उत्तराखंड की यूनेस्को विश्व धरोहर: नंदा देवी एवं फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान की संपूर्ण जानकारी

⌄
-- Questions Uttarakhand GK

उत्तराखंड की यूनेस्को विश्व धरोहर: नंदा देवी एवं फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान की संपूर्ण जानकारी - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

उत्तराखंड के दो प्रमुख प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थलों—नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान एवं फूलों की घाटी—की स्थापना, यूनेस्को मान्यता, जैव विविधता, भौगोलिक विस्तार और पर्यावरणीय संरक्षण पर आधारित परीक्षोपयोगी अध्ययन सामग्री।

प्रश्न 1 / --
00:00
2%
प्रश्न 1

लोडिंग...

💡 व्याख्या

उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत एवं यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल

देवभूमि उत्तराखंड अपनी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता, हिमाच्छादित पर्वत शिखरों और समृद्ध जैव विविधता के कारण वैश्विक स्तर पर अद्वितीय पहचान रखता है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन द्वारा अंतरराष्ट्रीय महत्व के असाधारण सार्वभौमिक मूल्य वाले प्राकृतिक स्थलों को विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया जाता है। उत्तराखंड के चमोली जनपद में स्थित नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को सम्मिलित रूप से यूनेस्को द्वारा प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्रदान किया गया है। यह संपूर्ण क्षेत्र उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, लुप्तप्राय वन्यजीवों और दुर्लभ वनौषधियों का एक अत्यंत संवेदनशील तथा सुरक्षित प्राकृतिक आवास है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में इन दोनों राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना वर्ष, यूनेस्को घोषणा की तिथियों, खोजकर्ताओं और यहाँ पाई जाने वाली जैविक प्रजातियों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान: स्थापना, विस्तार एवं यूनेस्को मान्यता

नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष उन्नीस सौ बयासी में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से की गई थी, जिसे बाद में भारत की दूसरी सर्वोच्च पर्वत चोटी नंदा देवी के नाम पर नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान नाम दिया गया। लगभग छह सौ चौबीस वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला यह अभयारण्य चारों ओर से सत्तर से अधिक गगनचुंबी बर्फीली चोटियों से घिरा हुआ है, जिसके मध्य में ऋषिगंगा नदी अपनी संकरी और गहरी घाटी बनाती है। इसकी अद्वितीय प्राकृतिक भव्यता और समृद्ध वन्य जीवन को देखते हुए यूनेस्को ने वर्ष उन्नीस सौ अठासी में इसे प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। इस उद्यान में हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग, भरल, भूरा भालू तथा हिमालयी थार जैसे दुर्लभ वन्यजीव सुरक्षित विचरण करते हैं। पर्यावरणीय संवेदनशीलता और सुरक्षा कारणों के चलते इस उद्यान के भीतरी कोर क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों और सामान्य पर्यटन पर कड़ा प्रतिबंध लागू है।

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान: खोज, जैव विविधता एवं वैश्विक विस्तार

चमोली जनपद के उच्च पर्वतीय क्षेत्र में नर और गंधमादन पर्वतों के मध्य स्थित फूलों की घाटी एक प्राकृतिक पुष्प वाटिका है। वर्ष उन्नीस सौ इकतीस में ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक स्मिथ, एरिक शिप्टन और आर. एल. होल्ड्सवर्थ कामेट पर्वत अभियान से लौटते समय मार्ग भटक कर इस सुरम्य घाटी में पहुँचे थे। फ्रैंक स्मिथ ने इसकी सम्मोहक सुंदरता से अभिभूत होकर अपनी प्रसिद्ध पुस्तक द वैली ऑफ फ्लावर्स लिखी, जिसके पश्चात यह घाटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हुई। पुष्पावती नदी के तट पर फैली लगभग सत्तासी दशमलव पांच वर्ग किलोमीटर की इस घाटी को वर्ष उन्नीस सौ बयासी में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया। वर्ष दो हजार पांच में यूनेस्को ने इसे नंदा देवी विश्व धरोहर स्थल के विस्तार के रूप में मान्यता प्रदान करते हुए दोनों को संयुक्त रूप से नंदा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान विश्व धरोहर घोषित किया। यहाँ ब्रह्मकमल, ब्लू पॉपी, एनीमोन और पोटेंटिला सहित पांच सौ से अधिक प्रजातियों के दुर्लभ प्राकृतिक फूल खिलते हैं।

उत्तराखंड की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत: रम्माण लोक परंपरा

प्राकृतिक धरोहरों के अतिरिक्त चमोली जनपद के जोशीमठ विकासखंड स्थित सलूर-डूंगरा गांव का ऐतिहासिक धार्मिक लोक उत्सव रम्माण भी यूनेस्को के वैश्विक मानचित्र पर अंकित है। वर्ष दो हजार नौ में यूनेस्को ने रम्माण उत्सव को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में सम्मिलित किया। वैशाख मास में आयोजित होने वाले इस उत्सव में मुखौटा नृत्य, रामायण प्रसंगों का पारंपरिक मंचन और भूमियाल देवता की पूजा बिना किसी लिखित ग्रंथ के केवल मौखिक परंपरा के आधार पर की जाती है।

परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य: यूनेस्को धरोहर एवं उत्तराखंड

  • नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को सूची में: वर्ष उन्नीस सौ अठासी में प्राकृतिक विश्व धरोहर घोषित किया गया।
  • फूलों की घाटी यूनेस्को सूची में: वर्ष दो हजार पांच में नंदा देवी धरोहर के विस्तार के रूप में शामिल हुई।
  • फूलों की घाटी के खोजकर्ता: वर्ष उन्नीस सौ इकतीस में ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक स्मिथ द्वारा आकस्मिक रूप से खोजी गई।
  • घाटी से बहने वाली प्रमुख नदी: कामेट पर्वत के हिमनद से निकलने वाली पुष्पावती नदी इस घाटी के मध्य से बहती है।
  • अमूर्त सांस्कृतिक विरासत रम्माण: दो अक्टूबर दो हजार नौ को यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया गया।
  • नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व: वर्ष उन्नीस सौ अठासी में स्थापित हुआ और वर्ष दो हजार चार में यूनेस्को के मानव एवं जैवमंडल नेटवर्क में शामिल हुआ।

उत्तराखंड के यूनेस्को धरोहर स्थलों का तुलनात्मक परीक्षोपयोगी विवरण

धरोहर / स्थल का नामजनपद / अवस्थितिस्थापना एवं यूनेस्को वर्षप्रमुख आकर्षण एवं जैव विविधता
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यानचमोली (ऋषिगंगा घाटी)स्थापना उन्नीस सौ बयासी, यूनेस्को उन्नीस सौ अठासीहिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग, नंदा देवी पर्वत चोटी, दुर्गम कोर जोन।
फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यानचमोली (नर-गंधमादन मध्य)स्थापना उन्नीस सौ बयासी, यूनेस्को दो हजार पांचपांच सौ से अधिक पुष्प प्रजातियां, ब्रह्मकमल, पुष्पावती नदी, फ्रैंक स्मिथ कब्र।
रम्माण धार्मिक लोक उत्सवचमोली (सलूर-डूंगरा गांव)यूनेस्को अमूर्त सूची दो हजार नौमुखौटा नृत्य, पारंपरिक रामायण मंचन, कुरुड़ सुनार युद्ध प्रसंग, माल नृत्य।
नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्वचमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वरस्थापना उन्नीस सौ अठासी, यूनेस्को दो हजार चारसमस्त बफर एवं ट्रांजिशन जोन, उच्च हिमालयी वानस्पतिक एवं औषधीय संपदा।