उत्तराखंड की प्रमुख पर्वत चोटियाँ और दर्रे
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उत्तराखंड की प्रमुख पर्वत चोटियाँ नंदा देवी, कामेत, चौखंबा, त्रिशूल, पंचाचूली, बंदरपूंछ, नीलकंठ और प्रमुख दर्रे माणा, नीति, लिपुलेख की जानकारी।
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💡 व्याख्या
उत्तराखंड की प्रमुख पर्वत चोटियों का परिचय
उत्तराखंड हिमालय की गोद में बसा है और यहां विश्व की कुछ सबसे ऊंची और सुंदर पर्वत चोटियां स्थित हैं। उत्तराखंड की पर्वत चोटियां महान हिमालय में स्थित हैं और 6000 मीटर से अधिक ऊंची हैं। नंदा देवी उत्तराखंड की सबसे ऊंची चोटी है और 7816 मीटर ऊंची है। इसके अलावा कामेत, चौखंबा, त्रिशूल, पंचाचूली, बंदरपूंछ, नीलकंठ और केदारनाथ शिखर प्रमुख चोटियां हैं। ये चोटियां पर्वतारोहण, पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उत्तराखंड की चोटियों से गंगा और यमुना जैसी प्रमुख नदियों का उद्गम होता है।
नंदा देवी, कामेत और चौखंबा
नंदा देवी उत्तराखंड की सबसे ऊंची और भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है। इसकी ऊंचाई 7816 मीटर है और यह चमोली जिले में स्थित है। नंदा देवी को उत्तराखंड की आराध्य देवी माना जाता है। कामेत चोटी 7756 मीटर ऊंची है और उत्तराखंड की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है। यह भी चमोली जिले में स्थित है और तिब्बत सीमा के पास है। चौखंबा चोटी 7138 मीटर ऊंची है और चार शिखरों वाली चोटी है। चौखंबा रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों की सीमा पर स्थित है और केदारनाथ मंदिर से दिखाई देती है।
त्रिशूल, पंचाचूली और बंदरपूंछ
त्रिशूल चोटी 7120 मीटर ऊंची है और तीन शिखरों वाली चोटी है इसलिए इसे त्रिशूल कहा जाता है। यह चमोली जिले में स्थित है। पंचाचूली चोटी पिथौरागढ़ जिले में स्थित है और पांच शिखरों वाली चोटी है। पंचाचूली की पांच चोटियों की ऊंचाई 6334 से 6904 मीटर तक है। पंचाचूली दारमा घाटी में स्थित है और नेपाल सीमा के पास है। बंदरपूंछ चोटी 6316 मीटर ऊंची है और उत्तरकाशी जिले में स्थित है। बंदरपूंछ का नाम बंदर की पूंछ जैसा आकार होने के कारण पड़ा है।
• नंदा देवी 7816 मीटर उत्तराखंड की सबसे ऊंची और भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है।
• कामेत 7756 मीटर दूसरी सबसे ऊंची चोटी है और चमोली में स्थित है।
• चौखंबा 7138 मीटर चार शिखरों वाली चोटी है।
• त्रिशूल 7120 मीटर तीन शिखरों वाली चोटी है।
• पंचाचूली पांच शिखरों वाली चोटी है और पिथौरागढ़ में स्थित है।
• बंदरपूंछ 6316 मीटर उत्तरकाशी में स्थित है।
• माणा दर्रा 5608 मीटर, नीति दर्रा 5044 मीटर और लिपुलेख दर्रा 5100 मीटर ऊंचा है।
• लिपुलेख दर्रा भारत, नेपाल और चीन तीन देशों के मिलन बिंदु पर स्थित है।
उत्तराखंड के प्रमुख पर्वतीय दर्रे
उत्तराखंड में कई महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रे स्थित हैं जो भारत को तिब्बत और नेपाल से जोड़ते हैं। माणा दर्रा, नीति दर्रा, लिपुलेख दर्रा, कुंगरी बिंगरी दर्रा और ट्रेल पास प्रमुख दर्रे हैं। ये दर्रे महान हिमालय में स्थित हैं और 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर हैं। माणा दर्रा चमोली जिले में 5608 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और भारत तिब्बत सीमा पर है। नीति दर्रा भी चमोली में 5044 मीटर पर स्थित है। लिपुलेख दर्रा पिथौरागढ़ में 5100 मीटर पर स्थित है और कैलाश मानसरोवर यात्रा का मार्ग है।
माणा, नीति और लिपुलेख दर्रा
माणा दर्रा उत्तराखंड का सबसे ऊंचा दर्रा है और 5608 मीटर की ऊंचाई पर चमोली जिले में स्थित है। माणा गांव भारत का अंतिम गांव है और माणा दर्रा उसी के पास स्थित है। नीति दर्रा चमोली जिले में 5044 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और नीति घाटी में स्थित है। नीति गांव तिब्बत सीमा के पास स्थित है। लिपुलेख दर्रा पिथौरागढ़ जिले में 5100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और भारत, नेपाल और चीन तीन देशों के मिलन बिंदु पर स्थित है। लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा का मार्ग जाता है।
| महत्वपूर्ण तथ्य / विषय | विवरण |
|---|---|
| नंदा देवी | 7816 मीटर, सबसे ऊंची, चमोली, आराध्य देवी |
| कामेत | 7756 मीटर, दूसरी सबसे ऊंची, चमोली, तिब्बत सीमा |
| चौखंबा | 7138 मीटर, चार शिखर, रुद्रप्रयाग चमोली सीमा |
| त्रिशूल | 7120 मीटर, तीन शिखर, चमोली |
| पंचाचूली | 6334 से 6904 मीटर, पांच शिखर, पिथौरागढ़, दारमा घाटी |
| बंदरपूंछ | 6316 मीटर, उत्तरकाशी, बंदर की पूंछ जैसा आकार |
| नीलकंठ | 6596 मीटर, चमोली, बद्रीनाथ के पीछे स्थित |
| केदारनाथ शिखर | 6940 मीटर, रुद्रप्रयाग, केदारनाथ मंदिर के पीछे |
| माणा दर्रा | 5608 मीटर, चमोली, सबसे ऊंचा दर्रा, भारत तिब्बत सीमा |
| नीति दर्रा | 5044 मीटर, चमोली, नीति घाटी |
| लिपुलेख दर्रा | 5100 मीटर, पिथौरागढ़, तीन देशों का मिलन, कैलाश यात्रा |
उत्तराखंड की पर्वत चोटियां और दर्रे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। नंदा देवी, कामेत, चौखंबा, त्रिशूल, पंचाचूली, बंदरपूंछ, नीलकंठ और केदारनाथ शिखर तथा माणा, नीति, लिपुलेख जैसे दर्रों से संबंधित प्रश्न यूकेपीएससी और अन्य परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं।