पाल साम्राज्य के संस्थापक
उत्तर देखें
गोपाल
| राजवंश एवं संस्थापक | प्रमुख शासक व राजधानी | प्रमुख ऐतिहासिक उपलब्धियां |
|---|---|---|
पाल वंश (गोपाल, 750 ई.) |
उत्तर देखें
धर्मपाल, देवपाल, महिपाल प्रथम
(पाटलिपुत्र / मुंगेर)
|
उत्तर देखें
मात्स्यन्याय का अंत, विक्रमशिला व सोमपुर की स्थापना, बौद्ध धर्म को संरक्षण, कन्नौज दरबार
|
गुर्जर-प्रतिहार (नागभट्ट प्रथम, 730 ई.) |
उत्तर देखें
वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय, मिहिरभोज
(भीनमाल / कन्नौज)
|
उत्तर देखें
अरब आक्रमणों का सफल प्रतिरोध, कन्नौज पर स्थायी आधिपत्य, आदिवराह मुद्राएं, मारु-गुर्जर शैली
|
राष्ट्रकूट वंश (दंतिदुर्ग, 752 ई.) |
उत्तर देखें
कृष्ण प्रथम, ध्रुव, अमोघवर्ष प्रथम
(मान्यखेट / मालखेड)
|
उत्तर देखें
चालुक्यों का उन्मूलन, एलोरा कैलाश मंदिर निर्माण, त्रिपक्षीय संघर्ष में विजय, कविराजमार्ग रचना
|
| राजवंश | धार्मिक नीति एवं संरक्षण | प्रमुख सांस्कृतिक एवं वास्तुकला योगदान |
|---|---|---|
पाल राजवंश |
उत्तर देखें
महायान व वज्रयान बौद्ध धर्म को पूर्ण राज्याश्रय; शैव-वैष्णव संप्रदायों के प्रति सहिष्णु
|
उत्तर देखें
विक्रमशिला, सोमपुर व ओदंतपुरी महाविहार; नालंदा का संरक्षण; धीमान-वीटपाल की कांस्य कला व ताड़पत्र चित्रकला
|
गुर्जर-प्रतिहार |
उत्तर देखें
वैष्णव (आदिवराह), शैव और सौर (सूर्य) धर्म के कट्टर समर्थक एवं पोषक
|
उत्तर देखें
मारु-गुर्जर (प्रतिहार) मंदिर स्थापत्य; मिहिरभोज के आदिवराह सिक्के; राजशेखर की कर्पूरमंजरी व काव्यमीमांसा
|
राष्ट्रकूट राजवंश |
उत्तर देखें
शैव व वैष्णव धर्म के साथ-साथ जैन धर्म को समान उदार संरक्षण
|
उत्तर देखें
एलोरा का एकाश्मक कैलाश मंदिर (गुफा 16); एलिफेंटा की त्रिमूर्ति; कविराजमार्ग, आदिपुराण व गणितसारसंग्रह
|
| संघर्ष का चरण व काल | शामिल पक्ष एवं शासक | प्रमुख घटना एवं निर्णायक परिणाम |
|---|---|---|
प्रथम चरण (8वीं सदी का अंत) |
उत्तर देखें
वत्सराज (प्रतिहार), धर्मपाल (पाल), ध्रुव (राष्ट्रकूट)
|
उत्तर देखें
वत्सराज ने धर्मपाल को हराया; ध्रुव ने दोनों को पराजित किया; राष्ट्रकूटों की दक्षिण वापसी से धर्मपाल का कन्नौज पर अस्थायी प्रभाव
|
द्वितीय चरण (9वीं सदी का आरंभ) |
उत्तर देखें
नागभट्ट द्वितीय (प्रतिहार), धर्मपाल (पाल), गोविंद तृतीय (राष्ट्रकूट)
|
उत्तर देखें
नागभट्ट द्वितीय ने चक्रायुध व धर्मपाल को पराजित कर कन्नौज पर कब्जा किया; गोविंद तृतीय का उत्तरी अभियान; प्रतिहारों को अस्थायी आघात
|
तृतीय चरण (9वीं सदी का मध्य) |
उत्तर देखें
मिहिरभोज (प्रतिहार), देवपाल (पाल), अमोघवर्ष (राष्ट्रकूट)
|
उत्तर देखें
देवपाल के समय कड़ा संतुलन; देवपाल के बाद मिहिरभोज द्वारा कन्नौज पर स्थायी व निर्विवाद प्रतिहार प्रभुत्व स्थापित
|
चतुर्थ चरण व अंत (10वीं सदी) |
उत्तर देखें
महिपाल प्रथम (प्रतिहार), इंद्र तृतीय व कृष्ण तृतीय (राष्ट्रकूट)
