उत्तर वैदिक काल में क्षेत्रीय राज्यों के उद्भव का मुख्य कारण
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लोहे का व्यापक प्रयोग
| महाजनपद एवं शासन प्रणाली | राजधानी / प्रमुख केंद्र | वर्तमान भौगोलिक क्षेत्र |
|---|---|---|
अंग (राजतंत्र) |
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चंपा (मालिनी)
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भागलपुर और मुंगेर (बिहार)
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मगध (राजतंत्र) |
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गिरिव्रज / राजगृह, पाटलिपुत्र
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पटना, गया और नालंदा (बिहार)
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काशी (राजतंत्र) |
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वाराणसी
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वाराणसी और आसपास (उत्तर प्रदेश)
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वत्स (राजतंत्र) |
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कौशांबी
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प्रयागराज और बांदा (उत्तर प्रदेश)
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कोशल (राजतंत्र) |
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श्रावस्ती और अयोध्या
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फैजाबाद, गोंडा, बहराइच (उत्तर प्रदेश)
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शूरसेन (राजतंत्र) |
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मथुरा
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मथुरा और ब्रज क्षेत्र (उत्तर प्रदेश)
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पांचाल (राजतंत्र) |
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अहिच्छत्र (उत्तरी) और कांपिल्य (दक्षिणी)
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बरेली, बदायूं, फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश)
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कुरु (राजतंत्र) |
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इंद्रप्रस्थ
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दिल्ली, मेरठ और कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
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मत्स्य (राजतंत्र) |
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विराटनगर
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जयपुर, अलवर और भरतपुर (राजस्थान)
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चेदि (राजतंत्र) |
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शुक्तिमती (सोत्थिवती)
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बुंदेलखंड क्षेत्र (उत्तर प्रदेश/मप्र)
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अवंति (राजतंत्र) |
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उज्जयिनी (उत्तरी) और महिष्मती (दक्षिणी)
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मालवा और उज्जैन क्षेत्र (मध्य प्रदेश)
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अश्मक (राजतंत्र) |
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पोतन / पोतली (पोटन)
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गोदावरी नदी घाटी (महाराष्ट्र/तेलंगाना)
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गांधार (राजतंत्र) |
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तक्षशिला और पुष्करावती
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पेशावर और रावलपिंडी (पाकिस्तान)
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कंबोज (राजतंत्र/गणसंघ) |
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हाटक / राजपुर
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राजौरी और हजारा (जम्मू-कश्मीर/पाकिस्तान)
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वज्जि (गणतंत्र/गण-संघ) |
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वैशाली
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मुजफ्फरपुर, वैशाली और दरभंगा (बिहार)
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मल्ल (गणतंत्र/गण-संघ) |
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कुशीनारा और पावा
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देवरिया, कुशीनगर और गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
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| परंपरा / श्रेणी | प्रमुख उदाहरण एवं राज्य | उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोत |
|---|---|---|
वंशानुगत राजतंत्र |
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मगध, कोशल, वत्स, अवंति, काशी, अंग, पांचाल
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अंगुत्तर निकाय, पुराण, बौद्ध व जैन साहित्य
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संघीय गणतंत्र (गण-संघ) |
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वज्जि संघ (वैशाली), मल्ल (कुशीनारा-पावा)
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दीघ निकाय, महापरिनिब्बान सुत्त, अर्थशास्त्र
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एकल गणराज्य |
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शाक्य (कपिलवस्तु), कोलिय (रामग्राम), मोरिय (पिप्पलिवन)
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बौद्ध जातक कथाएं, महावंश, अष्टाध्यायी
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वार्ताशास्त्रोपजीवी संघ (अस्त्रजीवी) |
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कंबोज, गांधार क्षेत्र के कतिपय संघ
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कौटिल्य का अर्थशास्त्र, पाणिनि की अष्टाध्यायी
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| गण-संघ / गणराज्य | क्षेत्र एवं प्रमुख केंद्र | राजनीतिक संगठन एवं ऐतिहासिक महत्व |
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वज्जि संघ (8 कुलों का संघ) |
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वैशाली (उत्तरी बिहार)
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विश्व का प्रथम संगठित गणतंत्र, चेटक प्रमुख नेता
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लिच्छवि गणराज्य |
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वैशाली
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वज्जि संघ का सबसे शक्तिशाली घटक, महावीर की ननिहाल
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शाक्य गणराज्य |
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कपिलवस्तु (नेपाल तराई)
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महात्मा बुद्ध का जन्मस्थान, क्षत्रिय परंपरा
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मल्ल गणराज्य |
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कुशीनारा एवं पावा
