उत्तर प्रदेश जनगणना 2011: जनसंख्या, साक्षरता, घनत्व, लिंगानुपात और प्रमुख जनसांख्यिकीय तथ्य

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उत्तर प्रदेश जनगणना 2011: जनसंख्या, साक्षरता, घनत्व, लिंगानुपात और प्रमुख जनसांख्यिकीय तथ्य - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

उत्तर प्रदेश की 2011 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व, साक्षरता दर, लिंगानुपात, जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, जिलावार जनसंख्या, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बाल जनसंख्या और प्रमुख जनसांख्यिकीय तथ्यों का परीक्षोपयोगी अध्ययन।

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💡 व्याख्या

उत्तर प्रदेश की 2011 की जनगणना का परिचय

उत्तर प्रदेश की जनसांख्यिकीय संरचना को समझने के लिए 2011 की जनगणना अत्यंत महत्वपूर्ण आधार है। भारत की जनगणना प्रत्येक निर्धारित दशक में देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना, शिक्षा, निवास, लिंग संरचना और अन्य जनसांख्यिकीय विशेषताओं से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराती है। उत्तर प्रदेश में 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या लगभग 19.98 करोड़ थी। राज्य की जनसंख्या देश की कुल जनसंख्या का लगभग 16.5 प्रतिशत थी। इसलिए जनसंख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व रहा है।

2011 की जनगणना के आँकड़े प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान के महत्वपूर्ण भाग हैं। जनसंख्या, घनत्व, साक्षरता, लिंगानुपात, दशकीय वृद्धि, शहरी जनसंख्या, बाल जनसंख्या और सामाजिक वर्गों से संबंधित आँकड़ों का अध्ययन करते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये आँकड़े जनगणना वर्ष 2011 से संबंधित हैं। भारत की अगली नियमित जनगणना के आँकड़ों से इन्हें अलग समझना चाहिए।

उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या

कुल जनसंख्या और पुरुष-महिला वितरण

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या 19,98,12,341 थी। इसमें पुरुषों की संख्या लगभग 10.45 करोड़ तथा महिलाओं की संख्या लगभग 9.53 करोड़ थी। जनसंख्या का यह वितरण राज्य में पुरुष और महिला जनसंख्या के बीच अंतर को दर्शाता है। जनसंख्या के अध्ययन में कुल जनसंख्या के साथ उसके लैंगिक वितरण को समझना भी आवश्यक है।

राष्ट्रीय जनसंख्या में उत्तर प्रदेश का योगदान

उत्तर प्रदेश की विशाल जनसंख्या का प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास, परिवहन, खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक सेवाओं की योजना पर पड़ता है। 2011 में राज्य की जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 16.5 प्रतिशत थी। इस कारण राष्ट्रीय जनसांख्यिकीय अध्ययन में उत्तर प्रदेश को अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है।

जनसंख्या घनत्व

जनसंख्या घनत्व का अर्थ

जनसंख्या घनत्व से आशय प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों की औसत संख्या से है। 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश का जनसंख्या घनत्व लगभग 829 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। राज्य के विभिन्न जिलों में घनत्व समान नहीं था। मैदानी और अधिक नगरीकृत क्षेत्रों में जनसंख्या का दबाव अपेक्षाकृत अधिक पाया गया।

घनत्व में क्षेत्रीय अंतर

उत्तर प्रदेश के गंगा-यमुना के मैदानी भागों में उपजाऊ भूमि, जल की उपलब्धता, कृषि गतिविधियों, नगरों और परिवहन सुविधाओं के कारण जनसंख्या का संकेंद्रण अधिक रहा है। इसके विपरीत बुंदेलखंड और कुछ दक्षिणी क्षेत्रों में भौगोलिक तथा आर्थिक परिस्थितियों के कारण जनसंख्या घनत्व अपेक्षाकृत कम पाया जाता है।

साक्षरता दर

2011 में साक्षरता की स्थिति

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश की कुल साक्षरता दर 67.68 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता दर लगभग 77.28 प्रतिशत तथा महिला साक्षरता दर लगभग 57.18 प्रतिशत थी। इससे पुरुष और महिला साक्षरता के बीच अंतर स्पष्ट होता है। शिक्षा संबंधी योजनाओं और सामाजिक विकास के अध्ययन में इन आँकड़ों का विशेष महत्व है।

साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता से संबंधित आँकड़ा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक है। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों तथा पुरुष और महिला जनसंख्या के बीच साक्षरता में अंतर का अध्ययन जनसांख्यिकीय विश्लेषण के लिए उपयोगी है।

लिंगानुपात

राज्य का लिंगानुपात

लिंगानुपात से आशय प्रत्येक 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या से है। 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश का लिंगानुपात 912 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुष था। यह आँकड़ा राज्य की लैंगिक संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। प्रतियोगी परीक्षाओं में लिंगानुपात की परिभाषा और 2011 का राज्य स्तरीय आँकड़ा बार-बार पूछा जा सकता है।

बाल लिंगानुपात

बाल जनसंख्या में लिंगानुपात का अध्ययन भी जनसांख्यिकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। शून्य से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की संख्या और उनके लैंगिक वितरण से संबंधित आँकड़े सामाजिक संरचना, बाल स्वास्थ्य और लैंगिक समानता के अध्ययन में उपयोगी होते हैं। जनगणना की विभिन्न सारणियाँ आयु और लिंग के आधार पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराती हैं।

जनसंख्या वृद्धि दर

2001 से 2011 के बीच दशकीय वृद्धि

उत्तर प्रदेश की 2001 से 2011 के बीच दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर लगभग 20.23 प्रतिशत रही। इससे पिछले दशक की तुलना में जनसंख्या वृद्धि की गति में कमी का संकेत मिलता है। जनसंख्या वृद्धि का अध्ययन जन्मदर, मृत्यु दर, प्रवासन, सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक विकास जैसे अनेक कारकों के संदर्भ में किया जाता है।

जनसंख्या वृद्धि दर का उपयोग किसी क्षेत्र में जनसंख्या परिवर्तन की गति समझने के लिए किया जाता है। उच्च जनसंख्या वृद्धि वाले क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और आधारभूत सुविधाओं की योजना बनाते समय बढ़ती आबादी को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

शहरीकरण

नगरीय जनसंख्या

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या का लगभग 22.27 प्रतिशत भाग नगरीय क्षेत्रों में निवास करता था। शहरीकरण का संबंध नगरों के विस्तार, रोजगार के अवसर, औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार, परिवहन और सेवाओं के विकास से है। राज्य में बड़े नगरों के आसपास जनसंख्या का संकेंद्रण नगरीय विकास की महत्वपूर्ण विशेषता है।

ग्रामीण और नगरीय संरचना

उत्तर प्रदेश की जनसंख्या का बड़ा भाग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है। इसलिए ग्रामीण विकास, कृषि, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण रोजगार राज्य की जनसांख्यिकीय योजना के महत्वपूर्ण विषय हैं। साथ ही नगरों में बढ़ती आबादी के लिए आवास, यातायात, पेयजल, स्वच्छता और रोजगार जैसी सुविधाओं की आवश्यकता बढ़ती है।

जिलावार जनसंख्या

अधिक जनसंख्या वाले जिले

2011 की जनगणना के समय प्रयागराज, मुरादाबाद और गाजियाबाद जैसे जिले राज्य के अधिक जनसंख्या वाले जिलों में शामिल थे। जिलावार जनसंख्या का अध्ययन करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रशासनिक सीमाओं और जिलों के पुनर्गठन के कारण वर्तमान जिला संरचना को 2011 के आँकड़ों के साथ सीधे नहीं मिलाया जाना चाहिए।

कम जनसंख्या वाले जिले

2011 की जनगणना में महोबा, चित्रकूट और हमीरपुर जैसे जिले अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वाले जिलों में शामिल थे। दक्षिणी और बुंदेलखंड क्षेत्र के कई जिलों में भौगोलिक परिस्थितियों, कम नगरीकरण और कृषि संबंधी परिस्थितियों का जनसंख्या वितरण पर प्रभाव देखा जाता है।

