चौरी-चौरा कांड के बाद असहयोग आंदोलन वापस लेने पर राष्ट्रीय राजनीति में क्या स्थिति उत्पन्न हुई
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गंभीर राजनीतिक शून्यता व निराशा
| घटक / आयाम | संस्थापक व स्वरूप | मुख्य रणनीति एवं उपलब्धियां |
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स्थापना व नेतृत्व |
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1 जनवरी 1923 (इलाहाबाद);
संस्थापक: सी. आर. दास (अध्यक्ष) व मोतीलाल नेहरू (सचिव)
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कांग्रेस के आंतरिक अंग के रूप में गठन; विधानमंडलों में प्रवेश कर द्वैध शासन को ध्वस्त करना
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1923 के चुनाव परिणाम |
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केंद्रीय विधानसभा की 101 निर्वाचित सीटों में से 42 पर शानदार विजय
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मध्य प्रांत में स्पष्ट पूर्ण बहुमत; बंगाल में सबसे बड़ा एकल दल; बंबई व यूपी में संतोषजनक स्थिति
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केंद्रीय सभा में विधायी उपलब्धियां |
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जिन्ना (इंडिपेंडेंट) व मालवीय के साथ मिलकर 'नेशनलिस्ट पार्टी' साझा मोर्चा बनाया
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1924 के बजट को खारिज किया; दमनकारी कानूनों को रद्द करने के प्रस्ताव पारित; मूडीमैन समिति का गठन
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विट्ठलभाई पटेल का निर्वाचन |
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24 अगस्त 1925 को केंद्रीय विधानसभा के प्रथम निर्वाचित भारतीय स्पीकर बने
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सरकारी प्रत्याशी टी. ग्राहम को पराजित किया; 1928 में पब्लिक सेफ्टी बिल को निर्णायक मत से गिराया
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विभाजन एवं पतन |
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1925 में दास के निधन बाद 'प्रत्युत्तरवादी' (लाला लाजपत, केलकर, जयकर) अलग हुए
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एस. बी. तांबे द्वारा मंत्री पद स्वीकारना; 1926 चुनावों में पराजय; 1930 में सविनय अवज्ञा में पुनः विलय
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| वर्ष व कालक्रम | ऐतिहासिक घटना | प्रमुख विवरण एवं प्रभाव |
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1 जनवरी 1923 |
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स्वराज पार्टी की स्थापना (इलाहाबाद)
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सी. आर. दास व मोतीलाल नेहरू द्वारा गठन; विधान परिषदों में प्रवेश कर सरकार का संवैधानिक गतिरोध करने का लक्ष्य
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नवंबर 1923 |
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केंद्रीय व प्रांतीय विधानसभा चुनाव
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स्वराजियों की उल्लेखनीय सफलता; केंद्रीय विधानसभा में 42 सीटें; मध्य प्रांत में पूर्ण बहुमत; बंगाल में सबसे बड़ा दल
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24 अगस्त 1925 |
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विट्ठलभाई पटेल का स्पीकर चुना जाना
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केंद्रीय विधानसभा के प्रथम भारतीय अध्यक्ष बने; ब्रिटिश प्रत्याशी को 2 मतों से हराया; विधायी सर्वोच्चता स्थापित
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8 नवंबर 1927 |
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साइमन कमीशन की औपचारिक घोषणा
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ब्रिटिश प्रधानमंत्री बाल्डविन द्वारा नियुक्ति; 7 सदस्यीय श्वेत आयोग; 1919 के एक्ट की समीक्षा हेतु 2 वर्ष पूर्व गठन
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3 फरवरी 1928 |
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साइमन कमीशन का भारत आगमन (बंबई)
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काले झंडे दिखाकर देशव्यापी हड़ताल; 'साइमन गो बैक' के नारे; मद्रास कांग्रेस (1927) द्वारा पूर्ण बहिष्कार का निर्णय
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10 अगस्त 1928 |
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नेहरू रिपोर्ट की प्रस्तुति (लखनऊ)
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मोतीलाल नेहरू समिति द्वारा तैयार प्रथम भारतीय संविधान प्रारूप; डोमिनियन स्टेटस व 19 मौलिक अधिकारों की मांग
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30 अक्टूबर 1928 |
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लाहौर में साइमन विरोधी लाठीचार्ज
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सांडर्स के लाठी प्रहार से लाला लाजपत राय गंभीर घायल; 17 नवंबर को शहादत; भगत सिंह द्वारा सांडर्स वध (17 दिसंबर)
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मार्च 1929 |
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जिन्ना के 14 सूत्रों की घोषणा (दिल्ली)
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नेहरू रिपोर्ट की अस्वीकृति उपरांत मुस्लिम लीग के 14 सूत्री सांप्रदायिक दावे; मुस्लिम पृथक निर्वाचन पर दृढ़ता
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31 दिसंबर 1929 |
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लाहौर कांग्रेस में 'पूर्ण स्वराज' संकल्प
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रावी तट पर जवाहरलाल नेहरू द्वारा तिरंगा फहराया गया; 26 जनवरी 1930 को प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय
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| दस्तावेज / आयोग व वर्ष | पृष्ठभूमि एवं प्रमुख प्रावधान | प्रतिक्रिया एवं राजनीतिक परिणाम |
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साइमन कमीशन
(नवंबर 1927 / मई 1930) |
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1919 एक्ट की समीक्षा हेतु 7 सदस्यीय श्वेत आयोग; प्रांतों में द्वैध शासन समाप्ति व उत्तरदायी शासन की सिफारिश
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भारतीयों की गैर-मौजूदगी पर देशव्यापी बहिष्कार; लालाजी की शहादत; गोलमेज सम्मेलनों व 1935 के एक्ट का आधार बना
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नेहरू रिपोर्ट
(10 अगस्त 1928) |
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बर्कनहेड की चुनौती पर सर्वदलीय समिति का गठन; डोमिनियन स्टेटस, 19 मौलिक अधिकार, संयुक्त निर्वाचन, भाषाई प्रांत
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युवाओं (नेहरू-सुभाष) द्वारा पूर्ण स्वराज की मांग; मुस्लिम लीग व हिंदू महासभा से असहमति; कलकत्ता में 1 वर्ष की मोहलत
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जिन्ना के 14 सूत्र
(मार्च 1929 ई.) |
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नेहरू रिपोर्ट द्वारा पृथक निर्वाचन रद्द करने के विरोध में लीग के दिल्ली अधिवेशन में 14 सूत्री मांग पत्र प्रस्तुत
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कमजोर केंद्र व प्रांतों को अवशिष्ट शक्तियां; 1/3 मुस्लिम आरक्षण; कांग्रेस द्वारा अस्वीकार; सांप्रदायिक खाई अत्यधिक गहरी हुई
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| लाहौर अधिवेशन का पहलू | विशिष्ट निर्णय एवं प्रस्ताव | ऐतिहासिक महत्व एवं प्रभाव |
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अध्यक्ष पद व नेतृत्व |
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दिसंबर 1929, लाहौर (रावी तट);
अध्यक्ष: पंडित जवाहरलाल नेहरू (गांधीजी के आग्रह पर)
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युवा नेतृत्व का उदय; नेहरू ने स्वयं को समाजवादी व गणतंत्रवादी घोषित कर आंदोलन को नई ऊर्जा दी
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पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव |
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31 दिसंबर 1929 की मध्यरात्रि को 'पूर्ण स्वराज' (Complete Independence) का ऐतिहासिक संकल्प स्वीकृत
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नेहरू रिपोर्ट की 'डोमिनियन स्टेटस' की मांग निरस्त; पूर्ण स्वतंत्रता ही कांग्रेस का एकमात्र घोषित राष्ट्रीय लक्ष्य बना
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तिरंगा ध्वज का फहराया जाना |
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31 दिसंबर 1929 की रात 12 बजे रावी नदी के तट पर पंडित नेहरू द्वारा स्वतंत्र भारत का तिरंगा फहराया गया
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'इंकलाब जिंदाबाद' व 'वंदे मातरम्' के नारों से आकाश गूंजा; ब्रिटिश दासता के अंत की औपचारिक घोषणा
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26 जनवरी का स्वतंत्रता दिवस |
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कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा प्रतिवर्ष 26 जनवरी को 'पूर्ण स्वाधीनता दिवस' मनाने का निर्णय
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26 जनवरी 1930 को पूरे देश में प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाया गया; 1950 में इसी दिन संविधान लागू हुआ
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आगामी आंदोलन की अधिकृति |
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विधान परिषदों के पूर्ण बहिष्कार का आदेश; गांधीजी को 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' का सर्वोच्च दायित्व सौंपा
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जनवरी 1930 में गांधीजी की 11 सूत्री मांगें; अस्वीकृति पर 12 मार्च 1930 को दांडी मार्च का सूत्रपात
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