दिल्ली सल्तनत की स्थापना का वर्ष
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1206 ई.
| सुल्तान व शासनकाल | राजवंश व उपाधियां | प्रमुख कार्य एवं ऐतिहासिक सुधार |
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कुतुबुद्दीन ऐबक
(1206–1210 ई.) |
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कुतुबी / गुलाम वंश
लाखबख्श, कुरानख्वां
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सल्तनत की स्थापना; राजधानी लाहौर; कुतुब मीनार व कुव्वत-उल-इस्लाम की नींव; चौगान में मृत्यु
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शम्सुद्दीन इल्तुतमिश
(1211–1236 ई.) |
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शम्सी / इल्बारी तुर्क
सुल्तान-ए-आजम
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वास्तविक संस्थापक; राजधानी दिल्ली; चालीसा दल (चिहलगानी) गठन; इक्ता व्यवस्था; टंका व जीतल सिक्के
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रजिया सुल्तान
(1236–1240 ई.) |
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शम्सी राजवंश
उम्दत-उल-निस्वां
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प्रथम मुस्लिम महिला शासिका; पर्दा त्याग; कुबा व कुलाह धारण; दरबार पर सीधा नियंत्रण
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गयासुद्दीन बलबन
(1266–1286 ई.) |
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बलबनी राजवंश
जिल्ले-इलाही, उलूग खां
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रक्त और लौह नीति; चालीसा दल का दमन; सिजदा-पाबोस व नवरोज; दीवान-ए-आरिज सैन्य विभाग
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जलालुद्दीन खिलजी
(1290–1296 ई.) |
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खिलजी राजवंश
शाइस्ता खां
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खिलजी क्रांति के जनक; उदार निरंकुशता; सहिष्णु नीति; 'नवीन मुसलमान' मंगोलों को बसाया
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अलाउद्दीन खिलजी
(1296–1316 ई.) |
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खिलजी राजवंश
सिकंदर-ए-सानी
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विशाल स्थायी सेना; दाग व हुलिया; बाजार एवं मूल्य नियंत्रण; 50% खराज; दक्षिण भारत विजय
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| संस्थागत उपाय / नीति | उद्देश्य एवं प्रशासनिक स्वरूप | युगीन एवं ऐतिहासिक प्रभाव |
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खलीफा से मंसूर प्राप्ति
(1229 ई.) |
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बगदाद के खलीफा से 'सुल्तान-ए-आजम' की सनद पाकर स्वतंत्र वैध सत्ता
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सल्तनत को इस्लामी जगत में वैधानिक मान्यता मिली; प्रतिद्वंद्वियों के दावे समाप्त
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तुर्कान-ए-चिहलगानी
(चालीसा दल) |
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40 निष्ठावान तुर्क दासों का सर्वोच्च सैन्य व प्रशासनिक कोर ग्रुप
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राजसत्ता को सुदृढ़ किया, किंतु आगे चलकर सुल्तान विरोधी षड्यंत्रों का केंद्र बना
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इक्ता व्यवस्था का संगठन |
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अधिकारियों को नकद वेतन के स्थान पर भू-राजस्व क्षेत्रों (इक्ता) का आवंटन
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सामंती विकेंद्रीकरण पर नियंत्रण, नियमित सेना का संधारण व राजस्व वसूली सुनिश्चित
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शुद्ध अरबी सिक्का प्रणाली |
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चांदी का टंका (175 ग्रेन) व तांबे का जीतल; टकसाल नाम अंकन
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सल्तनत की मौद्रिक संप्रभुता स्थापित; व्यापार-वाणिज्य में अत्यधिक सुगमता
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कुशल मंगोल कूटनीति
(1221 ई.) |
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मांगबर्नी को शरण देने से विनम्र इनकार; चंगेज खां को तटस्थ रखा
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नवजात दिल्ली सल्तनत मंगोलों के भीषण रक्तपात व विध्वंस से सुरक्षित बची
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| राजसत्ता सिद्धांत / नीति | क्रियान्वयन एवं प्रशासनिक स्वरूप | उद्देश्य एवं ऐतिहासिक परिणाम |
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नियाबत-ए-खुदाई व जिल्ले-इलाही |
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राजा ईश्वर का प्रतिनिधि व उसकी छाया है; सुल्तान निरंकुश व अलौकिक है
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सुल्तान पद की गरिमा पुनर्स्थापित; जनसाधारण व अमीरों में भय व श्रद्धा उत्पन्न
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सिजदा, पाबोस व नवरोज उत्सव |
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सुल्तान के समक्ष घुटने टेकना, चरण चूमना और फारसी नववर्ष का भव्य आयोजन
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दरबार में कठोर अनुशासन; तुर्क अमीरों की समानता के दावे का पूर्ण उन्मूलन
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रक्त और लौह की नीति |
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विद्रोहियों का निर्मम वध, स्त्रियों-बच्चों को दास बनाना व वनों की कटाई
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मेवातियों, कटेहर व दोआब के विद्रोहों का दमन; दिल्ली में शांति व्यवस्था
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तुर्कान-ए-चिहलगानी का विनाश |
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चालीसा दल के प्रमुख अमीरों (शेर खां आदि) को विष व दंड देकर समाप्त करना
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अमीरों की गुटबंदी का अंत; सत्ता का पूर्ण केंद्रीकरण सुल्तान के हाथों में
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दीवान-ए-आरिज व गुप्तचर व्यवस्था |
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वजीर से स्वतंत्र सैन्य विभाग (इमाद-उल-मुल्क) व गुप्तचरों (बरीद) का सघन जाल
