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Sangam Kaal

संगम का अर्थ, अवधारणा एवं तीन संगम सभाएं

संगम शब्द का शाब्दिक अर्थ
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गोष्ठी या सभा
संगम काल का मुख्य भौगोलिक विस्तार
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सुदूर दक्षिण (तमिलकम क्षेत्र)
तमिलकम क्षेत्र किन नदियों के मध्य स्थित था?
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कृष्णा व तुंगभद्रा से कन्याकुमारी तक
संगम साहित्य किस भाषा में रचित है?
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तमिल भाषा
संगम सभाओं को मुख्य रूप से किस राजवंश का संरक्षण प्राप्त था?
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पाण्ड्य राजवंश
पारंपरिक कथाओं के अनुसार संगम सभाओं की कुल संख्या
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तीन संगम सभाएं
प्रथम संगम सभा का आयोजन स्थल
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मदुरै (समुद्र में निमज्जित)
प्रथम संगम सभा के अध्यक्ष कौन थे?
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ऋषि अगस्त्य
द्वितीय संगम सभा का आयोजन स्थल
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कपाटपुरम (अलवै)
द्वितीय संगम सभा के अध्यक्ष
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अगस्त्य एवं तोल्काप्पियर
द्वितीय संगम का एकमात्र उपलब्ध ग्रंथ
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तोल्काप्पियम
तृतीय संगम सभा का आयोजन स्थल
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उत्तरी मदुरै
तृतीय संगम सभा के अध्यक्ष
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नक्कीरर
तीनों संगमों की पारंपरिक कुल अवधि मानी जाती है
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9990 वर्ष
संगम साहित्य का वास्तविक ऐतिहासिक कालक्रम
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300 ई.पू. से 300 ई.
तीन संगमों की परंपरा का सर्वप्रथम उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?
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इरायनार अगप्पोरुल (भाष्य)
इरायनार अगप्पोरुल के प्रसिद्ध भाष्यकार
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नक्कीरर
संगम काल की जानकारी देने वाला अशोक का अभिलेख
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द्वितीय एवं त्रयोदश शिलालेख
अशोक के अभिलेखों में वर्णित सुदूर दक्षिण के राज्य
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चोल, चेर, पाण्ड्य एवं सत्यपुत्र
खारवेल के हाथगुंफा अभिलेख में किस तमिल संघ का उल्लेख है?
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तमिरा देश संघ
तमिल भाषा की प्रथम उपलब्ध व्याकरण पुस्तक
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तोल्काप्पियम
तमिल साहित्य का स्वर्ण युग किसे कहा जाता है?
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संगम काल को
संगम कालीन राजाओं की सामान्य राजकीय उपाधि
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वेंदन या कोर्रवन
सुदूर दक्षिण के आर्यीकरण का श्रेय किसे दिया जाता है?
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ऋषि अगस्त्य को
संगम काल में तमिल कवियों की परिषद् का मुख्य कार्य
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ग्रंथों की समीक्षा व स्वीकृति
संगम सभाएं
तीनों संगम सभाएं — स्थान, अध्यक्ष एवं साहित्य
पारंपरिक विवरण, आयोजक स्थल एवं ऐतिहासिक साक्ष्य
संगम सभा स्थान एवं अध्यक्ष/संरक्षक प्रमुख साहित्य व ऐतिहासिक विवरण
प्रथम संगम (मदुरै)
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मदुरै | ऋषि अगस्त्य | 89 पाण्ड्य राजा
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कोई ग्रंथ उपलब्ध नहीं; समुद्र में निमज्जित।
द्वितीय संगम (कपाटपुरम)
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कपाटपुरम | अगस्त्य व तोल्काप्पियर | 59 पाण्ड्य राजा
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'तोल्काप्पियम' (व्याकरण ग्रंथ) एकमात्र उपलब्ध रचना।
तृतीय संगम (उत्तर मदुरै)
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उत्तरी मदुरै | नक्कीरर | 49 पाण्ड्य राजा
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वर्तमान उपलब्ध अधिकांश संगम साहित्य इसी का हिस्सा।

संगम साहित्य, तोल्काप्पियम एवं प्रमुख महाकाव्य

संगम साहित्य को मुख्य रूप से कितने भागों में बांटा गया है?
