उत्तराखंड के राजकीय प्रतीक एवं सांख्यिकी: प्रतीक, जनसांख्यिकी एवं प्रशासनिक परिदृश्य
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उत्तराखंड के राज्य प्रतीकों, राजकीय पशु, पक्षी, वृक्ष, पुष्प, प्रशासनिक मंडलों, जिलों एवं महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय व भौगोलिक आंकड़ों का विस्तृत परीक्षोपयोगी अध्ययन।
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💡 व्याख्या
उत्तराखंड के राजकीय प्रतीक एवं प्रशासनिक सांख्यिकी: एक समग्र अवलोकन
देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखंड राज्य अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान, समृद्ध जैव विविधता और विशिष्ट भौगोलिक संरचना के लिए जाना जाता है। नौ नवंबर दो हज़ार को भारत के सत्ताइसवें राज्य के रूप में अस्तित्व में आने वाले इस पर्वतीय राज्य की अपनी अलग प्रशासनिक और सांस्कृतिक गरिमा है। राज्य निर्माण के समय इसका नाम उत्तरांचल रखा गया था, जिसे जनभावनाओं का सम्मान करते हुए एक जनवरी दो हज़ार सात को आधिकारिक रूप से उत्तराखंड कर दिया गया। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से उत्तराखंड के राजकीय प्रतीक, प्रशासनिक संरचना और जनसांख्यिकीय आंकड़े अत्यंत महत्वपूर्ण आधारशिला माने जाते हैं। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की विभिन्न परीक्षाओं में इनसे संबंधित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।
उत्तराखंड के प्रमुख राजकीय प्रतीक एवं उनकी जैव विशेषताएं
उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को प्रतिबिंबित करने वाले विशिष्ट प्रतीकों को राजकीय दर्जा प्रदान किया गया है। राज्य पशु के रूप में कस्तूरी मृग को चुना गया है, जो उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है और अपनी कस्तूरी ग्रंथि के लिए प्रसिद्ध है। राज्य पक्षी मोनाल अपनी सतरंगी सुंदरता और विशिष्ट पंखों की बनावट के कारण हिमालयी मयूर के समान प्रतिष्ठा रखता है। पर्वतीय ढलानों पर लाल रंग के मनोहारी फूलों से आच्छादित होने वाले बुरांश को राजकीय वृक्ष घोषित किया गया है, जिसके फूलों का जूस हृदय रोगियों के लिए अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। इसी प्रकार, उच्च तुंगता वाले बर्फीले क्षेत्रों में खिलने वाला दिव्य पुष्प ब्रह्मकमल राज्य पुष्प के रूप में प्रतिष्ठित है, जिसे भगवान शिव की पूजा और नंदा अष्टमी के पावन अवसर पर अर्पित किया जाता है। राज्य के राजकीय चिन्ह में ऊपर अशोक की लाट तथा नीचे तीन पर्वत चोटियों के साथ पवित्र गंगा नदी की चार जल लहरों को दर्शाया गया है।
उत्तराखंड के प्रतीक एवं प्रशासनिक स्वरूप के प्रमुख परीक्षोपयोगी बिंदु
उत्तराखंड राज्य की प्रशासनिक राजधानी देहरादून है, जबकि चमोली जिले में स्थित गैरसैंण को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया है। राज्य में आधिकारिक कामकाज की प्रथम राजभाषा हिंदी है, जबकि जनवरी दो हज़ार दस में संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा का वैधानिक दर्जा दिया गया। उत्तराखंड का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल तिरपन हजार चार सौ तिरासी वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग एक दशमलव छह नौ प्रतिशत हिस्सा है। राज्य दो प्रशासनिक मंडलों गढ़वाल मंडल और कुमाऊँ मंडल में विभाजित है, जिनके अंतर्गत कुल तेरह जनपद समाहित हैं।
जनसांख्यिकीय आँकड़े, लिंगानुपात एवं साक्षरता का विवरण
वर्ष दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की कुल जनसंख्या एक करोड़ चौरासी लाख तैंतालीस है। राज्य का जनसंख्या घनत्व एक सौ नवासी व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर दर्ज किया गया है। लिंगानुपात के मामले में उत्तराखंड राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है, जहाँ प्रति एक हजार पुरुषों पर नौ सौ त्रेसठ महिलाएं हैं। अल्मोड़ा जनपद राज्य में सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला है, जबकि हरिद्वार जनपद में लिंगानुपात सबसे कम पाया गया है। साक्षरता की दृष्टि से राज्य का प्रदर्शन सराहनीय रहा है, जहाँ कुल साक्षरता दर उन्यासी दशमलव छह तीन प्रतिशत है। पुरुष साक्षरता सत्तासी दशमलव चार शून्य प्रतिशत और महिला साक्षरता सत्तर दशमलव शून्य चार प्रतिशत दर्ज की गई है। देहरादून जिला राज्य का सर्वाधिक साक्षर जनपद है।
| राजकीय प्रतीक / सांख्यिकी विषय | विस्तृत तथ्य एवं विवरण |
|---|---|
| राज्य स्थापना दिवस | नौ नवंबर दो हज़ार |
| आधिकारिक नाम परिवर्तन | एक जनवरी दो हज़ार सात उत्तरांचल से उत्तराखंड |
| प्रशासनिक राजधानियाँ | देहरादून स्थाई राजधानी एवं गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी |
| आधिकारिक भाषाएँ | प्रथम राजभाषा हिंदी एवं द्वितीय राजभाषा संस्कृत |
| राजकीय पशु | कस्तूरी मृग हिमालयन मस्क डियर |
| राजकीय पक्षी | मोनाल हिमालयन मोनाल |
| राजकीय वृक्ष | बुरांश पर्वतीय लाल पुष्प वृक्ष |
| राजकीय पुष्प | ब्रह्मकमल कौलपद्म |
| प्रशासनिक मंडल एवं जिले | दो मंडल गढ़वाल व कुमाऊँ तथा कुल तेरह जिले |
| कुल भौगोलिक क्षेत्रफल | तिरपन हजार चार सौ तिरासी वर्ग किलोमीटर |
| कुल जनसंख्या जनगणना दो हज़ार ग्यारह | एक करोड़ चौरासी लाख तैंतालीस |
| जनसंख्या घनत्व | एक सौ नवासी व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर |
| समग्र राज्य लिंगानुपात | नौ सौ त्रेसठ महिलाएं प्रति एक हजार पुरुष |
| कुल साक्षरता दर | उन्यासी दशमलव छह तीन प्रतिशत |
| सर्वाधिक साक्षरता वाला जनपद | देहरादून चौरासी दशमलव दो पांच प्रतिशत |