संगम शब्द का शाब्दिक अर्थ
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गोष्ठी या सभा
| संगम सभा | स्थान एवं अध्यक्ष/संरक्षक | प्रमुख साहित्य व ऐतिहासिक विवरण |
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प्रथम संगम (मदुरै) |
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मदुरै | ऋषि अगस्त्य | 89 पाण्ड्य राजा
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कोई ग्रंथ उपलब्ध नहीं; समुद्र में निमज्जित।
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द्वितीय संगम (कपाटपुरम) |
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कपाटपुरम | अगस्त्य व तोल्काप्पियर | 59 पाण्ड्य राजा
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'तोल्काप्पियम' (व्याकरण ग्रंथ) एकमात्र उपलब्ध रचना।
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तृतीय संगम (उत्तर मदुरै) |
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उत्तरी मदुरै | नक्कीरर | 49 पाण्ड्य राजा
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वर्तमान उपलब्ध अधिकांश संगम साहित्य इसी का हिस्सा।
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| संगम ग्रंथ / महाकाव्य | रचनाकार व परंपरा | विषयवस्तु एवं ऐतिहासिक महत्व |
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तोल्काप्पियम |
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तोल्काप्पियर (द्वितीय संगम)
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तमिल व्याकरण, काव्यशास्त्र एवं सामाजिक नियम।
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तिरुक्कुरल (कुरल) |
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तिरुवल्लुवर
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तमिल भूमि की बाइबिल; धर्म, अर्थ, काम का प्रतिपादन।
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शिलप्पादिकारम |
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इलंगो अडिगल (चेर राजकुमार)
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कोवलन-कन्नगी की कथा, पट्टिनी पूजा का आधार।
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मणिमेखलै |
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सीत्तलै सत्तनार (बौद्ध व्यापारी)
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कोवलन-माधवी की पुत्री मणिमेखलै का बौद्ध जीवन।
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जीवक चिंतामणि |
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तिरुतक्कदेव (जैन भिक्षु)
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राजकुमार जीवक की कथा, विवाह ग्रंथ नाम से प्रसिद्ध।
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| राज्य एवं क्षेत्र | राजधानी व राजकीय चिह्न | प्रमुख शासक एवं विशेषताएँ |
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चेर राज्य (केरल तट) |
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वंजी (करूर) | राजकीय चिह्न: धनुष
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सेनगुट्टुवन (लाल चेर), पट्टिनी/कन्नगी पूजा का संस्थापक।
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चोल राज्य (कावेरी घाटी) |
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उरैयूर व पुहार | राजकीय चिह्न: बाघ
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करिकाल (महानतम शासक), वेण्णि युद्ध विजेता, कावेरी बांध निर्माता।
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पाण्ड्य राज्य (दक्षिण तमिलनाडु) |
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मदुरै (कोरकाई बंदरगाह) | राजकीय चिह्न: मछली
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नेडुंजेलियन (तलैयालंगानम विजेता), मोती व्यापार व स्त्री शासन की परंपरा।
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| सामाजिक/आर्थिक पहलू | प्रमुख व्यवस्था / वर्ग | महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य |
|---|---|---|
प्रशासनिक संस्थाएँ |
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मनरम, ऐम्पेरुंगुलु, एण्पेरायाम
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राजा की निरंकुशता पर अंकुश एवं न्याय व्यवस्था संचालन।
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सामाजिक वर्ग संरचना |
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अरसर (शासक), वेल्लाल (किसान), कदैसियर (मजदूर)
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वर्ण व्यवस्था के बजाय व्यावसायिक एवं भौगोलिक विभाजन।
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सभ्यता एवं महिला स्थिति |
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अग्निकुंड सती (तिप्पायदाल), विदुषी अव्वैयार
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स्त्रियों को उच्च शिक्षा प्राप्त, परंतु विधवा जीवन कठिन।
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कृषि एवं उद्योग |
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धान मुख्य फसल, उरैयूर सूती वस्त्र केंद्र
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मा व वेलि भूमि माप, कावेरी घाटी सर्वाधिक उपजाऊ।
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| बंदरगाह / व्यापारिक केंद्र | निर्यात/आयात वस्तुएं | रोमन साक्ष्य व विवरण |
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अरिकामेडु (पोडुके) |
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निर्यात: मलमल, मोती | आयात: मदिरा, स्वर्ण सिक्के
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रोमन बस्ती के अवशेष, एरेटाइन बर्तन व ऑगस्टस के सिक्के।
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मुसिरिस (चेर बंदरगाह) |
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निर्यात: काली मिर्च (यवनप्रिय), हाथीदांत | आयात: सीसा, सोना
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ऑगस्टस का मंदिर, यवन व्यापारियों के जहाजों का स्थायी जमावड़ा।
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पुहार (कावेरीपट्टनम - चोल) |
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निर्यात: सूती वस्त्र, मणियाँ | आयात: घोड़े (अरब/रोम)
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पेरिप्लस व शिलप्पादिकारम में विशाल जहाजी गोदी का वर्णन।
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कोरकाई (पाण्ड्य बंदरगाह) |
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निर्यात: मोती (Pearls), शंख | आयात: विदेशी मदिरा
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पाण्ड्य मोतियों का अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, प्लिनी द्वारा उल्लेख।
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