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दो (मेलकणक्कु व कील्कणक्कु)
'मेलकणक्कु' के अंतर्गत आने वाली रचनाओं का स्वरूप
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आख्यानात्मक काव्य (18 मुख्य काव्य)
'एट्टुत्तोकै' का अर्थ क्या है?
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आठ गीति-संग्रह
'पत्तुप्पाट्टु' का अर्थ
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दस दीर्घ गीत
'पतिनेनकील्कणक्कु' का अर्थ
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18 लघु उपदेशात्मक काव्य
तमिल साहित्य का 'पंचम वेद' किसे माना जाता है?
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तिरुक्कुरल (कुरल)
तिरुक्कुरल के रचयिता
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तिरुवल्लुवर
तिरुक्कुरल में वर्णित तीन मुख्य विषय
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धर्म, अर्थ एवं काम (मुप्पाल)
तोल्काप्पियम ग्रंथ के रचयिता
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तोल्काप्पियर
तोल्काप्पियम किस विषय का ग्रंथ है?
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व्याकरण एवं काव्यशास्त्र
'अहम' (Aham) काव्य की मुख्य विषयवस्तु
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प्रेम एवं आंतरिक भावनाएं
'पुरम' (Puram) काव्य की मुख्य विषयवस्तु
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युद्ध, वीरता एवं बाह्य जीवन
तमिल साहित्य का प्रथम महाकाव्य
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शिलप्पादिकारम
'शिलप्पादिकारम' का शाब्दिक अर्थ
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नूपुर की कहानी
शिलप्पादिकारम के रचनाकार
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इलंगो अडिगल
इलंगो अडिगल किस राजवंश के राजकुमार थे?
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चेर राजवंश (सेनगुट्टुवन के भाई)
शिलप्पादिकारम का मुख्य नायक
उत्तर देखें
कोवलन
शिलप्पादिकारम की मुख्य नायिका
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कन्नगी
कोवलन की प्रेमिका/नर्तकी का नाम
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माधवी
पट्टिनी सम्प्रदाय (कन्नगी पूजा) का वर्णन किसमें है?
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शिलप्पादिकारम महाकाव्य में
दूसरा प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य 'मणिमेखलै' के रचयिता
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सीत्तलै सत्तनार
मणिमेखलै किसकी पुत्री की कहानी पर आधारित है?
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कोवलन एवं माधवी की
मणिमेखलै किस धार्मिक विचारधारा से प्रभावित है?
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बौद्ध धर्म
'जीवक चिंतामणि' महाकाव्य के रचयिता
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तिरुतक्कदेव
जीवक चिंतामणि किस धर्म से संबंधित है?
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जैन धर्म
'मनमुल' (विवाह ग्रंथ) किस महाकाव्य को कहा जाता है?
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जीवक चिंतामणि को
'मुरुगारुप्पडै' ग्रंथ के रचयिता
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नक्कीरर
मुरुगारुप्पडै में किस देवता की स्तुति की गई है?
