ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अब तक का सबसे विस्तृत और अंतिम प्रमुख अधिनियम
उत्तर देखें
भारत शासन अधिनियम, 1935
| प्रांत एवं कुल सीटें | चुनावी परिणाम व दलीय स्थिति | सरकार, प्रधानमंत्री व मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
मद्रास
(कुल 215 सीटें) |
उत्तर देखें
कांग्रेस को 159 सीटों पर भारी जीत (पूर्ण बहुमत); जस्टिस पार्टी की करारी हार
|
उत्तर देखें
सी. राजगोपालाचारी प्रधानमंत्री बने; मद्यनिषेध व मंदिर प्रवेश कानून लागू किए
|
संयुक्त प्रांत (यूपी)
(कुल 228 सीटें) |
उत्तर देखें
कांग्रेस को 134 सीटें (स्पष्ट बहुमत); मुस्लिम लीग को मात्र 29 सीटें
|
उत्तर देखें
गोविंद वल्लभ पंत प्रधानमंत्री बने; रफी अहमद किदवई वित्त मंत्री; काश्तकारी कानून पारित
|
बिहार
(कुल 152 सीटें) |
उत्तर देखें
कांग्रेस को 98 सीटें (स्पष्ट बहुमत); स्वतंत्र व अन्य दल पीछे
|
उत्तर देखें
श्रीकृष्ण सिंह प्रधानमंत्री बने; अनुग्रह नारायण सिंह वित्त मंत्री; किसान ऋण राहत
|
मध्य प्रांत व बरार
(कुल 112 सीटें) |
उत्तर देखें
कांग्रेस को 70 सीटें (स्पष्ट बहुमत); निर्दलीय पराजित
|
उत्तर देखें
डॉ. एन. बी. खरे (बाद में पं. रविशंकर शुक्ल) प्रधानमंत्री बने; शिक्षा सुधार
|
ओडिशा
(कुल 60 सीटें) |
उत्तर देखें
कांग्रेस को 36 सीटें (स्पष्ट बहुमत); राजा-जमींदार पराजित
|
उत्तर देखें
हरेकृष्ण महताब व विश्वनाथ दास के नेतृत्व में स्थिर सरकार; काश्तकारी सुधार
|
बंबई
(कुल 175 सीटें) |
उत्तर देखें
कांग्रेस को 86 सीटें (लगभग बहुमत); निर्दलीयों के समर्थन से सरकार
|
उत्तर देखें
बी. जी. खेर प्रधानमंत्री बने; के. एम. मुंशी गृह मंत्री; औद्योगिक विवाद अधिनियम
|
असम
(कुल 108 सीटें) |
उत्तर देखें
कांग्रेस 33 सीटें पाकर सबसे बड़ा दल बनी; आरंभ में सादुल्ला सरकार
|
उत्तर देखें
सितंबर 1938 में गोपीनाथ बोरदोलोई के नेतृत्व में कांग्रेस गठबंधन सरकार बनी
|
पश्चिमोत्तर सीमांत (NWFP)
(कुल 50 सीटें) |
उत्तर देखें
कांग्रेस 19 सीटें पाकर सबसे बड़ा दल बनी; खुदाई खिदमतगार का प्रभाव
|
उत्तर देखें
डॉ. खान साहिब (सीमांत गांधी के भाई) के नेतृत्व में कांग्रेस गठबंधन सरकार बनी
|
बंगाल
(कुल 250 सीटें) |
उत्तर देखें
कृषक प्रजा पार्टी 36, मुस्लिम लीग 38, कांग्रेस 54 (सबसे बड़ा दल)
|
उत्तर देखें
फजलुल हक (कृषक प्रजा पार्टी) ने मुस्लिम लीग संग गठबंधन सरकार बनाई
|
पंजाब
(कुल 175 सीटें) |
उत्तर देखें
यूनियनिस्ट पार्टी को 89 सीटें (स्पष्ट बहुमत); कांग्रेस 18, लीग 1
|
उत्तर देखें
सर सिकंदर हयात खान के नेतृत्व में गैर-कांग्रेसी यूनियनिस्ट सरकार बनी
|
सिंध
(कुल 60 सीटें) |
उत्तर देखें
सिंध यूनाइटेड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनी; दलीय अस्थिरता
|
उत्तर देखें
