जनजातीय आंदोलनों का सबसे प्रमुख मूल कारण
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पारंपरिक वन अधिकारों का हनन
| जनजातीय विद्रोह व वर्ष | भौगोलिक क्षेत्र व प्रमुख नेता | विद्रोह का मुख्य कारण व परिणाम |
|---|---|---|
संथाल विद्रोह (हूल)
(1855–1856 ई.) |
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दामिन-ए-कोह (भागलपुर-राजमहल)
नेता: सिद्धू, कान्हू, चांद, भैरव
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महाजनों का अत्यधिक ब्याज, पुलिसिया शोषण व भूमि बेदखली; मार्शल लॉ द्वारा दमन; 1855 में पृथक संथाल परगना जिले का गठन
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कोल विद्रोह
(1831–1832 ई.) |
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छोटांनागपुर (रांची, सिंहभूम, पलामू)
नेता: बुद्धो भगत, गंगा नारायण
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आदिवासी भूमि बाहरी मुस्लिम व सिख ठेकेदारों को हस्तांतरित करना; चावल की शराब पर कर; कठोर सैन्य दमन द्वारा नियंत्रण
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मुंडा उलगुलान
(1899–1900 ई.) |
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छोटांनागपुर (रांची व खूंटी)
नेता: बिरसा मुंडा ('धरती आबा')
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सामूहिक खूंटकट्टी व्यवस्था का हनन, बेगार (बेथबेगारी) व ईसाई मिशनरी प्रसार; 1908 में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम पारित
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रम्पा विद्रोह
(1922–1924 ई.) |
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गोदावरी घाटी (आंध्र प्रदेश)
नेता: अल्लूरी सीताराम राजू
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मद्रास वन अधिनियम 1882 द्वारा पोडू (झूम) खेती पर रोक व शराब निर्माण निषेध; छापामार युद्ध; 1924 में राजू की शहादत
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खोंड विद्रोह
(1837–1856 ई.) |
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ओडिशा की पहाड़ी पट्टी
नेता: चक्र बिसोई
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पारंपरिक मानव बलि (मरियाह प्रथा) पर ब्रिटिश रोक, नये कर व बेगार; कैम्पबेल द्वारा दमन के बाद शांत हुआ
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ताना भगत आंदोलन
(1914–1919 ई.) |
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छोटांनागपुर (उरांव जनजाति)
नेता: जतरा भगत व बलराम भगत
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जमींदारी व बेगार का शांतिपूर्ण अहिंसक विरोध; सात्विक जीवन शैली; कालांतर में गांधीजी के असहयोग आंदोलन में पूर्ण विलय
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| किसान आंदोलन व वर्ष | क्षेत्र व प्रमुख नेतृत्वकर्ता | मुख्य कारण, मांगें एवं परिणाम |
|---|---|---|
नील विद्रोह
(1859–1860 ई.) |
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नादिया व पवना (बंगाल)
नेता: दिगंबर विश्वास, विष्णु विश्वास
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यूरोपीय मालिकों द्वारा जबरन नील की अलाभकारी खेती; किसानों की पूर्ण हड़ताल; 1860 में नील आयोग द्वारा खेती स्वैच्छिक घोषित
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पबना किसान विद्रोह
(1873–1876 ई.) |
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पबना (पूर्वी बंगाल)
नेता: ईशान चंद्र राय, शंभू पाल
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जमींदारों द्वारा अवैध उपकर व बेदखली; कानूनी मोर्चे पर शांतिपूर्ण लड़ाई; 1885 का बंगाल काश्तकारी अधिनियम पारित हुआ
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दक्कन दंगे
(1875 ई.) |
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पुणे व अहमदनगर (महाराष्ट्र)
किसान समूह (रामोसी व कुनबी)
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रैयतवाड़ी में भारी लगान व मारवाड़ी साहुकारों का बंधक शोषण; ऋण दस्तावेजों का दहन; 1879 में दक्कन कृषक राहत अधिनियम लागू
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चंपारण सत्याग्रह
(1917 ई.) |
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चंपारण (उत्तरी बिहार)
नेता: महात्मा गांधी, राजकुमार शुक्ल
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यूरोपीय मालिकों की तिनकठिया प्रथा (3/20 भाग पर नील); गांधीजी का प्रथम सविनय अवज्ञा; तिनकठिया समाप्त व 25% अवैध वसूली वापसी
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खेड़ा सत्याग्रह
(1918 ई.) |
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खेड़ा (गुजरात)
नेता: गांधीजी, वल्लभभाई पटेल
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सूखे से फसल नष्ट होने पर भी राजस्व जब्ती; किसानों का कर-रोको आंदोलन; सरकार द्वारा निर्धन किसानों का लगान माफ
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बारदोली सत्याग्रह
(1928 ई.) |
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सूरत जिला (गुजरात)
नेता: वल्लभभाई पटेल ('सरदार')
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प्रांतीय सरकार द्वारा 22% अनुचित लगान वृद्धि; महिलाओं सहित पूर्ण असहयोग; जांच समिति द्वारा दर घटाकर 6.03% की गई
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तेभागा आंदोलन
(1946–1947 ई.) |
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दिनाजपुर, रंगपुर (बंगाल)
नेता: कम्पाराम सिंह, भवन सिंह
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बटाईदारों (वर्गदारों) द्वारा फसल का आधा देने के स्थान पर 2/3 हिस्सा रखने की मांग; फ्लाउड आयोग समर्थन; जोतदारों पर दबाव