उत्तर देखें
मुरुगन (स्कंद/कार्तिकेय)
संगम साहित्य में 'तिणै' अवधारणा का अर्थ
उत्तर देखें
पांच भौगोलिक/प्राकृतिक क्षेत्र
'कुरिंजी' प्रदेश की भौगोलिक पहचान
उत्तर देखें
पहाड़ी एवं पर्वतीय क्षेत्र
'मुल्लै' प्रदेश की भौगोलिक पहचान
उत्तर देखें
जंगल व चरागाह क्षेत्र
'मरुदम' प्रदेश की भौगोलिक पहचान
उत्तर देखें
उपजाऊ कृषि भूमि क्षेत्र
'नेयदल' प्रदेश की भौगोलिक पहचान
उत्तर देखें
तटीय एवं समुद्री क्षेत्र
संगम साहित्य
प्रमुख संगम ग्रंथ एवं महाकाव्य
रचनाकार, विषयवस्तु तथा ऐतिहासिक महत्व
संगम ग्रंथ / महाकाव्य रचनाकार व परंपरा विषयवस्तु एवं ऐतिहासिक महत्व
तोल्काप्पियम
उत्तर देखें
तोल्काप्पियर (द्वितीय संगम)
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तमिल व्याकरण, काव्यशास्त्र एवं सामाजिक नियम।
तिरुक्कुरल (कुरल)
उत्तर देखें
तिरुवल्लुवर
उत्तर देखें
तमिल भूमि की बाइबिल; धर्म, अर्थ, काम का प्रतिपादन।
शिलप्पादिकारम
उत्तर देखें
इलंगो अडिगल (चेर राजकुमार)
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कोवलन-कन्नगी की कथा, पट्टिनी पूजा का आधार।
मणिमेखलै
उत्तर देखें
सीत्तलै सत्तनार (बौद्ध व्यापारी)
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कोवलन-माधवी की पुत्री मणिमेखलै का बौद्ध जीवन।
जीवक चिंतामणि
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तिरुतक्कदेव (जैन भिक्षु)
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राजकुमार जीवक की कथा, विवाह ग्रंथ नाम से प्रसिद्ध।

संगम कालीन राजवंश: चोल, चेर और पाण्ड्य

चेर राज्य का मुख्य भौगोलिक क्षेत्र
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आधुनिक केरल एवं तमिलनाडु का भाग
चेर राजवंश का राजकीय चिह्न
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धनुष (Bow)
चेरों की प्रारंभिक राजधानी थी
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वंजी (करूर)
चेरों का प्रसिद्ध बंदरगाह
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मुसिरिस एवं तोंडी
चेर वंश का प्रथम ऐतिहासिक शासक
उत्तर देखें
उदयनजेरल
महाभारत युद्ध के योद्धाओं को भोजन कराने का दावा करने वाला शासक
उत्तर देखें
उदयनजेरल
'इमयावरम्बन' (हिमालय तक सीमा वाला) की उपाधि किसने ली?
उत्तर देखें
नेदुंजेरलादन ने
'लाल चेर' या 'भला चेर' के नाम से प्रसिद्ध शासक
उत्तर देखें
चेर सेनगुट्टुवन
भारत में 'पट्टिनी सम्प्रदाय' (कन्नगी पूजा) की शुरुआत करने वाला शासक
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चेर सेनगुट्टुवन
चोल राज्य का मुख्य भौगोलिक क्षेत्र
उत्तर देखें
कावेरी घाटी एवं कोरोमंडल तट
चोल राजवंश का राजकीय चिह्न
उत्तर देखें
बाघ (Tiger)
चोलों की प्रारंभिक राजधानी
उत्तर देखें
उरैयूर एवं बाद में पुहार
संगम काल का सबसे महान चोल शासक
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करिकाल
प्रसिद्ध 'वेण्णि का युद्ध' किस चोल शासक ने जीता?
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करिकाल
वेण्णि के युद्ध में करिकाल ने किसे हराया?
उत्तर देखें
चेर, पाण्ड्य तथा 11 वेलिर संघ को
कावेरी नदी पर 160 किमी लंबा बांध बनवाने वाला शासक
उत्तर देखें
करिकाल
पुहार (कावेरीपट्टनम) बंदरगाह नगर की स्थापना किसने की?
उत्तर देखें
करिकाल ने
'पट्टिनप्पाले' ग्रंथ में किस चोल शासक की विजयों का वर्णन है?
उत्तर देखें
करिकाल
पाण्ड्य राज्य का मुख्य भौगोलिक क्षेत्र
उत्तर देखें
सुदूर दक्षिण-पूर्वी तमिलनाडु
पाण्ड्य राजवंश का राजकीय चिह्न
उत्तर देखें
मछली (Carp)
पाण्ड्यों की राजधानी कहाँ स्थित थी?
