जौनपुर नगर के संस्थापक सुल्तान
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फिरोजशाह तुगलक (1359 ई.)
| क्षेत्रीय राज्य | राजधानी / प्रमुख केंद्र | संस्थापक शासक एवं स्थापना वर्ष |
|---|---|---|
जौनपुर सल्तनत
(शर्की वंश) |
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जौनपुर
(उत्तर प्रदेश)
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मलिक सरवर (ख्वाजा-ए-जहाँ)
(1394 ई.)
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बंगाल सल्तनत
(इलियास व हुसैन शाही) |
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लखनौती, पाण्डुआ एवं गौड़
(पश्चिम बंगाल)
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शम्सुद्दीन इलियास शाह (एकीकृत)
(1342 ई.)
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मालवा सल्तनत
(गोरी व खिलजी वंश) |
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धार एवं मांडू (शादियाबाद)
(मध्य प्रदेश)
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दिलावर खां गोरी
(1401 ई.)
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गुजरात सल्तनत
(मुजफ्फराबाद) |
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अणहिलवाड़ (पाटन) व अहमदाबाद
(गुजरात)
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जफर खां (मुजफ्फर शाह प्रथम)
(1407 ई.)
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मेवाड़ राज्य
(सिसोदिया राजवंश) |
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चित्तौड़गढ़ एवं कुंभलगढ़
(राजस्थान)
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राणा हम्मीर देव सिसोदिया
(1326 ई.)
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कश्मीर सल्तनत
(शाहमीर वंश) |
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श्रीनगर
(जम्मू एवं कश्मीर)
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शम्सुद्दीन शाहमीर
(1339 ई.)
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| शासक व राज्य | शासनकाल व उपाधि | प्रमुख ऐतिहासिक उपलब्धियां |
|---|---|---|
इब्राहिम शाह शर्की
(जौनपुर) |
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1402–1440 ई.
शीराज-ए-हिंद का निर्माता
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अटाला मस्जिद व झंझरी मस्जिद का निर्माण; जौनपुर को इस्लामी ज्ञान व संस्कृति का शीर्ष केंद्र बनाया
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अलाउद्दीन हुसैन शाह
(बंगाल) |
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1493–1519 ई.
नृपति तिलक
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हुसैन शाही वंश की स्थापना; बांग्ला साहित्य का अभूतपूर्व विकास; चैतन्य महाप्रभु के समकालीन; धार्मिक सहिष्णुता
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होशंगशाह गोरी
(मालवा) |
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1405–1435 ई.
अल्प खां
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मांडू (शादियाबाद) को राजधानी बनाया; भारत में पूर्ण संगमरमर से निर्मित प्रथम मकबरा; मांडू जामा मस्जिद की नींव
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महमूद बेगड़ा
(गुजरात) |
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1459–1511 ई.
बेगड़ा (दो दुर्ग विजेता)
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जूनागढ़ (गिरनार) व चंपानेर दुर्ग विजय; पुर्तगालियों के विरुद्ध नौसैन्य अभियान; चांपानेर जामा मस्जिद निर्माण
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राणा कुंभा
(मेवाड़) |
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1433–1468 ई.
अभिनव भरताचार्य, हालगुरु
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मालवा-गुजरात संयुक्त सेना पराजित; चित्तौड़ में विजय स्तंभ निर्माण; 32 दुर्गों का निर्माण; संगीतराज ग्रंथ रचना
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राणा सांगा
(मेवाड़) |
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1508–1528 ई.
