19वीं सदी के अंत में उग्र राष्ट्रवाद के उदय का मुख्य आंतरिक कारण
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उदारवादी भिक्षावृत्ति की विफलता
| प्रमुख नेता व उपाधि | कार्यक्षेत्र व प्रमुख संस्था | राजनीतिक दर्शन व प्रमुख दृष्टिकोण |
|---|---|---|
बाल गंगाधर तिलक
('लोकमान्य') |
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महाराष्ट्र (पुणे व बंबई)
डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी, होमरूल लीग
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स्वराज जन्मसिद्ध अधिकार; 3-P नीति का विरोध; गणपति व शिवाजी उत्सव द्वारा जन-गोलबंदी; बहिष्कार को राजनीतिक अस्त्र बनाया
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लाला लाजपत राय
('पंजाब केसरी') |
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पंजाब (लाहौर)
डीएवी कॉलेज ट्रस्ट, सर्वेंट्स ऑफ पीपल सोसाइटी
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निष्क्रिय प्रतिरोध; कांग्रेस की सेफ्टी वॉल्व थ्योरी के प्रतिपादक; विदेशों में भारतीय स्वाधीनता का प्रचार; साइमन विरोधी आंदोलन
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बिपिन चंद्र पाल
('प्रखर वाग्मी') |
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बंगाल (कलकत्ता व सिलहट)
ब्रह्म समाज, वंदे मातरम् पत्र
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आर्थिक बहिष्कार व राष्ट्रीय शिक्षा; ब्रिटिश शासन से पूर्ण अलगाव; आत्मनिर्भरता एवं जन-आंदोलन द्वारा सत्ता हस्तांतरण
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अरविंद घोष
('ऋषि अरविंद') |
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बंगाल (कलकत्ता व बड़ौदा)
बंगाल नेशनल कॉलेज, अनुशीलन समिति
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निष्क्रिय प्रतिरोध का सिद्धांत (पैसिव रेजिस्टेंस); राष्ट्रवाद को एक धर्म बताया; आध्यात्मिक राष्ट्रवाद व पूर्ण स्वतंत्रता की मांग
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| तिथि / वर्ष व घटना | संबद्ध नेता व प्रमुख केंद्र | ऐतिहासिक परिणाम व प्रभाव |
|---|---|---|
19 या 20 जुलाई 1905
(विभाजन की घोषणा) |
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लॉर्ड कर्जन व एंड्रयू फ्रेजर;
शिमला व कलकत्ता
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बंगाल विभाजन की आधिकारिक घोषणा; संपूर्ण बंगाल में अभूतपूर्व असंतोष व विरोध की लहर
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7 अगस्त 1905
(स्वदेशी का शंखनाद) |
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टाउन हॉल (कलकत्ता);
सुरेंद्रनाथ बनर्जी, आनंदमोहन बोस
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स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा; विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का ऐतिहासिक प्रस्ताव स्वीकृत
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16 अक्टूबर 1905
(विभाजन प्रभावी) |
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संपूर्ण बंगाल;
रवींद्रनाथ टैगोर, रामेंद्रसुंदर त्रिवेदी
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शोक दिवस व रक्षाबंधन दिवस का आयोजन; 'आमार सोनार बांला' गायन; फेडरेशन हॉल की स्थापना
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दिसंबर 1905
(बनारस कांग्रेस अधिवेशन) |
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बनारस;
अध्यक्ष: गोपाल कृष्ण गोखले
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कर्जन की नीतियों व विभाजन की कटु निंदा; स्वदेशी व बहिष्कार को औपचारिक समर्थन
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अक्टूबर–दिसंबर 1906
(मुस्लिम लीग की स्थापना) |
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शिमला व ढाका;
आगा खां, नवाब सलीमुल्लाह
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शिमला शिष्टमंडल; 30 दिसंबर 1906 को ढाका में मुस्लिम लीग का गठन; पृथक निर्वाचक मंडल की मांग
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दिसंबर 1906
(कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन) |
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कलकत्ता;
अध्यक्ष: दादाभाई नौरोजी
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प्रथम बार कांग्रेस मंच से 'स्वराज' की मांग; स्वदेशी, बहिष्कार व राष्ट्रीय शिक्षा के 4 प्रस्ताव पारित
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26 दिसंबर 1907
(सूरत कांग्रेस विभाजन) |
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सूरत (ताप्ती तट);
अध्यक्ष: डॉ. रासबिहारी घोष