|
उत्तर देखें
इंद्र तृतीय द्वारा कन्नौज पर विनाशकारी आक्रमण; तीनों महाशक्तियों का पतन; उत्तर भारत में नए राजपूत सामंतों का स्वतंत्र उदय
|
| अभिलेख व प्राप्ति स्थल | संबंधित शासक / राजवंश | मुख्य विषय एवं ऐतिहासिक महत्व |
|---|---|---|
खालिमपुर ताम्रपत्र (मालदा, बंगाल) |
उत्तर देखें
धर्मपाल (पाल वंश)
|
उत्तर देखें
मात्स्यन्याय का अंत, गोपाल का निर्वाचन, धर्मपाल का कन्नौज दरबार तथा बौद्ध मंदिर को भूमि अनुदान
|
मुंगेर ताम्रपत्र (मुंगेर, बिहार) |
उत्तर देखें
देवपाल (पाल वंश)
|
उत्तर देखें
देवपाल की सैन्य विजयें (उत्कल, कामरूप, हूण) तथा मुंगेर को राजधानी बनाने का स्पष्ट प्रमाण
|
नालंदा ताम्रपत्र (नालंदा, बिहार) |
उत्तर देखें
देवपाल / बालपुत्रदेव
|
उत्तर देखें
सुमात्रा के शैलेंद्र राजा द्वारा नालंदा में विहार निर्माण व उसके खर्च हेतु देवपाल द्वारा 5 गाँवों का दान
|
ग्वालियर प्रशस्ति (ग्वालियर, म.प्र.) |
उत्तर देखें
मिहिरभोज (गुर्जर-प्रतिहार)
|
उत्तर देखें
प्रतिहारों की विस्तृत वंशावली, नागभट्ट प्रथम द्वारा अरबों का दमन तथा मिहिरभोज की सैन्य उपलब्धियां
|
संजन ताम्रपत्र (संजन, महाराष्ट्र) |
उत्तर देखें
अमोघवर्ष प्रथम (राष्ट्रकूट)
|
उत्तर देखें
दंतिदुर्ग द्वारा उज्जैन में हिरण्यगर्भ यज्ञ का संपादन एवं राष्ट्रकूटों के उत्तरी सैन्य अभियानों का ब्यौरा
|
एलोरा गुहा अभिलेख (एलोरा, महाराष्ट्र) |
उत्तर देखें
दंतिदुर्ग व कृष्ण प्रथम
|
उत्तर देखें
राष्ट्रकूटों की चालुक्यों पर विजय, स्वतंत्र सत्ता की स्थापना तथा गुहा मंदिरों के निर्माण का उल्लेख
|
| प्रशासनिक तत्व / स्तर | पाल एवं गुर्जर-प्रतिहार व्यवस्था | राष्ट्रकूट साम्राज्य व्यवस्था |
|---|---|---|
क्षेत्रीय प्रशासनिक विभाजन |
उत्तर देखें
भुक्ति (प्रांत) -> विषय (जिला) -> मंडल/वीथी -> ग्राम
|
उत्तर देखें
राष्ट्र (प्रांत) -> विषय (जिला) -> भुक्ति (गांव समूह) -> ग्राम
|
प्रांतीय व स्थानीय अधिकारी |
उत्तर देखें
उपरिक (प्रांत प्रमुख), विषयपति (जिला प्रमुख), ग्रामपति (ग्राम प्रमुख)
|
उत्तर देखें
राष्ट्रपति (राष्ट्र प्रमुख), विषयपति (विषय प्रमुख), ग्रामकूट/गावुंड (ग्राम प्रमुख)
|
विशिष्ट सैन्य संगठन |
उत्तर देखें
पाल: नौसेना व विशाल गजसेना; प्रतिहार: उच्च कोटि की मध्य एशियाई अश्वसेना
|
उत्तर देखें
पहाड़ी दुर्ग व्यवस्था, अनुशासित अश्वसेना एवं शक्तिशाली पदाति वाहिनी
|
राज्याश्रय एवं धार्मिक नीति |
उत्तर देखें
पाल: महायान-वज्रयान बौद्ध धर्म; प्रतिहार: कट्टर ब्राह्मणीय (वैष्णव/शैव) धर्म
|
उत्तर देखें
उदार सर्वधर्म समभाव (शैव, वैष्णव एवं दिगंबर जैन धर्म को समान संरक्षण)
|
सामंती प्रभाव एवं पतन |
उत्तर देखें
अत्यधिक सामंती विकेंद्रीकरण; कैवर्त विद्रोह व गजनवी के आक्रमण से पतन
|
उत्तर देखें
महामंडलेश्वरों की बढ़ती शक्ति, चोलों से निरंतर संघर्ष व कल्याणी चालुक्यों द्वारा उन्मूलन
|