भारत में द्वितीय अफगान (सूर) साम्राज्य के संस्थापक
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शेरशाह सूरी
| सुधार क्षेत्र / विषय | प्रशासनिक स्वरूप एवं विभाग | ऐतिहासिक उद्देश्य व परिणाम |
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केंद्रीय प्रशासन
(4 प्रमुख दीवान) |
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दीवान-ए-विजारत (वित्त), दीवान-ए-आरिज (सैन्य), दीवान-ए-इंशा (पत्राचार) व दीवान-ए-रिसालत (विदेश/धर्म)
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सुल्तान के हाथों में सत्ता का पूर्ण केंद्रीकरण; मंत्रियों को सचिव स्तर का अधिकार देकर त्वरित निर्णय
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स्थानीय शासन
(सरकार व परगना) |
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47 सरकारों (जिलों) में विभाजन; शिकदार-ए-शिकदारान (शांति) व मुंसिफ-ए-मुंसिफान (न्याय); परगने में शिकदार, अमीन, फोतेदार
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सामंती अराजकता का अंत; प्रशासनिक इकाइयों में संतुलन व जनता को स्थानीय स्तर पर त्वरित न्याय
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सैन्य सुधार
(दाग व चेहरा) |
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सैनिकों की सीधी भर्ती, नकद वेतन, घोड़ों की दाग प्रथा, सैनिकों का हुलिया (चेहरा) व नियमित निरीक्षण
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अलाउद्दीन खिलजी की व्यवस्था का पुनरुद्धार; मध्यस्थ सरदारों का अंत व अनुशासित स्थायी केंद्रीय सेना
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गुप्तचर व न्याय व्यवस्था |
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डाक चौकियों के माध्यम से बरीद (गुप्तचर) नेटवर्क; काजी व मीर-अदल; सुल्तान द्वारा निष्पक्ष व्यक्तिगत न्याय
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अपराधों व विद्रोहों की पूर्व सूचना; 'न्याय में किसी सगे-संबंधी या अमीर से कोई रियायत नहीं' की नीति
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| राजस्व तत्व / पद | प्रक्रिया एवं स्वरूप | संबंधित अधिकारी व प्रभाव |
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भूमि पैमाइश
(सिकंदरी गज) |
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सन की रस्सी की जगह 32 अंगुल (39 इंच) के सिकंदरी गज का प्रयोग; मानक बीघा (60×60 गज)
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अमीन (सर्वेक्षक) व पटवारी; भूमि की वास्तविक माप कराकर सटीक क्षेत्रफल पंजीबद्ध किया
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भूमि का वर्गीकरण
(उत्पादकता आधार) |
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भूमि तीन श्रेणियों में विभक्त: उत्तम (अच्छी), मध्यम और निकृष्ट (खराब); औसत उपज निर्धारण
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मुंसिफ व कानूनगो; तीनों की औसत उपज निकालकर मानक राज्य उपज दर तय की गई
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भू-राजस्व दर
(राई प्रणाली) |
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औसत उपज का 1/3 भाग (33.3%) राज्य का हिस्सा; मुल्तान में केवल 1/4 भाग
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शिकदार व आमिल; नकद अथवा अनाज दोनों में भुगतान मान्य, किंतु नकद को सर्वोच्च प्राथमिकता
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पट्टा एवं कबूलियत
(विधिक अनुबंध) |
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पट्टा: सरकार द्वारा किसान को भूमि व कर की लिखित सनद; कबूलियत: किसान द्वारा कर अदायगी की लिखित स्वीकृति
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मध्यस्थों (खूत, मुकद्दम) के शोषण का अंत; किसान और राज्य के बीच सीधा विधिक संबंध
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जरीबाना व महासिलाना
(सर्वेक्षण व संग्रह शुल्क) |
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जरीबाना (सर्वेक्षक शुल्क): 2.5%; महासिलाना (कर संग्रह शुल्क): 5% अतिरिक्त उपकर
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सरकारी राजस्व अमले के संधारण हेतु किसानों से नकद संग्रह; अकाल में पूर्ण कर माफी
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| सड़क / संस्था | विस्तार एवं संरचना | प्रशासनिक, व्यापारिक व डाक महत्व |
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सड़क-ए-आजम
(ग्रांड ट्रंक रोड) |
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सोनारगाँव (बंगाल) से आगरा, दिल्ली, लाहौर होते हुए अटक (सिंधु नदी) तक (~1500 कोस / 2500 किमी)
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साम्राज्य की मुख्य धमनी; सैन्य टुकड़ियों का तीव्र आवागमन; बंगाल से पश्चिमोत्तर सीमांत का सीधा व्यापारिक जुड़ाव
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आगरा से बुरहानपुर मार्ग
(दक्कन राजमार्ग) |
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राजधानी आगरा से धौलपुर, ग्वालियर, नरवर होते हुए बुरहानपुर (खानदेश सीमा) तक
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उत्तर भारत को मालवा व दक्षिण भारत के व्यापारिक केंद्रों से जोड़ने वाला रणनीतिक सैन्य मार्ग
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आगरा से जोधपुर-चित्तौड़ मार्ग
(राजपूताना राजमार्ग) |
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आगरा से फतेहपुर सीकरी, जयपुर, जोधपुर होते हुए चित्तौड़गढ़ दुर्ग तक