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सैन्य क्षमता में सुधार; अधिकारियों की गतिविधियों की त्वरित व निष्पक्ष सूचना
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| सुधार क्षेत्र / योजना | प्रमुख नियम एवं विभाग | उद्देश्य एवं प्रभाव |
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विद्रोह निरोधक 4 अध्यादेश |
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दान भूमि जब्ती, गुप्तचर जाल, मद्यनिषेध एवं अमीरों के सामाजिक मेलजोल पर पूर्ण पाबंदी
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अमीरों के षड्यंत्रों का समूल नाश; सुल्तान की व्यक्तिगत सत्ता का सर्वोच्च सुदृढ़ीकरण
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सैन्य सुधार एवं नकद वेतन |
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नकद वेतन (234 टंका), स्थायी विशाल केंद्रीय सेना, घोड़ों की दाग व सैनिकों की हुलिया प्रथा
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सेना में मध्यस्थों व फर्जी हाजिरी का अंत; मंगोलों व भारतीय राज्यों पर निर्णायक सैन्य विजय
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भू-राजस्व एवं मसाहत व्यवस्था |
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बिस्वा माप आधारित लगान; उपज का 50% खराज; चरी व घरी कर; दीवान-ए-मुस्तखराज गठन
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राजकोष में अभूतपूर्व वृद्धि; ग्रामीण मध्यस्थों (खूत/मुकद्दम) की शक्ति का दमन
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धर्म और राजनीति का पृथक्करण |
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उलेमाओं के धार्मिक हस्तक्षेप को अस्वीकार किया; राज्यहित को शरीयत से सर्वोपरि माना
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शुद्ध धर्मनिरपेक्ष व्यावहारिक राजनीति का सूत्रपात; सुल्तान का पूर्ण प्रभुत्व
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| बाजार का नाम / श्रेणी | नियंत्रित वस्तुएं एवं दरें | प्रमुख नियंत्रक अधिकारी एवं साधन |
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मंडी (गल्ला बाजार)
[अनाज मंडी] |
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गेहूं (7.5 जीतल/मन), जौ (4 जीतल/मन), चावल व चना (5 जीतल/मन)
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शहना-ए-मंडी (मलिक कबूल); बंजारों का पंजीकरण; सरकारी अन्नागार व कठोर मूल्य नियंत्रण
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सराय-ए-अदल
[निर्मित वस्तु बाजार] |
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वस्त्र (मलमल, रेशम, सूती), शर्करा, घी, तेल, मेवे व आयातित जड़ी-बूटियां
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दीवान-ए-रियासत व परवाना नवीस; थोक व्यापारियों को अग्रिम ऋण व परमिट अनिवार्यता
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अश्व, दास व मवेशी बाजार
[पशु व दास बाजार] |
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युद्धक घोड़े (प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी), दुधारू पशु, दास-दासियां
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मध्यस्थों (दलालों) का पूर्ण निष्कासन; घोड़ों की गुणवत्ता जांच व नियमित मूल्य सूची
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सामान्य दैनिक बाजार
[स्थानीय हाट] |
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सब्जियां, जूते, सुई-धागा, बर्तन, कंघी एवं अन्य दैनिक उपभोग्य वस्तुएं
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शहना-ए-मंडी, बरीद व मुनहियान (गुप्तचर); छोटे बालकों द्वारा तोल परीक्षण व मांस काटने का दंड
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| अभियान व वर्ष | लक्षित क्षेत्र व शासक | सेनापति व ऐतिहासिक परिणाम |
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गुजरात अभियान
(1299 ई.) |
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अणहिलवाड़ (पाटन)
शासक: राय कर्ण वाघेला
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उलुग खां व नुसरत खां; कर्ण पराजित होकर देवगिरि भागा; मलिक काफूर की प्राप्ति व अकूत धन
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रणथंभौर अभियान
(1301 ई.) |
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रणथंभौर दुर्ग
शासक: हम्मीरदेव चौहान
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अलाउद्दीन व उलुग खां (नुसरत खां मारा गया); हम्मीरदेव वीरगति; स्त्रियों का प्रसिद्ध ऐतिहासिक जौहर
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चित्तौड़ अभियान
(1303 ई.) |
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मेवाड़ (चित्तौड़)
शासक: राणा रतन सिंह
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अलाउद्दीन खिलजी स्वयं; रतन सिंह पराजित; रानी पद्मिनी का महान जौहर; चित्तौड़ का नाम 'खिज्राबाद'
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मालवा अभियान
(1305 ई.) |
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मांडू, उज्जैन व धार
शासक: महलक देव
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आईन-उल-मुल्क मुल्तानी; महलक देव मारा गया; मालवा का सल्तनत में सीधा विलय
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देवगिरि अभियान
(1307–08 ई.) |
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यादव साम्राज्य
शासक: रामचंद्र देव
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मलिक काफूर; रामचंद्र देव ने अधीनता मानी; सुल्तान द्वारा 'राय रायान' उपाधि व नवसारी जागीर
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वारंगल अभियान
(1309–10 ई.) |
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काकतीय साम्राज्य
शासक: प्रतापरुद्रदेव द्वितीय
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मलिक काफूर; सोने की जंजीर युक्त प्रतिमा व कोहिनूर हीरा समर्पित; वार्षिक कर देना स्वीकार
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माबर (मदुरै) अभियान
(1311 ई.) |
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पांड्य साम्राज्य
शासक: वीर पांड्य व सुंदर पांड्य
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मलिक काफूर; मदुरै नगर व मंदिरों की लूट; रामेश्वरम में मस्जिद निर्माण; अपार स्वर्ण व 512 हाथी
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