गुलाम हुसैन हिदायतुल्लाह, बाद में अल्लाह बख्श के नेतृत्व में गैर-कांग्रेसी सरकार
|
| प्रशासनिक / नीतिगत क्षेत्र | कांग्रेस मंत्रिमंडलों की प्रमुख नीतियां एवं उपलब्धियां | 1939 में इस्तीफे की पृष्ठभूमि एवं प्रभाव |
|---|---|---|
नागरिक स्वतंत्रताएं
व राजबंदी रिहाई |
उत्तर देखें
प्रेस पर से सरकारी प्रतिबंध हटाए; आपातकालीन शक्तियां समाप्त; हिंदुस्तान सेवा दल से प्रतिबंध हटाया; काकोरी व अन्य राजनीतिक बंदियों की रिहाई कराई
|
उत्तर देखें
गवर्नर संग बंदियों की रिहाई पर टकराव; यूपी व बिहार के मुख्यमंत्रियों ने इस्तीफे की चेतावनी दी; अंततः गवर्नर झुके
|
कृषक व भूमि सुधार
(काश्तकारी कानून) |
उत्तर देखें
काश्तकारी अधिनियम पारित; लगान में छूट; साहूकारों के ब्याज पर कानूनी सीमा; बेदखली पर रोक; जब्त जमीनें किसानों को लौटाईं
|
उत्तर देखें
जमींदारों का कड़ा विरोध; किसान सभाओं द्वारा अधिक आमूलचूल सुधारों का दबाव; सामाजिक सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त
|
सामाजिक सुधार व शिक्षा
(मद्यनिषेध व वर्धा) |
उत्तर देखें
मद्रास व बंबई में मद्यनिषेध (शराबबंदी) लागू; मद्रास में दलितों हेतु मंदिर प्रवेश कानून; महात्मा गांधी की वर्धा बुनियादी शिक्षा योजना प्रारंभ
|
उत्तर देखें
सरकारी आबकारी राजस्व में भारी गिरावट, किंतु जनस्वास्थ्य में सुधार; अस्पृश्यता के विरुद्ध ठोस कानूनी कदम
|
श्रम व औद्योगिक नीतियां |
उत्तर देखें
मजदूरों की कार्यदशाओं में सुधार; बंबई औद्योगिक विवाद अधिनियम (1938); न्यूनतम मजदूरी व मध्यस्थता समिति
|
उत्तर देखें
कम्युनिस्टों व वामपंथियों द्वारा कुछ धाराओं का विरोध, किंतु औद्योगिक शांति स्थापित करने में सफल
|
1939 का सामूहिक इस्तीफा
(विश्वयुद्ध का संकट) |
उत्तर देखें
1 सितंबर 1939 को द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू; वायसराय लिनलिथगो ने बिना पूछे भारत को युद्धरत देश घोषित किया; स्वतंत्रता का आश्वासन नकारा
|
उत्तर देखें
22 अक्टूबर 1939 को CWC के निर्देश पर 8 प्रांतों से इस्तीफा; 22 दिसंबर को लीग द्वारा 'मुक्ति दिवस' मनाया गया
|
| रियासत एवं क्षेत्र | प्रजामंडल संस्था व गठन वर्ष | प्रमुख नेतृत्वकर्ता एवं मुख्य मांगें/उपलब्धियां |
|---|---|---|
मेवाड़ (उदयपुर)
राजस्थान |
उत्तर देखें
मेवाड़ प्रजामंडल
(अप्रैल 1938)
|
उत्तर देखें
माणिक्यलाल वर्मा व बलवंत सिंह मेहता;
नागरिक अधिकारों की बहाली व उत्तरदायी शासन; बिजौलिया किसानों का समर्थन
|
जयपुर
राजस्थान |
उत्तर देखें
जयपुर प्रजामंडल
(1931 / पुनर्गठित 1936)
|
उत्तर देखें
कपूरचंद पाटनी, जमनालाल बजाज, हीरालाल शास्त्री;
सत्याग्रह द्वारा अकाल राहत व राज्य में निर्वाचित विधायिका की स्थापना
|
मारवाड़ (जोधपुर)
राजस्थान |
उत्तर देखें
मारवाड़ लोक परिषद
(मई 1938)
|
उत्तर देखें
जयनारायण व्यास, आनंदराज सुराणा;
