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Sher Shah Suri

शेरशाह सूरी का प्रारंभिक जीवन, शिक्षा एवं बिहार में उत्कर्ष

भारत में द्वितीय अफगान (सूर) साम्राज्य के संस्थापक
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शेरशाह सूरी
शेरशाह सूरी का मूल वास्तविक नाम
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फरीद खां
शेरशाह का जन्म वर्ष (अधिकांश इतिहासकारों के अनुसार)
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1472 ई. (या 1486 ई.)
शेरशाह का जन्म स्थल
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बजवाड़ा (होशियारपुर) अथवा नारनौल
शेरशाह के पिता का नाम
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हसन खां सूर
शेरशाह के दादा इब्राहिम सूर का मूल पेशा
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घोड़ों का व्यापार
शेरशाह किस अफगान कबीले से संबंधित थे
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सूर कबीला
हसन खां सूर को कहाँ की जागीर प्राप्त थी
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सासाराम, खवासपुर और टांडा
पिता से अनबन के बाद फरीद ने शिक्षा कहाँ ग्रहण की
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जौनपुर (शीराज-ए-हिंद)
जौनपुर में फरीद ने किन अरबी-फारसी ग्रंथों का अध्ययन किया
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गुलिस्तां, बोस्तां और सिकंदरनामा
फरीद ने सासाराम की जागीर का सफल प्रबंध किस अवधि में किया
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1497 से 1518 ई.
सासाराम के जागीर प्रबंधन ने शेरशाह को किस क्षेत्र का गहरा अनुभव दिया
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भू-राजस्व एवं कृषक समस्याओं का
दक्षिण बिहार के किस सूबेदार ने फरीद को सेवा में रखा
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बहार खां लोहानी (सुल्तान मुहम्मद)
फरीद को 'शेर खां' की उपाधि किसने दी
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बहार खां लोहानी ने
फरीद को 'शेर खां' की पदवी क्यों दी गई
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तलवार से अकेले बाघ मारने पर
बहार खां लोहानी ने शेर खां को किसका शिक्षक (अतालीक) नियुक्त किया
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अपने अल्पवयस्क पुत्र जलाल खां का
बाबर की मुगल सेना में शेर खां ने किस युद्ध में भाग लिया
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चंदेरी का युद्ध (1528 ई.)
बाबर के खेमे में शेर खां ने मुगलों की किस कमजोरी को भांप लिया था
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सैन्य अव्यवस्था व आंतरिक फूट
चुनार दुर्ग के सूबेदार ताज खां की विधवा जिनसे विवाह कर शेर खां को चुनार मिला
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लाड मलिका
शेर खां ने हिंदू राजा से छलपूर्वक बिहार का कौन सा अभेद्य दुर्ग छीना
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रोहतासगढ़ दुर्ग (1538 ई.)
रोहतासगढ़ दुर्ग का रणनीतिक उपयोग शेर खां ने किस हेतु किया
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अपने परिवार व खजाने की सुरक्षा
1534 ई. में सूरजगढ़ के युद्ध में शेर खां ने किसे हराया
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बंगाल के सुल्तान महमूद शाह को
सूरजगढ़ की विजय से शेर खां को क्या लाभ हुआ
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अकूत संपदा व संपूर्ण बिहार पर प्रभुत्व
1538 ई. में हुमायूं के आने से पूर्व शेर खां ने कहाँ की संपत्ति लूटी
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गौड़ (बंगाल की राजधानी)
शेरशाह के प्राथमिक जीवन की सबसे प्रमुख व्यक्तिगत विशेषता
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धैर्य, दूरदर्शिता एवं कुशल कूटनीति
प्रशासनिक एवं सैन्य सुधार
शेरशाह सूरी के प्रमुख प्रशासनिक, भू-राजस्व और सैन्य सुधार
मध्यकालीन भारत में लोक-कल्याणकारी एवं सैन्य राजतंत्र का पुनर्गठन
सुधार क्षेत्र / विषय प्रशासनिक स्वरूप एवं विभाग ऐतिहासिक उद्देश्य व परिणाम