हिंदू पत, संग्राम सिंह
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इब्राहिम लोदी व मालवा को हराया; राजपूत शक्तियों का संघ बनाया; बयाना युद्ध में बाबर को हराया; खानवा में संघर्ष
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| क्षेत्रीय शैली व केंद्र | प्रमुख स्मारक व स्थापत्य | सांस्कृतिक व साहित्यिक विशेषताएं |
|---|---|---|
शर्की शैली
(जौनपुर) |
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अटाला मस्जिद, झंझरी मस्जिद, लाल दरवाजा, जामा मस्जिद
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मीनारों का पूर्ण अभाव; विशाल मेहराबी तोरण (प्रोपाइलन); ख्याल गायन व जौनपुरी रागों का सृजन
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बंगाल शैली
(पाण्डुआ व गौड़) |
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अदीना मस्जिद, छोटा व बड़ा सोना मस्जिद, एकलाखी मकबरा
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ईंटों व पकी मिट्टी (टेराकोटा) का प्रयोग; मुड़ी हुई बांस की झोपड़ी जैसी ढलवा छतें (बांग्ला शैली); कृत्तिवासी रामायण
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मालवा शैली
(मांडू / शादियाबाद) |
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होशंगशाह का मकबरा, जहाज महल, हिंडोला महल, जामी मस्जिद
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ऊंचे चबूतरों पर निर्माण; लाल बलुआ पत्थर व संगमरमर का समन्वय; ढलवा दीवारें एवं मेहराबदार विशाल कक्ष
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गुजरात शैली
(अहमदाबाद व चांपानेर) |
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सीदी सैयद मस्जिद, तीन दरवाजा, जामा मस्जिद, रानी सिपरी मस्जिद
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हिंदू-जैन काष्ठ नक्काशी का पाषाण में रूपांतरण; बारीक जालीदार खिड़कियां (ट्री ऑफ लाइफ); अलंकृत मीनारें
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मेवाड़ शैली
(चित्तौड़ व कुंभलगढ़) |
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विजय स्तंभ (कीर्ति स्तंभ), कुंभलगढ़ दुर्ग प्राचीर
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पारंपरिक हिंदू राजपूत स्थापत्य; 36 किमी लंबी अभेद्य प्राचीर; मूर्तिकला का विश्वकोश; संगीत ग्रंथों की रचना
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| अभियान / युद्ध व वर्ष | शामिल विरोधी पक्ष | रणनीतिक परिणाम एवं ऐतिहासिक प्रभाव |
|---|---|---|
सारंगपुर का युद्ध
(1437 ई.) |
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राणा कुंभा
बनाम
महमूद खिलजी प्रथम (मालवा)
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कुंभा की शानदार विजय; खिलजी 6 माह चित्तौड़ में बंदी रहा; चित्तौड़ में 9 मंजिला विजय स्तंभ का निर्माण
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चंपानेर गठबंधन प्रतिरोध
(1456–57 ई.) |
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राणा कुंभा
बनाम
मालवा व गुजरात संयुक्त सेना
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कुंभा ने दोनों संयुक्त मुस्लिम सेनाओं को बदनौर के युद्ध में पराजित किया; मेवाड़ की संप्रभुता अक्षुण्ण रही
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खातौली का युद्ध
(1517 ई.) |
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राणा सांगा
बनाम
इब्राहिम लोदी (दिल्ली)
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लोदी सेना पराजित; सांगा ने एक हाथ व एक पैर में तीर लगने से दिव्यांगता पाई; लोदी का प्रभाव समाप्त
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गागरौन का युद्ध
(1519 ई.) |
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राणा सांगा
बनाम
महमूद खिलजी द्वितीय (मालवा)
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मालवा सुल्तान बंदी बना; सांगा ने उपचार कर राज्य लौटाया; मालवा पर मेवाड़ का प्रत्यक्ष प्रभाव स्थापित
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बयाना का युद्ध
(फरवरी 1527 ई.) |
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राणा सांगा
बनाम
बाबर की अग्रिम मुगल सेना
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मुगल सेना बुरी तरह पराजित होकर भागी; बयाना दुर्ग पर सांगा का कब्जा; मुगलों में भारी दहशत फैली
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खानवा का युद्ध
(17 मार्च 1527 ई.) |
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राणा सांगा (राजपूत संघ)
बनाम
बाबर (मुगल सेना)
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बाबर ने तोपखाने व तुलगुमा पद्धति से विजय पाई; सांगा घायल होकर मूर्छित हुए; उत्तर भारत में मुगल सत्ता दृढ़
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| कश्मीर के सुल्तान | शासनकाल व उपाधि | प्रमुख राजनीतिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक योगदान |
|---|---|---|
शम्सुद्दीन शाहमीर |
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1339–1342 ई.
शाहमीर वंश संस्थापक
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कश्मीर में प्रथम स्वतंत्र मुस्लिम सल्तनत की स्थापना; इंद्रकोट को राजधानी बनाया; न्यायप्रिय शासन
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सुल्तान सिकंदर |
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1389–1413 ई.
बुतशिकन (मूर्तिभंजक)
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धार्मिक असहिष्णुता; कठोर जजिया; मार्तंड सूर्य मंदिर सहित सैकड़ों मंदिर ध्वस्त; श्रीनगर जामा मस्जिद निर्माण
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जैन-उल-आबदीन
(शाही खां) |
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1420–1470 ई.
बड़शाह (महान राजा),
'कश्मीर का अकबर'
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जजिया समाप्त; गोहत्या निषेध; विस्थापित पंडितों की पुनर्स्थापना; वुलर झील में जैना लंक द्वीप; महाभारत व राजतरंगिणी का फारसी अनुवाद
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यूसुफ शाह चक |
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1579–1586 ई.
चक राजवंश
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प्रसिद्ध कवयित्री हब्बा खातून के पति; अकबर के आक्रमण का सामना; 1586 ई. में कश्मीर का मुगल साम्राज्य में विलय
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