उत्तर देखें
मदुरै
पाण्ड्य राज्य का प्रसिद्ध बंदरगाह
उत्तर देखें
कोरकाई (मोतियों हेतु प्रसिद्ध)
पाण्ड्य राज्य का प्रथम उल्लेख किस विदेशी विवरण में मिलता है?
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मेगस्थनीज की 'इंडिका'
मेगस्थनीज के अनुसार पाण्ड्य राज्य का शासन किसके हाथ में था?
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हेराक्लीज की पुत्री (स्त्री शासन)
पाण्ड्य राज्य किस वस्तु के व्यापार हेतु विश्वप्रसिद्ध था?
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मोती (Pearls)
प्रथम प्रसिद्ध ऐतिहासिक पाण्ड्य शासक
उत्तर देखें
नेडियोंन
समुद्र पूजा की शुरुआत करने का श्रेय किस पाण्ड्य राजा को है?
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नेडियोंन को
'तलैयालंगानम के युद्ध' का महान विजेता पाण्ड्य शासक
उत्तर देखें
नेडुंजेलियन
तलैयालंगानम के युद्ध में नेडुंजेलियन ने किसे हराया?
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चेर, चोल व 5 मित्र राजाओं को
शिलप्पादिकारम में किस पाण्ड्य शासक के अन्याय से मदुरै जली?
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नेडुंजेलियन
'मुदुकुदुमी पेरुवलुदी' पाण्ड्य राजा किस लिए प्रसिद्ध था?
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अनेक वैदिक यज्ञ कराने हेतु
रोम के सम्राट ऑगस्टस के दरबार में राजदूत भेजने वाला राजा
उत्तर देखें
पाण्ड्य राजा (नेडुंजेलियन)
क्षेत्रीय राज्य
चोल, चेर और पाण्ड्य राज्य
राजधानी, प्रतीक, क्षेत्र एवं प्रमुख शासक
राज्य एवं क्षेत्र राजधानी व राजकीय चिह्न प्रमुख शासक एवं विशेषताएँ
चेर राज्य (केरल तट)
उत्तर देखें
वंजी (करूर) | राजकीय चिह्न: धनुष
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सेनगुट्टुवन (लाल चेर), पट्टिनी/कन्नगी पूजा का संस्थापक।
चोल राज्य (कावेरी घाटी)
उत्तर देखें
उरैयूर व पुहार | राजकीय चिह्न: बाघ
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करिकाल (महानतम शासक), वेण्णि युद्ध विजेता, कावेरी बांध निर्माता।
पाण्ड्य राज्य (दक्षिण तमिलनाडु)
उत्तर देखें
मदुरै (कोरकाई बंदरगाह) | राजकीय चिह्न: मछली
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नेडुंजेलियन (तलैयालंगानम विजेता), मोती व्यापार व स्त्री शासन की परंपरा।

संगम कालीन समाज, प्रशासन एवं अर्थव्यवस्था

संगम काल में राजा की सर्वोच्च अदालत को क्या कहते थे?
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मनरम
राजा की सहायता हेतु बनी पांच अधिकारियों की सभा
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ऐम्पेरुंगुलु
आठ प्रतिनिधियों वाली प्रशासनिक संस्था
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एण्पेरायाम
संगम काल में करों की वसूली करने वाले अधिकारी
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वारियारियार
संगम काल में सीमा शुल्क व चुंगी कर कहलाता था
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उल्गु या सुंगम
संगम काल में अनिवार्य भू-राजस्व कर कहलाता था
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करै
स्वेच्छा से दिया जाने वाला उपहार या कर
उत्तर देखें
सम्पाद या काणिक्कै
संगम समाज में विभाजन का मुख्य आधार
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तिणै (भौगोलिक/व्यावसायिक क्षेत्र)
संगम काल में सत्तारूढ़ अथवा अभिजात वर्ग कहलाता था
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अरसर
संगम काल में व्यापारी वर्ग को क्या कहा जाता था?
