उत्तराखंड की जलवायु और मानसून
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उत्तराखंड की जलवायु, ऊंचाई के अनुसार परिवर्तन, मानसून, वर्षा वितरण, हिमपात, पश्चिमी विक्षोभ, दून और पर्वतीय जलवायु, तापमान, जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर प्रभाव की जानकारी।
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💡 व्याख्या
उत्तराखंड की जलवायु का परिचय
उत्तराखंड की जलवायु विविधतापूर्ण है क्योंकि ऊंचाई 200 मीटर से 7816 मीटर तक बदलती है। तराई में उष्णकटिबंधीय, दून में समशीतोष्ण और ऊंचाई पर शीत शीतोष्ण और टुंड्रा जलवायु मिलती है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में गर्मी 40 डिग्री तक जाती है जबकि बद्रीनाथ केदारनाथ में माइनस 15 डिग्री तक ठंड होती है। मानसून जून से सितंबर तक रहता है और 70 प्रतिशत वर्षा इसी समय होती है। पश्चिमी विक्षोभ से दिसंबर से मार्च तक वर्षा और हिमपात होता है।
ऊंचाई के अनुसार जलवायु परिवर्तन
उत्तराखंड में ऊंचाई के अनुसार जलवायु बदलती है। 0 से 1000 मीटर तक तराई भाबर और दून में उष्ण और समशीतोष्ण जलवायु है जहां गर्मी अधिक और सर्दी कम होती है। 1000 से 2000 मीटर तक मध्य हिमालय में समशीतोष्ण जलवायु है जहां नैनीताल मसूरी अल्मोड़ा स्थित हैं। 2000 से 3000 मीटर तक शीत समशीतोष्ण है जहां औली मुनस्यारी स्थित हैं। 3000 मीटर से ऊपर अल्पाइन और टुंड्रा जलवायु है जहां हिमपात होता है और हिमनद स्थित हैं।
मानसून वर्षा वितरण और हिमपात
उत्तराखंड में मानसून बंगाल की खाड़ी से आता है और जून के अंत में प्रवेश करता है। सबसे अधिक वर्षा बाह्य हिमालय में 200 सेंटीमीटर तक होती है और सबसे कम वर्षा शीत मरुस्थल में 20 सेंटीमीटर होती है। नैनीताल और चमोली में अधिक वर्षा होती है। हिमपात 2000 मीटर से ऊपर दिसंबर से मार्च तक होता है। औली, मुनस्यारी, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री में भारी हिमपात होता है। पश्चिमी विक्षोभ से शीतकालीन वर्षा गेहूं के लिए उपयोगी है।
दून और पर्वतीय जलवायु तथा तापमान वितरण
दून जलवायु देहरादून, कोटद्वार, कोटदून, पाटलीदून घाटियों में समशीतोष्ण है जहां गर्मी कम और सर्दी अधिक नहीं होती। देहरादून की जलवायु सबसे अच्छी मानी जाती है। पर्वतीय जलवायु नैनीताल, मसूरी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ में समशीतोष्ण से शीत समशीतोष्ण है। तापमान ऊंचाई के साथ घटता है। हर 165 मीटर पर 1 डिग्री तापमान घटता है। हरिद्वार में जनवरी में 15 डिग्री और जून में 40 डिग्री रहता है। नैनीताल में जनवरी में 5 डिग्री और जून में 25 डिग्री रहता है। बद्रीनाथ में जनवरी में माइनस 10 डिग्री रहता है।
जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर पिघलने का प्रभाव
जलवायु परिवर्तन से उत्तराखंड में तापमान बढ़ रहा है और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। गंगोत्री हिमनद हर वर्ष 12 से 22 मीटर पीछे हट रहा है। ग्लेशियर पिघलने से नदियों में पहले बाढ़ और बाद में पानी की कमी होगी। केदारनाथ आपदा 2013 और चमोली आपदा 2021 जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हैं। हिमपात कम हो रहा है और वर्षा अनियमित हो रही है। सेब की खेती प्रभावित हो रही है। सरकार ने जलवायु परिवर्तन कार्य योजना बनाई है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| ऊंचाई अनुसार जलवायु | 0 से 1000 मी उष्ण तराई दून, 1000 से 2000 मी समशीतोष्ण मध्य हिमालय, 2000 से 3000 मी शीत समशीतोष्ण, 3000 मी ऊपर टुंड्रा हिम |
| मानसून | जून से सितंबर बंगाल की खाड़ी से 70 प्रतिशत वर्षा बाह्य हिमालय में अधिक 200 सेमी |
| वर्षा वितरण | अधिक नैनीताल चमोली बाह्य हिमालय, कम शीत मरुस्थल नेलांग 20 सेमी, औसत 150 सेमी |
| हिमपात | 2000 मी ऊपर दिसंबर से मार्च औली मुनस्यारी केदारनाथ बद्रीनाथ गंगोत्री यमुनोत्री |
| पश्चिमी विक्षोभ | दिसंबर से मार्च भूमध्य सागर से शीतकालीन वर्षा हिमपात गेहूं के लिए लाभदायक |
| दून जलवायु | देहरादून कोटद्वार कोटदून पाटलीदून समशीतोष्ण सबसे अच्छी जलवायु देहरादून |
| तापमान | हर 165 मी पर 1 डिग्री कमी हरिद्वार 15 से 40 डिग्री नैनीताल 5 से 25 डिग्री बद्रीनाथ माइनस 10 डिग्री |
| जलवायु परिवर्तन | तापमान वृद्धि गंगोत्री 12 मी पीछे हटना बाढ़ सूखा सेब प्रभावित आपदा 2013 2021 |
| ग्लेशियर प्रभाव | पिघलने से पहले बाढ़ बाद में पानी कमी समुद्र स्तर वृद्धि केदारनाथ चमोली आपदा |