मौर्य इतिहास जानने का सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक स्रोत
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कौटिल्य का अर्थशास्त्र
| स्रोत का नाम | लेखक / प्रकार | प्राप्त प्रमुख ऐतिहासिक जानकारी |
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अर्थशास्त्र |
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कौटिल्य (चाणक्य)
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मौर्यकालीन शासन व्यवस्था, सप्तांग सिद्धांत, कर प्रणाली व गुप्तचर व्यवस्था
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इंडिका |
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मेगस्थनीज (यूनानी राजदूत)
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पाटलिपुत्र प्रशासन, 7 सामाजिक वर्ग, अकाल व दास प्रथा का अभाव
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अशोक के अभिलेख |
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शिलालेख, स्तंभलेख, गुहालेख
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धम्म नीति, कलिंग युद्ध, प्रशासनिक सुधार व साम्राज्य की सीमाएं
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मुद्राराक्षस |
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विशाखदत्त (संस्कृत नाटक)
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नंद वंश का पतन, चाणक्य की कूटनीति व चंद्रगुप्त का रोहण
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परिशिष्टपर्वन |
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हेमचंद्र (जैन ग्रंथ)
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चंद्रगुप्त मौर्य का अंतिम समय, अकाल व जैन धर्म स्वीकार करना
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महावंश व दीपवंश |
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सिंहली बौद्ध वृत्तांत
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अशोक का बौद्ध धर्म में धर्मांतरण व श्रीलंका में बौद्ध प्रचार
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जूनागढ़ अभिलेख |
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रुद्रदामन (शैल अभिलेख)
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सुदर्शन झील का निर्माण एवं चंद्रगुप्त-अशोक के प्रांतीय राज्यपाल
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| मौर्य शासक | शासनकाल व उपाधि/उपनाम | समकालीन विदेशी शासक एवं कूटनीतिक संबंध |
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चंद्रगुप्त मौर्य |
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322–298 ई.पू. (सैंड्रोकोट्टस, एंड्रोकोट्टस)
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सेल्यूकस निकेटर (सीरिया); मेगस्थनीज राजदूत बनकर आया
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बिंदुसार |
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298–273 ई.पू. (अमित्रघात, सिंहसेन)
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एंटीयोक्स प्रथम (सीरिया) व टॉलमी II फिलाडेल्फस (मिस्र); डाइमेकस व डायोनिसियस राजदूत
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अशोक महान |
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268–232 ई.पू. (देवनामप्रिय, प्रियदर्शी)
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एंटीयोक्स II, टॉलमी II, मगा, अलेक्जेंडर, एंटीगोनस गोनाटास (यूनानी राज्य)
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दशरथ मौर्य |
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232–224 ई.पू. (देवनामप्रिय)
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आजीवकों को नागार्जुनी गुफाएं दान; प्रांतीय विखंडन प्रारंभ
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बृहद्रथ |
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187–185 ई.पू. (अंतिम मौर्य शासक)
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डेमेट्रियस (यवन आक्रमणकारी); सेनापति पुष्यमित्र शुंग द्वारा हत्या
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| शिलालेख | मुख्य विषय / संदेश | स्थान एवं ऐतिहासिक महत्व |
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प्रथम शिलालेख |
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पशुबलि पर प्रतिबंध एवं उत्सवों पर रोक
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गिरनार, धौली आदि; प्राणी मात्र के प्रति दया
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द्वितीय शिलालेख |
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मनुष्य व पशु चिकित्सा, चोल-पांड्य का उल्लेख
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शाहबाज़गढ़ी आदि; कल्याणकारी राज्य की अवधारणा
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तृतीय शिलालेख |
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युक्त, रज्जुक, प्रादेशिक अधिकारियों की नियुक्ति
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राज्याभिषेक के 12वें वर्ष; 5वें वर्ष दौरा
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चतुर्थ शिलालेख |
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भेरीघोष के स्थान पर धम्मघोष की घोषणा
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नैतिक मूल्यों और अहिंसा का प्रसार
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पंचम शिलालेख |
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धम्म महामात्रों की नियुक्ति का प्रथम उल्लेख
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राज्याभिषेक के 13वें वर्ष; समाज कल्याण
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षष्ठम शिलालेख |
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आत्मनियंत्रण एवं प्रशासनिक तत्परता
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लोक कल्याण हेतु सम्राट सदैव उपलब्ध
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सप्तम व अष्टम शिलालेख |
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सभी संप्रदायों की सहिष्णुता व धम्म यात्राएं
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बोधिगया यात्रा का उल्लेख
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नवम शिलालेख |
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सच्ची भेंट और सच्चे शिष्टाचार की व्याख्या
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व्यर्थ के रीति-रिवाजों का खंडन