केंद्रीय प्रशासन (4 प्रमुख दीवान)
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दीवान-ए-विजारत (वित्त), दीवान-ए-आरिज (सैन्य), दीवान-ए-इंशा (पत्राचार) व दीवान-ए-रिसालत (विदेश/धर्म)
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सुल्तान के हाथों में सत्ता का पूर्ण केंद्रीकरण; मंत्रियों को सचिव स्तर का अधिकार देकर त्वरित निर्णय
स्थानीय शासन (सरकार व परगना)
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47 सरकारों (जिलों) में विभाजन; शिकदार-ए-शिकदारान (शांति) व मुंसिफ-ए-मुंसिफान (न्याय); परगने में शिकदार, अमीन, फोतेदार
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सामंती अराजकता का अंत; प्रशासनिक इकाइयों में संतुलन व जनता को स्थानीय स्तर पर त्वरित न्याय
सैन्य सुधार (दाग व चेहरा)
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सैनिकों की सीधी भर्ती, नकद वेतन, घोड़ों की दाग प्रथा, सैनिकों का हुलिया (चेहरा) व नियमित निरीक्षण
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अलाउद्दीन खिलजी की व्यवस्था का पुनरुद्धार; मध्यस्थ सरदारों का अंत व अनुशासित स्थायी केंद्रीय सेना
गुप्तचर व न्याय व्यवस्था
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डाक चौकियों के माध्यम से बरीद (गुप्तचर) नेटवर्क; काजी व मीर-अदल; सुल्तान द्वारा निष्पक्ष व्यक्तिगत न्याय
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अपराधों व विद्रोहों की पूर्व सूचना; 'न्याय में किसी सगे-संबंधी या अमीर से कोई रियायत नहीं' की नीति

हुमायूं से निर्णायक संघर्ष, साम्राज्य विस्तार एवं मृत्यु

चौसा का ऐतिहासिक युद्ध किस तिथि को लड़ा गया
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26 जून 1539
चौसा के युद्ध में शेर खां ने हुमायूं की सेना पर किस समय धावा बोला
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भोर के समय अचानक
चौसा विजय के उपरांत शेर खां ने कौन सी शाही पदवी धारण की
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शेरशाह सुल्तान-ए-आदिल
चौसा विजय के बाद शेरशाह ने अपने नाम का क्या कराया
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खुत्बा पढ़वाया और सिक्के ढाले
कन्नौज या बिलग्राम का निर्णायक युद्ध किस तिथि को लड़ा गया
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17 मई 1540
कन्नौज के युद्ध में हुमायूं के साथ कौन से दो भाई लड़े
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अस्करी और हिंदाल
कन्नौज विजय के पश्चात शेरशाह ने किन दो राजधानियों पर अधिकार किया
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आगरा और दिल्ली
दिल्ली के सिंहासन पर शेरशाह का औपचारिक राज्याभिषेक वर्ष
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1540 ई. (68 वर्ष की आयु में)
1541 ई. में बंगाल में विद्रोह रोकने हेतु शेरशाह ने क्या प्रशासनिक नवाचार किया
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बंगाल को 19 सरकारों (जिलों) में बांटा
बंगाल का असैनिक प्रमुख (अमीन-ए-बंगाल) किसे नियुक्त किया गया
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काजी फजीलत
काजी फजीलत को उनकी न्यायप्रियता के कारण जनता ने क्या व्यंग्य उपाधि दी
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'आमील-ए-फजीहत'
1542 ई. में शेरशाह ने मालवा के किस शासक को आत्मसमर्पण हेतु विवश किया
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मल्लू खां (कादिर शाह)
1543 ई. में रायसेन के किस राजपूत शासक के विरुद्ध शेरशाह ने अभियान किया
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पूरनमल
शेरशाह के चरित्र पर कौन सा अभियान एक अमिट कलंक माना जाता है
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रायसेन अभियान (कुरान की शपथ तोड़ना)
रायसेन में राजपूत स्त्रियों ने आत्मसम्मान हेतु क्या किया
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सामूहिक जौहर
1544 ई. में मारवाड़ के किस राठौड़ शासक से शेरशाह का भीषण युद्ध हुआ
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राव मालदेव
