परमाणु नाभिक और रेडियोधर्मिता - अल्फा बीटा गामा से विखंडन संलयन तक - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

⌄
-- Questions Science

परमाणु नाभिक और रेडियोधर्मिता - अल्फा बीटा गामा से विखंडन संलयन तक - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

क्या आपने कभी सोचा है कि सूर्य इतनी ऊर्जा कहां से प्राप्त करता है? या रेडियोधर्मी तत्व चिकित्सा में कैसे काम आते हैं? इन सबका उत्तर परमाणु नाभिक की संरचना और रेडियोधर्मिता में छिपा है।

प्रश्न 1 / --
00:00
2%
प्रश्न 1

लोडिंग...

💡 व्याख्या

क्या आपने कभी सोचा है कि सूर्य इतनी ऊर्जा कहां से प्राप्त करता है? या रेडियोधर्मी तत्व चिकित्सा में कैसे काम आते हैं? इन सबका उत्तर परमाणु नाभिक की संरचना और रेडियोधर्मिता में छिपा है। परमाणु के केंद्र में स्थित नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन बाहर घूमते हैं। कुछ भारी नाभिक अस्थायी होते हैं और स्वतः विकिरण निकालकर स्थायी बनते हैं - इसी घटना को रेडियोधर्मिता कहते हैं। इस लेख में हम नाभिक की संरचना, अल्फा-बीटा-गामा विकिरण, अर्ध आयु, नाभिकीय विखंडन और संलयन को विस्तार से समझेंगे।

1. परमाणु नाभिक की संरचना

परमाणु नाभिक परमाणु का केंद्रीय भाग है, जिसकी खोज 1911 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने स्वर्ण पत्र प्रयोग से की थी। नाभिक में धनावेशित प्रोटॉन और आवेशहीन न्यूट्रॉन होते हैं। इन दोनों को सामूहिक रूप से न्यूक्लियॉन कहते हैं।

नाभिक का आकार परमाणु के आकार से लगभग 10,000 गुना छोटा होता है। परमाणु का आकार 10⁻¹⁰ m है जबकि नाभिक का आकार 10⁻¹⁵ m है। नाभिक में परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान केंद्रित होता है।

परमाणु क्रमांक (Z) = प्रोटॉनों की संख्या। द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन। इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर कक्षाओं में घूमते हैं। समस्थानिक वे परमाणु हैं जिनमें प्रोटॉन समान लेकिन न्यूट्रॉन अलग होते हैं, जैसे कार्बन-12 और कार्बन-14।

2. रेडियोधर्मिता की परिभाषा और खोज

रेडियोधर्मिता वह घटना है जिसमें अस्थायी नाभिक स्वतः अल्फा, बीटा और गामा विकिरण निकालकर स्थायी नाभिक में बदल जाते हैं। यह प्रक्रिया स्वतः होती है और बाहरी कारकों पर निर्भर नहीं करती।

रेडियोधर्मिता की खोज 1896 में हेनरी बेकुरेल ने की थी। उन्होंने पाया कि यूरेनियम लवण से कुछ अदृश्य किरणें निकलती हैं जो फोटोग्राफिक प्लेट को प्रभावित करती हैं।

मैरी क्यूरी और पियरे क्यूरी ने रेडियम और पोलोनियम तत्वों की खोज की। मैरी क्यूरी को 1903 और 1911 में दो बार नोबेल पुरस्कार मिला। रेडियोधर्मिता का SI मात्रक बेकुरेल (Bq) है। 1 Bq = 1 क्षय प्रति सेकंड।

3. अल्फा, बीटा और गामा विकिरण के गुण

अल्फा कण: यह हीलियम नाभिक है जिसमें 2 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं। आवेश +2 होता है। आयनीकरण क्षमता सबसे अधिक होती है। भेदन क्षमता सबसे कम होती है - कागज की पतली शीट से रुक जाते हैं। वायु में कुछ सेंटीमीटर ही चल पाते हैं।

बीटा कण: यह तेज गति से निकलने वाला इलेक्ट्रॉन है। आवेश -1 होता है। आयनीकरण क्षमता मध्यम होती है। भेदन क्षमता अल्फा से अधिक - एल्युमिनियम की पतली शीट से रुक जाते हैं।

गामा किरण: यह विद्युत चुंबकीय तरंग है, आवेशहीन होती है। आयनीकरण क्षमता सबसे कम होती है। भेदन क्षमता सबसे अधिक - सीसे की मोटी शीट से भी पार निकल जाती हैं।