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राजपूताना के प्रमुख दुर्गों व राजाओं पर कड़े नियंत्रण एवं गुजरात व्यापार को सुरक्षा प्रदान करना
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लाहौर से मुल्तान मार्ग
(पश्चिमोत्तर मार्ग) |
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पंजाब की राजधानी लाहौर से दक्षिण-पश्चिमी व्यापारिक नगर मुल्तान तक
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बलूचिस्तान, सिंध व कंधार व्यापारिक कारवां की सुरक्षा एवं सीमांत सुरक्षा चौकियों की निगरानी
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सराय एवं डाक चौकियां
(1700 सराय) |
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प्रत्येक 2 कोस (लगभग 6 किमी) पर पक्की सराय; हिंदू-मुस्लिमों हेतु पृथक भोजन-जल प्रबंध; 2 डाक अश्व
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अब्बास खां सरवानी अनुसार 'साम्राज्य की धमनियां'; संदेशवाहकों द्वारा 24 घंटे में सैकड़ों मील डाक परिवहन
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| मुद्रा का नाम / धातु | वजन (ग्रेन) व विनिमय दर | आर्थिक व व्यापारिक महत्व |
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चांदी का रुपया
(मानक रजत सिक्का) |
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178 ग्रेन (173 ग्रेन विशुद्ध चांदी); गोल व चौकोर आकार
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साम्राज्य का आधारभूत मूल्य मापक; ब्रिटिश काल (1835) तक मानक रूप में प्रचलित रहा
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तांबे का दाम
(दैनिक विनिमय सिक्का) |
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380 ग्रेन शुद्ध तांबा; रुपये के साथ 1 : 64 का विनिमय अनुपात
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जनसाधारण के दैनिक लेन-देन, मजदूरी भुगतान व स्थानीय हाट-बाजारों का प्राथमिक माध्यम
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सोने की मोहर
(अशरफी) |
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167 से 169 ग्रेन विशुद्ध स्वर्ण; उच्च मूल्य संचय मुद्रा
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बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक विनिमय, शाही उपहार, नजराना एवं राजकोषीय बचत संचय
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तांबे के उप-विभाजन
(अधेला, पौला, दमड़ी) |
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दाम के उप-विभाजन: अधेला (1/2), पौला (1/4) और दमड़ी (1/8 दाम)
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अत्यंत छोटी दैनिक खरीदारी को सुगम बनाना; मुद्रास्फीति पर प्रभावी नियंत्रण
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23 शाही टकसालें
(द्विभाषी अंकन) |
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सिक्कों पर अरबी में कलमा, सुल्तान का नाम, उपाधि व टकसाल का नाम; देवनागरी में 'श्री शेरशाह'
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मुद्रा जालसाजी पर पूर्ण अंकुश; हिंदू-मुस्लिम प्रजा के मध्य सहज स्वीकार्यता व व्यापार वृद्धि
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| स्मारक व स्थान | निर्माता व वास्तुकार | प्रमुख वास्तुकला विशेषताएं एवं उद्देश्य |
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शेरशाह का मकबरा
(सासाराम, बिहार) |
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शेरशाह सूरी (पूर्ण: इस्लाम शाह)
वास्तुकार: अलीवाल खां
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विशाल कृत्रिम झील के मध्य 30 फीट ऊंचे वर्गाकार चबूतरे पर निर्मित अष्टकोणीय मकबरा; लाल बलुआ पत्थर पर भव्य गुंबद; 'ताजमहल से श्रेष्ठ पौरुष प्रतीक'
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किला-ए-कुहना मस्जिद
(पुराना किला, दिल्ली) |
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शेरशाह सूरी
(1542 ई.)
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पांच मेहराबी द्वारों वाली लाल बलुआ पत्थर व श्वेत संगमरमर की मस्जिद; घोड़े की नालनुमा मेहराबें व उत्कृष्ट सुलेखन; मुगल शैली का अग्रदूत
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पुराना किला (शेरगढ़)
(यमुना तट, दिल्ली) |
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शेरशाह सूरी
(1540–1545 ई.)
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हुमायूं के दीनपनाह को ध्वस्त कर विशाल प्राचीर युक्त सुरक्षित राजप्रासाद; तीन भव्य प्रवेश द्वार (बड़ा दरवाजा, हुमायूं दरवाजा, तलाकी दरवाजा)
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रोहतासगढ़ का नवीन दुर्ग
(झेलम, पंजाब, पाक) |
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शेरशाह सूरी
पर्यवेक्षक: टोडरमल
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पश्चिमोत्तर सीमांत पर विद्रोही घक्खर कबीलों एवं संभावित मुगल प्रत्याक्रमण को रोकने हेतु 4 किमी परिधि वाला विशाल सामरिक पहाड़ी दुर्ग
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शेर मंडल
(पुराना किला, दिल्ली) |
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शेरशाह सूरी
(1541 ई.)
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लाल बलुआ पत्थर से निर्मित दोमंजिला अष्टकोणीय मंडप; सौर वेधशाला व विश्राम कक्ष; कालांतर में हुमायूं का पुस्तकालय जहाँ से गिरकर उसकी मृत्यु हुई
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