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बुद्ध एवं महावीर दोनों के निर्वाण का स्थल
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कोलिय गणराज्य |
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रामग्राम
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शाक्यों से रोहिणी नदी जल विवाद हेतु प्रसिद्ध
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मोरिय गणराज्य |
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पिप्पलिवन
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चंद्रगुप्त मौर्य के पूर्वजों का संभावित केंद्र
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कालाम गणराज्य |
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केशपुत्त
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बुद्ध के सांख्य गुरु आलार कालाम का स्थल
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| राजवंश एवं राजधानी | संस्थापक एवं प्रमुख शासक | अंतिम शासक एवं प्रमुख उपलब्धियां |
|---|---|---|
हर्यक वंश (राजगृह/पाटलिपुत्र) |
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बिंबिसार, अजातशत्रु, उदयन
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नागदासक (कूटनीतिक विवाह, अंग विलय)
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शिशुनाग वंश (वैशाली/राजगृह) |
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शिशुनाग, कालाशोक (काकवर्ण)
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नंदीवर्धन (अवंति विलय, द्वितीय बौद्ध संगीति)
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नंद वंश (पाटलिपुत्र) |
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महापद्मनंद, घनानंद
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घनानंद (एकराट उपाधि, विशाल सेना, सिकंदर आक्रमण)
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| उत्कर्ष का कारक श्रेणी | प्रमुख कारण एवं विशेषताएं | मगध साम्राज्य पर प्रभाव |
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भौगोलिक स्थिति |
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राजगृह पहाड़ियों से घिरा, पाटलिपुत्र जलदुर्ग (गंगा, सोन, गंडक)
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अभेद्य सुरक्षा एवं सुगम व्यापारिक मार्ग
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प्राकृतिक संसाधन |
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छोटानागपुर की लौह खदानें एवं समृद्ध जंगल
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उन्नत हथियार, कृषि औजार व हाथियों की उपलब्धता
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आर्थिक कारक |
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मध्य गंगा मैदान की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, अतिरिक्त उत्पादन
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अधिक कर राजस्व एवं विशाल सेना का रखरखाव
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राजनीतिक एवं सैन्य कारक |
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बिंबिसार, अजातशत्रु, महापद्मनंद जैसे महत्वाकांक्षी शासक
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युद्ध में हाथियों का प्रथम व्यापक प्रयोग एवं आक्रामक नीतियां
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सामाजिक-सांस्कृतिक कारक |
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रूढ़िवादी आर्य संस्कृति से दूर, मिश्रित खुला समाज
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नवीन विचारों व साम्राज्यवादी विस्तार का सहज स्वीकार
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| नगर का नाम | भौगोलिक स्थिति एवं नदी | आर्थिक एवं राजनीतिक महत्व |
|---|---|---|
पाटलिपुत्र |
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गंगा-सोन संगम (बिहार)
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मगध की राजधानी, प्रमुख जलदुर्ग व व्यापारिक केंद्र
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कौशांबी |
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यमुना नदी तट (उत्तर प्रदेश)
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वत्स की राजधानी, पक्की ईंटों के साक्ष्य, सूती वस्त्र केंद्र
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तक्षशिला |
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सिंधु-झेलम मध्य (पाकिस्तान)
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गांधार की राजधानी, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व शिक्षा केंद्र
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उज्जयिनी |
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शिप्रा नदी तट (मध्य प्रदेश)
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अवंति की राजधानी, लोहे के काम व सूती वस्त्र का केंद्र
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वाराणसी |
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गंगा नदी तट (उत्तर प्रदेश)
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काशी की राजधानी, रेशम एवं शंख उद्योग हेतु प्रसिद्ध
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श्रावस्ती |
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अचिरवती (राप्ती) नदी तट (उ.प्र.)
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कोशल की राजधानी, उत्तरापथ मार्ग का प्रमुख केंद्र
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चंपा |
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गंगा-चंपा संगम (बिहार)
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अंग की राजधानी, पूर्वी समुद्री व्यापार का शुरुआती स्थल
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| पक्ष / विषय | विशेषताएं एवं निर्माण पद्धति | आर्थिक एवं व्यापारिक महत्व |
|---|---|---|
धातु एवं रूप |
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मुख्यतः चांदी, कभी-कभी तांबा; अनियंत्रित आयताकार/वर्ग आकार
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मुद्रा अर्थव्यवस्था का प्रारंभ, मानक विनिमय माध्यम
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निर्माण तकनीक |
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धातु की चादर काटकर ठप्पे (Punches) से प्रतीक छापना
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राज्य व श्रेणी द्वारा विश्वसनीयता की गारंटी
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उत्कीर्ण चिन्ह |
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सूर्य, चंद्र, पर्वत, नदी, हाथी, वृक्ष आदि प्रकृति प्रतीक
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स्थान व निर्गतकर्ता संस्था की पहचान संकेत
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साहित्यिक नाम |
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कार्षापण, धरण, रूप्य, पाद, मशक आदि
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दीर्घकालिक व्यापार व कर संग्रह में सुगमता
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