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नरम दल और गरम दल में ऐतिहासिक टकराव; कांग्रेस दो फाड़; उग्रवादी निष्कासित; तिलक को 6 वर्ष जेल
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| आंदोलन का कार्यक्रम | विशिष्ट गतिविधियां व प्रमुख संगठन | ऐतिहासिक उद्देश्य व जन-प्रभाव |
|---|---|---|
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
(Boycott) |
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मैनचेस्टर के वस्त्र, लिवरपूल का नमक, विदेशी चीनी, जूते व बर्तनों का त्याग; विदेशी कपड़ों की होली
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ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यापार पर सीधी चोट; भारतीय हथकरघा व कुटीर उद्योगों को अभूतपूर्व संजीवनी
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स्वदेशी वस्तुओं का संवर्धन
(Swadeshi Enterprise) |
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स्वदेशी हथकरघा वस्त्र, साबुन, माचिस कारखाने; बंगाल केमिकल्स; वी. ओ. सी. पिल्लई की स्टीम नेविगेशन कंपनी
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आर्थिक आत्मनिर्भरता की स्थापना; भारतीय पूंजीपतियों व कारीगरों का अभूतपूर्व विकास
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राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन
(National Education) |
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डॉन सोसाइटी (1902); राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (1906); बंगाल नेशनल कॉलेज; बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट
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सरकारी शिक्षण संस्थाओं का बहिष्कार; मातृभाषा में राष्ट्रप्रेमी, वैज्ञानिक व तकनीकी शिक्षा का प्रसार
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स्वावलंबन व रचनात्मक कार्य
(Atmashakti) |
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स्वदेश बांधव समिति द्वारा मध्यस्थता अदालतें; सामाजिक कुरीतियों का बहिष्कार; लोक उत्सव व मेलों का आयोजन
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गाँवों का पुनरुत्थान; आत्म-सम्मान व नैतिक शक्ति का जागरण; जनता को निडर व संगठित बनाना
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| समाचार पत्र / पत्रिका | संपादक / संस्थापक व भाषा | वैचारिक दृष्टिकोण व प्रभाव |
|---|---|---|
केसरी एवं मराठा
(1881 ई., बंबई) |
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बाल गंगाधर तिलक;
केसरी (मराठी) व मराठा (अंग्रेजी)
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उग्र राष्ट्रवाद का मुखपत्र; अफजल खां व शिवाजी प्रसंग द्वारा जन-जागृति; 1897 व 1908 में तिलक को जेल
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वंदे मातरम्
(1906 ई., कलकत्ता) |
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संपादक: अरविंद घोष व बिपिन पाल;
भाषा: अंग्रेजी
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निष्क्रिय प्रतिरोध (पैसिव रेजिस्टेंस) के सिद्धांतों का प्रतिपादन; पूर्ण स्वराज व बहिष्कार का खुला प्रचार
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युगांतर
(1906 ई., कलकत्ता) |
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बारींद्र कुमार घोष व भूपेंद्रनाथ दत्त;
भाषा: बांग्ला
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क्रांतिकारी राष्ट्रवाद का प्रथम मुखपत्र; 'गोली का जवाब गोली'; नौजवानों में सशस्त्र क्रांति का संचार
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संध्या
(1906 ई., कलकत्ता) |
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ब्रह्मबांधव उपाध्याय;
भाषा: बांग्ला
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स्वदेशी आंदोलन का अतिवादी समर्थन; 'फिरंगी राज को उखाड़ फेंकने' का खुला आह्वान; मुकदमे में मृत्यु
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संजीवनी
(1883 ई., कलकत्ता) |
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कृष्ण कुमार मित्र;
भाषा: बांग्ला
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6 जुलाई 1905 के अंक में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का सर्वप्रथम सुझाव प्रस्तुत किया
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द पंजाबी एवं पीपल
(लाहौर) |
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लाला लाजपत राय;
भाषा: अंग्रेजी
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पंजाब में उग्र राष्ट्रवाद, किसान अधिकारों व ब्रिटिश नौकरशाही के अत्याचारों का निर्भीक पर्दाफाश
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