सामंती लाग-बाग व बेगार की समाप्ति; 1940 में भूख हड़ताल व व्यापक जन-आंदोलन
|
कश्मीर
उत्तर भारत |
उत्तर देखें
ऑल जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस
(1932/1939)
|
उत्तर देखें
शेख अब्दुल्ला ('शेर-ए-कश्मीर');
महाराजा हरि सिंह के विरुद्ध 'कश्मीर छोड़ो' आंदोलन; 'नया कश्मीर' समाजवादी घोषणा पत्र
|
हैदराबाद
दक्कन |
उत्तर देखें
हैदराबाद स्टेट कांग्रेस
(1938)
|
उत्तर देखें
स्वामी रामानंद तीर्थ, गोविंददास श्रॉफ;
निजाम के निरंकुश शासन व रजाकारों का विरोध; भारतीय संघ में पूर्ण विलय की मांग
|
त्रावणकोर
दक्षिण भारत |
उत्तर देखें
त्रावणकोर स्टेट कांग्रेस
(1938)
|
उत्तर देखें
पट्टम थानु पिल्लई, टी. एम. वर्गीज;
दीवान सी. पी. रामास्वामी अय्यर की तानाशाही व स्वतंत्र त्रावणकोर की साजिश का विरोध
|
मैसूर
दक्षिण भारत |
उत्तर देखें
मैसूर स्टेट कांग्रेस
(1937)
|
उत्तर देखें
के. सी. रेड्डी, के. टी. भाष्यम;
'जिम्मेदार सरकार' (उत्तरदायी शासन) हेतु संघर्ष; 1947 में 'मैसूर चलो' सत्याग्रह
|
| अधिवेशन / घटना व वर्ष | संबद्ध नेता व पृष्ठभूमि | प्रमुख निर्णय, संकट एवं राजनीतिक परिणाम |
|---|---|---|
हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन
(फरवरी 1938, गुजरात) |
उत्तर देखें
अध्यक्ष: सुभाष चंद्र बोस;
पंडित नेहरू, सरदार पटेल
|
उत्तर देखें
सुभाष निर्विरोध अध्यक्ष; राष्ट्रीय योजना समिति का गठन (नेहरू अध्यक्ष); देशी रियासतों के आंदोलनों को नैतिक समर्थन
|
त्रिपुरी कांग्रेस चुनाव
(29 जनवरी 1939) |
उत्तर देखें
सुभाष चंद्र बोस बनाम
डॉ. पट्टाभि सीतारमैया
|
उत्तर देखें
गांधीजी समर्थित सीतारमैया को 203 मतों से हराकर सुभाष पुनः अध्यक्ष निर्वाचित; गांधीजी ने इसे 'व्यक्तिगत हार' बताया
|
त्रिपुरी अधिवेशन व पंत प्रस्ताव
(मार्च 1939, जबलपुर) |
उत्तर देखें
सुभाष बोस (गंभीर बीमार),
गोविंद वल्लभ पंत, गांधीजी
|
उत्तर देखें
पंत प्रस्ताव पारित: 'कार्यसमिति गांधीजी की इच्छा से बने'; गांधीजी द्वारा सहयोग न करने से गंभीर सांगठनिक गतिरोध पैदा हुआ
|
सुभाष बोस का त्यागपत्र
(29 अप्रैल 1939, कलकत्ता) |
उत्तर देखें
सुभाष चंद्र बोस एवं
कांग्रेस कार्यसमिति
|
उत्तर देखें
गतिरोध सुलझाने में विफलता पर सुभाष ने अध्यक्ष पद त्यागा; डॉ. राजेंद्र प्रसाद 1939 हेतु शेष अवधि के नए अध्यक्ष बने
|
फॉरवर्ड ब्लॉक का गठन
(3 मई 1939) |
उत्तर देखें
नेताजी सुभाष चंद्र बोस
एवं वामपंथी राष्ट्रवादी
|
उत्तर देखें
कांग्रेस के भीतर प्रगतिशील वामपंथी दल की स्थापना; 22 जून 1939 को बंबई में अखिल भारतीय रूप दिया गया
|
अनुशासनात्मक कार्रवाई
(अगस्त 1939) |
उत्तर देखें
कांग्रेस कार्यसमिति
बनाम सुभाष चंद्र बोस
|
उत्तर देखें
प्रांतीय कांग्रेस के फैसलों के विरोध में प्रदर्शन पर बोस 3 वर्ष हेतु कांग्रेस के किसी भी निर्वाचित पद से अयोग्य घोषित
|