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वैसियार या वैनिगर
संगम काल में भू-स्वामी या संपन्न किसान कहलाते थे
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वेल्लाल (वेलार)
संगम समाज में निर्धन या कृषि मजदूर कहलाते थे
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कदैसियर
संगम काल में दास या बंधुआ मजदूर कहलाते थे
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अलुम्बई / पुलैयन
संगम समाज में ब्राह्मणों की स्थिति कैसी थी?
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अत्यधिक प्रतिष्ठित एवं सम्मानित
क्या संगम काल में उत्तर भारत जैसी कठोर जाति प्रथा थी?
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नहीं, व्यवस्था अत्यधिक लचीली थी
संगम काल में सती प्रथा का प्रचलन किस वर्ग में था?
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उच्च एवं सैनिक वर्ग में
सती प्रथा को संगम साहित्य में क्या कहा गया?
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तिप्पायदाल
विधवाओं के पुनर्विवाह की स्थिति संगम समाज में थी
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अत्यंत कष्टप्रद एवं हतोत्साहित
संगम काल की दो प्रसिद्ध विदुषी महिलाएं
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अव्वैयार एवं काक्कैपाडिनियार
संगम काल की मुख्य खाद्यान्न फसल
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धान (चावल)
कावेरी घाटी की उर्वरता हेतु प्रसिद्ध कहावत
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जितने में हाथी लेटे, 7 का पेट भरे
संगम काल में भूमि नापने की इकाई
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मा एवं वेलि
उरैयूर नगर किस उद्योग के लिए प्रसिद्ध था?
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मलमल एवं सूती वस्त्र
संगम काल में रात्रिकालीन बाज़ार को कहा जाता था
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अल्लांगडी
दिन के समय लगने वाले बाज़ार को कहते थे
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नालांगडी
सामाजिक संरचना
संगम कालीन समाज, अर्थव्यवस्था व प्रशासन
प्रशासनिक निकाय, सामाजिक वर्ग एवं आर्थिक पहलू
सामाजिक/आर्थिक पहलू प्रमुख व्यवस्था / वर्ग महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य
प्रशासनिक संस्थाएँ
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मनरम, ऐम्पेरुंगुलु, एण्पेरायाम
उत्तर देखें
राजा की निरंकुशता पर अंकुश एवं न्याय व्यवस्था संचालन।
सामाजिक वर्ग संरचना
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अरसर (शासक), वेल्लाल (किसान), कदैसियर (मजदूर)
उत्तर देखें
वर्ण व्यवस्था के बजाय व्यावसायिक एवं भौगोलिक विभाजन।
सभ्यता एवं महिला स्थिति
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अग्निकुंड सती (तिप्पायदाल), विदुषी अव्वैयार
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स्त्रियों को उच्च शिक्षा प्राप्त, परंतु विधवा जीवन कठिन।
कृषि एवं उद्योग
उत्तर देखें
धान मुख्य फसल, उरैयूर सूती वस्त्र केंद्र
उत्तर देखें
मा व वेलि भूमि माप, कावेरी घाटी सर्वाधिक उपजाऊ।

व्यापार, रोमन संबंध, धार्मिक जीवन एवं मुरुगन पूजा

संगम काल में सुदूर दक्षिण का सबसे प्रमुख व्यापारिक भागीदार
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रोमन साम्राज्य
किस ग्रीक ग्रंथ से संगम कालीन बंदरगाहों की जानकारी मिलती है?
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पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी
अरिकामेडु बंदरगाह का पेरिप्लस में नाम
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पोडुके (Poduke)
अरिकामेडु वर्तमान में किस स्थान पर स्थित है?
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पुडुचेरी के समीप
अरिकामेडु से प्राप्त प्रसिद्ध रोमन अवशेष
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एरेटाइन मृद्भांड एवं द्विहत्थी जार
संगम काल में रोमन स्वर्ण सिक्कों के प्रमुख भंडार मिले हैं
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अरिकामेडु एवं कोयंबटूर से
रोम के किस सम्राट का मंदिर मुसिरिस में बनने का उल्लेख है?