अनुसूचित जाति की जनसंख्या

उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति की जनसंख्या का सामाजिक और जनसांख्यिकीय अध्ययन महत्वपूर्ण है। 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति की जनसंख्या राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 20.7 प्रतिशत थी। अनुसूचित जाति से संबंधित जनगणना सारणियाँ कुल जनसंख्या, ग्रामीण-नगरीय निवास, आयु, शिक्षा और कार्य संबंधी अनेक विवरण उपलब्ध कराती हैं।

अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या

उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या का अनुपात अनुसूचित जाति की तुलना में बहुत कम है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों का अनुपात लगभग 0.6 प्रतिशत था। जनगणना की अनुसूचित जनजाति संबंधी सारणियों में आयु, लिंग, शिक्षा और ग्रामीण-नगरीय निवास के आधार पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।

बाल जनसंख्या

शून्य से छह वर्ष आयु वर्ग

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में शून्य से छह वर्ष आयु वर्ग की बाल जनसंख्या लगभग 3.08 करोड़ थी। बाल जनसंख्या का अध्ययन शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण और बाल कल्याण की योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जनसंख्या संरचना में बच्चों का अनुपात भविष्य की कार्यशील जनसंख्या और सामाजिक सेवाओं की आवश्यकताओं को समझने में भी सहायता करता है।

प्रमुख जनसांख्यिकीय तथ्य

परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य:
  • 2011 में उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या लगभग 19.98 करोड़ थी।
  • राज्य की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 20.23 प्रतिशत थी।
  • जनसंख्या घनत्व लगभग 829 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था।
  • कुल साक्षरता दर 67.68 प्रतिशत थी।
  • पुरुष साक्षरता लगभग 77.28 प्रतिशत और महिला साक्षरता लगभग 57.18 प्रतिशत थी।
  • लिंगानुपात 912 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुष था।
  • नगरीय जनसंख्या का अनुपात लगभग 22.27 प्रतिशत था।
  • अनुसूचित जाति की जनसंख्या का अनुपात लगभग 20.7 प्रतिशत था।
  • अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या का अनुपात लगभग 0.6 प्रतिशत था।
  • शून्य से छह वर्ष आयु वर्ग की बाल जनसंख्या लगभग 3.08 करोड़ थी।

जनगणना 2011 के महत्वपूर्ण आँकड़े

महत्वपूर्ण तथ्य / विषयविवरण
कुल जनसंख्या19,98,12,341
पुरुष जनसंख्यालगभग 10.45 करोड़
महिला जनसंख्यालगभग 9.53 करोड़
दशकीय वृद्धि दर20.23 प्रतिशत
जनसंख्या घनत्व829 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
कुल साक्षरता67.68 प्रतिशत
पुरुष साक्षरता77.28 प्रतिशत
महिला साक्षरता57.18 प्रतिशत
लिंगानुपात912 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुष
नगरीय जनसंख्यालगभग 22.27 प्रतिशत
अनुसूचित जाति जनसंख्यालगभग 20.7 प्रतिशत
अनुसूचित जनजाति जनसंख्यालगभग 0.6 प्रतिशत
शून्य से छह वर्ष बाल जनसंख्यालगभग 3.08 करोड़

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जनगणना का महत्व

उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान की प्रतियोगी परीक्षाओं में 2011 की जनगणना से संबंधित प्रश्नों का विशेष महत्व है। अभ्यर्थियों को कुल जनसंख्या, घनत्व, साक्षरता, पुरुष और महिला साक्षरता, लिंगानुपात, दशकीय वृद्धि, नगरीय जनसंख्या, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अनुपात तथा बाल जनसंख्या जैसे प्रमुख आँकड़ों को समझकर याद करना चाहिए। जिलावार तथ्यों के अध्ययन में उस समय की प्रशासनिक सीमाओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।

जनगणना के आँकड़े केवल संख्या याद करने का विषय नहीं हैं। इनसे राज्य की सामाजिक संरचना, शिक्षा की स्थिति, ग्रामीण और नगरीय वितरण, लैंगिक संरचना तथा जनसंख्या परिवर्तन की दिशा को समझा जा सकता है। इसी कारण उत्तर प्रदेश की जनगणना 2011 राज्य स्तरीय सामान्य ज्ञान, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, पुलिस भर्ती, प्रारंभिक पात्रता परीक्षा तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन विषय है।