उत्तराखंड की प्रमुख सरकारी योजनाएँ, विकास नीतियाँ एवं कल्याणकारी कार्यक्रम
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उत्तराखंड शासन की प्रमुख जन कल्याणकारी योजनाएँ, पर्वतीय विकास नीतियाँ, महिला सशक्तिकरण, रोजगार, होमस्टे नीति, पलायन रोकथाम एवं औद्योगिक निवेश नीतियों का संपूर्ण अध्ययन।
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💡 व्याख्या
उत्तराखंड की प्रमुख सरकारी योजनाएँ एवं विकास नीतियाँ: एक समग्र दृष्टिकोण
देवभूमि उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों, विषम पर्वतीय भू-भाग, प्राकृतिक आपदाओं की संवेदनशीलता और दूरस्थ सीमांत क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और अवस्थापना नीतियों का क्रियान्वयन किया गया है। राज्य गठन के उपरांत शासन की प्राथमिकताओं में पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे तीव्र पलायन की रोकथाम, युवाओं हेतु स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसरों का सृजन, महिला सशक्तीकरण, जैविक कृषि तथा पर्यावरण अनुकूल पर्यटन का संवर्धन प्रमुख रहा है। इसके अतिरिक्त सीमांत जनपदों के समग्र विकास हेतु विशेष सीमांत क्षेत्र विकास योजनाओं तथा औद्योगिक निवेश नीतियों के माध्यम से पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के मध्य क्षेत्रीय असंतुलन को पाटने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
पर्वतीय विकास, रोजगार संवर्धन एवं पर्यटन नीतियाँ
उत्तराखंड की आर्थिकी को गति देने हेतु पर्यटन और साहसिक गतिविधियों को मुख्य आधार बनाया गया है। राज्य में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के माध्यम से युवाओं को परिवहन और गैर-परिवहन पर्यटन अवसंरचना निर्माण हेतु वित्तीय अनुदान दिया जाता है। इसी क्रम में ग्रामीण पर्यटन को संबल प्रदान करने तथा स्थानीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने हेतु दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास योजना अर्थात होमस्टे नीति लागू की गई है। युवाओं के कौशल विकास और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना तथा नैनो उद्यम योजना चलाई जा रही है। पर्वतीय जनपदों में कृषि आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना तथा जैविक कृषि प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जो ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार ला रहे हैं।
उत्तराखंड शासन की नीतियों एवं योजनाओं के प्रमुख परीक्षोपयोगी तथ्य
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना वर्ष दो हज़ार दो में प्रारंभ की गई राज्य की पहली प्रमुख स्वरोजगार पहल थी। ग्रामीण महिलाओं को सिर पर भारी चारे का बोझ उठाने से मुक्ति दिलाने हेतु वर्ष दो हज़ार इक्कीस में मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना का शुभारंभ किया गया। बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने और बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु नंदा गौरा योजना संचालित है जिसमें इक्यावन हज़ार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों से वीरान हो रहे गांवों को पुनर्जीवित करने हेतु राज्य में विशेष ग्रामीण विकास एवं पलायन निवारण आयोग का गठन किया गया है जिसका मुख्यालय पौड़ी में स्थित है।
महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सीमांत क्षेत्र कल्याण
महिला सशक्तीकरण की दिशा में मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना, आंचल अमृत योजना तथा मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना जैसी संवेदनशील कल्याणकारी योजनाएँ राज्य में प्रभावी हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार सुलभ कराने हेतु अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना लागू की गई है जो राज्य के सभी नागरिकों को आच्छादित करती है। शिक्षा के क्षेत्र में उच्च हिमालयी और दूरस्थ क्षेत्रों के मेधावी छात्रों हेतु मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना संचालित है। सीमांत जनपदों उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के सीमांत गांवों के चौमुखी विकास, सड़क संपर्क, सौर ऊर्जा और आजीविका संवर्धन हेतु केंद्र और राज्य के सहयोग से वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है जो सामरिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
| योजना / नीति का नाम | प्रारंभ वर्ष, विभाग एवं मुख्य उद्देश्य |
|---|---|
| वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना | वर्ष दो हज़ार दो, पर्यटन विभाग, युवाओं को वाहन एवं होमस्टे हेतु वित्तीय अनुदान |
| दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे नीति | वर्ष दो हज़ार अठारह, पर्यटन विभाग, ग्रामीण पर्यटन संवर्धन एवं पलायन रोकथाम |
| नंदा गौरा कल्याण योजना | महिला सशक्तिकरण विभाग, बालिकाओं को जन्म एवं इंटर पास पर वित्तीय संबल |
| मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना | वर्ष दो हज़ार इक्कीस, सहकारिता विभाग, पशुपालक महिलाओं को रियायती दर पर साइलेज |
| अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना | वर्ष दो हज़ार अट्ठारह, स्वास्थ्य विभाग, शत-प्रतिशत परिवारों को कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा |
| मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना | उद्योग विभाग, विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र में युवाओं को रियायती ऋण सहायता |
| मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना | वर्ष दो हज़ार इक्कीस, अनाथ बच्चों को तीन हज़ार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण |
| मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना | वर्ष दो हज़ार उन्नीस, बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को निःशुल्क दूध |
| वाइब्रेंट विलेज सीमांत कार्यक्रम | पंचायती राज एवं ग्राम्य विकास, सीमांत गांवों में पलायन रोककर आधारभूत ढांचा विकास |