प्रधान
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सुल्तान
| केंद्रीय विभाग (दीवान) | संबंधित अधिकारी एवं प्रमुख कार्य | संस्थापक / पुनर्गठनकर्ता सुल्तान |
|---|---|---|
दीवान-ए-वजारत
(वित्त विभाग) |
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वजीर; संपूर्ण राज्य का वित्तीय नियंत्रण, लगान निर्धारण व व्यय निगरानी
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प्रारंभिक सुल्तानों से विद्यमान; तुगलक काल में चरमोत्कर्ष
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दीवान-ए-अर्ज
(सैन्य विभाग) |
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आरिज-ए-मुमालिक; सैनिकों की भर्ती, रसद, निरीक्षण, दाग-हुलिया व वेतन
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गयासुद्दीन बलबन (अलाउद्दीन द्वारा सुदृढ़ीकरण)
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दीवान-ए-इंशा
(पत्राचार विभाग) |
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दबीर-ए-मुमालिक; शाही फरमान तैयार करना व गोपनीय पत्राचार संधारण
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प्रारंभिक गुलाम वंश से निरंतर प्रभावी
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दीवान-ए-रिसालत
(विदेश/अपील विभाग) |
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सद्र/मुहतसिब; विदेशी राजदूतों से संबंध, राजनयिक पत्र व जन-शिकायतें
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प्रारंभिक सल्तनत काल से क्रियाशील
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दीवान-ए-मुस्तखराज
(बकाया राजस्व विभाग) |
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मुस्तखराज अधिकारी; इक्तादारों व किसानों से बकाया लगान की कठोर वसूली
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अलाउद्दीन खिलजी (1296–1316 ई.)
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दीवान-ए-कोही
(कृषि विभाग) |
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अमीर-ए-कोही; बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाना, सोंधर ऋण व फसल चक्र
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मुहम्मद बिन तुगलक (1325–1351 ई.)
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दीवान-ए-बंदगान
(दास विभाग) |
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नाइब-ए-बंदगान; 1.8 लाख गुलामों का रख-रखाव, वेतन व शिल्प प्रशिक्षण
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फिरोजशाह तुगलक (1351–1388 ई.)
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| इक्ता श्रेणी / घटक | प्रशासक व दायित्व | राजस्व अधिकार एवं फवाजिल व्यवस्था |
|---|---|---|
प्रांतीय इक्ता (बड़ा इक्ता)
[सूबाह] |
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मुक्ती या वली; कानून-व्यवस्था, सेना संधारण व स्थानीय विद्रोहों का दमन
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प्रांतीय लगान संग्रह; सैनिक खर्च काटकर शेष अधिशेष (फवाजिल) दिल्ली दरबार भेजना अनिवार्य
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सैनिक इक्ता (छोटा इक्ता)
[इतलाक] |
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सैनिक व निम्न अमीर; युद्ध के समय सैन्य हाजिरी व सेवा
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केवल व्यक्तिगत वेतन स्वरूप भू-राजस्व उपभोग का अधिकार; प्रशासनिक संप्रभुता नहीं
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शिक (जिला स्तर)
[शिकदार] |
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शिकदार; शिक में शांति व परगनों के लगान वसूली की निगरानी
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परगने के राजस्व पर पर्यवेक्षण; आपातकाल में प्रांतीय सेना को सहयोग
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परगना (तहसील स्तर)
[आमिल व कारकुन] |
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आमिल (कार्यकारी प्रमुख) व मुशरिफ (लगान निर्धारक)
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गाँवों से प्रत्यक्ष लगान संग्रह; मुकद्दम व पटवारी के अभिलेखों की जांच
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ग्राम (मूल इकाई)
[मुकद्दम व पटवारी] |
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मुकद्दम/खूत (ग्राम प्रधान) व पटवारी (लेखाकार)
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पारंपरिक मध्यस्थ; किसानों से भू-राजस्व वसूल कर परगने में जमा कराना
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| प्रशासनिक / सैन्य पद | प्रशासनिक स्तर व विभाग | प्रमुख कार्य एवं अधिकार |
|---|---|---|
नाइब-ए-मुमलिकात |
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केंद्रीय स्तर (उप-सुल्तान)
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सुल्तान की अनुपस्थिति अथवा नाबालिग होने पर व्यावहारिक रूप से सर्वोच्च सत्ता का प्रयोग
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आरिज-ए-मुमालिक |
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दीवान-ए-अर्ज (सैन्य विभाग)
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समस्त सेना का प्रमुख प्रबंधक; सैनिकों की भर्ती, वेतन वितरण, घोड़ों की दाग व वार्षिक निरीक्षण
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सद्र-उस-सुदूर |
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दीवान-ए-रिसालत / सद्र
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धार्मिक मामलों, वक्फ संपत्तियों, मस्जिदों के अनुदान एवं इस्लामी शिक्षा संस्थाओं का सर्वोच्च अध्यक्ष
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काजी-उल-कुजात |
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न्याय विभाग (दीवान-ए-कजा)
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सल्तनत का मुख्य न्यायाधीश; शरीयत के आधार पर दीवानी व फौजदारी अपीलों का निपटारा
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मुहतसिब |
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नगर प्रशासन व धर्म निरीक्षण
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सार्वजनिक नैतिकता का रक्षक; बाजार में नाप-तौल की जांच व मद्यपान-जुआ पर रोक
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कोतवाल |
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राजधानी एवं प्रमुख नगर
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नगर की आंतरिक सुरक्षा, रात्रि गश्त, विदेशियों का पंजीकरण व शांति व्यवस्था संधारण
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| कर का नाम | प्रकृति, दर एवं आधार | संबंधित करदाता वर्ग / क्षेत्र |
|---|---|---|
उश्र (Ushr) |
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धार्मिक भू-राजस्व; प्राकृतिक सिंचित पर 1/10 (10%) व कृत्रिम सिंचित पर 1/20 (5%)
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केवल मुस्लिम भूमि स्वामी एवं उनकी अधिकृत कृषि भूमि
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खराज (Kharaj) |
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सामान्य भू-राजस्व; उपज का 1/5 से 1/3 (अलाउद्दीन के काल में 50%)
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गैर-मुस्लिम हिंदू कृषक वर्ग एवं समस्त गैर-मुस्लिम कृषि भूमि
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खुम्स (Khums) |
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युद्ध में शत्रु से लूटी गई संपदा अथवा भूमिगत गड़े खजाने पर कर (1/5 या 4/5)
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सैनिक एवं राजकोष (अलाउद्दीन व एमबीटी ने 80% राज्य हेतु लिया)
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जजिया (Jizya) |
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सुरक्षा एवं सैन्य सेवा मुक्ति कर; 48, 24 व 12 दिरहम वार्षिक दर
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गैर-मुस्लिम प्रजा (जिम्मी); फिरोज तुगलक ने ब्राह्मणों पर भी लगाया
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जकात (Zakat) |
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अनिवार्य इस्लामी धार्मिक कर; वार्षिक बचत/संपत्ति पर 2.5% (1/40 भाग)
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केवल संपन्न मुस्लिम नागरिक; राशि केवल मुस्लिम निर्धनों हेतु व्यय
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हक-ए-शर्ब / अबवाब |
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हक-ए-शर्ब (सिंचाई कर 10%); अबवाब (चरी, घरी, मुकद्दमी जैसे 24 स्थानीय उपकर)
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नहरों से सिंचित किसान (हक-ए-शर्ब); जनसाधारण (अबवाब)
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| स्मारक व अवस्थिति | निर्माता सुल्तान व काल | प्रमुख स्थापत्य व कलात्मक विशेषताएं |
|---|---|---|
कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद
(महरौली, दिल्ली) |
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कुतुबुद्दीन ऐबक
(1192–1198 ई.)
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भारत की प्रथम तुर्क मस्जिद; 27 हिंदू-जैन मंदिरों के अलंकृत पाषाण स्तंभों का पुनर्चक्रण
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कुतुब मीनार
(महरौली, दिल्ली) |
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ऐबक (प्रारंभ), इल्तुतमिश (पूर्ण), फिरोज तुगलक (5वीं मंजिल)
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72.5 मीटर ऊंची 5 मंजिला लाल बलुआ पत्थर मीनार; बाहर निकली नक्काशीदार बालकनियां
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अढ़ाई दिन का झोंपड़ा
(अजमेर, राजस्थान) |
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कुतुबुद्दीन ऐबक
(1199 ई.)
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विग्रहराज चतुर्थ निर्मित संस्कृत पाठशाला का रूपांतरण; मेहराबदार सुंदर पर्दा-दीवार
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सुल्तानगढ़ी का मकबरा
(मलिकपुर, दिल्ली) |
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शम्सुद्दीन इल्तुतमिश
(1231 ई.)
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भारत का प्रथम इस्लामी मकबरा; भूमिगत अष्टकोणीय कक्ष व गढ़ीनुमा दुर्ग ढांचा
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बलबन का मकबरा
(महरौली, दिल्ली) |
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गयासुद्दीन बलबन
(1287 ई.)
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भारतीय उपमहाद्वीप में प्रथम विशुद्ध मेहराब (True Arch) का वैज्ञानिक निर्माण
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अलाई दरवाजा
(कुतुब परिसर, दिल्ली) |
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अलाउद्दीन खिलजी
(1311 ई.)
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घोड़े की नालनुमा मेहराब, जालीदार खिड़कियां, संगमरमर अलंकरण; 'सल्तनत का रत्न'
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गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा
(तुगलकाबाद, दिल्ली) |
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गयासुद्दीन / एमबीटी
(1325 ई.)
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रोमन शैली की ढलवा दीवारें (सलामी तकनीक); लाल पत्थर पर श्वेत संगमरमरी गुंबद
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सिकंदर लोदी का मकबरा
(लोदी गार्डन, दिल्ली) |
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इब्राहिम लोदी
(1517–18 ई.)
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भारत में दोहरे गुंबद (Double Dome) का प्रथम प्रयोग; चारबाग शैली के मध्य निर्मित
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| रचना का नाम व वर्ष | संरक्षक सुल्तान | मुख्य विषय एवं ऐतिहासिक महत्व |
|---|---|---|
किरान-उस-सादैन
(1289 ई.) |
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सुल्तान मुइज्जुद्दीन कैकुबाद
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अवध में कैकुबाद और उसके विद्रोही पिता बुगरा खां का भावुक राजनीतिक मिलन; दिल्ली का सुंदर नगर वर्णन
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मिफताह-उल-फतूह
(1291 ई.) |
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सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी
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मलिक छज्जू के विद्रोह का दमन, जलालुद्दीन की सैन्य विजयें एवं रणथंभौर व झाईं के अभियानों का विवरण
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खजाइन-उल-फतूह
(तारीख-ए-अलाई, 1311 ई.) |
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सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी
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अलाउद्दीन के 15 वर्षों के सुधार, बाजार नियंत्रण, मंगोल पराजय तथा मलिक काफूर के दक्षिण विजय अभियानों का प्रत्यक्ष गद्य विवरण
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आशिका
(दवल रानी खिज्र खां, 1315 ई.) |
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शहजादा खिज्र खां (खिलजी)
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गुजरात के राजा कर्ण की पुत्री देवल रानी और अलाउद्दीन के ज्येष्ठ पुत्र खिज्र खां की अमर प्रेम गाथा
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नूह सिपिहर
(नौ आकाश, 1318 ई.) |
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सुल्तान कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी
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भारत को स्वर्ग सदृश श्रेष्ठ बताना; भारतीय संस्कृति, ब्राह्मणों के ज्ञान, संस्कृत व 12 स्थानीय भाषाओं की प्रशंसा
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तुगलकनामा
(1325 ई.) |
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सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक
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खुसरो शाह का पतन, गाजी मलिक द्वारा तुगलक वंश की स्थापना; अमीर खुसरो की अंतिम ऐतिहासिक काव्य रचना
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