उत्तराखंड में जल संसाधन, सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाएँ
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उत्तराखंड की जलविद्युत क्षमता, टिहरी बांध, मनेरी भाली, विष्णुप्रयाग, श्रीनगर, धौलीगंगा, रामगंगा परियोजना, सिंचाई परियोजनाएँ और जल प्रबंधन की विस्तृत जानकारी।
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💡 व्याख्या
उत्तराखंड की जलविद्युत क्षमता और जल संसाधन
उत्तराखंड को जल संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य माना जाता है। यहाँ गंगा, यमुना, भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, धौलीगंगा और रामगंगा जैसी प्रमुख नदियाँ बहती हैं। राज्य की कुल जलविद्युत क्षमता लगभग 25000 मेगावाट आंकी गई है जिसमें से लगभग 4000 मेगावाट का दोहन हो चुका है। उत्तराखंड की नदियाँ बारहमासी हैं और हिमालय से निकलती हैं। जलविद्युत परियोजनाएँ राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं। जल संसाधन प्रबंधन से सिंचाई और पेयजल आपूर्ति भी होती है।
• टिहरी बांध भागीरथी और भिलंगना नदियों के संगम पर स्थित है।
• टिहरी जलविद्युत परियोजना की क्षमता 2400 मेगावाट है।
• मनेरी भाली परियोजना उत्तरकाशी में भागीरथी नदी पर है।
• विष्णुप्रयाग परियोजना अलकनंदा नदी पर 400 मेगावाट की है।
• श्रीनगर परियोजना अलकनंदा नदी पर 330 मेगावाट की है।
• धौलीगंगा परियोजना पिथौरागढ़ में 280 मेगावाट की है।
• रामगंगा परियोजना पौड़ी में 198 मेगावाट की है।
प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ
टिहरी बांध उत्तराखंड की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है जो भागीरथी और भिलंगना नदियों के संगम पर टिहरी जिले में स्थित है। टिहरी बांध की ऊँचाई 260.5 मीटर है और यह भारत का सबसे ऊँचा बांध है। टिहरी जलविद्युत परियोजना की कुल क्षमता 2400 मेगावाट है। टिहरी बांध का निर्माण टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा किया गया है। टिहरी बांध से सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण भी होता है।
मनेरी भाली और विष्णुप्रयाग परियोजना
मनेरी भाली परियोजना दो चरणों में बनी है। प्रथम चरण 90 मेगावाट और द्वितीय चरण 304 मेगावाट का है। यह परियोजना उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी पर स्थित है। मनेरी भाली परियोजना का निर्माण उत्तराखंड जलविद्युत निगम द्वारा किया गया है। विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर 400 मेगावाट की है। विष्णुप्रयाग परियोजना का निर्माण जेपी ग्रुप द्वारा किया गया है। यह परियोजना रन ऑफ द रिवर तकनीक पर आधारित है।
श्रीनगर, धौलीगंगा और रामगंगा परियोजना
श्रीनगर जलविद्युत परियोजना पौड़ी जिले में अलकनंदा नदी पर 330 मेगावाट की है। श्रीनगर परियोजना का निर्माण जीवीके ग्रुप द्वारा किया गया है। धौलीगंगा परियोजना पिथौरागढ़ जिले में धौलीगंगा नदी पर 280 मेगावाट की है। धौलीगंगा परियोजना का निर्माण नेशनल हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन द्वारा किया गया है। रामगंगा परियोजना पौड़ी जिले में रामगंगा नदी पर 198 मेगावाट की है। रामगंगा बांध 128 मीटर ऊँचा है और यह भारत का पहला मिट्टी और पत्थर का बांध है।
सिंचाई परियोजनाएँ और लघु जलविद्युत
उत्तराखंड में सिंचाई परियोजनाओं में ऊपरी गंगा नहर, पूर्वी यमुना नहर और रामगंगा नहर प्रमुख हैं। ऊपरी गंगा नहर हरिद्वार से निकलती है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सिंचित करती है। लघु जलविद्युत परियोजनाएँ 25 मेगावाट से कम क्षमता की होती हैं और ये पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित हैं। लघु जलविद्युत परियोजनाओं से दूरस्थ गांवों को बिजली मिलती है। जल संसाधन प्रबंधन के लिए उत्तराखंड जल संस्थान कार्य करता है। जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
| महत्वपूर्ण तथ्य / विषय | विवरण |
|---|---|
| टिहरी बांध | भागीरथी + भिलंगना, 260.5 मीटर ऊँचा, 2400 मेगावाट |
| मनेरी भाली | भागीरथी नदी, उत्तरकाशी, 90 + 304 मेगावाट |
| विष्णुप्रयाग | अलकनंदा नदी, चमोली, 400 मेगावाट |
| श्रीनगर | अलकनंदा नदी, पौड़ी, 330 मेगावाट |
| धौलीगंगा | धौलीगंगा नदी, पिथौरागढ़, 280 मेगावाट |
| रामगंगा | रामगंगा नदी, पौड़ी, 198 मेगावाट |
| कुल जलविद्युत क्षमता | लगभग 25000 मेगावाट |
| प्रमुख नहरें | ऊपरी गंगा नहर, पूर्वी यमुना नहर |
उत्तराखंड जलविद्युत उत्पादन में अग्रणी राज्य है। टिहरी बांध राज्य की सबसे बड़ी परियोजना है। मनेरी भाली, विष्णुप्रयाग, श्रीनगर, धौलीगंगा और रामगंगा प्रमुख परियोजनाएँ हैं। जलविद्युत परियोजनाएँ राज्य को राजस्व प्रदान करती हैं। सिंचाई परियोजनाओं से कृषि को लाभ होता है। लघु जलविद्युत परियोजनाएँ पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयोगी हैं। जल संसाधन प्रबंधन सतत विकास के लिए आवश्यक है।