उत्तराखंड के खनिज संसाधन और खनन क्षेत्र
⌄उत्तराखंड के खनिज संसाधन और खनन क्षेत्र - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़
उत्तराखंड के प्रमुख खनिज संसाधन, चूना पत्थर, मैग्नेसाइट, जिप्सम, तांबा, स्लेट, संगमरमर, खनन क्षेत्र, खनिज आधारित उद्योग और पर्यावरणीय प्रभाव की जानकारी।
लोडिंग...
💡 व्याख्या
उत्तराखंड के खनिज संसाधन का परिचय
उत्तराखंड खनिज संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है। यहाँ चूना पत्थर, मैग्नेसाइट, जिप्सम, तांबा, स्लेट, संगमरमर, सोप स्टोन, बैराइट, डोलोमाइट और भवन पत्थर प्रमुख रूप से पाए जाते हैं। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में खनिजों के विशाल भंडार हैं। खनिज संसाधन राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खनन से रोजगार मिलता है और खनिज आधारित उद्योगों को कच्चा माल प्राप्त होता है। उत्तराखंड में खनिजों का दोहन लंबे समय से किया जा रहा है।
• चूना पत्थर देहरादून, टिहरी और पौड़ी में अधिक पाया जाता है।
• मैग्नेसाइट अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में प्रसिद्ध है।
• जिप्सम देहरादून और टिहरी जिलों में मिलता है।
• तांबा अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चमोली में पाया जाता है।
• संगमरमर और स्लेट देहरादून तथा नैनीताल में मिलता है।
प्रमुख खनिज और खनन क्षेत्र
चूना पत्थर उत्तराखंड का प्रमुख खनिज है जो सीमेंट उद्योग के लिए उपयोगी है। देहरादून का सहस्त्रधारा क्षेत्र चूना पत्थर के लिए प्रसिद्ध है। मैग्नेसाइट अल्मोड़ा जिले के झिरोली और चंडाक क्षेत्रों में पाया जाता है। मैग्नेसाइट का उपयोग इस्पात उद्योग में किया जाता है। जिप्सम देहरादून के केराकोटली और टिहरी के खेराखात में मिलता है। जिप्सम का उपयोग उर्वरक और प्लास्टर बनाने में होता है। तांबा अल्मोड़ा के धौलादेवी और पिथौरागढ़ के देवलगढ़ क्षेत्रों में पाया जाता है।
स्लेट, संगमरमर और भवन पत्थर
स्लेट उत्तराखंड में छत बनाने के लिए उपयोग किया जाता है और यह देहरादून, टिहरी और पौड़ी जिलों में अधिक मिलता है। संगमरमर देहरादून और नैनीताल जिलों में पाया जाता है और इसका उपयोग फर्श और सजावट में होता है। भवन पत्थर के रूप में ग्रेनाइट, सैंड स्टोन और क्वार्टजाइट उपयोग किए जाते हैं। लघु खनिजों में रेत, बजरी और साधारण पत्थर शामिल हैं जिनका उपयोग निर्माण कार्यों में होता है। उत्तराखंड में लघु खनिजों का खनन नदी तल से किया जाता है।
खनिज आधारित उद्योग और पर्यावरणीय प्रभाव
खनिज आधारित उद्योगों में सीमेंट उद्योग, चूना उद्योग, सोप स्टोन उद्योग और स्लेट उद्योग प्रमुख हैं। देहरादून और हरिद्वार में सीमेंट कारखाने स्थित हैं। खनन से पर्यावरणीय प्रभाव भी पड़ता है जैसे वनों का विनाश, भू स्खलन और जल प्रदूषण। अनियंत्रित खनन से नदियों का तल नीचे चला जाता है। राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक खनन को बढ़ावा दिया है। खनन के लिए पर्यावरण अनुमति अनिवार्य की गई है।
लघु खनिज और संरक्षण
लघु खनिजों में रेत, बजरी, साधारण पत्थर, मिट्टी और स्लेट शामिल हैं जिनका उपयोग स्थानीय निर्माण कार्यों में होता है। लघु खनिजों का खनन जिला प्रशासन की अनुमति से किया जाता है। उत्तराखंड में खनिज संरक्षण के लिए खनन नीति बनाई गई है। अवैध खनन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। खनिज संसाधनों का सतत उपयोग राज्य के विकास के लिए आवश्यक है।
| महत्वपूर्ण तथ्य / विषय | विवरण |
|---|---|
| चूना पत्थर | देहरादून, टिहरी, पौड़ी - सीमेंट उद्योग में उपयोग |
| मैग्नेसाइट | अल्मोड़ा झिरोली, पिथौरागढ़ - इस्पात उद्योग |
| जिप्सम | देहरादून केराकोटली, टिहरी - उर्वरक निर्माण |
| तांबा | अल्मोड़ा धौलादेवी, पिथौरागढ़ - विद्युत उद्योग |
| स्लेट और संगमरमर | देहरादून, नैनीताल - भवन निर्माण |
| सोप स्टोन | अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ - सौंदर्य प्रसाधन |
| लघु खनिज | रेत, बजरी, पत्थर - निर्माण कार्य |
उत्तराखंड के खनिज संसाधन राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चूना पत्थर, मैग्नेसाइट, जिप्सम और तांबा प्रमुख खनिज हैं। खनिज आधारित उद्योगों से रोजगार मिलता है। पर्यावरण संरक्षण के साथ वैज्ञानिक खनन आवश्यक है। लघु खनिजों का उपयोग स्थानीय निर्माण में होता है। खनिज संरक्षण नीति से सतत विकास संभव है।