शेरशाह और मालदेव की सेनाओं के बीच लड़ा गया ऐतिहासिक युद्ध
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गिरि-सुमेल (जैतारण) का युद्ध
गिरि-सुमेल के युद्ध में अप्रतिम वीरता दिखाने वाले दो वीर राजपूत सेनापति
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जैता और कूंपा
'मैंने मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान का साम्राज्य लगभग खो दिया था' किसका कथन है
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शेरशाह सूरी (गिरि-सुमेल युद्ध बाद)
शेरशाह का अंतिम सैन्य अभियान (1545 ई.) किस दुर्ग के विरुद्ध था
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कालिंजर दुर्ग (बुंदेलखंड)
कालिंजर के घेरे के समय वहाँ के चंदेल शासक कौन थे
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कीरत सिंह
कालिंजर दुर्ग की दीवार से टकराकर फटने वाला आग्नेयास्त्र (रॉकेट)
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उक्का नामक आग्नेयास्त्र
उक्का के बारूद ढेर में आग लगने से शेरशाह की मृत्यु किस तिथि को हुई
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22 मई 1545
मृत्यु पूर्व शेरशाह ने कौन सा अंतिम शुभ समाचार सुना
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कालिंजर दुर्ग पर विजय का
शेरशाह का उत्तराधिकारी पुत्र जिसने 'इस्लाम शाह' की उपाधि ली
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जलाल खां (इस्लाम शाह सूर)
भू-राजस्व प्रबंधन
शेरशाह की भू-राजस्व व्यवस्था — मापन, वर्गीकरण एवं कर निर्धारण
रैयतवाड़ी एवं जब्ती प्रणाली का अग्रदूत स्वरूप
राजस्व तत्व / पद प्रक्रिया एवं स्वरूप संबंधित अधिकारी व प्रभाव
भूमि पैमाइश (सिकंदरी गज)
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सन की रस्सी की जगह 32 अंगुल (39 इंच) के सिकंदरी गज का प्रयोग; मानक बीघा (60×60 गज)
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अमीन (सर्वेक्षक) व पटवारी; भूमि की वास्तविक माप कराकर सटीक क्षेत्रफल पंजीबद्ध किया
भूमि का वर्गीकरण (उत्पादकता आधार)
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भूमि तीन श्रेणियों में विभक्त: उत्तम (अच्छी), मध्यम और निकृष्ट (खराब); औसत उपज निर्धारण
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मुंसिफ व कानूनगो; तीनों की औसत उपज निकालकर मानक राज्य उपज दर तय की गई
भू-राजस्व दर (राई प्रणाली)
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औसत उपज का 1/3 भाग (33.3%) राज्य का हिस्सा; मुल्तान में केवल 1/4 भाग
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शिकदार व आमिल; नकद अथवा अनाज दोनों में भुगतान मान्य, किंतु नकद को सर्वोच्च प्राथमिकता
पट्टा एवं कबूलियत (विधिक अनुबंध)
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पट्टा: सरकार द्वारा किसान को भूमि व कर की लिखित सनद; कबूलियत: किसान द्वारा कर अदायगी की लिखित स्वीकृति
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मध्यस्थों (खूत, मुकद्दम) के शोषण का अंत; किसान और राज्य के बीच सीधा विधिक संबंध
जरीबाना व महासिलाना (सर्वेक्षण व संग्रह शुल्क)
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जरीबाना (सर्वेक्षक शुल्क): 2.5%; महासिलाना (कर संग्रह शुल्क): 5% अतिरिक्त उपकर
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सरकारी राजस्व अमले के संधारण हेतु किसानों से नकद संग्रह; अकाल में पूर्ण कर माफी

भू-राजस्व प्रणाली, पट्टा-कबूलियत, जरीबाना एवं अधिकारी

शेरशाह की भू-राजस्व व्यवस्था का मूल आधार क्या था
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रैयतवाड़ी व्यवस्था (किसानों से सीधा संपर्क)
शेरशाह की भूमि नाप प्रणाली को किस नाम से जाना गया
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जब्ती प्रणाली या राई व्यवस्था
भूमि पैमाइश हेतु शेरशाह द्वारा प्रयुक्त मानक गज
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सिकंदरी गज (32 अंगुल)
सिकंदरी गज में नाप हेतु प्रयुक्त जरीब किसकी बनी थी
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सन की डंडी (रस्सी)
