उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन: भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, केदारनाथ एवं चमोली आपदा, राज्य आपदा मोचन बल
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उत्तराखंड के आपदा जोखिम, भूकंपीय क्षेत्र चार एवं पांच, भूस्खलन, केदारनाथ जलप्रलय, रैणी चमोली आपदा, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपदा मोचन बल तथा पूर्व चेतावनी तंत्र पर आधारित संपूर्ण परीक्षोपयोगी अध्ययन सामग्री।
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💡 व्याख्या
उत्तराखंड की प्राकृतिक संवेदनशीलता एवं आपदा जोखिम परिदृश्य
देवभूमि उत्तराखंड अपनी अत्यंत युवा, गतिशील और विवर्तनिक रूप से सक्रिय हिमालयी पर्वत शृंखलाओं में अवस्थित होने के कारण विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के निरंतर टकराव तथा भ्रंश रेखाओं की उपस्थिति के कारण संपूर्ण राज्य भूकंपीय दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र चार और क्षेत्र पांच के अंतर्गत विभाजित है। इसके अतिरिक्त खड़ी ढलानों, संकरी नदी घाटियों और बदलती मौसमी परिस्थितियों के फलस्वरूप यहाँ भूस्खलन, बादल फटना, अचानक आने वाली बाढ़ तथा हिमनद झीलों के टूटने जैसी घटनाएं नियमित रूप से घटित होती रहती हैं। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में राज्य के ऐतिहासिक भूकंपों, प्रमुख प्राकृतिक त्रासदियों, आपदा राहत तंत्र, राज्य आपदा मोचन बल और पूर्व चेतावनी प्रणालियों से संबंधित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।
ऐतिहासिक आपदाएं: केदारनाथ जलप्रलय एवं चमोली त्रासदी
उत्तराखंड के आपदा इतिहास में जून दो हजार तेरह की केदारनाथ त्रासदी सर्वाधिक विनाशकारी घटनाओं में से एक है। मूसलाधार मानसूनी वर्षा और चोराबाड़ी हिमनद ताल के टूटने से मंदाकिनी नदी में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने केदारघाटी, रामबाड़ा और गौरीकुंड को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया था। इसके पश्चात सात फरवरी दो हजार इक्कीस को चमोली जनपद के रैणी क्षेत्र में नंदा देवी की तलहटी पर स्थित रौंटी हिमनद के टूटने से ऋषिगंगा और पश्चिमी धौलीगंगा में विनाशकारी सैलाब आया, जिससे तपोवन और ऋषिगंगा जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुँचा। इससे पूर्व वर्ष उन्नीस सौ इक्यानवे का उत्तरकाशी भूकंप, उन्नीस सौ निन्यानवे का चमोली भूकंप तथा वर्ष उन्नीस सौ अट्ठानवे का मालपा भूस्खलन राज्य की प्रमुख ऐतिहासिक विभीषिकाएं रही हैं।
आपदा प्रबंधन तंत्र: संस्थागत ढांचा, राज्य आपदा मोचन बल एवं पूर्व चेतावनी
आपदाओं के कुशल प्रबंधन, राहत और पुनर्वास हेतु उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने पृथक आपदा प्रबंधन मंत्रालय का गठन किया। राज्य में आपदा प्रबंधन अधिनियम दो हजार पांच के तहत मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कार्य करता है। आपातकालीन राहत और खोज अभियानों के त्वरित क्रियान्वयन हेतु नौ अक्टूबर दो हजार तेरह को राज्य आपदा मोचन बल का विधिवत गठन किया गया। राज्य में आपदा पूर्व चेतावनी तंत्र, डॉप्लर मौसम रडार की स्थापना और सुदूर संवेदन उपग्रह तकनीकों के माध्यम से बादल फटने और ग्लेशियर टूटने की घटनाओं की पूर्व सूचना प्राप्त करने के प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। साथ ही ग्रामीण स्तर पर युवक मंगल दलों, महिला मंगल दलों और स्थानीय आपदा मित्रों को प्राथमिक उपचार व खोज बचाव का प्रशिक्षण देकर सामुदायिक आपदा न्यूनीकरण को सशक्त बनाया जा रहा है।
परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य: उत्तराखंड आपदा प्रबंधन
- पृथक आपदा मंत्रालय वाला प्रथम राज्य: उत्तराखंड भारत का ऐसा पहला राज्य है जिसने अलग आपदा प्रबंधन मंत्रालय का गठन किया।
- राज्य आपदा मोचन बल का गठन: नौ अक्टूबर दो हजार तेरह को राज्य आपदा मोचन बल का औपचारिक गठन किया गया।
- भूकंपीय संवेदनशीलता क्षेत्र: उत्तराखंड के समस्त जनपद भूकंप क्षेत्र चार और क्षेत्र पांच में सम्मिलित हैं।
- केदारनाथ जलप्रलय की तिथि: सोलह और सत्रह जून दो हजार तेरह को चोराबाड़ी ताल टूटने से भीषण तबाही हुई थी।
- मालपा भूस्खलन त्रासदी: अठारह अगस्त उन्नीस सौ अट्ठानवे को पिथौरागढ़ के मालपा में कैलास मानसरोवर यात्रियों सहित भीषण जनहानि हुई थी।
- राज्य आपदा प्रबंधन का ऑस्ट्रेलियाई मॉडल: उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन ढांचा ऑस्ट्रेलिया के आपातकालीन प्रबंधन मॉडल पर आधारित है।
उत्तराखंड की प्रमुख ऐतिहासिक आपदाएं एवं प्रभावित क्षेत्र
| आपदा का नाम / घटना | घटित होने का वर्ष / तिथि | प्रभावित क्षेत्र एवं प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|
| उत्तरकाशी भूकंप | बीस अक्टूबर उन्नीस सौ इक्यानवे | उत्तरकाशी और टिहरी जनपद, रिक्टर पैमाने पर छह दशमलव आठ तीव्रता। |
| मालपा भूस्खलन त्रासदी | अठारह अगस्त उन्नीस सौ अट्ठानवे | पिथौरागढ़ जनपद की काली नदी घाटी, प्रसिद्ध नृत्यांगना प्रोतिमा बेदी सहित भारी क्षति। |
| चमोली भूकंप | उनतीस मार्च उन्नीस सौ निन्यानवे | चमोली और रुद्रप्रयाग जनपद, रिक्टर पैमाने पर छह दशमलव आठ तीव्रता का विनाश। |
| केदारनाथ जलप्रलय | सोलह-सत्रह जून दो हजार तेरह | रुद्रप्रयाग जनपद की मंदाकिनी घाटी, चोराबाड़ी हिमनद ताल का अचानक फटना। |
| रैणी चमोली हिमस्खलन सैलाब | सात फरवरी दो हजार इक्कीस | ऋषिगंगा और पश्चिमी धौलीगंगा घाटी, तपोवन सुरंग में बचाव हेतु ऑपरेशन। |
| जोशीमठ भू-धंसाव संकट | जनवरी दो हजार तेईस | चमोली का ऐतिहासिक नगर जोशीमठ, भूमि धंसने से भवनों में व्यापक दरारें। |