गुण अल्फा (α) बीटा (β) गामा (γ)
प्रकृति He²⁺ नाभिक तेज इलेक्ट्रॉन विद्युत चुंबकीय तरंग
आवेश +2 -1 0
आयनीकरण सबसे अधिक मध्यम सबसे कम
भेदन सबसे कम (कागज) मध्यम (Al) सबसे अधिक (सीसा)

4. रेडियोधर्मी क्षय के नियम

रेडियोधर्मी क्षय में नाभिक विकिरण निकालकर दूसरे तत्व में बदल जाता है। क्षय के नियम सोडी और फजान ने दिए थे:

अल्फा क्षय: अल्फा कण निकलने पर परमाणु क्रमांक Z में 2 की कमी और द्रव्यमान संख्या A में 4 की कमी होती है। उदाहरण: U-238 → Th-234 + He-4।

बीटा क्षय: बीटा कण निकलने पर परमाणु क्रमांक Z में 1 की वृद्धि होती है, द्रव्यमान संख्या A समान रहती है। उदाहरण: C-14 → N-14 + e⁻।

गामा क्षय: गामा किरण निकलने पर Z और A दोनों समान रहते हैं, केवल ऊर्जा निकलती है। गामा क्षय अक्सर अल्फा या बीटा क्षय के साथ होता है।

5. अर्ध आयु (Half Life)

अर्ध आयु वह समय है जिसमें किसी रेडियोधर्मी तत्व के आधे नाभिक क्षय हो जाते हैं। यह प्रत्येक रेडियोधर्मी तत्व की विशेषता है और बाहरी कारकों पर निर्भर नहीं करती।

यूरेनियम-238 की अर्ध आयु 4.5 अरब वर्ष है। कार्बन-14 की अर्ध आयु 5730 वर्ष है। रेडियम-226 की अर्ध आयु 1600 वर्ष है। आयोडीन-131 की अर्ध आयु 8 दिन है।

कार्बन डेटिंग: जीवित जीवों में कार्बन-14 की मात्रा स्थिर रहती है। मृत्यु के बाद कार्बन-14 का क्षय शुरू हो जाता है। कार्बन-14 की शेष मात्रा मापकर जीवाश्म की आयु ज्ञात की जाती है। इस विधि से 50,000 वर्ष तक पुरानी वस्तुओं की आयु मापी जा सकती है।

6. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)

नाभिकीय विखंडन वह प्रक्रिया है जिसमें भारी नाभिक न्यूट्रॉन से टकराकर दो छोटे नाभिकों में टूट जाता है। इसके साथ अत्यधिक ऊर्जा और अधिक न्यूट्रॉन निकलते हैं।

उदाहरण: U-235 + n → Ba-141 + Kr-92 + 3n + 200 MeV ऊर्जा।

आइंस्टीन का समीकरण E = mc² बताता है कि द्रव्यमान का क्षय ऊर्जा में बदलता है। यहाँ c = 3×10⁸ m/s है। थोड़ा सा द्रव्यमान भी विशाल ऊर्जा देता है।

श्रृंखला अभिक्रिया: विखंडन से निकले 3 न्यूट्रॉन और 3 नाभिकों को तोड़ते हैं, जिससे 9 न्यूट्रॉन निकलते हैं - यह श्रृंखला बढ़ती जाती है। नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया नाभिकीय रिएक्टर में और अनियंत्रित परमाणु बम में होती है।

7. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)

नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है जिसमें दो हल्के नाभिक जुड़कर एक भारी नाभिक बनाते हैं। इस प्रक्रिया में भी अत्यधिक ऊर्जा निकलती है।

उदाहरण: H-2 (ड्यूटीरियम) + H-3 (ट्रिटियम) → He-4 + n + 17.6 MeV ऊर्जा।

सूर्य और तारों की ऊर्जा का स्रोत नाभिकीय संलयन ही है। सूर्य में हाइड्रोजन नाभिक संलयित होकर हीलियम बनाते हैं। संलयन के लिए अत्यधिक उच्च तापमान (लगभग 10⁷ K) की आवश्यकता होती है।

हाइड्रोजन बम नाभिकीय संलयन पर आधारित है। संलयन से विखंडन की तुलना में अधिक ऊर्जा मिलती है। संलयन में रेडियोधर्मी कचरा कम बनता है, इसलिए यह अधिक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है।

8. रेडियोधर्मिता के उपयोग और सुरक्षा

रेडियोधर्मिता के उपयोग:

(1) चिकित्सा में: कैंसर के उपचार में कोबाल्ट-60 का उपयोग, थायरॉइड रोग में आयोडीन-131 का उपयोग, चिकित्सा उपकरणों का स्टरलाइजेशन।