शेरशाह के काल में भूमि माप की मानक इकाई
उत्तर देखें
बीघा (60×60 वर्ग गज)
उपज के आधार पर भूमि को कितने वर्गों में बांटा गया था
उत्तर देखें
तीन वर्गों में (उत्तम, मध्यम, निकृष्ट)
शेरशाह द्वारा निर्धारित सामान्य भू-राजस्व की दर
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औसत उपज का 1/3 भाग
शेरशाह के साम्राज्य में किस प्रांत में लगान 1/4 भाग लिया जाता था
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मुल्तान में
फसलों की विभिन्न दरों की वार्षिक आधिकारिक मूल्य सूची को क्या कहते थे
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राई
सरकार द्वारा किसान को दी जाने वाली भूमि अधिकार पत्रिका
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पट्टा
किसान द्वारा निर्धारित कर चुकाने हेतु दिया गया लिखित सहमति पत्र
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कबूलियत
पट्टा और कबूलियत प्रथा का सबसे बड़ा प्रशासनिक लाभ
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भ्रष्टाचार व अनिश्चितता की समाप्ति
भूमि सर्वेक्षण शुल्क के रूप में लिया जाने वाला उपकर
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जरीबाना (2.5%)
कर संग्रह शुल्क के रूप में किसानों से लिया जाने वाला उपकर
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महासिलाना (5%)
शेरशाह के भू-राजस्व सुधारों का प्रमुख सहयोगी विद्वान जो बाद में अकबर का वजीर बना
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राजा टोडरमल
अकबर की 'दहसाला बंदोबस्त' का अग्रगामी किसे माना जाता है
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शेरशाह सूरी की राई प्रणाली को
अकाल या सूखे के समय किसानों को राज्य द्वारा दिया जाने वाला अग्रिम ऋण
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तकावी ऋण
शेरशाह के साम्राज्य में कुल कितनी सरकारें (जिले) थीं
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47 सरकारें (बंगाल को छोड़कर)
सरकार (जिले) में कानून-व्यवस्था व सैन्य नियंत्रण का प्रधान अधिकारी
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शिकदार-ए-शिकदारान
सरकार (जिले) का मुख्य दीवानी व न्यायिक अधिकारी
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मुंसिफ-ए-मुंसिफान
परगने (तहसील) में शांति व्यवस्था का प्रमुख अधिकारी
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शिकदार
परगने में भू-राजस्व निर्धारण करने वाला अधिकारी
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मुंसिफ (अमीन)
परगने का खजांची (कोषाध्यक्ष)
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पोतदार (फोतेदार)
परगने में फारसी और हिंदी में हिसाब-किताब रखने वाले लिपिक
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कारकुन
गाँव स्तर पर लगान वसूलने और अभिलेख रखने वाले पारंपरिक अधिकारी
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मुकद्दम और पटवारी
सड़क एवं संचार व्यवस्था
शेरशाह की सड़क, सराय और डाक व्यवस्था — व्यापारिक व सैन्य महत्व
साम्राज्य को जोड़ने वाले चार राष्ट्रीय राजमार्ग एवं 1700 सरायों का संजाल
सड़क / संस्था विस्तार एवं संरचना प्रशासनिक, व्यापारिक व डाक महत्व
सड़क-ए-आजम (ग्रांड ट्रंक रोड)
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सोनारगाँव (बंगाल) से आगरा, दिल्ली, लाहौर होते हुए अटक (सिंधु नदी) तक (~1500 कोस / 2500 किमी)
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साम्राज्य की मुख्य धमनी; सैन्य टुकड़ियों का तीव्र आवागमन; बंगाल से पश्चिमोत्तर सीमांत का सीधा व्यापारिक जुड़ाव
आगरा से बुरहानपुर मार्ग (दक्कन राजमार्ग)
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राजधानी आगरा से धौलपुर, ग्वालियर, नरवर होते हुए बुरहानपुर (खानदेश सीमा) तक
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उत्तर भारत को मालवा व दक्षिण भारत के व्यापारिक केंद्रों से जोड़ने वाला रणनीतिक सैन्य मार्ग
आगरा से जोधपुर-चित्तौड़ मार्ग (राजपूताना राजमार्ग)