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तेलंगाना आंदोलन
(1946–1951 ई.) |
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हैदराबाद रियासत (तेलंगाना)
नेता: सुंदरय्या, डी. वी. राव
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निजाम के देशमुखों व जमींदारों की बेगार (वेथी) व दमन; 3000 गांवों में जन-कम्यून; भारत संघ में हैदराबाद के विलय का मार्ग बना
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| मजदूर हड़ताल व वर्ष | स्थान एवं संबद्ध उद्योग | नेतृत्वकर्ता एवं प्रमुख मांगें |
|---|---|---|
अहमदाबाद मिल हड़ताल
(फरवरी–मार्च 1918) |
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अहमदाबाद (गुजरात)
सूती वस्त्र मिल उद्योग
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महात्मा गांधी व अनसूया बेन;
प्लेग बोनस समाप्ति के विरोध में 35% वेतन वृद्धि की मांग; भूख हड़ताल से मांग स्वीकार
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बंबई कपड़ा मिल महा-हड़ताल
(जनवरी 1919 व 1920) |
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बंबई (महाराष्ट्र)
सूती वस्त्र मिलें (1.5 लाख श्रमिक)
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सामूहिक स्वप्रेरित मजदूर नेतृत्व;
काम के घंटे 12 से घटाकर 10 करना, 25% मजदूरी वृद्धि व महंगाई भत्ता
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तूतीकोरिन कोरल मिल हड़ताल
(फरवरी–मार्च 1908) |
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तूतीकोरिन (तमिलनाडु)
ब्रिटिश स्वामित्व वाली सूती मिल
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वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई व सुब्रमण्यम शिव;
अमानवीय कार्यदशाओं का विरोध व वेतन वृद्धि; स्वदेशी आंदोलन से जुड़ाव
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जमशेदपुर टिस्को हड़ताल
(1920 व 1928 ई.) |
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जमशेदपुर (झारखंड)
टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी
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एस. एन. हलधर (1920) व सुभाष चंद्र बोस (1928);
काम के घंटे निर्धारण, वेतन वृद्धि व लेबर एसोसिएशन को मान्यता
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बंबई टेक्सटाइल आम हड़ताल
(1928 ई., 6 माह लंबी) |
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बंबई (महाराष्ट्र)
समस्त कपड़ा मिल उद्योग
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गिरनी कामगार यूनियन (कम्युनिस्ट);
मजदूरी में कटौती का विरोध; 1.5 लाख मजदूरों की ऐतिहासिक लंबी हड़ताल
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असम-बंगाल रेलवे हड़ताल
(मई 1921 ई.) |
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असम व पूर्वी बंगाल
रेलवे व स्टीमर मजदूर
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जे. एम. सेनगुप्त;
चांदपुर में चाय बागान कुलियों के क्रूर दमन के विरोध में राजनीतिक एकजुटता हड़ताल
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| ट्रेड यूनियन संगठन व वर्ष | संस्थापक एवं प्रमुख नेतृत्वकर्ता | ऐतिहासिक भूमिका एवं वैचारिक दिशा |
|---|---|---|
बॉम्बे मिलहैंड्स एसोसिएशन
(1890 ई., बंबई) |
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नारायण मेघाजी लोखंडे (एन. एम. लोखंडे)
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भारत का प्रथम संगठित मजदूर मंच; दीनबंधु पत्र द्वारा रविवार की छुट्टी व 30 मिनट भोजन अवकाश दिलाया
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मद्रास लेबर यूनियन
(1918 ई., मद्रास) |
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बी. पी. वाडिया एवं वी. कल्याणसुंदरम
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भारत का प्रथम औपचारिक आधुनिक ट्रेड यूनियन; नियमित सदस्यता शुल्क व व्यवस्थित प्रबंधन ढांचा
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अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन
(TLA / मजदूर महाजन, 1920) |
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महात्मा गांधी व अनसूया बेन साराभाई
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गांधीवादी ट्रस्टीशिप (न्यासधारिता) पर आधारित; वर्ग-संघर्ष के स्थान पर मध्यस्थता व अहिंसक वार्ता
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अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस
(AITUC, 31 अक्टूबर 1920) |
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लाला लाजपत राय, एन. एम. जोशी, चमन लाल
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भारत का प्रथम केंद्रीय राष्ट्रीय मजदूर महासंघ; ILO में भारतीय श्रमिकों का प्रतिनिधित्व; साम्राज्यवाद विरोध
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गिरनी कामगार यूनियन
(1928 ई., बंबई) |
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एस. ए. डांगे, मुजफ्फर अहमद, एस. वी. घाटे
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क्रांतिकारी कम्युनिस्ट प्रभाव; 1928 की ऐतिहासिक बंबई कपड़ा मिल हड़ताल का संचालन; लाल झंडे का प्रसार
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इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस
(INTUC, मई 1947) |
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सरदार वल्लभभाई पटेल व वी. वी. गिरि
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कांग्रेस समर्थित राष्ट्रवादी मजदूर संघ; कम्युनिस्ट हड़ताली राजनीति के विरोध में लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण मार्ग
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