(2) कृषि में: बीजों की उत्परिवर्तन द्वारा उन्नत किस्में बनाना, खाद्य संरक्षण।

(3) उद्योग में: वेल्डिंग की जांच, पाइपलाइन में रिसाव की जांच।

(4) विद्युत उत्पादन: नाभिकीय रिएक्टर में।

सुरक्षा उपाय: रेडियोधर्मी पदार्थों को सीसे के बक्सों में रखा जाता है। काम करते समय सुरक्षा वस्त्र पहने जाते हैं। रेडियोधर्मी कचरे को गहराई में दबाया जाता है। अधिक विकिरण से कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, इसलिए सावधानी आवश्यक है।

🔑 मुख्य तथ्य (Key Facts)

  • ●नाभिक की खोज रदरफोर्ड ने 1911 में की, इसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं, आकार 10⁻¹⁵ m, परमाणु का 10,000वां भाग।
  • ●रेडियोधर्मिता की खोज बेकुरेल ने 1896 में की, मैरी क्यूरी ने रेडियम-पोलोनियम खोजे, SI मात्रक बेकुरेल (Bq)।
  • ●अल्फा +2 आवेश, सबसे अधिक आयनीकरण, सबसे कम भेदन; बीटा -1 आवेश, मध्यम; गामा 0 आवेश, सबसे अधिक भेदन।
  • ●क्षय नियम: अल्फा में Z-2, A-4; बीटा में Z+1, A समान; गामा में दोनों समान।
  • ●अर्ध आयु: U-238 की 4.5 अरब वर्ष, C-14 की 5730 वर्ष, Ra-226 की 1600 वर्ष, I-131 की 8 दिन।
  • ●विखंडन: U-235 + n → Ba + Kr + 3n + 200 MeV, E=mc², श्रृंखला अभिक्रिया नियंत्रित-रिएक्टर, अनियंत्रित-बम।
  • ●संलयन: H-2 + H-3 → He-4 + n + 17.6 MeV, सूर्य का ऊर्जा स्रोत, 10⁷ K तापमान आवश्यक।
  • ●उपयोग: कैंसर में Co-60, थायरॉइड में I-131, कार्बन डेटिंग, विद्युत उत्पादन, खाद्य संरक्षण।

📝 परीक्षा बिंदु (Exam Points)

  • ✓नाभिक की संरचना - रदरफोर्ड 1911, Z और A की परिभाषा, समस्थानिक का अर्थ।
  • ✓रेडियोधर्मिता की परिभाषा - स्वतः विकिरण, बेकुरेल 1896, क्यूरी का योगदान, SI मात्रक Bq।
  • ✓अल्फा, बीटा, गामा के गुण - आवेश, आयनीकरण, भेदन - सारणी बनाकर।
  • ✓क्षय नियम - सोडी-फजान, अल्फा में Z-2 A-4, बीटा में Z+1, उदाहरण सहित।
  • ✓अर्ध आयु - परिभाषा, U-238 और C-14 की अर्ध आयु, कार्बन डेटिंग का सिद्धांत।
  • ✓विखंडन - U-235 का समीकरण, E=mc², श्रृंखला अभिक्रिया, रिएक्टर और बम में अंतर।
  • ✓संलयन - H-2 + H-3 का समीकरण, सूर्य की ऊर्जा, आवश्यक तापमान, हाइड्रोजन बम।
  • ✓रेडियोधर्मिता के उपयोग - चिकित्सा, कृषि, उद्योग, विद्युत उत्पादन, सुरक्षा उपाय।

⚡ त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)

  • ➤नाभिक: रदरफोर्ड 1911, p+n, आकार 10⁻¹⁵ m, Z प्रोटॉन, A प्रोटॉन+न्यूट्रॉन।
  • ➤रेडियोधर्मिता: बेकुरेल 1896, α+2, β-1, γ0, Bq मात्रक।
  • ➤क्षय: α Z-2 A-4, β Z+1 A समान, γ कोई परिवर्तन नहीं।
  • ➤अर्ध आयु: U-238 4.5e9y, C-14 5730y, कार्बन डेटिंग।
  • ➤विखंडन: U-235+n→Ba+Kr+3n+200MeV, E=mc², श्रृंखला।
  • ➤संलयन: H-2+H-3→He+n+17.6MeV, सूर्य, 10⁷K।
  • ➤उपयोग: Co-60 कैंसर, I-131 थायरॉइड, कार्बन डेटिंग।