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दशम शिलालेख |
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ख्याति व यश की निंदा; धम्म श्रेष्ठता
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प्रजा के नैतिक उत्थान पर बल
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एकादश शिलालेख |
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धम्मदान की व्याख्या व उसकी श्रेष्ठता
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धम्म की तुलना में भौतिक दान गौण
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द्वादश शिलालेख |
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धार्मिक सहिष्णुता व स्त्री महामात्र नियुक्ति
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सभी धर्मों के सार की वृद्धि पर बल
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त्रयोदश शिलालेख |
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कलिंग युद्ध का वर्णन व 5 यूनानी राजा
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सबसे बड़ा शिलालेख; हृदय परिवर्तन
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चतुर्दश शिलालेख |
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जनता को धार्मिक जीवन बिताने की प्रेरणा
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अभिलेख उत्कीर्ण कराने का उद्देश्य
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| धम्म का सिद्धांत / उद्देश्य | मुख्य प्रावधान एवं व्यावहारिक शिक्षा | संबंधित अभिलेखीय प्रमाण |
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अहिंसा व जीवदया |
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पशुबलि निषेध, हिंसा का त्याग, राजकीय रसोई में पक्षी-पशु हत्या सीमित
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प्रथम व पंचम शिलालेख, दिल्ली-टोपरा स्तंभलेख
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धार्मिक सहिष्णुता |
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अन्य संप्रदायों की निंदा न करना, सभी धर्मों के सार की वृद्धि करना
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12वां शिलालेख, भाब्रू बैराठ शिलालेख
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माता-पिता व गुरु सेवा |
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ज्येष्ठों का सम्मान, दासों व भृत्यों के प्रति मानवीय व्यवहार
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3रा, 9वां व 11वां शिलालेख
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प्रजा कल्याणकारी कार्य |
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सड़क निर्माण, वृक्षारोपण, कूप उत्खनन, सराय व अस्पताल निर्माण
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2रा शिलालेख, 7वां स्तंभलेख
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नैतिक प्रशासन |
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धम्म महामात्रों द्वारा न्याय, बंदियों को क्षमादान, दौरा करना
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5वां शिलालेख, पृथक कलिंग शिलालेख (धौली-जौगड़)
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| वर्ष / अनुमानित काल | ऐतिहासिक घटना | ऐतिहासिक संदर्भ एवं प्रभाव |
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322 ई.पू. |
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चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा मौर्य वंश की स्थापना
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घनानंद का वध, चाणक्य की सहायता से प्रथम अखिल भारतीय साम्राज्य
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305 ई.पू. |
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चंद्रगुप्त-सेल्यूकस युद्ध एवं संधि
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सेल्यूकस पराजित; 4 प्रांत मौर्य साम्राज्य में विलय, वैवाहिक संबंध
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298 ई.पू. |
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चंद्रगुप्त की मृत्यु व बिंदुसार का सत्तारोहण
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श्रवणबेलगोला में संलेखना द्वारा देहत्याग; बिंदुसार राजा बना
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273 ई.पू. |
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बिंदुसार की मृत्यु व उत्तराधिकार संघर्ष
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अशोक का सत्ता पर नियंत्रण; 4 वर्षों का अंतरिम काल
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269 ई.पू. |
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सम्राट अशोक का औपचारिक राज्याभिषेक
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मगध के सिंहासन पर बैठना; देवनामप्रिय उपाधि धारण
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261 ई.पू. |
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कलिंग युद्ध (राज्याभिषेक का 8वां वर्ष)
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भीषण नरसंहार; अशोक द्वारा युद्ध त्याग एवं धम्मघोष की घोषणा
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256 ई.पू. |
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धम्म महामात्रों की नियुक्ति (13वां वर्ष)
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धम्म प्रचार एवं समाज कल्याण हेतु नए प्रशासनिक पद का सृजन
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250 ई.पू. |
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तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन
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पाटलिपुत्र में आयोजित; अभीधम्मपिटक का संकलन व विदेशों में प्रचार
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232 ई.पू. |
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सम्राट अशोक की मृत्यु
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37 वर्षों के शासन का अंत; साम्राज्य का कुणाल व दशरथ में विभाजन
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185 ई.पू. |
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अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या
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पुष्यमित्र शुंग द्वारा हत्या; शुंग वंश की स्थापना व मौर्य साम्राज्य अंत
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