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सम्राट ऑगस्टस
मुसिरिस में यवन व्यापारियों की बस्ती कहलाती थी
उत्तर देखें
यवनप्रिय
संगम काल में भारत से रोम को निर्यातित मुख्य वस्तु
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काली मिर्च, सूती वस्त्र, मोती
काली मिर्च को तमिल/संस्कृत में क्या कहा गया?
उत्तर देखें
यवनप्रिय
रोम से भारत में आयात की जाने वाली मुख्य वस्तुएं
उत्तर देखें
सोना, चांदी, मदिरा एवं सीसा
संगम काल में व्यापारिक काफिले का नेता कहलाता था
उत्तर देखें
मासात्थुवन
संगम काल में ग्रीक/रोमन व्यापारियों हेतु प्रयुक्त शब्द
उत्तर देखें
यवन
संगम काल में सुदूर दक्षिण के मुख्य संरक्षक देवता
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मुरुगन (सुब्रमण्यम)
मुरुगन देवता का प्रमुख शस्त्र/प्रतीक
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वेल (भाला)
मुरुगन देवता का वाहन माना जाता है
उत्तर देखें
मयूर एवं मुर्गा
मुरुगन पूजा में किया जाने वाला विशेष नृत्य
उत्तर देखें
वेलन आडल
उत्तर भारत के किस देवता से मुरुगन का तादात्म्य स्थापित हुआ?
उत्तर देखें
कार्तिकेय (स्कंद)
संगम काल में युद्ध की देवी के रूप में पूजित देवी
उत्तर देखें
कोर्रावै
संगम काल में विष्णु देवता को तमिल में क्या कहा गया?
उत्तर देखें
मायावोन या तिरुमाल
इन्द्र देवता के सम्मान में मनाया जाने वाला प्रमुख उत्सव
उत्तर देखें
इन्द्र उत्सव (पुहार में)
संगम काल में वीर सैनिकों की स्मृति में गाड़े गए पत्थर
उत्तर देखें
नडुकल या वीरक्कल
संगम काल में बलि प्रथा की स्थिति
उत्तर देखें
व्यापक रूप से प्रचलित
संगम काल के अंत में आक्रमण करने वाली बाह्य जनजाति
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कलभ्र (Kalabhras)
संगम काल के पश्चात् के काल (300-600 ई.) का नाम
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कलभ्र अंतराल (अंधकार युग)
विदेशी व्यापार
रोमन व्यापार, बंदरगाह एवं व्यापारिक वस्तुएं
प्रमुख तटीय बंदरगाह, निर्यात-आयात एवं रोमन साक्ष्य
बंदरगाह / व्यापारिक केंद्र निर्यात/आयात वस्तुएं रोमन साक्ष्य व विवरण
अरिकामेडु (पोडुके)
उत्तर देखें
निर्यात: मलमल, मोती | आयात: मदिरा, स्वर्ण सिक्के
उत्तर देखें
रोमन बस्ती के अवशेष, एरेटाइन बर्तन व ऑगस्टस के सिक्के।
मुसिरिस (चेर बंदरगाह)
उत्तर देखें
निर्यात: काली मिर्च (यवनप्रिय), हाथीदांत | आयात: सीसा, सोना
उत्तर देखें
ऑगस्टस का मंदिर, यवन व्यापारियों के जहाजों का स्थायी जमावड़ा।
पुहार (कावेरीपट्टनम - चोल)
उत्तर देखें
निर्यात: सूती वस्त्र, मणियाँ | आयात: घोड़े (अरब/रोम)
उत्तर देखें
पेरिप्लस व शिलप्पादिकारम में विशाल जहाजी गोदी का वर्णन।
कोरकाई (पाण्ड्य बंदरगाह)
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निर्यात: मोती (Pearls), शंख | आयात: विदेशी मदिरा
उत्तर देखें
पाण्ड्य मोतियों का अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, प्लिनी द्वारा उल्लेख।
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