उत्तराखंड की भौतिक संरचना और हिमालय की प्रमुख श्रेणियाँ
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उत्तराखंड की भौतिक संरचना, महान हिमालय, मध्य हिमालय, शिवालिक, दून घाटी, भाबर तराई और भूस्खलन क्षेत्रों की सम्पूर्ण जानकारी।
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💡 व्याख्या
उत्तराखंड की भौतिक संरचना का परिचय
उत्तराखंड की भौतिक संरचना हिमालय पर्वत श्रृंखला पर आधारित है। राज्य को भौतिक दृष्टि से चार प्रमुख भागों में बांटा गया है। महान हिमालय, मध्य हिमालय, शिवालिक क्षेत्र और तराई भाबर क्षेत्र। उत्तराखंड का अधिकांश भाग पर्वतीय है और यहां की औसत ऊंचाई 1500 मीटर से अधिक है। उत्तर में महान हिमालय की ऊंची चोटियां, मध्य में मध्य हिमालय की घाटियां और दक्षिण में शिवालिक तथा दून घाटियां स्थित हैं। यह भौतिक विविधता ही उत्तराखंड की जलवायु और जैव विविधता का आधार है।
महान हिमालय और मध्य हिमालय
महान हिमालय को हिमाद्री भी कहा जाता है और यह 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाला क्षेत्र है। इसमें नंदा देवी, कामेट, त्रिशूल, चौखंबा, बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसी ऊंची चोटियां स्थित हैं। महान हिमालय में हिमनद और बर्फीले क्षेत्र पाए जाते हैं। मध्य हिमालय को हिमाचल भी कहा जाता है और यह 1500 से 3500 मीटर ऊंचाई वाला क्षेत्र है। इसमें अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, नैनीताल और रानीखेत जैसे शहर स्थित हैं। मध्य हिमालय में समशीतोष्ण जलवायु पाई जाती है और यहां चीड़, देवदार और बांज के वन पाए जाते हैं।
शिवालिक क्षेत्र और दून घाटियां
शिवालिक को बाहरी हिमालय भी कहा जाता है और यह 300 से 1500 मीटर ऊंचाई वाला क्षेत्र है। शिवालिक हिमालय की सबसे बाहरी श्रृंखला है। इसमें दून घाटियां स्थित हैं। देहरादून, कोटा, पाटली और काठमांडू दून प्रमुख दून घाटियां हैं। देहरादून घाटी सबसे बड़ी दून घाटी है जो शिवालिक और मध्य हिमालय के बीच स्थित है। दून घाटियों में उपजाऊ मिट्टी पाई जाती है और यहां धान और गेहूं की खेती होती है। शिवालिक क्षेत्र में साल और सागौन के वन पाए जाते हैं।
• महान हिमालय 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाला क्षेत्र है और हिमाद्री कहलाता है।
• मध्य हिमालय 1500 से 3500 मीटर ऊंचाई वाला क्षेत्र है और हिमाचल कहलाता है।
• शिवालिक 300 से 1500 मीटर ऊंचाई वाला क्षेत्र है और बाहरी हिमालय कहलाता है।
• देहरादून सबसे बड़ी दून घाटी है जो शिवालिक और मध्य हिमालय के बीच स्थित है।
• भाबर क्षेत्र में नदियां भूमिगत हो जाती हैं और तराई में पुनः प्रकट होती हैं।
• उत्तराखंड में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ हैं।
• उत्तराखंड का 71 प्रतिशत भाग वनाच्छादित है।
भाबर एवं तराई क्षेत्र तथा भौगोलिक प्रदेश
भाबर और तराई क्षेत्र शिवालिक के दक्षिण में स्थित हैं। भाबर क्षेत्र 300 मीटर से कम ऊंचाई वाला क्षेत्र है और इसमें कंकड़ पत्थर वाली भूमि पाई जाती है। भाबर में नदियां भूमिगत हो जाती हैं। तराई क्षेत्र भाबर के दक्षिण में स्थित है और यहां दलदली भूमि पाई जाती है। तराई में नदियां पुनः प्रकट होती हैं और यहां घने वन पाए जाते हैं। ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिले तराई क्षेत्र में स्थित हैं। तराई क्षेत्र कृषि के लिए अत्यंत उपजाऊ है और यहां गन्ना, गेहूं और धान की खेती होती है।
ऊंचाई एवं स्थलरूप तथा भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र
उत्तराखंड में ऊंचाई के आधार पर स्थलरूप में विविधता पाई जाती है। उत्तर में 7000 मीटर से अधिक ऊंची चोटियां, मध्य में 1500 से 3500 मीटर की घाटियां और दक्षिण में 300 मीटर से कम ऊंचाई वाले मैदान स्थित हैं। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र मुख्य रूप से उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, टिहरी और रुद्रप्रयाग जिलों में हैं। 1991 में उत्तरकाशी, 1998 में चमोली और 2013 में केदारनाथ में बड़े भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएं हुई थीं। उत्तराखंड भूकंपीय क्षेत्र 4 और 5 में आता है और यहां भूस्खलन की घटनाएं अक्सर होती हैं।
| महत्वपूर्ण तथ्य / विषय | विवरण |
|---|---|
| महान हिमालय | 3500 मीटर से अधिक, हिमाद्री, नंदा देवी, कामेट, त्रिशूल |
| मध्य हिमालय | 1500 से 3500 मीटर, हिमाचल, अल्मोड़ा, पौड़ी, नैनीताल |
| शिवालिक क्षेत्र | 300 से 1500 मीटर, बाहरी हिमालय, देहरादून, साल वन |
| दून घाटियां | देहरादून सबसे बड़ी, कोटा, पाटली, उपजाऊ मिट्टी |
| भाबर क्षेत्र | 300 मीटर से कम, कंकड़ भूमि, नदियां भूमिगत |
| तराई क्षेत्र | भाबर के दक्षिण में, दलदली, घने वन, कृषि उपजाऊ |
| भूस्खलन क्षेत्र | उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, टिहरी, रुद्रप्रयाग |
| वन क्षेत्र | 71 प्रतिशत वनाच्छादित, चीड़, देवदार, साल, बांज |
उत्तराखंड की भौतिक संरचना और हिमालय की श्रेणियां प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। महान हिमालय, मध्य हिमालय, शिवालिक, दून घाटी, भाबर तराई और भूस्खलन क्षेत्रों से संबंधित प्रश्न यूकेपीएससी और अन्य परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं।