भारत पर प्रथम सफल मुस्लिम व अरब आक्रमण का वर्ष
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712 ई.
| आक्रमणकारी व काल | प्रमुख भारतीय अभियान व क्षेत्र | ऐतिहासिक प्रभाव व परिणाम |
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मुहम्मद बिन कासिम
(712–714 ई.) |
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सिंध (देबल, रावर, ब्राह्मणवाद) एवं मुल्तान
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सिंध में अरब शासन की नींव; प्रथम बार जजिया कर लागू; दशमलव व अंक प्रणाली का अरब जगत में प्रसार
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सुबुक्तगीन
(977–997 ई.) |
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पंजाब सीमांत एवं हिंदूशाही राज्य (पेशावर)
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भारत पर प्रथम तुर्क आक्रमण; हिंदूशाही शासक जयपाल पराजित; तुर्कों के भावी अभियानों का मार्ग खुला
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महमूद गजनवी
(1000–1027 ई.) |
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पंजाब, नगरकोट, थानेसर, मथुरा, कन्नौज व सोमनाथ
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17 विध्वंसक आक्रमण; अकूत संपदा की लूट; मंदिरों का विध्वंस; पंजाब का गजनी साम्राज्य में स्थायी विलय
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मुहम्मद गौरी
(1175–1206 ई.) |
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मुल्तान, गुजरात, पंजाब, तराइन (हरियाणा) व चंदावर
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राजपूत शक्तियों का दमन; भारत में स्थायी तुर्की मुस्लिम साम्राज्य (दिल्ली सल्तनत) की वैधानिक स्थापना
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| वर्ष / काल व अभियान | अभियान का लक्ष्य व स्थल | मुख्य घटना एवं ऐतिहासिक परिणाम |
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1001 ई.
(पेशावर का युद्ध) |
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हिंदूशाही राज्य (पेशावर)
शासक: जयपाल
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जयपाल बंदी बना; 2.5 लाख दीनार देकर मुक्त हुआ; ग्लानिवश चिता में आत्मदाह किया
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1008–09 ई.
(वहिंद का युद्ध) |
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हिंदूशाही राज्य (वहिंद)
शासक: आनंदपाल
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राजपूत संयुक्त मोर्चे की पराजय; पंजाब पर तुर्की प्रभुत्व सुदृढ़; तोपों/हाथियों में भगदड़
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1009 ई.
(नगरकोट अभियान) |
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ज्वालामुखी मंदिर
(कांगड़ा, हिमाचल)
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अपरिमित सोने-चांदी व रत्नों की लूट; गजनवी की प्रथम शुद्ध लूटपाट आधारित मंदिर विजय
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1018 ई.
(मथुरा-कन्नौज) |
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गंगा-यमुना दोआब
शासक: राज्यपाल प्रतिहार
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मथुरा के भव्य मंदिरों का विध्वंस; राज्यपाल बिना लड़े भागा; प्रतिहार शक्ति का अंत तय हुआ
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1019–20 ई.
(कालिंजर अभियान) |
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चंदेल साम्राज्य
शासक: विद्याधर चंदेल
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विद्याधर ने गजनवी का कड़ा प्रतिरोध किया; युद्ध अनिर्णायक रहा; दोनों में उपहार व मैत्री संधि
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1025–26 ई.
(सोमनाथ अभियान) |
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सोमनाथ शिव मंदिर
(काठियावाड़, गुजरात)
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भीम प्रथम भागा; 50,000 रक्षक मारे गए; 20 लाख दीनार की लूट; ज्योतिर्लिंग खंडित किया गया
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1027 ई.
(अंतिम अभियान) |
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सिंध-मुल्तान सीमांत
लक्ष्य: खोखर व जाट
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सोमनाथ से वापसी पर लूटने वाले जाटों पर नौका युद्ध में भीषण हमला; गजनवी का अंतिम अभियान
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| अभियान व वर्ष | लक्षित क्षेत्र व शासक | राजनीतिक परिवर्तन व परिणाम |
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मुल्तान व उच्छ
(1175–1178 ई.) |
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करमाथियन शासक
(मुल्तान व सिंध)
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निचले सिंधु क्षेत्र पर गौरी का नियंत्रण; भारत में प्रवेश का आरंभिक आधार निर्मित
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कायदरा (गुजरात)
(1178 ई.) |
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चालुक्य (सोलंकी) वंश
शासक: मूलराज द्वितीय
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गौरी बुरी तरह पराजित होकर भागा; गुजरात मार्ग छोड़कर पंजाब मार्ग अपनाने का निर्णय
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पेशावर व लाहौर
(1179–1186 ई.) |
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गजनवी शासक
खुसरो मलिक (लाहौर)
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गजनवी वंश का पूर्ण उन्मूलन; पंजाब का विलय; तुर्की सीमाएं चौहान राज्य के स्पर्श में आईं
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तराइन का प्रथम युद्ध
(1191 ई.) |
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चौहान साम्राज्य
शासक: पृथ्वीराज चौहान
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गौरी पराजित व घायल हुआ; तुर्क सेना की वापसी; तबरहिंद दुर्ग पर चौहानों का पुनः कब्जा
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तराइन का द्वितीय युद्ध
(1192 ई.) |
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चौहान साम्राज्य
शासक: पृथ्वीराज चौहान
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निर्णायक तुर्क विजय; दिल्ली व अजमेर पर तुर्की आधिपत्य; भारत में मुस्लिम राज्य की स्थापना
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चंदावर का युद्ध
(1194 ई.) |
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गहड़वाल साम्राज्य
शासक: जयचंद (कन्नौज)
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जयचंद वीरगति को प्राप्त; कन्नौज व बनारस पर तुर्क अधिकार; गंगा घाटी का द्वार खुला
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| निर्णायक युद्ध व वर्ष | शामिल पक्ष | निर्णायक परिणाम एवं प्रभाव |
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तराइन का प्रथम युद्ध
(1191 ई.) |
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पृथ्वीराज चौहान तृतीय
बनाम
मुहम्मद गौरी
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राजपूतों की शानदार विजय; गौरी घायल होकर भागा; तुर्कों के हौसले पस्त; 1 वर्ष तक युद्ध विराम
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तराइन का द्वितीय युद्ध
(1192 ई.) |
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पृथ्वीराज चौहान तृतीय
बनाम
मुहम्मद गौरी
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निर्णायक तुर्क विजय; पृथ्वीराज बंदी बने; दिल्ली, हांसी, समाना व अजमेर पर तुर्की झंडा फहराया
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चंदावर का युद्ध
(1194 ई.) |
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जयचंद गहड़वाल (कन्नौज)
बनाम
मुहम्मद गौरी
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जयचंद वीरगति को प्राप्त; गहड़वाल शक्ति नष्ट; बनारस तक तुर्की साम्राज्य का निर्विवाद विस्तार
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कालिंजर का घेरा
(1202–03 ई.) |
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परमर्दिदेव चंदेल
बनाम
कुतुबुद्दीन ऐबक
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ऐबक ने कालिंजर दुर्ग जीता; बुंदेलखंड में तुर्की सत्ता स्थापित; चंदेलों का प्रभाव अत्यंत सीमित हुआ
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नदिया (बंगाल) विजय
(1204–05 ई.) |
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लक्ष्मण सेन (सेन वंश)
बनाम
बख्तियार खिलजी
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लक्ष्मण सेन पूर्वी बंगाल भागे; लखनौती में तुर्क राजधानी बनी; नालंदा-विक्रमशिला महाविहार भस्म
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| आक्रमण का स्वरूप | राजनीतिक एवं आर्थिक प्रभाव | धार्मिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक प्रभाव |
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अरब आक्रमण
(8वीं सदी) |
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सिंध-मुल्तान तक सीमित; भारत के आंतरिक भाग सुरक्षित; जजिया कर का प्रथम प्रयोग; दिरहम सिक्कों का प्रचलन
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भारतीय ज्योतिष, गणित (शून्य) व आयुर्वेद का बगदाद में अनुवाद; खजूर व ऊंट पालन; सांस्कृतिक समन्वय का प्रारंभ
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गजनवी आक्रमण
(11वीं सदी का आरंभ) |
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पंजाब का स्थायी विलय; उत्तर भारतीय सुरक्षा प्राचीर ध्वस्त; अकूत संपदा गजनी स्थानांतरित; राजपूत प्रतिष्ठा को आघात
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भव्य मंदिरों व मूर्तियों का व्यापक विध्वंस; अलबरूनी की 'किताब-उल-हिंद'; लाहौर फारसी साहित्य का नया केंद्र बना
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तुर्क विजय (गौरी)
(12वीं सदी का अंत) |
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राजपूत राज्यों का पतन; दिल्ली सल्तनत की स्थापना; सामंती विकेंद्रीकरण का अंत; केंद्रीयकृत इक्ता व्यवस्था का जन्म
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फारसी राजभाषा बनी; सूफी मत (चिश्ती परंपरा) का प्रसार; नई युद्ध तकनीकें, चरखा, कागज़ व नगरीय क्रांति का सूत्रपात
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