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आगरा से फतेहपुर सीकरी, जयपुर, जोधपुर होते हुए चित्तौड़गढ़ दुर्ग तक
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राजपूताना के प्रमुख दुर्गों व राजाओं पर कड़े नियंत्रण एवं गुजरात व्यापार को सुरक्षा प्रदान करना
लाहौर से मुल्तान मार्ग (पश्चिमोत्तर मार्ग)
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पंजाब की राजधानी लाहौर से दक्षिण-पश्चिमी व्यापारिक नगर मुल्तान तक
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बलूचिस्तान, सिंध व कंधार व्यापारिक कारवां की सुरक्षा एवं सीमांत सुरक्षा चौकियों की निगरानी
सराय एवं डाक चौकियां (1700 सराय)
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प्रत्येक 2 कोस (लगभग 6 किमी) पर पक्की सराय; हिंदू-मुस्लिमों हेतु पृथक भोजन-जल प्रबंध; 2 डाक अश्व
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अब्बास खां सरवानी अनुसार 'साम्राज्य की धमनियां'; संदेशवाहकों द्वारा 24 घंटे में सैकड़ों मील डाक परिवहन

सड़क-ए-आजम, सराय, डाक व्यवस्था, रुपया एवं दाम

शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक राजमार्ग
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सड़क-ए-आजम (शाही सड़क)
सड़क-ए-आजम का विस्तार कहाँ से कहाँ तक था
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सोनारगाँव (बंगाल) से अटक (सिंधु तट)
ब्रिटिश काल में लॉर्ड ऑकलैंड ने सड़क-ए-आजम का नया नाम क्या रखा
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ग्रांड ट्रंक रोड (GT Road)
शेरशाह ने अपने साम्राज्य में कुल कितने प्रमुख राजमार्ग बनवाए
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चार प्रमुख राजमार्ग
शेरशाह ने यात्रियों व व्यापारियों की सुविधा हेतु कितनी सरायों का निर्माण कराया
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लगभग 1700 सराय
सड़क के दोनों ओर कितनी दूरी पर सरायों का निर्माण किया गया था
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प्रत्येक दो कोस (लगभग 6 किमी) पर
सरायों में हिंदू यात्रियों के भोजन व जल प्रबंध हेतु किसकी नियुक्ति थी
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ब्राह्मण रसोइयों की
इतिहासकार अब्बास खां सरवानी ने सरायों को क्या संज्ञा दी
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'साम्राज्य के शरीर की धमनियां'
सराय किस महत्वपूर्ण प्रशासनिक सेवा के केंद्र के रूप में भी कार्य करती थीं
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डाक चौकियों के रूप में
प्रत्येक सराय में हर समय कितने तेज दौड़ने वाले अश्व तैनात रहते थे
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दो डाक अश्व
मार्गों पर चोरी या डकैती होने पर किसे व्यक्तिगत उत्तरदायी माना जाता था
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स्थानीय मुकद्दम (ग्राम प्रधान) को
चोर न पकड़े जाने पर मुकद्दम को क्या दंड दिया जाता था
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स्वयं हर्जाना भरना अथवा मृत्युदंड
व्यापारियों के माल की पूर्ण सुरक्षा के कारण इतिहासकार सरवानी का कथन
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'वृद्धा सोने से भरी टोकरी लेकर भी सुरक्षित घूम सकती थी'
शेरशाह ने साम्राज्य में चुंगी कर (जकात) केवल किन दो स्थानों पर निर्धारित किया
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प्रवेश स्थल (बंगाल/सिंध) एवं बिक्री स्थल पर
शेरशाह सूरी द्वारा आरंभ किया गया मानक शुद्ध चांदी का सिक्का
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रुपया
शेरशाह के चांदी के रुपये का कुल वजन कितना था
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178 ग्रेन
रुपये में शुद्ध चांदी की मात्रा कितनी थी
उत्तर देखें
173 ग्रेन शुद्ध चांदी
शेरशाह द्वारा जारी किया गया मानक तांबे का सिक्का
उत्तर देखें
दाम
तांबे के दाम का कुल मानक वजन कितना था
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380 ग्रेन
चांदी के रुपये और तांबे के दाम में वैधानिक विनिमय अनुपात
