उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य - परीक्षोपयोगी संपूर्ण जानकारी

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उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य - परीक्षोपयोगी संपूर्ण जानकारी - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

उत्तराखंड के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, स्थापना वर्ष, क्षेत्रफल, जैव विविधता और संरक्षण महत्व पर आधारित विस्तृत अध्ययन सामग्री।

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💡 व्याख्या

उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य का महत्व

उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ वन्यजीवों की शरणस्थली भी कहा जाता है। यहाँ हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता अत्यधिक समृद्ध है। राज्य में छह राष्ट्रीय उद्यान, सात वन्यजीव अभयारण्य, चार कंजर्वेशन रिजर्व और एक बायोस्फीयर रिजर्व स्थित हैं। ये संरक्षित क्षेत्र न केवल जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण हैं बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी हैं। तराई से लेकर उच्च हिमालय तक फैले इन उद्यानों में बाघ, हाथी, हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग और मोनाल जैसे दुर्लभ जीव पाए जाते हैं।

परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य:
• भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान हैली राष्ट्रीय उद्यान 1936 में उत्तराखंड में बना जो अब जिम कॉर्बेट है।
• नंदा देवी और फूलों की घाटी को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है।
• राजाजी और कॉर्बेट हाथी और बाघ दोनों के लिए प्रसिद्ध हैं।
• केदारनाथ अभयारण्य कस्तूरी मृग के लिए और अस्कोट कस्तूरी मृग के लिए प्रसिद्ध है।
• राज्य में सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान गंगोत्री और सबसे छोटा फूलों की घाटी है।

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड के नैनीताल और पौड़ी जिलों में स्थित है और इसकी स्थापना 1936 में हुई थी। यह भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है। इसका क्षेत्रफल लगभग 520 वर्ग किलोमीटर है। 1973 में इसे भारत की प्रथम बाघ परियोजना के रूप में चयनित किया गया। यहाँ रामगंगा नदी बहती है और कालागढ़ जलाशय स्थित है। साल, शीशम और खैर यहाँ के प्रमुख वृक्ष हैं। बाघ, हाथी, तेंदुआ, भालू और घड़ियाल यहाँ पाए जाते हैं।

नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान

नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान चमोली जिले में स्थित है और इसकी स्थापना 1982 में हुई थी। इसका कोर क्षेत्र 624 वर्ग किलोमीटर है। इसे 1988 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। यह नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है। यहाँ हिम तेंदुआ, भरल, कस्तूरी मृग और हिमालयी थार पाए जाते हैं। यह उच्च हिमालयी जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करता है।

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान एवं जैव विविधता

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान चमोली जिले में स्थित है और 1982 में स्थापित हुआ। यह 87 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और अल्पाइन फूलों की 500 से अधिक प्रजातियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 2005 में इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला। यहाँ ब्रह्मकमल और फेनकमल जैसे दुर्लभ फूल पाए जाते हैं। यह औषधीय पौधों का भंडार भी है।

राजाजी राष्ट्रीय उद्यान

राजाजी राष्ट्रीय उद्यान देहरादून, हरिद्वार और पौड़ी जिलों में फैला है। इसकी स्थापना 1983 में तीन अभयारण्यों को मिलाकर हुई। 2015 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यह एशियाई हाथियों के लिए प्रसिद्ध है और हाथी गलियारा चिल्ला-मोतीचूर इसी में स्थित है।

गोविंद पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान

गोविंद पशु विहार उत्तरकाशी जिले के सांकरी क्षेत्र में स्थित है। इसकी स्थापना 1955 में अभयारण्य के रूप में और 1990 में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में हुई। यह हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग और भरल का प्रमुख आवास है। यहाँ हर की दून घाटी स्थित है।

प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य

केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य चमोली और रुद्रप्रयाग में 975 वर्ग किलोमीटर में फैला है और कस्तूरी मृग के लिए प्रसिद्ध है। अस्कोट अभयारण्य पिथौरागढ़ में 600 वर्ग किलोमीटर में फैला है। बिनसर अभयारण्य अल्मोड़ा में पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। नैनीताल क्षेत्र में नैना पीक और पंगोट संरक्षित क्षेत्र पक्षी विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य / विषयविवरण
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यानस्थापना 1936, भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान, प्रथम बाघ परियोजना 1973
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यानस्थापना 1982, क्षेत्रफल 624 वर्ग किलोमीटर, विश्व धरोहर 1988
फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यानस्थापना 1982, 87 वर्ग किलोमीटर, अल्पाइन फूलों के लिए प्रसिद्ध
राजाजी राष्ट्रीय उद्यानस्थापना 1983, टाइगर रिजर्व 2015, हाथी गलियारा प्रसिद्ध
केदारनाथ अभयारण्य975 वर्ग किलोमीटर, कस्तूरी मृग संरक्षण का प्रमुख केंद्र
अस्कोट अभयारण्यपिथौरागढ़ में, 600 वर्ग किलोमीटर, कस्तूरी मृग और हिम तेंदुआ

उत्तराखंड के सभी राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनसे संबंधित स्थापना वर्ष, क्षेत्रफल, जिले, प्रमुख वन्यजीव और विश्व धरोहर की स्थिति प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती है।