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1 : 64 (एक रुपया = 64 दाम)
शेरशाह द्वारा जारी सोने का सिक्का क्या कहलाता था
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मोहर या अशरफी (169 ग्रेन)
शेरशाह के सिक्कों पर उसका नाम किस भारतीय लिपि में भी अंकित होता था
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देवनागरी लिपि में
शेरशाह के साम्राज्य में कुल कितनी सरकारी टकसालें कार्यरत थीं
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23 टकसालें
आधुनिक भारतीय मुद्रा प्रणाली का जनक किस मध्यकालीन शासक को माना जाता है
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शेरशाह सूरी को (ब्रिटिश काल तक रुपया मान्य)
वि. ए. स्मिथ के अनुसार शेरशाह की मुद्रा व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता
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धातु की शुद्धता व मानकीकरण
मुद्रा सुधार
शेरशाह कालीन मुद्रा व्यवस्था — रुपया, दाम एवं उनकी आर्थिक भूमिका
मिश्रित धातु सिक्कों का उन्मूलन एवं शुद्ध द्वि-धात्विक मुद्रा प्रणाली
मुद्रा का नाम / धातु वजन (ग्रेन) व विनिमय दर आर्थिक व व्यापारिक महत्व
चांदी का रुपया (मानक रजत सिक्का)
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178 ग्रेन (173 ग्रेन विशुद्ध चांदी); गोल व चौकोर आकार
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साम्राज्य का आधारभूत मूल्य मापक; ब्रिटिश काल (1835) तक मानक रूप में प्रचलित रहा
तांबे का दाम (दैनिक विनिमय सिक्का)
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380 ग्रेन शुद्ध तांबा; रुपये के साथ 1 : 64 का विनिमय अनुपात
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जनसाधारण के दैनिक लेन-देन, मजदूरी भुगतान व स्थानीय हाट-बाजारों का प्राथमिक माध्यम
सोने की मोहर (अशरफी)
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167 से 169 ग्रेन विशुद्ध स्वर्ण; उच्च मूल्य संचय मुद्रा
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बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक विनिमय, शाही उपहार, नजराना एवं राजकोषीय बचत संचय
तांबे के उप-विभाजन (अधेला, पौला, दमड़ी)
उत्तर देखें
दाम के उप-विभाजन: अधेला (1/2), पौला (1/4) और दमड़ी (1/8 दाम)
उत्तर देखें
अत्यंत छोटी दैनिक खरीदारी को सुगम बनाना; मुद्रास्फीति पर प्रभावी नियंत्रण
23 शाही टकसालें (द्विभाषी अंकन)
उत्तर देखें
सिक्कों पर अरबी में कलमा, सुल्तान का नाम, उपाधि व टकसाल का नाम; देवनागरी में 'श्री शेरशाह'
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मुद्रा जालसाजी पर पूर्ण अंकुश; हिंदू-मुस्लिम प्रजा के मध्य सहज स्वीकार्यता व व्यापार वृद्धि

सैन्य व्यवस्था, वास्तुकला, सासाराम मकबरा एवं सूर साम्राज्य का अंत

शेरशाह ने सेना में भ्रष्टाचार रोकने हेतु अलाउद्दीन खिलजी की कौन सी प्रथाएं पुनः शुरू कीं
उत्तर देखें
दाग और चेहरा (हुलिया) प्रथा
घोड़ों पर शाही मुहर दागने की पद्धति क्या कहलाती थी
उत्तर देखें
दाग प्रथा
सैनिकों का विस्तृत शारीरिक पहचान पत्र दर्ज करने की प्रथा
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चेहरा या हुलिया प्रथा
शेरशाह अपने सैनिकों को वेतन किस रूप में देता था
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सीधा नकद वेतन
सैनिकों की व्यक्तिगत भर्ती और पदोन्नति का कार्य कौन करता था
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शेरशाह स्वयं
शेरशाह की स्थायी सेना में मुख्य अंग क्या थे
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1.5 लाख घुड़सवार, 25,000 पैदल व 5,000 हाथी
पश्चिमोत्तर सीमा पर घक्खर लड़ाकों और मुगलों को रोकने हेतु निर्मित विशाल दुर्ग
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रोहतासगढ़ का नया किला (झेलम, पाकिस्तान)
दिल्ली में हुमायूं के दीनपनाह को तोड़कर शेरशाह ने कौन सा किला बनवाया
उत्तर देखें
पुराना किला (शेरगढ़)
दिल्ली के पुराने किले के भीतर शेरशाह द्वारा निर्मित प्रसिद्ध मस्जिद
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किला-ए-कुहना मस्जिद (1542 ई.)
किला-ए-कुहना मस्जिद किस स्थापत्य काल की सर्वश्रेष्ठ कृति मानी जाती है
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लोदी और मुगल शैली का संक्रमण काल
पुराने किले के परिसर में शेरशाह द्वारा बनवाया गया अष्टकोणीय दोमंजिला मंडप
उत्तर देखें
शेर मंडल (पुस्तकालय भवन)
शेरशाह सूरी का विश्वप्रसिद्ध मकबरा कहाँ स्थित है
उत्तर देखें
सासाराम (रोहतास जिला, बिहार)
सासाराम मकबरे की सबसे अनूठी भौगोलिक व स्थापत्य विशेषता
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विशाल कृत्रिम झील के बीच निर्मित
सासाराम मकबरे का मुख्य वास्तुकार कौन था
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मीर मुहम्मद अलीवाल खां
सासाराम मकबरा किस ज्यामितीय आकार में निर्मित है
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अष्टकोणीय (ऊंचे चबूतरे पर)
कनिंघम ने सासाराम के मकबरे की तुलना किससे करते हुए उसे श्रेष्ठ बताया
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ताजमहल से भी अधिक भव्य
शेरशाह के दरबारी इतिहासकार जिन्होंने 'तारीख-ए-शेरशाही' लिखी
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अब्बास खां सरवानी
अब्बास खां सरवानी ने तारीख-ए-शेरशाही किसकी आज्ञा से लिखी
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मुगल सम्राट अकबर की आज्ञा से
मलिक मुहम्मद जायसी ने अपना अमर महाकाव्य 'पद्मावत' (1540 ई.) किसके शासनकाल में पूरा किया
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शेरशाह सूरी के काल में
शेरशाह का योग्य पुत्र जिसने कानून संहिता बनाई और मानकीकरण किया
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इस्लाम शाह सूर (1545–1554 ई.)
इस्लाम शाह ने सैन्य व्यवस्था में किन दशमलव टुकड़ियों का गठन किया
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50, 200, 250 और 500 की टुकड़ियां
सूर वंश का अंतिम शासक जिसे हुमायूं ने 1555 ई. में सरहिंद के युद्ध में हराया
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सिकंदर शाह सूरी
आदिल शाह सूर का विख्यात हिंदू सेनापति जो 22 युद्धों का विजेता था
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हेमू (हेमचंद्र विक्रमादित्य)
इतिहासकार कीन ने शेरशाह के प्रशासनिक सुधारों पर क्या टिप्पणी की
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'किसी भी सरकार ने इतनी बुद्धिमत्ता नहीं दिखाई'
मुगल प्रशासनिक ढांचे और अकबर के सुधारों का 'सच्चा पथ-प्रदर्शक' किसे माना जाता है
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शेरशाह सूरी को
स्थापत्य धरोहर
शेरशाह सूरी से संबंधित प्रमुख स्थापत्य स्मारक, स्थान और विशेषताएं
इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के संक्रमणकालीन उत्कृष्ट प्रतिमान
स्मारक व स्थान निर्माता व वास्तुकार प्रमुख वास्तुकला विशेषताएं एवं उद्देश्य
शेरशाह का मकबरा (सासाराम, बिहार)
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शेरशाह सूरी (पूर्ण: इस्लाम शाह) वास्तुकार: अलीवाल खां
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विशाल कृत्रिम झील के मध्य 30 फीट ऊंचे वर्गाकार चबूतरे पर निर्मित अष्टकोणीय मकबरा; लाल बलुआ पत्थर पर भव्य गुंबद; 'ताजमहल से श्रेष्ठ पौरुष प्रतीक'
किला-ए-कुहना मस्जिद (पुराना किला, दिल्ली)
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शेरशाह सूरी (1542 ई.)
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पांच मेहराबी द्वारों वाली लाल बलुआ पत्थर व श्वेत संगमरमर की मस्जिद; घोड़े की नालनुमा मेहराबें व उत्कृष्ट सुलेखन; मुगल शैली का अग्रदूत
पुराना किला (शेरगढ़) (यमुना तट, दिल्ली)
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शेरशाह सूरी (1540–1545 ई.)
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हुमायूं के दीनपनाह को ध्वस्त कर विशाल प्राचीर युक्त सुरक्षित राजप्रासाद; तीन भव्य प्रवेश द्वार (बड़ा दरवाजा, हुमायूं दरवाजा, तलाकी दरवाजा)
रोहतासगढ़ का नवीन दुर्ग (झेलम, पंजाब, पाक)
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शेरशाह सूरी पर्यवेक्षक: टोडरमल
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पश्चिमोत्तर सीमांत पर विद्रोही घक्खर कबीलों एवं संभावित मुगल प्रत्याक्रमण को रोकने हेतु 4 किमी परिधि वाला विशाल सामरिक पहाड़ी दुर्ग
शेर मंडल (पुराना किला, दिल्ली)
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शेरशाह सूरी (1541 ई.)
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लाल बलुआ पत्थर से निर्मित दोमंजिला अष्टकोणीय मंडप; सौर वेधशाला व विश्राम कक्ष; कालांतर में हुमायूं का पुस्तकालय जहाँ से गिरकर उसकी मृत्यु हुई
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